Representing the voice of FPOs & Farmers 🇮🇳 | Highlighting ground realities, challenges & policy concerns to Govt. & policymakers | Independent, Non-Government Platform.
"आत्मनिर्भर कृषक समन्वित विकास योजना" के पुनः अनुमोदन, 625 किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के कार्यों के लंबित अनुमोदन, संस्थाओं के भुगतान तथा योजना को बाधित किए जाने के संबंध में उच्चस्तरीय जांच एवं आवश्यक कार्यव��ही हेतु प्रार्थना-पत्र।
महोदय,
सादर अवगत कराना है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित "आत्मनिर्भर कृषक समन्वित विकास योजना" का उद्देश्य प्रदेश के छोटे एवं सीमांत किसानों को किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के माध्यम से संगठित कर उनकी आय में वृद्धि, कृषि आधारित उद्यमिता का विकास तथा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के "समृद्ध किसान एवं सशक्त FPO" के संकल्प को साकार करना है। इसी उद्देश्य से ��ित्तीय वर्ष 2024-25 में विभिन्न क्रियान्वयन एजेंसियों के माध्यम से 625 किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के गठन हेतु CBBO संस्थाओं के साथ विधिवत एमओयू किए गए तथा संस्थाओं द्वारा शासन के निर्देशानुसार FPO गठन, कंपनी पंजीकरण, सदस्यता, व्यवसाय योजना, एवं अन्य सभी आवश्यक कार्य समयबद्ध रूप से पूर्ण किए गए। इसके बावजूद आज तक योजना का पुनः अनुमोदन एवं कार्यों का प्रशासनिक एवं वित्तीय अनुमोदन लंबित है, जिससे प्रदेश के लाखों किसान एवं सैकड़ों FPO गंभीर संकट में हैं।
महोदय,
अत्यंत खेद के साथ अवगत कराना पड़ रहा है कि कृषि विभाग के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा इस महत्वपूर्ण योजना को आगे बढ़ाने के बजाय निरंतर विलंबित किए जाने एवं बाधित करने का प्रयास किए जाने की आशंका उत्पन्न हुई है, क्यूंकि निरंतर संस्थओं द्वारा कृषि विभाग के अधिकारियों से मौखिक एवं लिखित वार्ता की जा रही है फिर भी किसी भी प्रकार का कोई हल नही निकल पा रहा है I हमारे संज्ञान में यह भी आया कि कृषि निदेशक के स्तर से पूर्व में अपर कृषि निदेशक (ADA), संयुक्त कृषि निदेशक (JDA) सहित पाँच सदस्यीय टीम गठित कर क्रियान्वयन एजेंसियों (Implementing Agencies) की जांच कराई गई। उक्त जांच के उपरांत भी योजना को स्वीकृति प्रदान करने के स्थान पर पुनः जनपद स्तर पर उप कृषि निदेशकों को पत्र जारी कर संस्थाओं की पुनः जांच ��े निर्देश दिए गए। कृषि निदेशक ��्वारा कोई कसर नही छोड़ी गई कि योजना बंद हो जाये यही कारण था की अनुमोदन हेतु शासन से सीमित पत्राचार किया गयाI
सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि उक्त पत्र में प्रथम बिंदु में "NABARD के अनुसार जांच" करने का उल्लेख किया गया, जबकि अगले ही बिंदु में "SFAC के EOI के अनुसार जांच" करने के निर्देश दिए गए।
ऐसी स्थिति में परस्पर विरोधाभासी निर्देश जारी किए जाने से यह गंभीर संदेह उत्पन्न होता है कि योजना के अनुमोदन को और अधिक विलंबित करने अथवा उसे अनावश्यक विवादों में उलझाने का प्रयास किया जा रहा है।
