"If ever you do good work,be ready to be hunted by the powerful,Imagine someone coming to hurt u & you can't even defend yourself
They have conspired to send this Khan to jail somehow & shut his hospital because he speaks against the system"
Khan sir gets emotional !!
STORY | Ram Temple built due to commitment of those in power; India already a Hindu Rashtra: Bhagwat
The Ram Temple in Ayodhya was built due to the commitment of those in power and the support of everyone in the country, RSS chief Mohan Bhagwat has said, emphasising that there is no need to declare India a Hindu Rashtra as it already is.
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(PTI File Photo)
चूँकि अरविंद केजरीवाल लाखों करोड़ों के बंगले में रहते हैं, बड़ी कार से चलते हैं
इसीलिए स्वाति जी भाजपा में चली गईं जहाँ मोदी जी झोपड़ी में रहते हैं और तांगे से चलते हैं।
कोई और कहानी सुनाओ स्वाति जी, ये वाली हम सब जानते हैं। 🙏
अमेरिका के कहने पर 👇
• हमने ईरान से तेल लेना बंद किया
• रूस से तेल लेना बंद किया
• 50% टैरिफ पर कुछ नहीं कहा
• 18% टैरिफ के लिए राजी हुए, जो एवरेज टैरिफ से बहुत ज्यादा है
हमें विपक्ष की आलोचना झेलनी पड़ी, लेकिन भारत सरकार ने कहां कमी रखी?
- राम माधव, BJP के वरिष्ठ नेता
बेचैनियों की भी एक्सपायरी डेट होनी चाहिए।
एक इंसान जिसने अभी-अभी अपनी पढ़ाई पूरी की है, जो पहली नौकरी की तलाश में है, और नौकरी न मिल पाने के कारण हर वक्त बेचैन रहता है। दूसरी ओर, एक शख्स जिसे लाखों लोग जानते हैं, जिसने इतना पैसा कमा लिया है कि सारी ज़िंदगी बैठकर खा सकता है — मन के एक कोने में वो भी उतना ही बेचैन है।
दिक़्क़त कभी बेचैनी नहीं होती। दरअसल यही बेचैनी है जो हमसे बहुत कुछ करवाती है। दिक़्क़त ये है कि सालों-साल हमारी बेचैनी के कारण नहीं बदलते। हम सारी ज़िंदगी उन्हीं दो-चार चीज़ों को लेकर बेचैन रहते हैं। पाँच साल पहले जिस चीज़ को लेकर कंफ्यूज़ थे, आज भी उसी को लेकर परेशान हैं। शादी के वक्त पति-पत्नी जिन मामलों पर झगड़ा करते थे, दस साल बाद भी वे उन्हीं बातों को लेकर सिर खपा रहे होते हैं। हमेशा सर्वाइवल की सोचने वाला शख्स ‘इतिहास मुझे कैसे याद रखेगा’ की चिंता में नहीं डूब पाता।
हमारी बेचैनियों की कभी एक्सपायरी डेट नहीं आती। बेचैनियों से अपने रिश्ते को हम सात फेरे लेकर रिश्तेदारी में बदल लेते हैं। उन्हीं के साथ सात जन्मों तक रहने की कसमें खा लेते हैं। नई बेचैनियों को Friend Request भी नहीं भेजते। सामने से आ भी रही हों तो मोबाइल में झाँककर उन्हें Avoid कर देते हैं।
जीवन की ऊब उसकी एकरसता में नहीं है। जीवन की पीड़ा उसकी परेशानियों में भी नहीं है। जीवन का असल बोझ उन परेशानियों के जाने-पहचाने चेहरों में है, जो न जाने कौन-सा Age Filter यूज़ करती हैं कि हमारी नज़रों में कभी बूढ़ी ही नहीं होतीं — और हम ताउम्र उनसे वैसे ही इश्क करते जाते हैं।
-Neeraj Badhwar
