NEET। CBSE। SSC। और आज CUET।
चार परीक्षाएँ। एक करोड़ बच्चे। एक भी ईमानदारी से नहीं हो पाई।
दावे "विश्वगुरु" के, मगर देश में एक परीक्षा नहीं करवा सकते - मोदी जी ने पूरी शिक्षा व्यवस्था तबाह कर दी है।
जिस पीढ़ी का भविष्य आप बर्बाद कर रहे हैं - वही पीढ़ी आपका हिसाब करेगी।
NEET 2026 के पेपर लीक की खबर सुनी।
परीक्षा नहीं - NEET अब नीलामी है।
कई सवाल परीक्षा से 42 घंटे पहले WhatsApp पर बिक रहे थे।
22 लाख से ज़्यादा बच्चे साल भर रात-रात भर आँखें जलाकर पढ़ते रहे और एक रात में उनका भविष्य बाज़ार में सरेआम नीलाम हो गया। यह पहली बार नहीं है। 10 साल में 89 पेपर लीक - 48 बार दोबारा परीक्षा। हर बार वही वादे, और फिर वही ख़ामोशी।
मोदी जी, जब आप अपनी हर नाकामी का बिल जनता पर डालते हैं, तो ग़रीब के बच्चों का भविष्य भी उसी बिल में आता है।
22 लाख बच्चों का भरोसा टूटा है। और मोदी सरकार से बड़ा ख़तरा भारत के युवाओं के सपनों के लिए कोई नहीं।
मैं भारत के युवा के साथ हूँ। यह वक़्त बेहद मुश्किल है - मैं जानता हूँ। लेकिन यह व्यवस्था ऐसे नहीं रहेगी। हम मिलकर इसे बदलेंगे।
DMK की हार और TVK की जीत में सबसे बड़ा योगदान दलित समाज का है.
तमिलनाडु में दलित समाज एमके स्टालिन की सरकार से काफी नाराज था.
DMK ने दलितों की उपेक्षा की. DMK पर आरोप है उसके शासन में दलितों के खिलाफ अपराध में बढ़ोतरी हुई.
2023 की रिपोर्ट में Scheduled Caste Sub Plan फंड कम खर्च करने का आरोप लगा. दलितों के लिए तय फंड को दूसरी परियोजना पर खर्च किया गया.
तमिलनाडु में दलित समाज की आबादी 20% से ज्यादा है. द्रविड़ राजनीति के शोर में दलितों की आवाज को दब जाती है. दलित समाज की गोलबंदी ने सुपरस्टार विजय को मौका दिया है. लेकिन शाम को न्यूज़ चैनलों पर TVK की जीत का श्रेय ब्राह्मणों को दिया जाएगा.
नाम : प्रतिमा
जाति : जाटव
वर्ग : अनुसूचित जाति
जिला : पन्ना
राज्य : मध्यप्रदेश
उपलब्धि : मध्यप्रदेश माध्यमिक बोर्ड की 10 वीं की परीक्षा में 499/500 अंक प्राप्त करके पूरे मध्यप्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त करना।
मैं बिटिया के उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामनाएँ करता हूँ।
On #AmbedkarJayanti, visiting French senators honoured Dr B.R. Ambedkar, Father of the Indian Constitution, at Dr Ambedkar International Centre.
They also called on Dr. Virendra Kumar, Minister for Social Justice & Empowerment.
On Ambedkar Jayanti, Amb/PR paid floral tributes to Dr. Babasaheb #Ambedkar at @UNESCO on the sidelines of the 224th Executive Board. The bust unveiled last year on Samvidhan Diwas stands as a lasting tribute to his legacy.
Dr. Ambedkar’s journey reminds us that education is the most powerful path to empowerment, inspiring generations of youth to rise and transform their futures.
#AmbedkarJayanti
@VishalVSharma7
मैं देश की महामहिम राष्ट्रपति जी से मांग करता हूं कि IAS रिंकू सिंह राही जी का टेक्निकल इस्तीफा स्वीकार न किया जाए।
इसके साथ ही यूपी सरकार को ये निर्देश दिया जाए कि IAS रिंकू जी को काम दिया जाए।
वहीं, मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से मांग करता हूं कि जिन बच्चों ने The Scheduled Castes and the Scheduled Tribes (Prevention of Atrocities) Act, 1989 को कमजोर करने के खिलाफ आंदोलन किया था, उनके विरुद्ध केस वापस कर लिए जाएं।
वे बच्चे कोई अपराधी नहीं हैं, उन लोगों ने संवैधानिक तरीके से आंदोलन किया था, लेकिन वे आज भी कोर्ट कचहरी के चक्कर काट रहे हैं।
: कांग्रेस SC विभाग के चेयरमैन @AdvRajendraPal जी
नाम : आईएएस रिंकू सिंह राही
जन्म : 1982
वर्ग : अनुसूचित जाति
जिला : अलीगढ़, यूपी
बी0टेक0 : NIT, जमशेदपुर 2002
GATE : AIR 17-2002
2004 : UPPCS में चयनित
2008 : जिला समाज कल्याण अधिकारी, मुजफ्फरनगर
2008 : समाज कल्याण विभाग मुजफ्फरनगर के भ्रष्टाचार को उजागर करना
2009 : सपा नेता मुकेश चौधरी और उसके गुर्गों ने रिंकू सिंह राही की हत्या करने के लिए उनके ऊपर गोलियाँ चला दीं,जिसमें उनका जबड़ा व एक ऑंख हमेशा के लिए खराब हो गए।
2021 : UPSC CSE की परीक्षा पास की,लेकिन आईएएस नहीं मिला
