एक ट्रेंड चल रहा है— 'Reservation Hatao'
हो सकता है आपके चार दोस्त हों, जिन्हें लगता हो कि आरक्षण की वजह से उनका चयन नहीं हुआ। उनकी पीड़ा भी वास्तविक है, उसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
लेकिन क्या सिर्फ़ उन्हीं चार लोगों की कहानी पूरे भारत की कहानी है?
मैं गाँव से आता हूँ। मैंने अपनी आँखों से ऐसे परिवार देखे हैं जो इंसानी मल साफ़ करते थे। ऐसे बच्चे देखे हैं जिन्हें स्कूल में अलग बैठाया जाता था। जिनके छू लेने पर लोग नहाने चले जाते थे। यह कोई सैकड़ों साल पुरानी कहानी नहीं, आज भी बहुत से गाँव ऐसे हैं जहाँ वो समाज के नल से पानी नहीं पी सकते। आज भी उनकी बारात गाँव के बीच से नहीं निकल सकती।
सोचिए... जिस समाज ने किसी इंसान को जन्म के आधार पर ही सम्मान से वंचित कर दिया हो, उस मानसिक और सामाजिक दूरी का क्या ?
इसका मतलब यह भी नहीं कि आज का आरक्षण सिस्टम बिल्कुल परफेक्ट है।मैं खुद मानता हूँ कि Reforms की ज़रूरत है।?
जैसे General वर्ग में EWS आया।
जैसे OBC में Creamy Layer और Non-Creamy Layer का सिद्धांत आया।
SC/ST आरक्षण में जिन परिवारों की कई पीढ़ियाँ शिक्षा और अवसरों के माध्यम से आगे बढ़ चुकी हैं, उनके बारे में भी नीति-निर्माण के स्तर पर चर्चा हो सकती है।
लेकिन एक बात समझिए।
जब राजनीति आज भी जाति पर होती है...
जब समाज में आज भी जाति पूछी जाती है...
जब सामाजिक भेदभाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ...तब केवल यह कहना कि "आरक्षण पूरी तरह खत्म कर दो और सब कुछ सिर्फ़ आर्थिक आधार पर कर दो"
मेरा मानना है कि देश को दो अतियों से बचना होगा।
एक - 'कुछ मत बदलो।'
दूसरी -'सब खत्म कर दो।
'सही रास्ता है- सुधार (Reform), डेटा के आधार पर नीति, और सामाजिक न्याय के साथ समान अवसर।
क्योंकि किसी भी नीति का उद्देश्य समाज को बाँटना नहीं, बल्कि एक दिन ऐसी स्थिति तक पहुँचाना होना चाहिए जहाँ किसी विशेष सहायता की आवश्यकता ही न रह जाए।
उड़ने दो मिट्टी को आख़िर कहाँ तलक उड़ेगी,
हवाओं ने जब साथ छोड़ा तो ज़मीं पर ही गिरेगी।
सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में,
किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है।
जब इतने सारे लोग इकट्ठे हो रहे है और ये आवाज उठा रहे है कि #uplekhppal में गड़बड़िया है
तो क्या सरकार को संज्ञान लेकर इस पर कोई जाँच नहीं करनी चाहिए कोई कार्यवाही नहीं करनी चाहिए ?
जिसने वर्षों तक पत्रकारिता को TRP, प्रोपेगेंडा और सत्ता के पक्ष-विपक्ष की लड़ाई में बदल दिया हो, उसे शिक्षकों को 'धंधेबाज' कहने से पहले आत्ममंथन करना चाहिए।
शिक्षा में गलत लोग भी हैं।
लेकिन पत्रकारिता में भी हैं।
राजनीति में भी हैं।
व्यापार में भी हैं।
तो क्या कुछ गलत लोगों के कारण पूरे शिक्षक समाज को "दो कौड़ी का" कह दिया जाएगा?
anjana शिक्षक का सम्मान कमाने में वर्षों लगते हैं।
भर्तियाँ अटक रही थीं,
लाखों युवाओं की उम्र निकल रही थी,
तब आपके स्टूडियो की आवाज़ कहाँ थी?