नोएडा के प्रेसिडियम स्कूल की स्टूडेंट तनिष्का की माँ को जानने का हक है कि उसकी बेटी स्कूल में कैसे मरी । सीसीटीवी और बाकी डिटेल दी जानी चाहिए! इस महिला को अपनी बेटी के बारे में सभी जानकारी मिले । इस माँ को सपोर्ट की जरूरत है! ताकि सच सामने आए
अटल जी के साथ हमने कई निर्णय लिए, लेकिन उन्होंने यह कभी नहीं सोचा कि चुनाव पर इसका क्या असर पड़ेगा।
लेकिन वर्तमान में हमारे प्रधानमंत्री हर कदम चुनाव को देखकर उठाते हैं। इसलिए आर्थिक क्षेत्र समेत अन्य क्षेत्रों में सरकार की नीतियां बेहद गलत हो गई हैं।
I was ADMITTED in Medanta due to sudden unconsciousness As I had @HDFCERGOGIC insurance which covers Medanta .They referred me in ICU heart later on hdfc denied my claim stating it happened due to tension . I trusted my insurance and now they left me with no choice. #jagograhak
विपक्ष गायब है
विपक्ष गायब है
विपक्ष गायब है
विपक्ष गायब है
विपक्ष गायब है
विपक्ष गायब है
विपक्ष गायब है
विपक्ष गायब है
विपक्ष गायब है
विपक्ष गायब है
विपक्ष गायब है
विपक्ष गायब है
विपक्ष गायब है
विपक्ष गायब है
विपक्ष गायब है
विपक्ष गायब है
विपक्ष गायब है
विपक्ष गायब है
विपक्ष गायब है
विपक्ष गायब है
अबे चुप।
तू जिंदा है,
या तू मर चुका है।
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जब तक तू है, आखरी जीवित इंसान है, तेरे दिल मे लोकतन्त्र और आजादी बचाने की सुलग रही है, तो विपक्ष जिंदा है।
पार्टी नही आएगी, उसे आने नही दिया गया।
पोस्टर नही छपेंगे, छपने नही दिया गया।
संगठन नही आएगा, उसे तोड़ दिया गया
विज्ञापन नही दिखेंगे, स्लॉट नही दिया गया।
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लेकिन पोस्टर, पार्टी, संगठन, विज्ञापन और चीखता हुआ नेता तेरे दरवाजे न आये, तो क्या तेरी इंद्रियां काम करना बंद कर देंगी??
महंगाई है, चमड़ी से फील कर।
बेरोजगारी है, स्वाद ले जरा
हवा में खून की गंध है, सूंघकर देख।
गुमाश्ते हथकड़ी लेकर घूम रहे, देख आंखों से
धमक और जहरीले नारे गूंज रहे, सुन जरा..
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अपनी इंद्रियों का यकीन कर। अपना यकीन कर। बन विपक्ष.. तन कर खड़ा हो।
न हिम्मत हो, तो चुप ही सही। खामोशी से बटन दबा, उसके नाम, जो यह माहौल बदल सकता है।
बदलने वाला, तुझमें जिंदा है। विपक्ष मरेगा नही। जब तलक..
तू जिंदा है।
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दोबारा मत पूछना।
सारी बातें CJI ही पूछता रहेगा क्या, एक आधी बात तुम भी पूछ लो @ABPNews वालो।
सवाल पूछो, डिबेट करो, स्टिंग करो, अपने कथित पत्रकारों को तालाब और नालों से बाहर निकालकर सत्ताधारी पार्टी के दफ्तर के बाहर खड़ा करो।
आज जयराम रमेश द्वारा एक महिला पत्रकार को अमित मालवीय कहने पर बहुत बुरा लगा। लगना भी चाहिये था, एक तो जयराम जी का लहजा ठीक नहीं था, दूसरा अमित मालवीय का नाम एक असहनीय गाली का पर्याय बन चुका है।
किसी के ऊपर चाहे थूक लो, लेकिन उसको अमित मालवीय मत कहो।