द फेस ऑफ लॉस्ट ओपेर्चुनिटी!!
पवन खेड़ा को राहत मिल गयी है। उन्हें सुप्रीम कोर्ट ने अग्रिम जमानत दे दी है। कोर्ट ने माना कि आरोप राजनीतिक हैं, और गिरफ्तार करके पूछताछ की जरूरत नही है।
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इस केस को कीनली देखता रहा। खेड़ा का हमला सटीक औऱ सामयिक था। एन चुनाव की बेला में, एक सधा हुआ हमला था। सही या गलत, इसके ऑनसरेबल खेड़ा नही थे।
जवाब तो विश्वसरमा को देना था। वे धमकियां देने लगे। खुलेआम गाली बकने लगे। ऐसा मंजर, ऐसी भाषा भारतीय राजनीति के इतिहास में देखी नही गई थी।
लेकिन वे जीत गए। इसलिए कि खेड़ा, भागते और कोर्ट से राहत मांगते दिखे। वीक दिखे, और इसलिए बाजी हार गए। और यह हार उनकी अकेली नही, एक पार्टी के रूप में कांग्रेस और उनके लीडर, उनके समर्थकों की भी हार है।
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मंजर की कल्पना करिए..
कि धमकी के बाद खेड़ा सीना ठोककर गोहाटी जाते है। एयरपोर्ट पर गिरफ्तार होते हैं। बेड़ियों के, घसीटकर ले जाते हुए पवन खेड़ा।
उनके पीछे दिल्ली में राहुल गांधी, जयराम रमेश, खड़गे और दर्जन भर बड़े नेता वही आरोप दोहराते हैं। खुद को भी खेड़ा ही तरह, गिरफ्तारी की चुनौती देते हैं। सारे गोहाटी जाते हैं। आरोपो को दोहराते है।
अगर उन्हें भी गिरफ्तार किया जाता है, तो देश के कोने कोने इसे 100 सांसद, हजार विधायक यही दोहराते है। गोहाटी पहुँचते हैं।
पूरी कांग्रेस का हू इज हू,
विश्वसरमा की जेल में है।
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लेकिन नही। क्योकि पुलिस, असम की उस वक्त चुनाव आयोग के प्रभार में है। इन गिरफ्तारी का जवाब चुनाव आयोग को देना है। मोदी सरकार को देना है।
पूरी दुनिया मे देना है। पूरे एक माह, चुनावी मौसम में, यही खबर होती। मामला, गले की हड्डी हो जाता। यहां अपराध कुछ भी नही है, तो किसी को फांसी नही होती। लीगल टीम ऐसे 100-50 मामले क्लब करके, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जाती।
महीने 15 दिन में सभी बाहर..जैसे अभी अकेले खेड़ा हैं।
लेकिन तब कांग्रेस विजयी भाव में होती।
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भाजपा फट्टूओ का दल है। मुझे याद है, जब चोर को चोर कहने पर राहुल को 2 वर्ष सजा मिली। और अपील में उन्होंने हफ्ता भर लगाया। एक बार को लगा कि वे शायद अपील न करे।
सरकार की सांस अटक गई। खुद अमित शाह ने राहुल को मीडिया के माध्यम से सलाह दी कि उन्हें हायर कोर्ट में अपील करनी चाहिए। जब राहुल ने अपील की, तब भाजपा की लीडरशिप, कांग्रेस से ज्यादा राहत में आई होगी।
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इस बार खेड़ा के पास सितारा बनने का अवसर था।
उनके आरोप का खंडन किसी विदेशी एम्बेसी ने नही किया। संदिग्ध पासपोर्ट पर, विदेश मंत्रालय ने कोई क्लीन चिट नही दी। खुद भाजपा में कोई नेता हिमंता के साथ खड़ा न दिखा। वे बदहवास थे, उन्हें बेहतरीन ढंग से कार्नर किया जा चुका था।
लेकिन कांग्रेस, बड़ी फट्टू साबित हुई।
राजनीतिक लड़ाई जनता के परसेप्शन में लड़ी जाती है। जेल, दमन, गाली, अत्याचार उस परसेप्शन में कांग्रेस के प्रति सहानुभूति और श्रद्धा पैदा करते।
गिरफ़्तारी से डरकर अवसर खो दिया गया।
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खोए गए इस एक लाखवें अवसर का चेहरा, पवन खेड़ा है।
हर वह कांग्रेसी भी जिसने इस समय खेड़ा को अकेला छोड़ा। उनके आरोप नही दोहराए। जेल से कन्नी काटी, और खेड़ा के लगाए आरोपों की सत्यता असत्यता पर बहस करते रहे।।
वे सारे के सारे लॉस्ट ओपेर्चुनिटी हैं। फेल्ड लीडर्स हैं, डरपोक और कच्चे हैं। दे डोंट डिजर्व पॉवर। दे ऑल,
आर फेस ऑफ लॉस्ट ओपेर्चुनिटी..