यदि किसी प्रकार की अनियमितता की वास्तविक आशंका थी तो उसका परीक्षण योजना प्रारंभ होने से पूर्व या चयन के समय किया जाना चाहिए था। लगभग डेढ़ वर्ष तक कार्य पूर्ण होने एवं FPO गठन संपन्न होने के पश्चात बार-बार नई जांचें प्रारंभ करना न केवल संस्थाओं बल्कि लाखों किसानों एवं नवगठित FPOs के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। यह ��्थिति इसलिए भी अत्यंत गंभीर है क्योंकि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी देशभर में किसान उत्पादक संगठनों को सशक्त बनाने, किसानों को संगठित कर उनकी आय बढ़ाने तथा आत्मनिर्भर कृषि व्यवस्था स्थापित करने हेतु निरंतर प्रयासरत हैं। ऐसे समय में यदि उत्तर प्रदेश में FPO से संबंधित योजनाओं को प्रशासनिक स्तर पर अनावश्यक रूप से लंबित रखा जाता है या उनके क्रियान्वयन में बाधा उत्पन्न होती है, तो इससे केंद्र एवं राज्य सरकार की मंशा तथा किसानों के विश्वास दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि—
1."आत्मनिर्भर कृषक समन्वित विकास योजना" का तत्काल पुनः अनुमोदन कराया जाए।
2.वर्ष 2024-25 में गठित 625 FPOs के कार्यों का प्रशासनिक एवं वित्तीय अनुमोदन तत्काल प्रदान किया जाए।
3.योजना को अनावश्यक रूप से लंबित रखने एवं बार-बार विरोधाभासी जांच के आदेश जारी किए जाने की उच्चस्��रीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।
4.यदि किसी अधिकारी द्वारा जानबूझकर योजना के क्रियान्वयन में बाधा उत्पन्न की गई हो अथवा सरकार की मंशा के विपरीत कार्य किया गया हो, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार आवश्यक प्रशासनिक एवं विभागीय कार्यवाही की जाए।
महोदय,
यह विषय केवल संस्थाओं के भुगतान का नहीं, बल्कि प्रदेश के लगभग 1200000 किसान , 625 किसान उत्पादक संगठनों तथा केंद्र एवं राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी FPO नीति की स���लता से जुड़ा हुआ है।
@myogiadityanath@myogioffice@PMOIndia@narendramodi@jdabureau
सेवा में,
माननीय मुख्यमंत्री महोदय, उत्तर प्रदेश
विषय: "आत्मनिर्भर कृषक समन्वित विकास योजना" के पुनः अनुमोदन, 625 किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के कार्यों के लंबित अनुमोदन, संस्थाओं के भुगतान तथा योजना को बाधित किए जाने के संबंध में उच्चस्तरीय जांच एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रार्थना-पत्र।
महोदय,
सादर अवगत कराना है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित "आत्���निर्भर कृषक समन्वित विकास योजना" का उद्देश्य प्रदेश के छोटे एवं सीमांत किसानों को किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के माध्यम से संगठित कर उनकी आय में वृद्धि, कृषि आधारित उद्यमिता का विकास तथा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के "समृद्ध किसान एवं सशक्त FPO" के संकल्प को साकार करना है। इसी उद्देश्य से वित्तीय वर्ष 2024-25 में विभिन्न क्रियान्वयन एजेंसियों के माध्यम से 625 किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के गठन हेतु CBBO संस्थाओं के साथ विधिवत एमओयू किए गए तथा संस्थाओं द्वारा शासन के निर्देशानुसार FPO गठन, कंपनी पंजीकरण, सदस्यता, व्यवसाय योजना, एवं अन्य सभी आवश्यक कार्य समयबद्ध रूप से पूर्ण किए गए। इसके बावजूद आज तक योजना का पुनः अनुमोदन एवं कार्यों का प्रशासनिक एवं वित्तीय अनुमोदन लंबित है, जिससे प्रदेश के लाखों किसान एवं सैकड़ों FPO गंभीर संकट में हैं।
