अगर सचमुच पेपर लीक से "फ़ायदा" होता है, तो फिर सरकार हर परीक्षा से पहले ही पेपर लीक करवा दे। सबको "और अच्छी तैयारी" का मौका मिलेगा!
वाह मंत्री जी! बेरोज़गारी को "अनुभव", महंगाई को "अवसर" और अब पेपर लीक को "तैयारी का बोनस" बता दिया गया।
धन्य है वह सत्ता, जो युवाओं के ज़ख्मों पर मरहम रखने के बजाय उन पर कुतर्कों की परत चढ़ाती है। शायद अगला भाषण यही होगा - "समस्या नहीं, नज़रिया बदलिए।"
Abhinay Sir –– "JP Nadda himself is health minister. He is not able to handle his own department. From where did he get audacity to comment on education?"
Dharmendra Pradhan istipha do 😳
पेपर लीक के सवाल पर यह हंसी कितनी क्रूर, कितनी अश्लील और कितनी अमानवीय है!
जैसे कोई 22 बच्चों की लाश पर खड़ा होकर अट्ठहास कर रहा हो!
एक मैडम ने कल पेपर लीक का फायदा गिनाया। एक ने बच्चों को भेड़िया बताया। अब इनकी हंसी देखो।
ये सब मंत्री नहीं, देश का दुर्भाग्य बन चुके हैं।
सोनम वांगचुक को अस्पताल में ही नज़रबंद कर दिया गया।
कल तक सरकार जूस पिलाकर अपनी हमदर्दी दिखा रही थी, आज उनका असली चेहरा सामने आ गया। जिस सरकार पर अब पूरे देश का भरोसा उठ चुका है, उसके भरोसे सोनम वांगचुक को भी नहीं रहना चाहिए।
The discussion that we had with Rahul Gandhi Sir today on the education system is the most fruitful.
देश में शिक्षा व्यवस्था को takeover पर चर्चा न करके युवाओं की आकांक्षाओं को ख़त्म किया जा रहा है, लेकिन आज जो बातचीत हुई, वह शानदार रही
छात्रों की जो तीन मांग राहुल गांधी जी ने रखी हैं, वो जायज हैं और उनसे कोई समझौता नहीं हो सकता
@neha_aisa जी
“रुपया कमजोर नहीं हुआ है,डॉलर मजूबत हुआ है”
की अपार सफ़लता के बाद प्रस्तुत है निर्मला ताई का एक और नुस्खा
“पेपर लीक से नुकसान नहीं हुआ,दोबारा अच्छी तैयारी करने का मौका मिला है"
ऐसी संवेदनशून्य मूर्खतापूर्ण बातें आत्मविश्वास के साथ करने की training लगता है सीधा मोदी जी से ली है
देश के बच्चे Jantar Mantar के फुटपाथ पर सो रहे हैं, और TV Media PM Modi की Reel पर जश्न मना रहा है
अगर आपके सीने में इंसान का दिल है तो पिघल जाएगा,पत्थर हो चुके हैं तो मत देखिए
मेट्रो बंद करो।
रास्ते बंद करो।
दुकानें बंद करो।
Internet बंद करो।
खाना बंद करो।
अपना हक़ मांग रहे छात्रों के ख़िलाफ़ सरकार ने ये क्रूर कदम उठाए।
बस एक चीज़ बंद नहीं कर पाए, मोदी जी - पेपर लीक।
जंतर मंतर पर धरना दे रहे छात्रों के लिए लोगों ने बिसलेरी के पानी के कई बंडल भेजे थे
तभी एक RAF का जवान उनमें से एक बंडल उठाकर अपने कैंप की तरफ चल पड़ता है
यह देखकर एक छात्र ने उसे आवाज़ दी और कहा सर, हमारा ही पानी ले जाकर पी रहे हो
फिर हमें ही पीटते हो, शर्म नही...Read news
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि "पेपर लीक होने से बच्चों को पढ़ने का और ज़्यादा वक़्त मिल गया." इस पर पत्रकार कृष्णकांत ने कहा है कि "किसी निर्लज्ज मंत्री को 22 बच्चों की मौत के भी फायदे बताने चाहिए - "मृत्यु के बाद पुनर्जन्म मिलेगा" मूर्खता की यही खूबी है कि इसकी कोई लिमिट नहीं होती."
#NirmalaSitharaman
#PaperLeak
#ExamReforms
"रुपया कमजोर नहीं हुआ है, डॉलर मजूबत हुआ" के बाद अब पेश है "पेपर लीक से नुकसान नहीं हुआ है पेपर लीक से दोबारा और अच्छी तैयारी करने का मौका मिला है"
धन्य है जम्बूद्वीप की ये पावन धरा जहां ऐसी तेजस्वी प्रतिभाओं ने जन्म लिया 🙏
मोदी जी, अपने "फ्रैंड" को एक मंत्रालय से हटाकर दूसरे में बैठाकर बचाने की आपकी साज़िश देश के छात्रों और भारत की जनता को मंज़ूर नहीं।
धर्मेंद्र प्रधान भ्रष्टाचार और देश की education system की बर्बादी के चिन्ह और अनेक छात्रों की मौतों के ज़िम्मेदार हैं।
उन्हें अब किसी और की ज़िंदगी उजाड़ने नहीं देंगे। धर्मेंद्र प्रधान को कैबिनेट से जाना ही पड़ेगा - ये non-negotiable demand है।
हैलमेट में अपना चेहरा छिपाए दिल्ली पुलिस का ये जवान एक लड़की के माथे पर वार कर रहा है . पुलिस वालों ने सारी सीमाएं तोड़ दी .
पुलिस की ये लाठियां सरकार को भारी पड़ेगी .
@CPDelhi@DCPNewDelhi@DelhiPolice वर्दी वाले इन अपराधियों के खिलाफ कब कार्रवाई होगी ?
अभिजीत दीपके :–
जंतर मंतर को बेरिकेड लगाकर बड़ी जेल बना दिया
जैमर लगा दिए
17 मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए
CP की दुकानें बंद कर दी
"एक धर्मेंद्र प्रधान को बचाने के लिए पूरी दिल्ली का जीना हराम कर दिया"
मोदी जी के मंत्रिमंडल में एक से एक हीरे हैं ।
वित्त मंत्री कह रही पेपर लीक से बच्चों को फायदा हुआ क्योंकि और ज़्यादा समय मिला ।
मैडम, अब समझ आया कि 152 पेपर लीक क्यों हुए । आप तो बच्चों को समय दे रहे थे ।
मतलब साफ़ है - आगे भी यही होगा ।
साहिल हाथ में तिरंगा लेकर बस साफ़-सुथरी परीक्षा और मेहनत का फल मांग रहा था - पुलिस ने बंदूक उठाई और छर्रे दाग कर बुरी तरह घायल कर दिया।
ये अंग्रेज़ों का ज़ुल्म नहीं, आज़ाद भारत की मोदी सरकार की बर्बरता है - जहाँ अपना हक़ मांगते मासूम छात्रों को न्याय नहीं, छर्रे मिलते हैं।