किसी राजनेता या मुख्यमंत्री के कार्यकाल की गुणवत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लोकतंत्र को मजबूत करने हेतु उसने क्या कार्य किए, लोकतंत्र के महत्वपूर्ण स्तंभ मीडिया की मजबूती क्या कार्य किए ?
तो आज उत्तर प्रदेश में प्रेस की आजादी और पत्रकारों के खिलाफ दर्ज मुकदमे का विश्लेषण करेंगे, इस लेख में हम यह विश्लेषण करेंगे कि क्या अखिलेश यादव वाकई प्रेस-फ्रेंडली नेता हैं? उनका रुख सीएम योगी आदित्यनाथ की तुलना में कैसा रहा
दोनों मुख्यमंत्री अखिलेश यादव vs योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल के दौरान प्रेस की आजादी कैसे रही
CM Yogi Adityanath (2017–2025)
कुछ प्रमुख गिरफ्तारियां पत्रकारों की
1. प्रशांत कन्नौजिया
एक मीम ट्वीट पर घर से उठाया गया
दो बार गिरफ्तार, कोर्ट और मानवाधिकार आयोग ने निंदा की
2.Pawan Jaiswal (मिर्जापुर) स्वतंत्र पत्रकार
2019 में मिड-डे मील में रिपोर्ट के चलते यूपी पुलिस ने उनके खिलाफ केस दर्ज किया
3.Siddique Kappan (अक्टूबर 2020)
हाथरस की घटना की रिपोर्टिंग के लिए UAPA, विदेशी फंडिंग, देशद्रोह मे हुए गिरफ्तार, पत्रकार Kappan को 28 महीनों तक जेल में रखा गया
4.Scroll की पत्रकार सुप्रिया शर्मा पर बनारस में FIR
5.सीतापुर में दैनिक जागरण के पत्रकार की हत्या, ऐसे ढेरों घटनाएं है
यूपी में पत्रकारों पर दर्ज मुकदमों की तस्वीर (2017–2025) में कुल 138 मुकदमे दर्ज, जिनमें से 48 पत्रकारों पर शारीरिक हमला, 66 पत्रकारों को गिरफ्तार किया गया
पत्रकारों पर UAPA, sedition, IT Act, PMLA जैसे ज़ोरदार कानूनों के तहत गिरफ्तार किया गया
अखिलेश यादव का कार्यकाल (2012–2017) वर्तमान बीजेपी के कार्यकाल की तुलना में अपेक्षाकृत आज़ाद मीडिया
अब तक कोई दस्तावेज़ित प्रमाण नहीं मिला कि अखिलेश यादव के शासन में किसी पत्रकार को सरकारी दबाव में गिरफ्तार किया गया हो। रिपोर्टिंग को लेकर नाराज़गी हुई थी, लेकिन किसी भी पत्रकार को पत्रकारिता के खातिर कोई UAPA, देशद्रोह या गंभीर अपराधों में पत्रकारों की गिरफ्तारी नहीं हुई
मीडिया पर पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कुछ बयान
पत्रकार हमसे असहमत हो सकते हैं , यही लोकतंत्र की खूबसूरती है
–अखिलेश यादव पूर्व मुख्यमंत्री (2016)
सिद्दीक कप्पन की गिरफ्तारी पर
पत्रकार जो हाथरस की सच्चाई कवर करने जा रहा था, उसे आतंकवादी बना दिया गया यह लोकतंत्र की हत्या है – अखिलेश यादव, 2021
बड़े टीवी चैनल BJP के प्रचार पत्र बन गए हैं। जनता को सच अब वैकल्पिक मीडिया से मिल रहा है –अखिलेश यादव पूर्व मुख्यमंत्री
Source – {Committee against assault on journalist, CPJ, Free Speech Collective } for data
मीडिया का काम सत्ता की आलोचना ,कमियां बताना और जन नीतियों की समीक्षा करना होता है ताकि वो watchdog की भूमिका को सही से निभा सके
समाजवादी पार्टी में @rajkumarbhatisp जैसे प्रवक्ताओं की ही जरूरत है जो शोषणकारी व्यवस्था और पाखंडियों की पोल खोल दे, सदियों से वर्ण व्यवस्था और मनुस्मृति के पोषक लोगों को समाजवाद और धर्मनिरपेक्ष से तो दिक्कत होगी ये लाजमी ही है
जितने हरामख़ोर थे क़ुर्बो-जवार में
परधान बनके आ गए अगली क़तार में
दीवार फाँदने में यूँ जिनका रिकॉर्ड था
वे चौधरी बने हैं उमर के उतार में
फ़ौरन खजूर छाप के परवान चढ़ गई
जो भी ज़मीन ख़ाली पड़ी थी कछार में
बंजर ज़मीन पट्टे में जो दे रहे हैं आप
ये रोटी का टुकड़ा है मियादी बुख़ार में
जब दस मिनट की पूजा में घंटों गुज़ार दें
समझो कोई ग़रीब फँसा है शिकार में
– अदम गोंडवी