शिक्षकों ने पैसे लेकर शिक्षा दी है।
लेकिन पैसे लेकर किसी राजनीतिक दल का प्रवक्ता बन जाना,
व्यवस्था की हर गलती पर पर्दा डालना,
और जनता के असली मुद्दों से ध्यान भटकाना...
यह सिर्फ पत्रकारिता का पतन नहीं,
बल्कि अपने पेशे के साथ गद्दारी है।
शिक्षक फीस लेकर ज्ञान देता है,
मेहनत करवाता है,
बच्चे का भविष्य बनाता है
शिक्षकों ने पैसे लेकर पढ़ाया है,
देश के लाखों युवाओं को रोजगार तक पहुँचाया है।
लेकिन गलत को सही और सही को गलत साबित करने की कीमत लेकर काम करना,
समाज और लोकतंत्र दोनों के साथ विश्वासघात किसने किया ?
NEET। CBSE। SSC। और आज CUET।
चार परीक्षाएँ। एक करोड़ बच्चे। एक भी ईमानदारी से नहीं हो पाई।
दावे "विश्वगुरु" के, मगर देश में एक परीक्षा नहीं करवा सकते - मोदी जी ने पूरी शिक्षा व्यवस्था तबाह कर दी है।
जिस पीढ़ी का भविष्य आप बर्बाद कर रहे हैं - वही पीढ़ी आपका हिसाब करेगी।
प्रयागराज की सड़कों पर उमड़ा प्रतियोगी छात्रों का ग़ुस्सा सिर्फ़ एक परीक्षा का विरोध नहीं, बल्कि उस व्यवस्था के खिलाफ़ आवाज़ है जिस पर युवाओं का भरोसा लगातार टूटता जा रहा है। लेखपाल भर्ती परीक्षा को निरस्त कर निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया की मांग कर रहे छात्रों का कहना है कि भाजपा सरकार में भर्ती परीक्षाएं अब मेहनत नहीं, बल्कि अव्यवस्था और संदेह का प्रतीक बन चुकी हैं।
पेपर लीक, धांधली और लगातार उठते सवालों ने प्रतियोगी युवाओं के भविष्य को असुरक्षा के अंधेरे में धकेल दिया है। मेहनत करने वाला छात्र आज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है।
बड़ी खबर-
लेखपाल भर्ती परीक्षा में धांधली का आरोप लगाते हुए प्रयागराज में अभ्यर्थियों का जबरदस्त प्रदर्शन।
अभ्यर्थियों ने परीक्षाओं में हो रही अनियमितताओं, पेपर लीक, सेंटर बेहद दूर फेंके जाने, मार्कशीट न दिए जाने जैसी गहन समस्याओं का आरोप लगाते हुए कैंडल मार्च निकाला।
आप अभ्यर्थियों की संख्या देखिए। उनके तर्क सुनिए।
उनका आक्रोश देखिए और फिर सोचिए कि कुछ तो हुआ है जो उनका अपने विरोध के संकल्प पर इतना विश्वास है!!
आखिर क्यों न किसी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले एक ऐसी टाइम बाउंड इन्क्वायरी ऑर्डर की जाए जिसमें इन छात्रों की भी सुनवाई हो!!
