इस मामले पर जिला प्रशासन को तत्काल संज्ञान लेनी चाहिए एवं स्कूल के समक्ष बिकने वाली नशीले पदार्थों पर तत्काल रोक लगनी चाहिए यह सिगरेट ही है या कोई और नशीला पदार्थ इसकी भी कोई पक्की खबर नहीं
बेहद ही संवेदनशील मामला है इस मामले पर झारखंड सरकार की मुख्यमंत्री को तत्काल संज्ञान लेनी चाहिए क्योंकि बेटियां मुख्यमंत्री से मदद की गुहार लगा रही है किसी भी सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिला है अब स्थिति ऐसी है कि बेटियां भुखमरी के कगार पर खड़ी है @HemantSorenJMM@JmmJharkhand
जमशेदपुर ने दिया स्पष्ट संदेश।
पुलिस की मौजूदगी में हुई स्वर्गीय श्री हिमांशु सिंह की नृशंस हत्या के विरोध में भारतीय जनता पार्टी द्वारा आहूत जमशेदपुर बंद को शहरवासियों का व्यापक समर्थन मिला।
जब तक दोषियों पर कठोर कार्रवाई नहीं होगी और प्रदेश में कानून का राज स्थापित नहीं होगा, तब तक जनता की आवाज़ इसी तरह बुलंद होती रहेगी।
.@DC_Hazaribag सुनील बेटे की अविलंब मदद सुनिश्चित करें एवं इनके दस्तावेज बनवा कर सूचित करें तथा सरकारी योजनाओं से जोड़े तथा स्कूल में भी नामांकन करवाएं ताकि वह पढ़ाई कर जीवन की मुख्यधारा से जुड़कर अच्छा जीवन जी सके।
@HemantSorenJMM
.@DC_Hazaribag सुनील बेटे की अविलंब मदद सुनिश्चित करें एवं इनके दस्तावेज बनवा कर सूचित करें तथा सरकारी योजनाओं से जोड़े तथा स्कूल में भी नामांकन करवाएं ताकि वह पढ़ाई कर जीवन की मुख्यधारा से जुड़कर अच्छा जीवन जी सके।
@HemantSorenJMM
बेहद ही संवेदनशील मामला है आदरणीय
एक अनाथ बच्चा जो दर -दर की ठोकरे खा रहा है उम्र मात्र 12 वर्ष है और कोई भी जनप्रतिनिधि इस मासूम पर ध्यान नहीं दे रहे बहुत ही दुःखद बात है
बच्चे जल्द से जल्द मदद होनी चाहिए
12 वर्षीय अनाथ सुनील तिर्की, दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर! दाने-दाने को तरस रहा मासूम...
हजारीबाग (झारखंड): केरेडारी प्रखंड के अंतर्गत फुसरी गांव का निवासी 12 वर्षीय अनाथ बालक सुनील तिर्की आज दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है। इस मासूम का इस दुनिया में कोई सहारा नहीं है। आलम यह है कि प्रशासनिक उदासीनता के कारण इस बच्चे का अब तक न तो जन्म प्रमाण पत्र बन पाया है और न ही आधार कार्ड। यही वजह है कि आज तक इस अनाथ बच्चे को किसी भी प्रकार की सरकारी मदद का लाभ नहीं मिल सका है।
यह 12 साल का मासूम इस उम्र में पढ़ाई करने के बजाय पेट पालने के लिए मजदूरी करने को मजबूर है। लाचारी इतनी बड़ी है कि रोज काम न मिलने के कारण उसे कई दिन और रातें भूखे रहकर, सिर्फ पानी पीकर बितानी पड़ती हैं। आर्थिक तंगी और इस भीषण मजबूरी के कारण वह स्कूल भी नहीं जा पा रहा है।
@HemantSorenJMM@JmmJharkhand@DC_Hazaribag@SitaSorenMLA@PradipPrasadBJP@Manishjhzb@deepakbiruajmm@Rabindranathji@yourBabulal@BikerGirlkancha@WeAreRanchi@RLChoudharyBJP@JharkhandCMO@prdjharkhand@JMMKalpanaSoren@prdjharkhand
12 वर्षीय अनाथ सुनील तिर्की, दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर! दाने-दाने को तरस रहा मासूम...
