अपनी आखिरी सांस तक अंग्रेज़ों से लड़ने वाले, अपनी आखिरी सांस तक भारत की आज़ादी के लिए संघर्ष करने वाले महान स्वतंत्रता सेनानी के किरदार पर यूपी के मुख्यमंत्री ने कुंठा का प्रदर्शन किया है। सवाल यह नहीं है कि उस मुख्यमंत्री ने ऐसा किया है, विडंबना यह है कि उस मुख्यमंत्री के सामने बैठे लोग जहालत के प्रदर्शन पर तालियाँ पीट रहे थे। जिस ‘वीर’ ने अंग्रेज़ों से ‘वज़ीफा’ लिया वही ‘वीर’ विभाजन का भी पैरोकार था, अब ऐसे ‘वीरों’ को ‘आदर्श’ मानने वाले जौहर को कहाँ बर्दाश्त करेंगे।
पहली बार किसी रिपोर्टर को ' इंकलाब
ज़िंदाबाद ' जैसे नारे पर एतराज करते देख रहा हूं.
ABP न्यूज की इस रिपोर्टर को इंकलाब ज़िंदाबाद जैसे नारे से दिक्कत है ?
टीवी चैनल का माइक थामने से पहले थोड़ी बहुत तो पढ़ाई की होगी ?
या बस ऐसे ही ?
आज़ादी की लड़ाई के वक्त हसरत मोहानी ने पहली बार ये नारा दिया था. भगत सिंह जैसे देशभक्त ये नारा लगाया करते थे . आज भी सत्ता और सिस्टम के खिलाफ सबसे बुलंद नारा है - इंकलाब जिंदाबाद
यह तस्वीर मोहम्मद ज़ैद की है। ज़ैद अब दुनिया में नहीं है। ज़ैद दिल्ली के मुस्तफाबाद के रहने वाले थे। यह इलाक़ा लोनी बॉर्डर पर है। लोनी यूपी के गाजियाबाद में आता है। ज़ैद अपने दो दोस्तों, नदीम और इब्राहिम के साथ मोटरसाइकिल पर सवार होकर बेहटा स्थित एक स्विमिंग पूल में नहाने के लिए जा रहे थे। वो जैसे ही लोनी मेन रोड से बेहटा रोड की तरफ मुड़े, तभी एक एक कार से उनकी बाइक की हल्की सी टक्कर हो गई। इसके बाद कार में बैठा राहुल अपने दोस्त के साथ उतरा और जैद को को पीटना शुरू कर दिया। बात सिर्फ यही तक नहीं रही बल्कि राहुल अपने दोस्त के साथ ज़ैद को जबरन जैद कार में भरकर मनीष प्रॉपर्टीज नामी ऑफिस ले गया, वहां उन्होंने ज़ैद को बेरहमी से पीटा।
जब जैद के दोस्त नदीम और इब्राहिम बाइक लेकर वहां पहुंचे तो उन्होंने देखा कि जैद बेहोशी के हाल में ज़मीन पर पड़ा हुआ है, और राहुल नामी युवक लगातार गाली-गलौज करते हुए उसे लातों से बेरहमी से पीट रहा है। राहुल ने ज़ैद के दोस्त नदीम और इब्राहिम को धमकी देते हुए कहा कि इसे ले जाओ, नहीं तो तुम्हारा भी यही हाल होगा। वो दोनों दोस्त जैद को उठाकर अस्पताल लेकर पहुंचे, वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद जैद को मृत घोषित कर दिया।
पिछले कुछ वर्षों में एक बुलडोज़र और एनकाउंटर का चलन देखा गया है। दिल्ली में तरुण की हत्या हुई तो उसे इंसाफ दिलाने के नाम पर आरोपितों के घर को तोड़ दिया गया। उसके बाद दिल्ली से सटे खोड़ा में सूर्य की हत्या हुई तो हत्यारोपी का चौबीस घंटे के भीतर एनकाउंटर कर दिया गया। अब सवाल ज़ैद को इंसाफ दिलाने का है। जब हत्या के बदले एनकाउंटर और बुलडोज़र का ही चलन शुरू हो चुका है, तब ज़ैद के हत्यारोपी का एनकाउंटर क्यों नहीं किया जा रहा? उनके घरों पर बुलडोज़र क्यों नहीं चलाया जा रहा? सूर्या और तरुण की हत्या के बाद सत्ताधारी दल के अनुषांगिक संगठनों और नेताओं ने किस तरह बयानबाज़ी करके आपसी रंजिश में हुई इन हत्याओं को ‘दूसरा’ रंग दिया था, यह पूरे देश ने देखा है। खोड़ा और उत्तम नगर की गलियों में घूमते नफ़रती यू-ट्यूबिए किस तरह इन हत्याओं का दोष पूरे समुदाय पर मढ़ रहे थे, यह भी पूरे देश ने देखा है। सवाल फिर वही है कि जब किसी हिंदू के ग़ैर हिंदू हत्यारे के खिलाफ पुलिस और सरकार बुलडोज़र और एनकाउंटर एक्शन को अमल में लाती है, तब ज़ैद के हत्यारों पर यह कार्रावाई क्यों नहीं होनी चाहिए? हत्यारों से निपटने का यह फॉर्मूला सरकार और पुलिस ने खुद शुरू किया है, तो इसमें भेदभाव क्यों?
