राजस्थान की नीरू यादव देश के लिए एक मिसाल बन रही है। अब आप सोचेंगे कि नीरू कौन हैं! तो सुनिए। नीरू यादव एक लाम्बी अहीर गांव की सरपंच हैं। उन्होंने ऐसा कारनामा अंजाम दिया है, जिससे सरकारी स्कूलों के बारे में लोगों की धारणा ही बदल जाएगी।
नीरू ने अपनी ग्राम पंचायत में आने वाले एक सरकारी स्कूल को गोद लिया और वहाँ English Medium Play School की स्थापना की, नीरू के इस प्रयास ने सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को ‘क्वालिटी एजुकेशन’ से जोड़ दिया। इतना ही नहीं इस स्कूल के पांच किलोमीटर के दायरे में आने वाले बच्चों के लिए निःशुल्क वाहन की व्यवस्था भी की गई है।
नीरू की यह पहल सिर्फ स्कूल को बेहतर बनाने की पहल मात्र नहीं थी, बल्कि दूसरे सरपंचों के लिए भी इसी तरह की इच्छा शक्ति अपनाकर गांव को ‘मॉडर्न’ बनाने का रास्ता था। यह एक ऐसा प्रयास था, जिसने नौनिहालों को ऐसा विज़न दिया, जो उनके भविष्य को संवारने में काम आता रहेगा। नीरू की पहल सिर्फ शिक्षा का पैटर्न संवारने तक ही नहीं थी, बल्कि उन्होंने खेलों को ले��र भी गांव को प्रेरित किया। हॉकी से लेकर शिक्षा, बर्तन बैंक से लेकर ग्रामीण विकास तक, नीरू यादव के ऐसे कई “ग्रासरूट अविष्कार” हैं, जो बदलाव की दास्तान कह रहे हैं।
नीरू को ‘हॉकी वाली सरपंच’ के नाम से भी जाना जाता है। नीरू की इसी कोशिश ने उन्हें India Today के Independence Day Special में प्रकाशित ‘The She List’ के कवर पर 50 वर्ष से कम उम्र की उन सात Self-Made Women को जगह दिलाई है। ये वो महिलाएँ हैं जो अपने-अपने क्षेत्र में भारत का भविष्�� बदल रही हैं।
आगरा के शहीद नगर कब्रिस्तान के गेट पर रोज़ाना नशाखोरी और शराब पीने की घटनाओं से भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह स्थिति न केवल शांति भंग कर रही है, बल्कि इससे किसी बड़े विवाद या अप्रिय घटना के होने का भी खतरा बना हुआ है। @Uppolice, @DCPCityAgra, और @agrapolice से
@Uppolice@DCPCityAgra@agrapolice इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और इस समस्या का समाधान करने का आग्रह करते है। यह आवश्यक है कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर ध्यान दे और कब्रिस्तान के आसपास के क्षेत्र में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उचित कदम उठाए।
वीडियो दिल्ली के लाजपत नगर का है। क्रिसमस से पहले ईसाई समुदाय की महिलाएँ सांता क्लॉज़ की टोपी पहने हुए थीं। बस फिर क्या था! धार्मिक कट्टरपंथियों की भावनाएं आहत हो गयीं। और ईसाई संप्रदाय की महिलाओं से बदसलूकी करने लगे। उन पर आरो�� मढ़ने लगे। कार्रावाई होगी?
इसका चेहरा क्यों छुपाया है? इसका जुलूस निकालकर वीडियो क्यों नहीं बनाया? इसकी टांग में गोली मारकर इसे लगड़ाकर चलते हुए वीडियो शूट क्यों नहीं बनाया? इसका कान पकड़कर माफी मांगकर चलते हुए वीडियो क्यों नही बनवा��ा? इससे क्यों नहीं कहलवाया किसी से जबरन अपना नारा लगवाना पाप है, पुलिस हमारी बाप है? इसके घर को बुलडोज़र से ध्वस्त क्यों नही किया? क्या इसलिए कि यह ‘रोहित’ है? अगर यह रेहान होता तब?
मीडिया में एक भ्रामक खबर प्रचारित हो रही है कि से० 56 फरी० क्षेत्र में विस्फोटक सामग्री मिली है
यह सामग्री शादी विवाह में चलने वाले पटाखे व उसका रॉ मैटेरियल है, इसका आतंकवादी गतिविधियों से कोई संबंध नहीं है। फरीदाबाद पुलिस इसका खंडन करती है, भ्रामक प्रचार ना करें
@police_haryana
कल शाम दिल्ली में हुई भयावह घटना ने सभी के मन को व्यथित किया है। मैं पीड़ित परिवारों का दुख समझता हूं। पूरा देश उनके साथ खड़ा है।
मैं हर किसी को आश्वस्त करता हूं कि हमारी जांच एजेंसियां इस षड्यंत्र की तह तक जाएंगी। जो भी लोग इसके लिए जिम्मेदार हैं, उन्हें किसी भी कीमत पर नहीं बख्शा जाएगा।
@JaipurDialogues इस पर ट्रस्ट करेगा? यह @RSSorg के मंचों से 'राष्ट्रवाद' पर भाषण दिया करता था, DRDO में साइंटिस्ट ���ा, देश की खुफिया जानकारियां दुश्मन देश को देते हुए धरा गया। अब कहा जा रहा है कि यह 'हनी ट्रैप' में फंसा, यह हनी ट्रैप क्या है ��ी? यह सीधे-सीधे गद्दारी है।
प्रयागराज, उत्तरप्रदेश
कलमा लिखे हुए इस्लामी झंडे की पैरों से रौंदकर बेअदबी की गई पाकिस्तान के नाम पर किए गए विरोध प्रदर्शन के दौरान ऐसा प्रयोग मुस्लिम समुदाय के खिलाफ किया गया। RT रुकने नहीं चहिये इनकी गिरफ्तारी तक
पहलगाम में हुए ��तंकी हमले की जितनी निंदा की जाए, कम है। दरअसल, “निंदा” शब्द भी इस अमानवीय कृत्य के लिए छोटा पड़ जाता है। यह एक सीधा हमला न केवल निर्दोष नागरिकों पर था, बल्कि हमारी साझी संस्कृति, भाईचारे और इंसानियत पर भी।
लेकिन इस अंधेरे में उम्मीद की जो रौशनी नजर आई, वह उन कश्मीरी मुसलमान भाइयों की इंसानियत और बहादुरी से थी, जिन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर हिंदू यात्रियों की जान बचाई। उन्होंने न सिर्फ उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाया, बल्कि अपनी सेवाओं के लिए एक पैसे तक नहीं लिए। यह हमारे देश की गंगा-जमुनी तहज़ीब और असल भारतीयता की ज़िंदा मिसाल है।
आतंकियों ने इस घटना को सांप्रदायिक रंग देने की जो घिनौनी कोशिश की, उसे कश्मीरी मुसलमानों ने अपने अमल से नाकाम कर दिया। अब ज़रूरत इस बात की है कि देश में इस घटना के नकारात्मक असर को रोकने के लिए हम सब म���लकर काम करें।
हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि देश में अशांति न फैले, और “अनेकता में एकता” की हमारी ताक़त कमज़ोर न हो — क्योंकि यही आतंकवादियों का असली मकसद है।
मीडिया, जनता और हर जिम्मेदार नागरिक का फर्ज़ है कि किसी भी सूरत में इस घटना को सांप्रदायिक रंग न लेने दे। अगर हमने ऐसा होने दिया, तो हम दुश्मनों के इरादों को खुद ही कामयाबी दे देंगे।
#Pahalgam