महोदय,
अत्यंत खेद के साथ अवगत कराना पड़ र��ा है कि कृषि विभाग के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा इस महत्वपूर्ण योजना को आगे बढ़ाने के बजाय निरंतर विलंबित किए जाने एवं बाधित करने का प्रयास किए जाने की आशंका उत्पन्न हुई है, क्यूंकि निरंतर संस्थओं द्वारा कृषि विभाग के अधिकारियों से मौखिक एवं लिखित वार्ता की जा रही है फिर भी किसी भी प्रकार का कोई हल नही निकल पा रहा है I हमारे संज्ञान में यह भी आया कि कृषि निदेशक के स्तर से पूर्व में अपर कृषि ���िदेशक (ADA), संयुक्त कृषि निदेशक (JDA) सहित पाँच सदस्यीय टीम गठित कर क्रियान्वयन एजेंसियों (Implementing Agencies) की जांच कराई गई। उक्त जांच के उपरांत भी योजना को स्वीकृति प्रदान करने के स्थान पर पुनः जनपद स्तर पर उप कृषि निदेशकों को पत्र जारी कर संस्थाओं की पुनः जांच के निर्देश दिए गए। कृषि निदेशक द्वारा कोई कसर नही छोड़ी गई कि योजना बंद हो जाये यही कारण था की अनुमोदन हेतु शासन से सीमित पत्राचार किया गयाI
सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि उक्त पत्र में प्रथम बिंदु में "NABARD के अनुसार जांच" करने का उल्लेख किया गया, जबकि अगले ही बिंदु में "SFAC के EOI के अनुसार जांच" करने के निर्देश दिए गए।
ऐसी स्थिति में परस्पर विरोधाभासी निर्देश जारी किए जाने से यह गंभीर संदेह उत्पन्न होता है कि योजना के अनुमोदन को और अधिक विलंबित करने अथवा उसे अनावश्यक विवादों में उलझाने का प्रयास किया जा रहा है।
यदि किसी प्रकार की अनियमि���ता की वास्तविक आशंका थी तो उसका परीक्षण योजना प्रारंभ होने से पूर्व या चयन के समय किया जाना चाहिए था। लगभग डेढ़ वर्ष तक कार्य पूर्ण होने एवं FPO गठन संपन्न होने के पश्चात बार-बार नई जांचें प्रारंभ करना न केवल संस्थाओं बल्कि लाखों किसानों एवं नवगठित FPOs के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। यह स्थिति इसलिए भी अत्यंत गंभीर है क्योंकि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी देशभर में किसान ���त्पादक संगठनों को सशक्त बनाने, किसानों को संगठित कर उनकी आय बढ़ाने तथा आत्मनिर्भर कृषि व्यवस्था स्थापित करने हेतु निरंतर प्रयासरत हैं। ऐसे समय में यदि उत्तर प्रदेश में FPO से संबंधित योजनाओं को प्रशासनिक स्तर पर अन��वश्यक रूप से लंबित रखा जाता है या उनके क्रियान्वयन में बाधा उत्पन्न होती है, तो इससे केंद्र एवं राज्य सरकार की मंशा तथा किसानों के विश्वास दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि—
1."आत्मनिर्भर कृषक समन्वित विकास योजना" का तत्काल पुनः अनुमोदन कराया जाए।
2.वर्ष 2024-25 में गठित 625 FPOs के कार्यों का प्रशासनिक एवं वित्तीय अनुमोदन तत्काल प्रदान किया जाए।
3.योजना को अनावश्यक र���प से लंबित रखने एवं बार-बार विरोधाभासी जांच के आदेश जारी किए जाने की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।