@CMOfficeUP@PMOIndia@HMOIndia
आज के विशाल कैण्डल मार्च से आयोग और सरकार सब हिल चुके हैं। छात्रों के साथ लगभग सभी कोचिंग के शिक्षक भी एक मंच पर उपस्थित हुए
बहुत कुछ हुआ है दोस्तों...🤞
हमारा कैण्डल मार्च उम्मीद से भी ज्यादा सफल रहा.. छात्र एकता की मिसाल दी है आज हम सबने💪
थोड़ी देर में सारी बातें आपके साथ साझा करूँगा🙏
ऐसा एक भी दिन नहीं गुजर रहा, जब भाजपा की यह निकम्मी सरकार बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने से पीछे हट रही हो।
एक और मामला उत्तर प्रदेश से सामने आया है। यहां परीक्षा केंद्रों पर अफरा-तफरी का माहौल है, बच्चे परेशान हैं, लेकिन सरकार चैन की नींद सो रही है।
बेरोजगार युवाओं और गरीब-मजदूर माता-पिता के बच्चों की जिंदगी से खेलना इस देश में बहुत ही आसान हो गया फिर चाहे वह सरकारी नौकरी, डॉक्टर बनने, शिक्षक बनने या CBSE बोर्ड की परीक्षाएं हो,
हर एक एग्जाम में आपको धांधली, पेपर लीक या खुलेआम मोबाइल से चीटिंग करते हुए कुछ न कुछ नजारा देखने को मिल जाएगा,
भारत के शिक्षा व्यवस्था को सिस्टम और सरकार ने इतना अव्यवस्थित और नाकाम बना दिया है की हर दिन बेरोजगार युवाओं के भविष्य से खेला जा रहा है और उन्हें मानसिक रूप से पीड़ा पहुंचाई जा रही है,
आप जरा सोच कर देखिए कि जब इन वीडियोस को 10वीं 12वीं में पढ़ने वाले छात्र देखते होंगे तो वह क्या सोचते होंगे कि कल हम भी जब इन परीक्षाओं की तैयारी करेंगे तो हमारे साथ भी सिस्टम और सरकार ऐसे ही खिलवाड़ करेगी ।
सरकारी परीक्षाओं में अव्यवस्था अब खबर नहीं,
लगभग routine ही बनती जा रही है।
Video में seriousness देखिए !
Exam hall के अंदर खुलेआम mobile लेकर paper दिया जा रहा है।
अब इस पर क्या ही कहा जाए?
यहां सीधे-सीधे exam centres की व्यवस्था,
निगरानी, और जिम्मेदार लोगों की संवेदनशीलता पर सवाल उठते हैं।
लेकिन शायद उन्हें भी पता है कि
ना कोई बड़ी कार्रवाई होनी है,
ना blacklist होना है..........
अगली बार फिर Centre मिल ही जाएगा।
फिर अंत में वही statement जारी होगा
परीक्षा पूर्ण पारदर्शिता और सुचारु रूप से सम्पन्न हुई।
इतनी “पारदर्शिता” कि आराम से mobile से answer check करके exam दिया जा सके।
सबसे दुखद बात यही है कि
अब लाखों मेहनती छात्रों का भरोसा टूटना भी system को गंभीर समस्या नहीं लगता।
वर्तमान सरकार कि नीतियां और व्यवस्था इतनी लचर हो चुकी है कि किसी भी एग्जाम के परीक्षा का पेपर लीक हो जा रहा है अभी तक केवल सरकारी एग्जाम के परीक्षाओं के पेपर ही लीक हो रहे थे अब इंजीनियरिंग के छात्रों की परीक्षाओं के पेपर भी लीक होने लगे हैं सरकार और आयोग पेपर लीक के मुद्दे पर युवाओं कि समस्याओं को न सुन रही है नहीं कुछ बोल रही है व्यवस्था गुंगी-बहरी तो थी ही अब अंधी भी हो चुकी है जिस वजह से हर एक पेपर आज संदेह के घेरे में है
#PaperLeakAkTU #AKTUExaminationUpdate #BTechExamCancellation #AkTUNews
हम परीक्षा के लिए सुबह 4:30 बजे से निकले हैं, बहुत प्रेशर है, लेकिन इन लोगों को कोई मतलब नहीं है।'
- SSC GD की परीक्षा कैंसिल होने की खबर सुनते ही एक छात्रा फूट-फूटकर रोने लगी।
छात्रों का कहना है कि पेपर लीक के कारण परीक्षा रद्द हुई है। एग्जाम सेंटर पर पहुंचने के बाद कहा गया- घर लौट जाओ, परीक्षा नहीं होगी।
BJP सरकार एक परीक्षा ठीक से नहीं करवा सकती। पहले NEET में छात्रों का भविष्य तबाह किया गया और अब SSC GD में धांधली की खबरें आ रही हैं।
