*उसूलों पे आंच आए तो टकराना ज़रूरी है*
*जिंदा हो अगर तो जिंदा नजर आना जरूरी है*
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सम्मानित शिक्षक साथियों,आज हमारे सम्मान और जीविका पर डाका डाला जा रहा है।जब हमारे 2011 के पूर्व नियुक्त शिक्षक भर्ती हुए थे तो उन्होंने भर्ती प्रक्रिया की योग्यता में मेरिट प्राप्त कर शिक्षक पद की गरिमा पाई थी।जब 2011 में नयी भर्तियों में टेट लागू किया गया तो पूर्व के साथियों को अलग इसीलिए रखा गया। किन्तु अब कुछ सरकार को यह अयोग्य प्रतीत होने लगे।कारण सिर्फ एक है बेसिक शिक्षकों को समाज में नकारा साबित कर उनकी नौकरी छीन ली जाए।
साथियों यह एक होकर हुंकार भरने का समय है,खुद के अपमान का प्रतिकार का वक्त है।यह साबित करने का सही समय है कि हमें जानबूझकर अयोग्य साबित किया जा रहा है।हम सब यह करेंगे और
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*आज X हैंडल पर दोपहर 2 से 4बजे तक*
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*#JusticeForTeachers*
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के हैशटैग को देश और दुनिया को सुनने और पढ़ने को मजबूर कर देंगे।हम बता देंगे कि शिक्षकों के साथ इस अन्याय को हम सहन नहीं करेंगे।
*शिक्षक एकता जिंदाबाद*
*TEACHER FEDERATION OF INDIA*
@PMOIndia@DrDCSHARMAUPPSS
#JusticeForTeachers
TET अनिवार्यता के प्रश्न पर शिक्षक असमंजस में हैं। RTE से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के अनुभव और सेवा का सम्मान होना चाहिए। नियम परिवर्तन का प्रभाव पूर्व नियुक्तियों पर न्यायसंगत पुनर्विचार योग्य है। हम संवाद और संतुलित समाधान चाहते हैं,शिक्षक सम्मानित होगा तभी शिक्षा और राष्ट्र सशक्त होंगे।
@DrDCSHARMAUPPSS
#JusticeForTeachers
जब अधिकारों पर आंच आती है, तो मौन नहीं — संगठित स्वर ही परिवर्तन लाता है
📢 आज, 22 फ़रवरी, दोपहर 2:00 बजे — ट्विटर (X) अभियान
अपनी आवाज़ को एक स्वर दें, अपनी एकता की ताक़त दिखाएँ।
@DrDCSHARMAUPPSS@UPPSS1921
@TFI_2025
#JusticeForTeachers
देश के सभी राज्यों में आरटीई लागू होने के पूर्व राज्यों द्वारा निर्धारित अर्हता रखने वाले अभ्यर्थियों को ही शिक्षक पद पर नियुक्त किया गया है जोकि 25-30 वर्षों से शिक्षण कार्य कर रहे हैं ।
परन्तु आरटीई लागू होने के बाद शिक्षक पद पर नियुक्ति हेतु निर्धारित अर्हता उसके पूर्व में नियुक्त शिक्षकों पर थोपना सरासर अन्याय है ।हम भारत सरकार से अनुरोध करते हैं कि संसद द्वारा कानून पारित कराकर इस अन्याय पर रोक लगाकर देश के लाखों शिक्षकों और उनके परिजनों को न्याय दिलाया जाये ।
@PMOIndia@narendramodi@AmitShah@dpradhanbjp@jayantrld@CMOfficeUP@myogiadityanath@rajnathsingh@aajtak@brajeshlive@Aamitabh2@ABPNews
माननीय प्रधानमंत्री जी एवं केंद्रीय शिक्षा मंत्री जी से अनुरोध है कि इस गंभीर समस्या पर विचार करने की कृपा करें, ताकि किसी भी तरह से शिक्षक समाज का अहित न होने पाए। तभी सही मायने में शिक्षक दिवस पर शिक्षकों का सम्मान होगा ।
@DrDCSHARMAUPPSS@PMOIndia@narendramodi@dpradhanbjp
पूरे देश के लाखों शिक्षक इस से प्रभावित है जबकि यह पूरी तरह अनुचित प्रतीत होता है कि 20-30 वर्ष सेवा देने के बाद पात्रता परीक्षा का अनिवार्य करना।
केंद्र सरकार से अनुरोध है उक्त आदेश में वांछनीय संशोधन करने का कष्ट करें। आप कर सकते हैं और करना भी चाहिए
#काला_कानून_वापस_लो@narendramodi Sir @PMOIndia@dpradhanbjp Sir
माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से दुःखी लाखों शिक्षक नहीं मनायेंगे शिक्षक दिवस ।
