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पुलकित अपने एक्ट में ना किसी का नाम लेता है
ना किसी के जैसा मेक-अप करता है
यहाँ तक की आवाज भी किसी से नहीं मिलती है
वो बस एक पागल जोकर की तरह हँसते हुए कुछ-कुछ बड़बड़ाता है।
फिर पीयूष गोयल और उनके साथियों को कैसे पता चलता है कि ये मोदी का मजाक है ?
क्या इन मंत्रियों के दिमाग़ में प्रधानमंत्री की ये छवि है ?
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एक बात ध्यान रखना राहुल ने कभी किसी की माँ का मज़ाक़ नहीं उड़ाया, इसके बावज़ूद की अंधभक्तों ने अपनी माँ से पूछे बिना अपना बाप बदल लिया और राहुल की माँ का मज़ाक कई बार उड़ाया है, शीशे के घर मै रहते हो ध्यान रखो।
“उस मासूम की क्या गलती थी?”
सत्य निकेतन की त्रासदी में अपने बेटे, अर्पित जाज, को खोने वाला परिवार डबडबाई आंखों से यही सवाल पूछ रहा है।
अगर अच्छे और सुरक्षित हॉस्टल होते, तो उन्हें अपने बच्चे को ऐसी खतरनाक जगह में रखने के लिए मजबूर न होना पड़ता। और अगर सुरक्षा मानकों का सच में पालन होता, तो शायद यह त्रासदी होती ही नहीं - एक ऐसी त्रासदी, जिसकी कल्पना उन बच्चों और उनके माता-पिता ने सपने में भी नहीं की होगी।
सिस्टम की गैर-जिम्मेदारी और भ्रष्टाचार ने सपनों से भरी कई जिंदगियां छीन लीं और उम्मीदों से भरे कई परिवारों को उजाड़ दिया।
अर्पित का परिवार भी पूरे देश की तरह जवाबदेही मांग रहा है। वे चाहते हैं कि छात्रों की जिंदगी की जिम्मेदारी तय हो, ताकि फिर किसी माता-पिता को अपने बच्चे को इस तरह खोने का दर्द न सहना पड़े।
सिस्टम से मेरा सीधा सवाल है: नए और सुरक्षित हॉस्टल क्यों नहीं बनाए जा रहे? छात्रों को असुरक्षित PG में रहने के लिए मजबूर क्यों होना पड़ रहा है? सत्य निकेतन हादसे की जांच कहां तक पहुंची?
पूरी IT Cell ने जब 14 साल राहुल गांधी का मजाक उठाया तब तो खूब मजे लिए भक्तों ने,
अभी तो राहुल गांधी ने शुरू किया है, तुम तो अभी से काँपने लगे भक्तों, अभी तो ये ट्रेलर है, पिक्चर अभी बाकी है😂
कर्मों का फल रिटर्न जरूर मिलता है 💪
देश पर एक system का कब्ज़ा है - परत दर परत।
कौन है ये सिस्टम?
RSS और "हम दो, हमारे दो" की अगुवाई में गिनती के लोगों ने मिल कर भारत की हर संस्था पर अपना नियंत्रण कर लिया है।
सरकार हो, व्यापार हो, शिक्षा हो, स्वास्थ्य हो, खेल हो, मीडिया हो, न्यायपालिका हो, चुनाव आयोग हो या bureaucracy - इस सिस्टम में हुनर नहीं, पैसा और पहुंच मायने रखता है।
इस क़ब्ज़े के खिलाफ, भ्रष्टाचार के खिलाफ, अन्याय के खिलाफ छात्रों की आवाज़ ही सिस्टम के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
इसीलिए system को students से खतरा है - क्योंकि वो सवाल पूछते हैं, जवाबदेही मांगते हैं।
इसी डर से सिस्टम छात्र नहीं, अंधभक्त चाहता है - छात्रों को प्रताड़ित करता है, अंधभक्त को बढ़ावा देता है, ताकि कोई सवाल न उठे और मनमानी चलती रहे।
#ChhatronKiGoonj