मी स्वतः ब्राह्मण कुटुंबातील असून माझ्या कुटुंबात ५ पिढ्यांपासून लोक शिकलेले आहेत आणि नोकरी करत आहेत. याउलट, माझे काही मित्र असे आहेत जे त्यांच्या कुटुंबातील First Generation Learners आहेत. त्यांचे आई-वडील आजही शेतात मजुरी करतात. आरक्षण का असावे याचे उत्तर व्हिडिओ मध्ये आहे.
45 सेकंदाच्या या प्रोमोमध्ये फक्त 29 शब्द आहेत आणि प्रत्येक शब्द अंगावर काटा आणणारा आहे.
'जय भवानी जय शिवाजी' नंतर 'राजा शिवाजी' या सिनेमातील छत्रपती हे गीत अनेक रेकॉर्ड तोडून इतिहास रचणार आहे.
तिकीट मिळालं तर First Day, First Show बघणार 🩷🫶✨🔥
(जमल्यास तुमच्या किमान एका अमराठी मित्राला मराठ्यांचा दैदिप्यमान इतिहास दाखवण्यासाठी आवर्जून सोबत घेऊन जा..)
वैवाहिक महाभारत… १० वर्षांच्या लढाईला सुप्रीम कोर्टाचा पूर्णविराम....पत्नीला 5 कोटी पोटगी मंजूर, वकील पतीला दणका. ..
सुप्रीम कोर्टाचा art 142 नुसार विशेष अधिकार वापरून थेट निर्णय…
१० वर्षे वेगळे राहणारे पती-पत्नी… परस्परांवरच नव्हे, तर नातेवाईक आणि अगदी वकिलांवरही तब्बल ८० हून अधिक खटले… न्यायालयीन लढाईचं हे रूप इतकं विकोपाला गेलं की, सुप्रीम कोर्टाने ने या प्रकरणाला थेट “matrimonial battle of Mahabharata” असं संबोधलं...
या प्रकरणात एक धक्कादायक बाब पुढे आली...पती स्वतः वकील असूनही, त्याने आपल्या कायदेशीर ज्ञानाचा वापर न्याय मिळवण्यासाठी नव्हे, तर खटले वाढवण्यासाठी आणि छळ करण्यासाठी केला...
पत्नीविरुद्ध सातत्याने कारवाया, नातेवाईकांना अडकवणे, आणि सर्वात गंभीर म्हणजे पत्नीच्या वकिलांवरच ९ स्वतंत्र प्रकरणे दाखल करून त्यांना दबावाखाली आणण्याचा प्रयत्न...
न्यायालयाने स्पष्ट शब्दांत नमूद केलं की, ही केवळ वैवाहिक वादाची बाब राहिलेली नाही, तर न्यायप्रक्रियेचा दुरुपयोग (abuse of process of law) आहे...
यामुळेच, न्यायालयाने पारंपरिक प्रक्रियेत न अडकता Article 142 of the Constitution of India अंतर्गत विशेष अधिकार वापरून थेट हस्तक्षेप केला..“complete justice” साध्य केला. .
न्यायालयाचा ठोस निर्णय:
१० वर्षे पूर्णपणे तुटलेल्या वैवाहिक नात्याला अखेर विराम थेट घटस्फोट मंजूर..
पती-पत्नी, नातेवाईक व वकिलांदरम्यान प्रलंबित सर्व ८०+ खटले रद्द..
पत्नीला ₹5 कोटींची एकरकमी पोटगी मंजूर..