01 सितम्बर 2025 को माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिये गये आदेश से देश भर में 10 लाख से अधिक सरकारी शिक्षकों की नौकरी पर संकट मँडरा गया है ।यदि आदेश को निजी स्कूलों पर लागू किया गया तो इससे प्रभावित शिक्षकों की सम्भावित संख्या करोड़ में होगी ।इस निर्णय से शिक्षक दुःखी एवं चिन्तित हैं ।
सदैव की भाँति कल 5 सितम्बर को देश एवं सभी प्रदेश की सरकारें मंच सजाकर चंद शिक्षकों को चंद लम्हों का सम्मान देंगी ।उनमें कुछ ऐसे शिक्षक भी होंगे जिन्हें भारत सरकार द्वारा tet को लेकर बनाये गये कानून के कारण दो साल बाद सेवा से निकालने की चिंता सता रही होगी ।क्या ऐसे विषम परिस्थिति में मिलने वाले उस सम्मान को शिक्षक मन से स्वीकार करेगा ।भारत सरकार द्वारा tet को लेकर बनाये गये कानून के क्रम में मा सुप्रीमकोर्ट द्वारा दिए गये निर्णय से देश भर के दस लाख से अधिक सरकारी शिक्षकों के सामने दो वर्ष बाद सेवा से बाहर किए जाने का खतरा उत्पन्न हो गया है इसलिए हम माननीय प्रधानमंत्री जी एवं केन्द्रीय शिक्षा मंत्री जी से अनुरोध करते हैं कि शिक्षकों के साथ न्याय करने की घोषणा करने की कृपा करें ।आपकी घोषणा ही शिक्षकों के लिए वास्तविक सम्मान होगा।
@narendramodi@dpradhanbjp@PMOIndia@jagdambikapalmp
किसी भर्ती के पूर्व सरकार द्वारा संबंधित पद हेतु जो भी योग्यता निर्धारित की जाती है उसको पूर्ण करने वाले अभ्यर्थी ही भर्ती किये जाते हैं ।प्रदेश सरकार द्वारा समय समय पर शिक्षकों की भर्ती हेतु जो भी योग्यता निर्धारित की गई उसको पूरा करने पर ही शिक्षक भर्ती हुए हैं
जैसे हाईस्कूल बीटीसी,इण्टर बीटीसी,स्नातक बीटीसी/बिशिष्ट बीटीसी ,स्नातक बीटीसी/बिशिष्ट बीटीसी /बी एड इत्यादि
25- 30 वर्ष पूर्व निर्धारित योग्यता पर नियुक्त शिक्षकों पर वर्तमान भर्ती हेतु निर्धारित योग्यता थोपने हेतु बनाया गया कोई भी कानून केवल काला कानून ही कहा जायेगा ।
23 अगस्त 2010 की एनसीटीई की गाइड लाइन में संशोधन देश भर के शिक्षकों के साथ छल कपट व धोखा है जिसे देश का शिक्षक सहन नहीं करेगा ।हम भारत सरकार से अनुरोध करते हैं कि इस अन्याय के विरुद्ध देश के शिक्षकों को सड़क पर उतरने हेतु मजबूर न किया जाये ।भारत सरकार इस काले कानून को वापस लेकर शिक्षकों के साथ न्याय करे ।
#काला_कानून_वापस_लो
#Justiceforschoolschildren
सरकार 50 से कम छात्रों वाले स्कूलों को बंद करके ग्रामीण बच्चों को शिक्षा से वंचित कर रही है ।साथ ही 149 तक की छात्र संख्या वाले प्राथमिक एवं 99 तक की संख्या वाले उच्च प्राथमिक स्कूलों में प्रधानाध्यापक के पद समाप्त कर रही है अर्थात् अब स्कूल बिना हेड मास्टर के चलाने की योजना है,जिससे शिक्षकों की पदोन्नति के अवसर ही समाप्त हो गए हैं ।स्कूल बंद होने से हजारों रसोइयों की सेवा समाप्त होगी साथ ही भविष्य में शिक्षक बनने की उम्मीद लगाये बैठे DelEd/बीटीसी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की भर्ती नहीं हो पायेगी ।
प्रत्येक तिमाही पर रिकॉर्ड जीएसटी संग्रह पर गर्व करने वाली सरकार को इस प्रकार का निर्दयी /कठोर निर्णय वापिस लेना चाहिए ।
हमारी माँग है कि कोई भी विद्यालय बंद न किया जाये ।यदि सरकार वास्तव में शिक्षा का हित चाहती है तो प्रत्येक कक्षा पर एक सहायक अध्यापक एवं प्रत्येक विद्यालय में एक प्रधानाध्यापक अनिवार्य रूप से नियुक्त किया जाये ।
सरकार के इस निर्णय से प्रभावित सभी साथियों से अनुरोध है कि 8 जुलाई को संबंधित जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के कार्यालय पर प्रस्तावित धरने में उपस्थित होकर अपनी मांगों का समर्थन करें ।