इरफ़ान के वायरल होने के बाद एक मुलाक़ात तो बनती है. अब तमाम लोग मदद करने के लिए इरफ़ान को कॉल कर रहे. उससे मिलने जा रहे. बड़े नेता भी पहुँच रहे हैं. उम्मीद है तस्वीर बदलेगी.
@amie_story भैया के साथ मैं रजत. बने रहे @TheLallantop के साथ.
सभी पूछ रहे हैं ये कौन हैं?
ये मोहम्मद इरफ़ान हैं। साफ़गोई के साथ अपनी बात रख रहे हैं। संविधान की प्रस्तावना ऐसे सुना रहे हैं जैसे किसी गीत की तरह याद कर रखा हो। लोकतंत्र में व्यक्ति ही गरिमा की अहमियत बता रहे हैं। सोनम वांगचुक के साथ बदसलूकी पर ख़फ़ा हैं
⚠️ You may be older than your age… and not even know it.
Most people know their weight.
Most people know their age.
But very few people know how well their body is actually functioning.
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आज एशिया की सबसे बड़ी इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम देवबंद जाने और वहाँ के माहौल को करीब से देखने का अवसर मिला।
इस दौरान मौलाना अरशद मदनी साहब के दौलतखाने पर मुलाकात हुई। देश में चल रहे मौजूदा सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर विस्तार से बातचीत हुई। खास तौर पर गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग को लेकर मौलाना साहब द्वारा उठाई गई आवाज़ के लिए उनका धन्यवाद किया और इस सामाजिक सद्भाव और भाईचारे के मिशन में कंधे से कंधा मिलाकर चलने का भरोसा दिया।
मौलाना साहब से मुलाकात बेहद सकारात्मक, सौहार्दपूर्ण और प्रेरणादायक रही।
उन्होंने जिस तरह देश में अमन, इंसानियत, आपसी सम्मान और संविधानिक मूल्यों की बात रखी, वह वास्तव में सराहनीय है।
इसके बाद दारुल उलूम देवबंद को नज़दीक से देखने और समझने का मौका मिला। अक्सर इस संस्था को लेकर जो झूठे आरोप लगाए जाते हैं कि यहाँ कट्टरता या आतंकवाद की शिक्षा दी जाती है, वह पूरी तरह बेबुनियाद और राजनीतिक प्रोपेगेंडा है।
हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है। यहाँ शिक्षा, अनुशासन, नैतिकता, इंसानियत, भाईचारा और देशप्रेम का माहौल देखने को मिला।
दारुल उलूम ने केवल धार्मिक शिक्षा ही नहीं दी, बल्कि भारत की आज़ादी की लड़ाई में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस संस्था से जुड़े अनेक उलेमाओं ने अंग्रेज़ों के खिलाफ संघर्ष किया और देश की आज़ादी के लिए कुर्बानियाँ दीं।
सबसे ज्यादा खुशी उस समय हुई जब दारुल उलूम की लाइब्रेरी में हिंदू धर्मग्रंथ — मनुस्मृति, ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद आदि पुस्तकों को भी सम्मान के साथ रखा देखा।
यह इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि दारुल उलूम देवबंद नफरत नहीं, बल्कि आपसी सम्मान, धार्मिक सहिष्णुता और “सर्व धर्म समभाव” का संदेश देता है।
मैं अपने सभी हिंदू-मुस्लिम भाइयों से कहना चाहूँगा कि किसी भी संस्था के बारे में राय बनाने से पहले एक बार खुद वहाँ जाकर देखें, समझें और सच जानें।
सोशल मीडिया और राजनीति के जरिए फैलाए गए भ्रम से ऊपर उठकर सच्चाई को पहचानना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।
दारुल उलूम देवबंद हमेशा से अमन, शिक्षा, इंसानियत और भाईचारे का केंद्र रहा है और आगे भी देश में एकता और सौहार्द को मजबूत करने का काम करता रहेगा।
हिंदू-मुस्लिम एकता ज़िंदाबाद 🇮🇳
आपसी भाईचारा ज़िंदाबाद 🤝
भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब अमर रहे ❤️
#JustIn#AllahabadHighCourt criticizes @India_NHRC for directing #EOW to conduct an inquiry into 550+ aided Madrasas in UP while failing to take suo-motu cognizance of cases where members of the Muslim community are attacked or lynched.
BREAKING | Lok Sabha REJECTS the Constitutional (131st Amendment) Bill, 2026 which sought to expand the strength of the House from 543 to 850 seats and allow delimitation of seats based on pre-2026 Census.
आप जानते हैं कि 24 नवंबर, 2005 को राज्य में पहली बार एन०डी०ए० सरकार बनी थी। तब से राज्य में कानून का राज है और हम लगातार विकास के काम में लगे हुए हैं। सरकार ने शुरू से ही सभी तबकों का विकास किया है चाहे हिंदू हो, मुस्लिम हो, अपर कास्ट हो, पिछड़ा हो, अति पिछड़ा हो, दलित हो, महादलित हो- सभी के लिए काम किया गया है। हर क्षेत्र में काम हुआ है चाहे शिक्षा हो, स्वास्थ्य हो, सड़क हो, बिजली हो, कृषि हो। महिलाओं एवं युवाओं के लिए भी बहुत काम किया गया है।
इन दिनों काम को और आगे बढ़ाया गया है। अगले पाँच वर्षों यानि 2025 से 2030 के लिए 7 निश्चय-3 का गठन किया गया है। इससे और ज्यादा काम होगा जिससे बिहार काफी आगे बढ़ेगा। बिहार के विकास में केन्द्र का भी पूरा सहयोग मिल रहा है। इसके लिए आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का नमन करते हैं। बिहार और तेजी से विकसित होगा और देश के टॉप राज्यों में शामिल हो जाएगा तथा देश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
हमने बिहार के लोगों के लिए बहुत काम किया है। इतने दिनों से हमने लगातार लोगों की सेवा की है। हमने तय किया था कि अब मुख्यमंत्री का पद छोड़ देंगे और इसलिए आज मंत्रिमंडल की बैठक के बाद माननीय राज्यपाल से मिलकर उन्हें इस्तीफा सौंप दिया। अब नई सरकार यहाँ का काम देखेगी। नई सरकार को मेरा पूरा सहयोग एवं मार्गदर्शन रहेगा। आगे भी बहुत अच्छा काम होगा तथा बिहार बहुत आगे बढ़ेगा।
सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूँ तथा शुभकामनाएं देता हूँ।
Los alto al fuego siempre son una buena noticia. Sobre todo si conducen a una paz justa y duradera. Pero el alivio momentáneo no puede hacernos olvidar el caos, la destrucción y las vidas perdidas.
El Gobierno de España no aplaudirá a quienes incendian el mundo porque se presenten con un cubo.
Lo que toca ahora: diplomacia, legalidad internacional y PAZ.