सरकार ने तरुण और सूर्या के परिजनों को मुआवज़ा दिया है। तरुण के हत्यारोपितों का घर गिराया है, तो सूर्या मर्डर के नाबालिग आरोपी को एनकाउंटर में मारा है। अब सवाल है कि यह त्वरित ‘इंसाफ’ ज़ैद को क्यों नहीं? क्या वो इंसान नहीं? क्या वो भारतीय नागरिक नहीं? उसके परिवारजनों को मुआवज़ा क्यों नहीं? उसके हत्यारोपितों का एनकाउंटर क्यों नहीं? बुलडोज़र एक्शन क्यों नहीं? क्या इस देश में दो कानून हैं? जब बुलडोज़र और एनकाउंटर चलन शुरू हो ही चुका है, तब इसमें भेदभाव क्यों? क्या मदर ऑफ डेमोक्रेसी में सब कुछ नाम के आधार पर होता है?
महाराष्ट्र के अहमदनगर स्थित ब्राह्मण गली में बकरीद के दिन मांस फेंके जाने की घटना से क्षेत्र में तनाव फैल गया था। सीसीटीवी फुटेज में बुर्का पहने एक महिला संदिग्ध तरीके से मांस से भरा पैकेट फेंकती हुई दिखाई दी, जिसके बाद मामला गंभीर विवाद का विषय बन गया।
लगभग दो सप्ताह तक चली गहन जांच और 150 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने के बाद पुलिस ने आरोपी की पहचान स्वाती विक्रम भोसले के रूप में की। पुलिस के अनुसार, स्वाती हिंदू समुदाय से संबंधित है और उसने अपनी पहचान छिपाने के उद्देश्य से बुर्का पहन रखा था।
पुलिस ने आरोपी महिला को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
Meet Hindutva Sherni Riddhima Sharma
She used to work in Oman under a Muslim boss, in a Muslim country.
She got kicked from Oman.
She has now started an Islamophobia business, spreading hatred against Muslims and fooling Hindus.
रियाज़ुद्दीन साहब जिन्होंने अपनी मदद से 12 लोगों की जान बचाई थी आज उन्हें एडवोकेट वीरेंद्र कसाना ने पैसे देकर सम्मानित किया जिसे लेते वक़्त वो रो पड़े
हालांकि ये काम सरकार को करना चाहिए लेकिन खैर रियाजुद्दीन साहब इस इज़्ज़त के हक़दार हैं..!