4.यदि किसी अधिकारी द्वारा जानबूझकर योजना के क्रियान्वयन में बाधा उत्पन्न की गई हो अथवा सरकार की मंशा के विपरीत कार्य किया गया हो, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार आवश्यक प्रशासनिक एवं विभागीय कार्यवाही की जाए।
महोदय,
यह विषय केवल संस्थाओं के भुगतान का नहीं, बल्कि प्रदेश के लगभग 1200000 क��सान , 625 किसान उत्पादक संगठनों तथा केंद्र एवं राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी FPO नीति की सफलता से जुड़ा हुआ है।
भवदीय
@myogiadityanath@myogioffice@jdabureau@ChouhanShivraj@PIB_India@ANI@PTI_News@MIB_India@AgriGoI@DDNational@DDNewsUP@aajtak@News18India@ABPNews@ndtvindia@spshahibjp@BaldevAulakh@bjpkm4kisan प्रेस विज्ञप्ति
आत्मनिर्भर कृषक समन्वित विकास योजना के लंबित अनुमोदन एवं भुगतान को लेकर FPOs में आक्रोश
09 सितम्बर 2026 से लखनऊ में लगभग 600 FPO प्रतिनिधियों का अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन
लखनऊ, 08 सितम्बर 2026।
उत्तर प्रदेश में कृषक उत्पादक संगठनों (FPOs) को सशक्त बनाने के उद्देश्य से संचालित “आत्मनिर्भर कृषक समन्वित विकास योजना” के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2024-25 के लंबित अनुमोदन, CBBO एवं FPO संस्थाओं के लंबित भुगतान तथा तकनीकी एवं प्रशासनिक समस्याओं को लेकर प्रदेश के FPOs में गंभीर असंतोष उत्पन्न हो गया है। संबंधित विभागीय अधिकारियों को लगातार अवगत कराने के बावजूद समस्याओं का समाधान न होने के कारण अब FPOs ने लोकतांत्रिक तरीके से अप���ी आवाज शासन तक पहुंचाने का निर्णय लिया है।
वित्तीय वर्ष 2024-25 से संबंधित लगभग 500 किसान उत्पादक संगठनों का पंजीकरण हो चुका है, लेकिन उनका अनुमोदन अभी तक लंबित है। वहीं, योजना के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली CBBO संस्थाओं के भुगतान भी लंबे समय से लंबित हैं। इससे FPOs एवं CBBO संस्थाओं को गंभीर वित्तीय, प्रशासनिक एवं संचालन संबंधी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
भुगतान लंबित होने से जमीनी कार्य प्रभावित
CBBO संस्थाओं द्वारा FPOs के गठन, मार्गदर्शन एवं क्षमता निर्माण तथा अन्य निर्धारित गतिविधियों में कार्य किया गया है, लेकिन भुगतान लंबित होने के कारण मानव संसाधन, जमीनी स्तर की गतिविधियां, FPOs का मार्गदर्शन एवं क्षमता निर्माण, निगरानी एवं अनुश्रवण तथा कार्यालय एवं प्रशासनिक व्यय प्रभावित हो रहे हैं।
FPO प्रतिनिधियों का कहना है कि जब संस्थाओं ने निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्य किया है, तो उनके वैध भुगतानों को अनिश्चितकाल तक लंबित रखना गंभीर चिंता का विषय है।
30 सितम्बर के बाद ₹200 प्रतिदिन पेनाल्टी पर सवाल
FPOs के समक्ष एक और गंभीर समस्या 30 सितम्बर 2026 के बाद ₹200 प्रतिदिन पेनाल्टी लगाए जाने की संभावित स्थिति है। FPO प्रतिनिधियों का प्रश्न है कि यदि अनुमोदन, भुगतान अथवा संबंधित प्रक्रिया विभागीय/प्रशासनिक/तकनीकी स्तर पर लंबित है और FPO की ओर से कोई कमी नहीं है, तो विभागीय विलंब का आर्थिक दण्ड FPOs पर क्यों लगाया जाए?
