कितनी खूबसूरत हो तुम
"ग़ज़ब"
सुनो ..
मुझमें खुद को सम्माहित कर लो
मेरे लबों को चूमकर
दुनिया को अन्तर्ध्यान कर दो
चुम्बन से तुम मुझे
सिर्फ स्पर्श नहीं करना
मुझे खुद में सम्माहित कर लेना
फिर..
कोई शोर नहीं
कोई दर्द नहीं
बस तुम और मैं
और अंतहीन
येअहसास
समझी जादूगरनी!
"मनीष"
लड़कों का रोना शुभ नहीं होता
ऐसा बचपन से सुनते आए हैं हम
उन्हें सिखाया जाता है
दर्द हो तो सह लेना
मन टूटे तो चुप रहना
आँखें भर आएँ
तो चेहरा दूसरी ओर कर लेना।
क्योंकि लड़के रोते अच्छे नहीं लगते
उन्हें तो मज़बूत होना चाहिए
मगर कोई यह नहीं बताता
कि मज़बूत होने का मतलब
दर्द से ख़ाली होना नहीं होता।
वह भी रोता है
बस अकेले में
कभी तकिए में चेहरा छिपाकर
कभी अँधेरे कमरे में
कभी चलते-चलते अचानक रुककर
मगर आवाज़ नहीं करता।
वह भी किसी की याद में
बार-बार फोन की स्क्रीन देखता है
उँगलियाँ किसी नाम पर ठहरती हैं
फिर बिना कोई संदेश किए
फोन चुपचाप रख देता है।
वह भी माँ की आवाज़ सुनकर
अचानक बच्चा हो जाता है
मन करता है कह दे
“माँ, आज बहुत थक गया हूँ”
मगर होंठों पर बस यही आता है
“मैं ठीक हूँ।”
वह भी किसी अपने के जाने पर
अंदर से बिखर जाता है
मगर घरवालों के सामने
चेहरे पर मुस्कान रखकर
कह देता है
“कुछ नहीं हुआ।”
वह दूसरों के आँसू पोंछता है
सबकी परेशानियाँ सुनता है
हर मुश्किल में
सबके आगे खड़ा रहता है।
बस एक बात
कोई उससे नहीं पूछता
“तुम्हारे दुख में
तुम्हारे पास कौन खड़ा है?”
लड़कों का रोना अशुभ नहीं होता
अशुभ तो यह है
कि उन्हें रोने से पहले ही
अपनी भावनाएँ छिपाना सिखा दिया जाता है।
उन्हें बताया जाता है
कि आँसू कमजोरी हैं
जबकि कभी-कभी
आँसू ही वह रास्ता होते हैं
जिससे भीतर जमा हुआ दर्द
बाहर निकल पाता है।
इसलिए अगर कभी
किसी लड़के की आँखों में आँसू दिखें
तो उसकी नज़रें झुकी देखकर
उसे कमज़ोर मत समझना।
हो सकता है
वह बहुत दिनों से
सबके लिए मज़बूत बना हुआ हो
हो सकता है
उसने अपने हिस्से के आँसू
बहुत समय से बचाकर रखे हों।
और आज
बस एक पल के लिए
उसकी हिम्मत थक गई हो
उसे रो लेने देना।
क्योंकि हर आँसू हार नहीं होता
कुछ आँसू
बहुत लंबे समय तक
लड़ी गई लड़ाई के बाद
मिली थोड़ी-सी राहत होते हैं।
लड़कों का रोना अशुभ नहीं होता
कभी-कभी उनका रो लेना ही
उन्हें भीतर से टूटने से बचा लेता है। 🖤
अंत में बस इतना कहा
“अब मन नहीं है…”
तो ठीक है,
जो है, ठीक है।
शायद मुझे भी
उसके शब्दों से ज्यादा
उसके कर्मों पर विश्वास करना सीखना था।
कुछ भ्रम टूटते हैं
तो बहुत दर्द होता है,
मगर वही टूटे हुए भ्रम
हमें उस सच से मिलाते हैं
जिससे हम बहुत दिनों से भाग रहे होते हैं।
“मौत ज़िंदगी का सबसे बड़ा नुक़सान नहीं है। ज़िंदगी का सबसे बड़ा नुक़सान वह है, जो हमारे अंदर उस वक़्त मर जाता है जब हम ज़िंदा रहते हैं।”
— नॉर्मन कज़िन्स
सुनो...ओमी की मधुर रचना !
तुम्हारे काले बादल से घने केश...चांद सा चमकता ललाट...उत्तर–दक्षिण ध्रुवीय महासागर सी आँखे...तलवार सी भौहें...केशर से खिले सुंदर कपोल...पलाश से खिले अधर...चाक पर खेलती कच्ची सुराही सी गर्दन
उफ्फ !! बहुत प्यारी हो तुम
ईश्वर ने प्रेम से बनाया है तुम्हें... ❣️🌻
सुना है
तुम भी लिखते हो
तो जरा लिख दो
दो-चार बातें
बेतुकी सी
बेमायने सी
........ जिसके मायनों को
ढूंढते ढूंढते में
तुम्हारे बारे में सोचा करूं
लिख दो
दो-चार हर्फ़
और ज़्यादा रिक्त पंक्तियाँ
....... जिन को पूरा करने को मैं
तुम तक पहुंच सकूँ.!!
सुना है..... तुम भी......