हा ₹5 कोटींचा निर्णय केवळ आर्थिक मदत नाही, तर दीर्घकाळ चाललेल्या मानसिक छळ, न्यायालयीन त्रास आणि भविष्याची सुरक्षितता यांचा एकत्रित विचार आहे, हेही न्यायालयाने अधोरेखित केलं...
या निर्णयातून स्पष्ट संदेश:
वकील असो वा सामान्य नागरिक कायद्याचा गैरवापर सहन केला जाणार नाही..
न्यायालयीन प्रक्रियेचा वापर “हत्यार” म्हणून केल्यास, सर्वोच्च न्यायालय कठोर पावले उचलेल..
जेव्हा वैवाहिक नातं पूर्णपणे कोलमडतं, तेव्हा न्यायालय “irretrievable breakdown” मान्य करून अंतिम तोडगा काढू शकतं..
हा निर्णय केवळ एका दाम्पत्याचा शेवट नाही, तर न्यायव्यवस्थेच्या सन्मानाचं रक्षण करणारा आणि कायद्याच्या गैरवापराला लगाम घालणारा ठोस इशारा आहेच. ..पण कमीत कमी ज्या हिंदू धर्मात विवाह संस्कार मानला जातो, तिथं वैवाहिक महाभारत घडाव. ..हे विचार करण्याजोगे आहे. ..असो निर्णयाचे स्वागत. .🙏
citation - Neha Sandeep Todi v. Sandeep Khemraj Todi, 2026 INSC 334 (SC)
#SupremeCourtofIndia #matrimonialmahabharat
Madurai District Court pronounced a sentence in the Sathankulam custodial death case. The case falls under the rarest of rare categories. All nine policemen get the death penalty.
#IranWar
Apart from gigantic miscalculation of Iran's Missile Strength by USA and Israel which is leading to both getting hammered, there are serious consequences which nobody thought of
-Killing Supreme Leader of Iran has actually united Iranians like never before
-Iran has choked Strait of Hormuz which carries 20% of World Oil
-Chinese Yuan is gaining prominence. Iran collects Hormuz Toll in Chinese Currency
- The Gulf Countries are a collateral damage
-World now knows that American Weapon Systems aren't that good, nor are Russian and Israeli Iron Dome cracks
Ola Electric held 35% of India’s electric scooter market when it IPO’d in August 2024. In February 2026, that number is 3.5%. A 10x collapse in 18 months.
The stock listed at ₹76 per share. It trades around ₹24 today. The company that once commanded a $5.4 billion valuation is now worth roughly $1.2 billion.
The core problem is service. Ola Electric gets around 80,000 customer complaints every month. The National Consumer Helpline logged over 10,000 complaints in a single year, which triggered a formal government probe. Ola told regulators it had resolved 99.1% of complaints. When the consumer protection authority actually called 130 of those customers to check, 79.2% said they were still dissatisfied.
Sales reflect this. Ola sold 53,647 scooters in its best month (March 2024). By February 2026, that number was 3,968. A 93% drop. The company slipped from #1 to #6, outsold for the first time by Greaves Electric’s Ampere brand. TVS and Bajaj, two legacy players who entered EVs years after Ola, now control a combined 51% of the market. Rajiv Bajaj recently called Ola “a non-entity.”
Three weeks ago, a Goa consumer court issued a bailable arrest warrant against Bhavish Aggarwal personally because a customer’s scooter was taken in for repair and the company couldn’t explain where it went. The bail was set at ₹1,47,499, exactly the scooter’s purchase price. Bombay HC later stayed the warrant, but Goa had already suspended all new Ola registrations back in November 2025 due to the complaint backlog. Quarterly revenue fell 57% year-on-year.
Today, Bhavish is running a cricket match promo offering ₹10,000 off blue scooters. The top reply under this tweet is from a customer whose Ola has been dead at a service center for 74 days with no diagnosis.
अखंड हरिनाम सप्ताहाची जागा शिव कथा पुराण ने घेतोय. ज्ञानोबा-तुकोबांची जागा बागेश्वर बाबा सारखे ढोंगी घेताय. खंडोबा जोतिबा च्या ऐवजी लोकांना खाटू श्याम, सावरिया सेठ वगैरे जास्त श्रध्येय झाले.
महाराष्ट्रावर ठरवून होत असलेल सांस्कृतिक आक्रमण आहे . गाय पट्ट्यात समावेश करायचं काम आहे