विभागीय अथवा तकनीकी विलंब के लिए FPOs को आर्थिक दण्ड का भागीदार बनाया जाना उचित नहीं है।
09 सितम्बर से अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन
लगातार लंबित समस्याओं के समाधान के लिए किए गए प्रयासों के बावज���द अपेक्षित कार्रवाई न होने के कारण अब दिनांक 09.09.2026 से लखनऊ में लगभग 600 FPO प्रतिनिधियों द्वारा धरना-प्रदर्शन प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया है। यह धरना अनिश्चितकालीन होगा तथा इसकी समाप्ति की कोई निर्धारित तिथि नहीं होगी।
FPO प्रतिनिधियों का स्पष्ट कहना है कि जब तक वित्तीय वर्ष 2024-25 के लंबित अनुमोदन, CBBO के लंबित भुगतान तथा FPOs के लंबित भुगतान के संबंध में लिखित एवं ठोस समाधान नहीं किया जाता, तब तक आ��दोलन समाप्त करने का निर्णय लेना संभव नहीं होगा।
FPOs की प्रमुख मांगें
FPOs की प्रमुख मांगें हैं—
1.आत्मनिर्भर कृषक समन्वित विकास योजना के सभी लंबित प्रकरणों का तत्काल अनुमोदन।
2.सभी लंबित CBBO एवं FPO भुगतानों का तत्काल निस्तारण।
3.अनुमोदन एवं भुगतान के लिए समयबद्ध मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू की जाए।
4.लंबित मामलों का समयबद्ध एवं पारदर्शी तरीके से निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
“��ब आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं”
FPO प्रतिनिधियों का कहना है कि उन्होंने लंबे समय तक धैर्य रखते हुए विभागीय स्तर पर अपनी समस्याएं उठाईं, लेकिन लगातार लंबित अनुमोदन एवं भुगतान के कारण स्थिति अब गंभीर हो चुकी है। इसलिए 09 सितम्बर 2026 से अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया है।
यह आंदोलन किसी टकराव के उद्देश्य से नहीं, बल्कि लगातार लंबित प्रशासनिक, वित्तीय एवं तकनीकी समस्याओं ��े कारण FPOs की विवशता का परिणाम है। FPO प्रतिनिधियों ने शासन एवं विभाग से अपील की है कि धरना प्रारंभ होने से पूर्व तत्काल हस्तक्षेप कर समस्याओं का ठोस एवं लिखित समाधान कराया जाए।
निदेशक
समस्त किसान उत्पादक संगठन
@myogiadityanath@myogioffice@jdabureau@ChouhanShivraj@PIB_India@ANI@PTI_News@MIB_India@AgriGoI@DDNational@DDNewsUP@aajtak@News18India@ABPNews@ndtvindia@spshahibjp@BaldevAulakh@bjpkm4kisan
**प्रेस विज्ञप्ति**
### **आत्मनिर्भर कृषक समन्वित विकास योजना के लंबित अनुमोदन एवं वित्तीय सहयोग को लेकर CBBO एवं FPO प्रतिनिधियों का कृषि निदेशालय में अनिश्चितकालीन धरना**
**लखनऊ, दिनांक 09 सितम्बर 2026**
**लखनऊ।** आत्मनिर्भर कृषक समन्वित विकास योजना के अंतर्गत गठित किसान उत्पादक संगठनों (FPO) एवं उनके साथ कार्य कर रहे क्लस्टर बेस्ड बिजनेस ऑर्गेनाइजेशन (CBBO) के प्रतिनिधियों द्वारा आज कृषि निदेशालय, लखनऊ म���ं अपनी विभिन्न मांगों को लेकर **अनिश्चितकालीन धरना** प्रारम्भ किया गया।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि आत्मनिर्भर कृषक समन्वित विकास योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में कुल **625 FPO गठित किए जाने का लक्ष्य** निर्धारित किया गया था, जिस��े सापेक्ष लगभग **500 FPO का गठन किया जा चुका है।** इन FPO से लगभग **5 लाख किसान सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं।** योजना का मूल उद्देश्य किसानों को संगठित कर उन्हें कृषि उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन, मूल्य संवर्धन, बाजार से जोड़ने तथा आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का था।
### **31 मार्च 2025 को योजना समाप्त होने के बाद भी नहीं हुआ लंबित अनुमोदन**
CBBO एवं FPO प्रतिनिधियों का आरोप है कि योजना की निर्धारित अवधि **31 मार्च 2025 को समाप्त हो चुकी है**, लेकिन इसके बाद भी गठित FPO को योजना के अंतर्गत अपेक्षित वित्तीय सहयोग एवं अन्य सहायता उपलब्ध कराने के संबंध में अभी तक आवश्यक स्तर पर अनुमोदन नहीं कराया गया है।
