Just like how Ahirs were given the new Yadav surname, Koiris/Muraos/Kacchis were given the Maurya, Kushwaha surnames.
The incident in Bihar's Jamui is evidence that appropriation of identity and names of Upper Classes doesn't improve the Lowly Classes.
महाराणा जी हवा में तेज-तेज हाथ लहराने चाहिए थे, ज़ोर-ज़ोर से फ़ोन पर धमकाना चाहिए था, बोलना चाहिए था तू जानता नहीं मैं किसका वंशज हूँ, एक चैलेंज देना चाहिए था की ये कर दूँगा, फुल-ऑन औरा फार्मिंग करनी चाहिये थी… फिर एक बढ़िया लाउड “गूँजेगा-गूँजेगा” बैकग्राउंड में चलता.. तभी तो बंदा शूरवीर महाराणा प्रताप का वंशज लगता.
लाउड-क्रास, छपरी-देहाती, फेंका-फेंकी कल्चर इस देश में इतना हावी हो चुका है कि हर किसी को लगता है कि जो राज कर गये, वो इसलिए कर गये क्यूँकि वो इन गुणों की खान थे.
You can take the Dehati out of the Dehat but you cant take the Dehat out of the Dehati.
Have never seen heads of civilised nations engaging in such behavior (except for maybe Trump).
यूपी में खुला पोंगा ब्राह्मणवाद चल रहा है
बामण जब तक किसी की हत्या कर देता है
मंदिरों में खुलेआम चोरी डाका करता है, गाय काट कर बेचता है
दंगा फैलाने की कोशिश करता है
दिल्ली में पत्रकार का रूप लेकर बैठी पोंगा लॉबी गरीब निरीह जातियों को बदनाम करती है
उनके खिलाफ प्रोपगंडा करती है.
ram eating shabri’s jhute ber is not part of valmiki ramayan
bhils never saw combat at haldighati,they never fought alongside maharana Pratap
they were not Dileep Singh’s soldiers,he was simply involved in efforts to reduce christian conversion among those tribal populations
स्वर्ण एकता में जिसकी स्वान( कुकुर) जैसी औकात, वो राजपूत!
जो खुद लातें खाकर पंडित जी को बचाए, वो राजपूत!
खुद सबका दुश्मन बनकर गैरों को नेता बनाए, वो राजपूत!
जिसकी गांव फटे, फिर भी नवाबी न घटे, वो राजपूत!
छतरी पुत्र धर्म निभाते शिवम् सिंह।
ठाकुर साब गद्दार, भगोड़े और डरपोक को साथ लेकर जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने चले थे!
अभी समय है इस लहन के बंडों को त्यागो तभी तुम सफल हो पाओगे!
ठाकुर साब उधर लाठी डंडा खा रहे हैं इधर पंडित जी लखनऊ में आंदोलन का नेतृत्वकर्ता बने घूम रहे हैं।