हजारीबाग (झारखंड): केरेडारी प्रखंड के अंतर्गत फुसरी गांव का निवासी 12 वर्षीय अनाथ बालक सुनील तिर्की आज दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है। इस मासूम का इस दुनिया में कोई सहारा नहीं है। आलम यह है कि प्रशासनिक उदासीनता के कारण इस बच्चे का अब तक न तो जन्म प्रमाण पत्र बन पाया है और न ही आधार कार्ड। यही वजह है कि आज तक इस अनाथ बच्चे को किसी भी प्रकार की सरकारी मदद का लाभ नहीं मिल सका है।
यह 12 साल का मासूम इस उम्र में पढ़ाई करने के बजाय पेट पालने के लिए मजदूरी करने को मजबूर है। लाचारी इतनी बड़ी है कि रोज काम न मिलने के कारण उसे कई दिन और रातें भूखे रहकर, सिर्फ पानी पीकर बितानी पड़ती हैं। आर्थिक तंगी और इस भीषण मजबूरी के कारण वह स्कूल भी नहीं जा पा रहा है।
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12 वर्षीय अनाथ सुनील तिर्की, दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर! दाने-दाने को तरस रहा मासूम...
हजारीबाग (झारखंड): केरेडारी प्रखंड के अंतर्गत फुसरी गांव का निवासी 12 वर्षीय अनाथ बालक सुनील तिर्की आज दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है। इस मासूम का इस दुनिया में कोई सहारा नहीं है। आलम यह है कि प्रशासनिक उदासीनता के कारण इस बच्चे का अब तक न तो जन्म प्रमाण पत्र बन पाया है और न ही आधार कार्ड। यही वजह है कि आज तक इस अनाथ बच्चे को किसी भी प्रकार की सरकारी मदद का लाभ नहीं मिल सका है।
यह 12 साल का मासूम इस उम्र में पढ़ाई करने के बजाय पेट पालने के लिए मजदूरी करने को मजबूर है। लाचारी इतनी बड़ी है कि रोज काम न मिलने के कारण उसे कई दिन और रातें भूखे रहकर, सिर्फ पानी पीकर बितानी पड़ती हैं। आर्थिक तंगी और इस भीषण मजबूरी के कारण वह स्कूल भी नहीं जा पा रहा है।
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12 वर्षीय अनाथ सुनील टर्की की हर संभव सहायता करने की कृपा करें एवं बच्चों की पढ़ाई सुरक्षा पेंशन तथा तमाम सरकारी योजनाओं से जोड़ने की कृपा करें आदरणीय मुख्यमंत्री श्री @HemantSorenJMM एक मात्र बच्चे का आप सहारा है यह भाजपा विधायक और सांसद तो किसी काम के नहीं
12 वर्षीय अनाथ सुनील तिर्की, दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर! दाने-दाने को तरस रहा मासूम...
हजारीबाग (झारखंड): केरेडारी प्रखंड के अंतर्गत फुसरी गांव का निवासी 12 वर्षीय अनाथ बालक सुनील तिर्की आज दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है। इस मासूम का इस दुनिया में कोई सहारा नहीं है। आलम यह है कि प्रशासनिक उदासीनता के कारण इस बच्चे का अब तक न तो जन्म प्रमाण पत्र बन पाया है और न ही आधार कार्ड। यही वजह है कि आज तक इस अनाथ बच्चे को किसी भी प्रकार की सरकारी मदद का लाभ नहीं मिल सका है।
यह 12 साल का मासूम इस उम्र में पढ़ाई करने के बजाय पेट पालने के लिए मजदूरी करने को मजबूर है। लाचारी इतनी बड़ी है कि रोज काम न मिलने के कारण उसे कई दिन और रातें भूखे रहकर, सिर्फ पानी पीकर बितानी पड़ती हैं। आर्थिक तंगी और इस भीषण मजबूरी के कारण वह स्कूल भी नहीं जा पा रहा है।
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कहां हो मंगरु तनी पता करो?
झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री पाकिस्तान तो नहीं चले गए।
रिम्स 1 संभाल नहीं पा रहे स्वास्थ्य मंत्री @IrfanAnsariMLA और रिम 2आदिवासियों की खेतिहर जमीन को लूटने में लगे हुए हैं।
गोलमाल है भाई गोलमाल है।
पता नहीं जानत ऐसे धूर्त मंत्रियों को कब तक झेलेगी।
#rims
केंद्र की बीजेपी ने बिहार को सीएम पद का ऐसा "नमूना" सौंप दिया है, जिसके राज में पूरा सूबा बेहाल है।
नालंदा में राजगीर मेला घूमने गए पिंटू पासवान और श्रवण पासवान नाम के दो दलित युवकों को चोरी का झूठा आरोप लगाकर 15 लोगों की भीड़ ने बेरहमी से मार डाला। हत्यारों ने उनकी गर्दन पर चढ़कर हड्डियां तोड़ दीं।
कानून का खौफ इस कदर खत्म हो चुका है कि मारने वालों में एक जटाधारी बाबा खुलेआम कैमरे पर तांडव कर रहा है।
साम्राठ चौधरी जी सिर्फ गमछे का रंग पहचानने और कुर्सी बचाने में व्यस्त है। प्रशासन मूकदर्शक बना है—15 हत्यारों में से सिर्फ 4 की गिरफ्तारी हुई है, पुलिस सवर्णों को, जनता दलितों को, और समाज एक-दूसरे को मार रहा है। कानून-व्यवस्था पूरी तरह वेंटिलेटर पर है।
लेकिन इस महा-अराजकता में सबसे शर्मनाक भूमिका विपक्ष की है। किसी एक वर्ग के एनकाउंटर पर रोने वाले 'फेसबुकिया क्रांतिकारी' आज दो दलितों की मॉब लिंचिंग पर मुंह में दही जमाए बैठे हैं।
न सरकार सुरक्षित रख पा रही है, न विपक्ष आवाज उठा पा रहा है। जनता जाए तो कहां जाए?
भारत के इतिहास में पहली बार, देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर बैठी महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी एवं आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने हमारे आदिवासी समाज के जाहेरस्थान/ मांझीथान में पूरे विधि- विधान से पूजा कर, देश के सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।
आदिवासी समाज की आस्था, अस्मिता, संस्कृति, जीवनशैली एवं परंपराओं के संरक्षण तथा संवर्धन के प्रति केन्द्र सरकार की गंभीरता को इस दृश्य से समझा जा सकता है।
काश, यह पल यहीं थम जाये। इसे देखते ही ऐसा लगा, मानो बाबा तिलका मांझी, वीर सिदो कान्हू, वीर पोटो हो, वीर टाना भगत, वीर तेलंगा खड़िया एवं धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा जैसे वीरों ने देश के लिए जो बलिदान दिया था, आज कृतज्ञ राष्ट्र उनके वंशजों एवं परंपराओं के सामने नतमस्तक होकर, उनके प्रति आभार प्रकट कर रहा हो।
यह तस्वीर आदिवासी समाज के गौरवशाली इतिहास का एक महत्वपूर्ण पन्ना है, और हम लोग इसे सदैव अपने स्वाभिमान, अस्तित्व तथा पहचान के रूप के गर्व से आने वाली पीढ़ियों को दिखाएंगे।
हिरला मरांग बुरु !
जोहार जाहेर आयो !!
झारखंड पूछ रहा है—
जब त्रुटि वाले मतदाता चिन्हित हैं,
जब Unmapped मतदाता चिन्हित हैं,
तो घर-घर गणना के दौरान ही दस्तावेज़ क्यों नहीं लिए जा रहे?
क्यों लाखों लोगों पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है?