प्रतिनिधियों का कहना है कि बड़ी संख्या में FPO पहले ही गठित हो चुके हैं और किसानों को इन संगठनों से जोड़ा जा चुका है। FPO के गठन के बाद किसानों को यह उम्मीद थी कि उन्हें योजना के माध्यम से आवश्यक वित्तीय सहायता, क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण, व्यवसायिक गतिविधियों, आधारभूत संरचना, विपणन एवं अन्य सहयोग प्राप्त होगा। लेकिन अनुमोदन एवं वित्तीय सहयोग लंबित रहने के कारण FPO के संचालन और किसानों को अपेक्षित लाभ पहुंचाने में गंभीर कठिनाइयां उत्पन्न हो रही हैं।
### **लगभग 5 लाख किसानों पर पड़ रहा प्रत्यक्ष प्रभाव**
प्रदर्शनकारियों के अनुसार यह मामला केवल CBBO अथवा FPO तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े लगभग **5 लाख किसानों के हित सीधे प्रभावित हो रहे हैं।**
FPO के माध्यम से किसानों को सामूहिक रूप से कृषि इनपुट उपलब्ध कराने, कृषि उत्पादों की खरीद एवं बिक्री, प्रसंस्करण, भंडारण, मूल्य संवर्धन तथा बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जाना था। इसके लिए FPO को संस्थागत एवं वित्तीय रूप से मजबूत किया जाना आवश्यक है।
प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि गठित FPO को समय पर वित्तीय सहयोग और प्रशासनिक अनुमोदन नहीं मिलता है तो इन संगठनो�� की कार्यक्षमता प्रभावित होगी और इसका सीधा नुकसान उनसे जुड़े किसानों को उठाना पड़ेगा।
### **कृषि निदेशक से वार्ता, लेकिन समाधान नहीं निकलने से बढ़ा आक्रोश**
��रने के दौरान CBBO एवं FPO प्रतिनिधियों ने कृषि निदेशक, उत्तर प्रदेश से मुलाकात कर अपनी समस्याओं एवं मांगों को विस्तार से रखा।
प्रतिनिधियों के अनुसार वार्ता के दौरान कृषि निदेशक द्वारा यह बताया गया कि **योजना की अवधि समाप्त हो चुकी है और वर्तमान स्तर पर इस संबंध में उनके स्तर से कुछ नहीं किया जा सकता।**
प्रतिनिधियों का कहना है कि इस प्रकार का जवाब समस्या का समाधान नहीं है। यदि योजना की अवधि समाप��त हो गई है, तो भी पहले से गठित लगभग 500 FPO तथा उनसे जुड़े लगभग 5 लाख किसानों के भविष्य को देखते हुए शासन स्तर पर आवश्यक निर्णय एवं समाधान की प्रक्रिया प्रारम्भ की जानी चाहिए।
प्रतिनिधियों ने कहा कि FPO का गठन विभागीय योजना के अंतर्गत हुआ है और किसानों को योजना से जोड़ने के लिए CBBO एवं अन्य संस्थाओं द्वारा लंबे समय तक कार्य किया गया। ऐसे में केवल योजना की अवधि समाप्त होने का हवाला देकर सभी लंबित विषय��ं को समाप्त मान लेना किसानों एवं FPO के हित में नहीं है।
### **प्रमुख मांगें**
CBBO एवं FPO प्रतिनिधियों ने सरकार एवं कृषि विभाग के समक्ष निम्न प्रमुख मांगें रखी हैं—
1. **आत्मनिर्भर कृषक समन्वित विकास योजना के अंतर्गत गठित FPO के लंबित अनुमोदन को तत्काल पूरा किया जाए।**
2. योजना के अंतर्गत पात्र FPO को नियमानुसार **वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तत्काल प्रारम्भ की जा��।**
3. CBBO द्वारा योजना के अंतर्गत किए गए कार्यों एवं लंबित दावों/भुगतान का **शीघ्र निस्तारण किया जाए।**