2022 : UPSC CSE की परीक्षा पास कर आईएएस बने।
2026 : आईएएस रिंकू सिंह राही ने अपने पद से इस्तीफा दिया,क्योंकि यूपी सरकार ने उन्हें कोई कार्यभार नहीं दिया और उन्हें साइडलाइन कर रखा था।
कुशल अधिकारियों की भाजपा सरकार में कोई अहमियत नहीं है। भाजपा में तो उनकी पूछ है जिनकी चोरी के पैसों की ही चोरी हो जाती है या जो निवेश तक में 5% का प्रवेश शुल्क वसूल लेते हैं।
हर अच्छे अधिकारी से हमारी माँग है कि भावावेश में आकर कोई फ़ैसला न करें, बुरे दिन जानेवाले हैं। पीडीए सरकार आएगी और सबको उचित मान-सम्मान-स्थान देगी क्योंकि पीडीए की सरकार जनता की सरकार होगी, जो समस्याओं के समाधान व असमानताओं को दूर करने के लिए सच में विकास के काम करेगी। क्वॉलिटी वर्क और तय समय सीमा के अंदर काम को पूरा करने के लिए हमेशा ही बेहतरीन ऑफ़िसर्स की ज़रूरत पड़ती है। अपने काम में पारंगत अधिकारियों की हमने हमेशा क़द्र की है और आगे भी करेंगे।
पीड़ित अधिकारी हो या कर्मचारी सभी भाजपा को हटाने के लिए पीडीए के साथ हैं। ’पीड़ा’ बढ़ रही है, इसीलिए ‘पीडीए’ बढ़ रहा है क्योंकि ‘जो पीड़ित, वो पीडीए’।
#बुरे_दिन_जानेवाले_हैं
IAS रिंकू सिंह का घर देखिए!
उनके पिता जी का दर्द देखिए!
रिंकू सिंह की हिम्मत, संघर्ष और ईमानदारी देखिए!
सरकार और सिस्टम की बेईमानी और नीचता देखिए!👎
#IAS
इस देश में होशियार वही है जो घोटालेबाजों के साथ मिलकर नौकरी पूरी कर ले जाए।🫡
नाम - रिंकू सिंह राही
•2004 में PCS परीक्षा पास की
•2008 में 83करोड़ के घोटाले का पर्दाफाश।
2009 में इनाम में 7 गोलियां मारी गईं।
• 2022 में IAS बने
•2025 में शाहजहांपुर में वकीलों ने उठक बैठक लगवाई।
•ऊपर से योगी जी ने लाइन हाजिर कर दिया।
•फ़ील्ड पोस्टिंग न मिलने के कारण थक हारकर आज इस्तीफा दे दिया।
और इस तरह एक होनहार अफसर जो देश और सिस्टम सुधारना चाहता था उसको सरकार ने सुधार दिया।🫡
आईएएस रिंकू सिंह राही का इस्तीफ़ा यूपी की भाजपा सरकार और उसके प्रशासन के मुँह पर करारा तमाचा है।
देश को आईएएस रिंकू सिंह राही जैसा ईमानदार आईएएस अफसर दुबारा नहीं मिलेगा।
Last year, Some Judges from Supreme Court said ,once Dalits become IAS IPS officers, they become so elite that their next generation shouldn't need any reservation, now this is happening with Dalit IAS Rinku Rahi!! Earlier a Dalit IPS of Haryana institutionally died due to horrific caste discriminations. All of this is happening in BJP ruled states.
Rinku Singh Rahi, an IAS officer from the 2023 batch belonging to the Dalit community, has resigned from his position.
He alleged that he was being systematically harassed, denied field posting and subjected to discrimination within the system.
उत्तर प्रदेश में जहां एक ओर आईएएस अधिकारी दलित समाज के मंत्रियों के साथ प्रोटोकॉल का पालन नहीं कर रहे और उन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही, वहीं दूसरी ओर एक दलित आईएएस अधिकारी उपेक्षा के चलते इस्तीफा देने को मजबूर हैं। यह स्थिति बेहद चिंताजनक और सवालों से भरी है।
रिंकू सिंह राही, जो दलित समाज से आते हैं, उनका इस्तीफा किसी एक अधिकारी का व्यक्तिगत निर्णय नहीं, बल्कि पूरी प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह है; एक ऐसा अधिकारी जिसने 2009 में भ्रष्टाचार उजागर किया, जानलेवा हमले में 7 गोलियां खाईं, फिर भी सिस्टम के भीतर रहकर जनसेवा करना चाहता रहा। आज वही यह कहने को मजबूर है कि उसे काम ही नहीं दिया जा रहा और इसी उपेक्षा के कारण उसे इस्तीफा देना पड़ा।
अभी तीन दिन पहले ही कन्नौज में राज्य मंत्री असीम अरुण जी को मुख्य अतिथि बनाकर बुलाया गया, लेकिन 45 मिनट तक इंतजार कराया गया और अंत में बिना कार्यक्रम के लौटना पड़ा।
वहीं, पिछले साल भूतपूर्व राज्यपाल और वर्तमान कैबिनेट मंत्री बेबी रानी मौर्य जी द्वारा अपने गृह जनपद आगरा में बुलाई गई किसानों की बैठक में अधिकारी पहुंचे ही नहीं, जिससे उन्हें बैठक स्थगित करनी पड़ी।
यह विरोधाभास केवल संयोग नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था के भीतर मौजूद गंभीर असंतुलन और सवालों की ओर इशारा करता है।