छात्र दिन-रात पढ़ाई करते हैं, मां-बाप पेट काटकर उनकी फीस भरते हैं, परीक्षा में आने-जाने का खर्च मैनेज करते हैं और आखिर में पेपर लीक हो जाता है।
ये पाप है- जिसकी कोई माफी नहीं है
पेपर लीक की साझेदार - मोदी सरकार
अपनी जायज मांग को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे है SSC_GD के छात्रों को सरकार अभी कहेगी ये युवा देशद्रोही है
इनके साथ खड़े होने वाले अध्यापकों के ऊपर सरकार मुकदमा दर्ज करेगी और आयोग भी बयान देगा की परीक्षा में कोई भी गड़बड़ी नहीं हुई है किसी भी तरह की धांधली नहीं हुई है परीक्षा एकदम निष्पक्ष और पूर्ण पारदर्शिता के साथ हुई है अगर परीक्षा को लेकर कोई भी भ्रामक वीडियो या फिर अफवाह फैलाई जाती है और इसमें कोई छात्र सम्मिलित मिलता है तो उसके ऊपर भी मुकदमा होगा यानी उसका भविष्य खराब कर दिया जाएगा,
मेरा एक सवाल है अगर सरकार और आयोग किसी भी एग्जाम को सुचारू रूप से नहीं करवा सकती तो युवाओं और छात्रों से कह दे कि हम आपके भविष्य से यूं ही खिलवाड़ करते रहेंगे क्योंकि हमारे बच्चों का भविष्य सुरक्षित है हमें देश के गरीब, मजदूर के बच्चों से क्या मतलब है, अगर बेरोजगार युवाओं से ऐसी अव्यवस्था नहीं झेली जा रही है तो वह पढ़ाई लिखाई छोड़कर पकौड़े तले... #ssc_gd
एक परीक्षा ढंग से नहीं करा पा रहे हैं। NEET के बाद अब SSC GD की भी परीक्षा गड़बड़ी के आरोप लग रहे हैं।
छात्र तोड़फोड़ कर रहे हैं,आक्रोशित हैं।
स्पष्ट कारण क्या है? SSC वाले अभ्यर्थी बताएं
This is India's ‘FREE PRESS’ !
He's an anchor on Doordarshan, a central government TV channel. He's always spewing venom. When a child questioned the flaws in the CBSE exam testing, this national channel anchor @AshokShrivasta6 labeled him a P@kistani child. Imagine the mental trauma the child and his entire family must have suffered!
This is a serious crime. It's online bullying. If it were any other country, he would be in jail for violating child rights. But the @narendramodi government won't take action against this anchor. If they do, we'll let you know.
This is PRESS FREEDOM here… you can FREELY commit any crime while sitting in the government's lap.
Thank you
अगर राजस्थान में अभी कांग्रेस सरकार रही होती
तो ये TV चैनलों पर डिबेट का विषय बन गया होता है।
जैसलमेर के डंपिंग यार्ड में सैकड़ों गायों के शव पड़े हैं, तस्वीर हृदयविदारक है। मगर गौमाता के लिए आउटरेज सलेक्टिव है
मोदी-प्रधान की जोड़ी ने एक और संस्था को धांधली का प्रतीक बना दिया।
दशकों में पहली बार CBSE बोर्ड परीक्षा पर इतने गंभीर सवाल उठे हैं। 18.5 लाख बच्चों ने परीक्षा दी - और एक हफ़्ते से OSM, ग़लत मार्किंग और जाँच की गड़बड़ी की शिकायतें अनसुनी पड़ी हैं और शिक्षा मंत्री अपनी कुर्सी से चिपके हुए हैं।
एक 17 साल का बच्चा, जिसकी कॉपी ग़लत जाँची गई, न्याय की उम्मीद में सोशल मीडिया पर आया।
मगर, उसे मदद नहीं, गालियाँ मिलीं - BJP के IT cell ने उसे “Anti-National” कहा, “Soros का एजेंट” कहा, “Deep State” का हिस्सा कहा।
एक 17 साल का बच्चा अपने भविष्य के लिए आवाज़ उठाता है और यह BJP उसे देशद्रोही बना देती है।
सच यह है - मोदी सरकार युवाओं और Gen Z से डरती है, क्योंकि वो अब सवाल पूछ रहे हैं। और जो सवाल पूछे, उसे यह सरकार बदनाम करती है, डराती है, कुचलती है।
पर सुन लीजिए, मोदी जी - यही युवा, यही Gen-Z आपका अहंकार तोड़ेगा।