ख़ान सर को ये समझना चाहिए कि वे एक ऐसे निज़ाम में रह रहे हैं जिसमें मुसलमानों की एक भूल भी माफ़ नहीं की जाएगी। इस निज़ाम में हिंदुओं को सौ भूल करने की छूट है। अगर ब्राम्हण हुए तो हज़ार भूल कर सकते हैं और अगर ताक़तवर कारोबारी हैं तो एक लाख भूल करने की छूट मिली हुई है। मगर यदि कोई विधर्मी, ख़ास तौर पर मुस्लिम एक ही भूल करेगा तो उसे ख़ान सर से फैसल ख़ान बना दिया जाएगा, उसके ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज़ कर दी जाएगी, उसे जेल भेजने की तैयारियाँ शुरू हो जाएंगी।
मीडिया उसे टुकड़े-टुकड़े गैंग के रूप में पेश करने लगेगा, उसे पाकिस्तानी, गद्दार कहा जाएगा, उसके घरों पर बुल्डोज़र पहुँच जाएंगे, उसको औकात में लाने की हर संभव साज़िश की जाएगी। ये भी समझ लेना चाहिए कि हिंदुत्व कोई भी मुस्लिम हीरो नहीं चाहता है। वह मुस्लिम समाज के सामाजिक-राजनीतिक-बौद्धिक नेतृत्व को पूरी तरह से साफ़ कर देना चाहता है ताकि वह संगठित न हो, अत्याचार और भेदभाव के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने की हिम्मत न करे।
अब ख़ान सर एक ही सूरत में बच सकते हैं। वे बीजेपी की राजनीति के टूल बन जाएं। कहा जा रहा है कि अतीत में ऐसा करते भी रहे हैं। इसमें कितनी सचाई है हमें नहीं पता। मगर हिंदु्त्व उन्हें उसी सूरत में बख्शेंगे अगर वे उनके पाले में चले जाएंगे। जो लोग ये कह रहे हैं कि ख़ान सर ने हदें लाँघ दीं, वे या तो नासमझ हैं या फिर ख़ुद इस्लाम-हेटर हैं। उन्हें हर दिन हिंदू ब्रिगेड के उग्रवादी बयान, कार्रवाईयाँ नहीं दिख रही हैं। वे उन्हें अनदेखा कर रहे हैं, बल्कि कई बार हौंसला भी बढ़ाते नज़र आ जाते हैं। वे ऐंकर, वे चैनल जो तरह-तरह के जिहाद गढ़ते रहे हैं, गढ़ रहे हैं, फल-फूल रहे हैं।
और जहाँ तक कोचिंग का मसला है तो ऐसे लोगों की आँखों में आज ही कोचिंग क्यों चुभने लगी...वे कोटा के कोचिंग उद्योग को बंद करवाने के लिए मुहिम क्यों नहीं छेड़ रहे थे। ख़ान सर ने ग़लती की है। उन्होंने मुस्लिम होते हुए भी ख़ुद को इस देश का बराबर का नागरिक समझने की ग़लती की है। उन्होंने ग़लती की है कि मुस्लिम होते हुए भी आवेश में आकर अनाप-शनाप बोल दिया। उन्हें हमले को चुपचाप सहना था। उन्हें पुलिस से मदद लेनी चाहिए थी। इतना आत्मविश्वासी नहीं बनना था कि हिंदू ब्रिगेड को ये लगने लगे कि साला कटुआ अपनी औकात भूल गया।
@mukeshbudharwi के कलम से।
नकुल गुर्जर ने कथित तौर पर अपनी बहन को ज़ीशान और शाहवेज़ के पास जबरन भेजा ताकि उन्हें यौन संबंधों के जाल में फँसाकर “लव जिहाद” के मामले में आरोपित किया जा सके और उनसे ₹10 लाख की उगाही की जा सके।
अब बताओ अंधभक्त क्या क्या कर रहे हैं
Location: Delhi
Peace will not be established until you launch a clean Muslim campaign in this country, ki!! them one by one, drag them out of their homes and ki!! them.
Sunil Singh Rajput openly calls for the genocide of Indian Muslims.
A Canadian guy wore an Arab thobe into a grocery store run by an older Indian Hindu woman. The moment she saw him, she went full Islamophobic and racist toward Arab Muslims and even threatened to call the cops.
These are the same people complain about racism against themselves.
"Jaisi public, waisi facilities."
This Aam Aadmi Mohalla Clinic in Chander Vihar, Delhi was shut down soon after BJP came to power.
Listen to this man.
Puneet from Meerut informed the police that someone had thrown meat outside his house. Upon reviewing CCTV footage, the police discovered that a boy was transporting waste meat from his home on a bicycle, which accidentally fell along the way. Puneet picked up the meat, placed it outside his own house, and then notified the police. Puneet has now been arrested.