क्रोनोलॉजी समझिये
🔼 सत्ता ने पहले संस्थाएं क़ब्ज़े में लीं.
🔼 सत्ता ने फिर से अपनी पसंद के वोटर चुने.
🔼 अब आर्गेनिक दिखती हुई घटनाओं के ज़रिये अपनी पसंद का विपक्ष खड़ा करने की कोशिश है.
🔼 इनको प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मिलता कवरेज देखिये और समझिए कि सत्ता का उद्देश्य इन्हें मीडिया में स्थापित करना ही था.
वो तो Gen Z ने ख़ुद अपनी कमान अपने हाथ सम्हाल ली, तो फ़ास्ट फ़ॉर्वर्ड में शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा ले लिया गया, वरना ये आंदोलन वांगचुक और CJP से बड़ा हो चुका था.
जनता द्वारा बीजेपी मंत्रियों को खदेड़ना शुरू।
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के विधानसभा क्षेत्र बांकीपुर में चुनाव प्रचार के दौरान मतदाताओं द्वारा गली बनाने का वादा याद दिलाने पर बीजेपी नेता और मंत्री गाली-गलौज कर रहे है। 35 साल से यहाँ बीजेपी विधायक, सांसद और मंत्री है लेकिन गली और नाली जैसी मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है।
अभी अभी इंस्टाग्राम पर इन माता जी से मुलाकात हुई, ये माता जी तो #GenZ से भी ज्यादा ख़तरनाक है मोदी जी- संस्कारी कम आंदोलनकारी 🪧 भयानक है,मेलोडी ❤️को लेकर ज़हर ☠️ भरा पड़ा है इसमें.
RAF ने पैलेट गन से सात राउंड फायर किए थे . पाँच प्रदर्शनकारियों को चोटें आई . एक की तो आँख लगभग चली गई है .
किसके कहने पर चले थे पैलेट गन ?
ये सवाल संसद में पूछा जाएगा.
थोड़ा अचरज मुझे भी हो रहा है: जीत के साथ 'जंतर-मंतर आंदोलन' खत्म होते ही CJP नेताओं का टीवीपुरम से इतना प्रेम क्यों उमड़ पड़ा है! शायद पार्टी के प्रवक्ता@SauravDassss इसे बेहतर ढंग से बता सकते हैं. सबसे ज्यादा 'टीवी चर्चा' में वही दिख भी रहे हैं!
"आखिरकार कांग्रेस की शरण में आना पड़ा, नंदन नीलेकणी आज भी कांग्रेस के सदस्य हैं" : पेपर लीक पर नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में हाई-पावर्ड टास्क फोर्स बनाने के एलान पर कटाक्ष करते हुए बोले कांग्रेस प्रवक्ता @AbhayDubeyINC
संदीप चौधरी के साथ देखिए 'सीधा सवाल' | https://t.co/bDshh3WfQN
#SeedhaSawaal #SandeepChaudhary #PaperLeak #StudentsProtest #ABPNews
कांग्रेस की 'जंतर-मंतर' रणनीति!
PART-01
छात्रों के आंदोलन में कांग्रेस की रणनीति सटीक और सधी हुई दिखी। कांग्रेस ने अपने हर कदम को बेहद सोच समझकर आगे बढ़ाया। सूत्र बताते हैं कि इस मामले में हर कदम राहुल गांधी को बताकर और उन्हें भरोसे में लेकर बढ़ाया गया। प्रियंका गांधी भी पर्दे के पीछे से काफी एक्टिव रहीं। हर रणनीतियों में प्रियंका की अहम भूमिका रही।
-सबसे पहले 16 जुलाई को केसी वेणुगोपाल ने सोनम वांगचुक से अनशन खत्म करने की अपील की।
-फिर 17 जुलाई को पवन खेड़ा को जंतर-मंतर भेजा गया। उन्होंने सोनम वांगचुक से मुलाकात की।
-इसके बाद जब 18 जुलाई को सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से उठाया गया तो राहुल गांधी की एंट्री हुई।
सूत्र बता रहे हैं कि कांग्रेस को पहले ही पता चल चुका था कि सोनम वांगचुक अनशन खत्म करने वाले हैं। ऐसे में कांग्रेस ने वक्त रहते अपना दांव चल दिया। कांग्रेस ने जनता में ये संदेश जाने से रोक दिया कि वो सोनम वांगचुक के अनशन को लेकर गंभीर नहीं है। इसलिए सोनम वांगचुक के प्रति पूरी सहानुभूति दिखाई गई।
कांग्रेस ने पांचवां गियर कब लगाया?
PART 02...कुछ देर में...
जिनकी सारी जिंदगी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और प्रधानमंत्री नेहरू जी को गंदी गंदी गालियां देने में बीत गई, वे नाराज़ हैं कि हमारे भगवान मोदी को कैसे कोई गाली दे रहा है.
अरे तुम्हारे ही पाप हैं जो सूद सहित लौटाये जा रहे हैँ.
जितनी आसानी से जंतर-मंतर को पूरा का पूरा खाली करके दीपके दास रांका तुरंत निकल लिए, साफ़ दिखता है ऊपर से आदेश था.
कोई भी ईमानदार होता, डटकर बैठ जाता वहां.
इतने सारे बड़े मुद्दे हैं लेकिन इन एजेंटों को immediately end का आदेश दे दिया था बाप ने.
सावधान ⚠️
सही कहा @ajitanjum। इसलिए मुझे @SauravDassss का इसके जैसे और एंकर्स के शो में जाना बहुत अनुचित लगा।why are they according them the credibility of their companionship?
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का क्रेडिट कोई भी ले ले, अपने को क्या ?
लेकिन एक बात तय है, आख़िरी में विनिंग शॉट राहुल गांधी ने लगाया है, अगर राहुल गांधी को 10 लोगो में मिलकर उठाया नहीं होता, एक पैर में बिना जूते वाला मामला नहीं होता, स्टूडेंट्स पर हुई बर्बरता पर PC नहीं होती, भूख हड़ताल करने वाली नेहा के साथ PC नहीं होती तो सरकार घुटनों पर नहीं होती …!
आखिर में राहुल गांधी ने शानदार पारी खेली।
एक छात्र ने रोते हुए कहा —
“धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा काफ़ी नहीं है। हम चाहते हैं कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह भी इस्तीफ़ा दें।
पुलिस ने हमें कितनी बेरहमी से पीटा, यह सिर्फ़ हम ही जानते हैं।”