हमारे बीच जो अंतराल है,
वह दूरी नहीं
अस्तित्व की वह सूक्ष्म दरार है
जहाँ समय स्वयं निर्वाक् हो जाता है ।
तुम अनुपस्थित होकर भी
मेरी चेतना में ऐसी उपस्थित हो
जैसे शून्य में
किसी अनाम सत्य का बोध।
शायद,
दो अस्तित्वों के बीच
अनंत का जो क्षीणतम आभास बचा रहता है
वही प्रेम है।
/ आरव
कभी-कभी सोचती हूँ... तुमसे मिलने से पहले ज़िंदगी कितनी सादी थी। ना किसी की ज़रूरत थी, ना कोई किसी के लिए ख़ास था। सब कुछ अपनी जगह पर था, पर कहीं कोई कमी भी नहीं खलती थी।
और फिर तुम आए... और सब कुछ बदल गया।अब जब भी भविष्य का कोई ख्वाब बुनती हूँ,जानेअनजाने उसकी हर बात में तुम्हारा नाम जुड़ा होता है। मेरी हर योजना, हर प्रार्थना, हर बात... कहीं न कहीं तुमसे होकर गुज़रती है।तुम्हारी खुशी अब मेरी खुशी बन गई है। अगर तुम हँसते हो तो लगता है मेरे भीतर दीवाली है और अगर तुम्हारी पेशानी पर शिकन आ जाए, तो मेरा दिल बेवजह बेचैन हो जाता है।
शायद यही मोहब्बत है।दिन-ब-दिन तुम्हारी अहमियत मेरे लिए और बढ़ती जा रही है। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि कोई इंसान मेरी सोच में इस कदर उतर जाएगा। दिन हो या रात, आँख खुलते ही सबसे पहले तुम्हारा ख्याल आता है। कोई किताब खोलूँ तो किरदारों में तुम्हारी झलक दिखती है। कोई गीत सुनूँ तो लफ़्ज़-लफ़्ज़ में तुम्हारी आवाज़ गूँजती है। रात को आसमान में तारे देखूँ तो लगता है वो भी तुम्हारी तरह मुझे देखकर पलक झपका रहे हैं।
मेरे इर्द-गिर्द लोग बहुत हैं,रिश्ते बहुत हैं,पर जो अपनापन, जो सुकून, जो बेइंतहा तसल्ली मुझे तुमसे मिलती है... वो दुनिया की किसी भी भीड़ में नहीं मिलती। तुमसे बात न भी हो, तो बस ये जानकर दिल को चैन आ जाता है कि तुम हो।
अब जी चाहता है हर खूबसूरत लम्हा तुम्हारे साथ बाँटा जाए। चाय की पहली चुस्की से लेकर रात की आखिरी दुआ तक... सब में तुम शामिल हो। हर दुआ में बस एक ही बात दोहराती हूँ वो हमेशा हँसता रहे, मुस्कुराता रहे।
पता नहीं कब, कैसे... मेरी खुशी तुमसे जुड़ गई। मेरी धड़कन तुम्हारे नाम से चलने लगी और अब तो ऐसा लगता है कि तुम मिलो या न मिलो, तुम मेरी ज़िंदगी का सबसे हसीन हिस्सा तो बन ही गए हो... जिसे मैं उम्र भर संभाल कर रखूँगी। ✨♥️
#રાધાસ્વરા
#बज़्म
आज फिर कमरे में बहुत देर तक खामोशी पसरी रही। बाहर की दुनिया अपनी तमाम आवाज़ों के साथ चलती रही, लेकिन मेरे हिस्से में हमेशा की तरह वही धीमा-सा सन्नाटा था। मेज़ पर रखी किताब खुली हुई थी, मगर आँखें शब्दों पर टिक नहीं रही थीं। खिड़की के बाहर आसमान था, भीतर वही पुराना अकेलापन और इन दोनों के बीच जाने कब तुम आकर बैठ गईं।
तुम्हारे बारे में सोचता हूँ तो अक्सर यही ख्याल आता है कि मेरे जीवन के इस साधारण, वीरान कमरे की दीवारों पर लिपटी अमरबेल हो तुम।
कितना अजीब है न…अमरबेल अपने लिए कोई जमीन नहीं चुनती, वह किसी और के सहारे अपना संसार रचती चली जाती है। शायद प्रेम भी कुछ ऐसा ही है। वह आदमी की जिंदगी में किसी शोर के साथ नहीं आता, बस धीरे-धीरे उसकी दीवारों पर फैलता है, उसकी दरारों में उतरता है, उसकी खामोशियों को हरा करता जाता है और एक दिन आदमी पीछे मुड़कर देखता है तो समझ आता है कि जिस जीवन को वह इतने वर्षों से सूना समझ रहा था, उसमें कहीं बहुत गहराई से मोहब्बत उग आई है।
मेरे साथ भी शायद यही हुआ।
मैंने अपने भीतर बहुत पहले एक कमरा बना लिया था। छोटा-सा, साधारण-सा, जिसमें किसी के आने की जगह तो थी मगर किसी के ठहरने की उम्मीद नहीं थी। उस कमरे में मेरी पुरानी यादें थीं, कुछ अधूरे रिश्तों की परछाइयाँ थीं, कुछ ऐसे सवाल थे जिनके जवाब कभी नहीं मिले और कुछ ऐसी चुप्पियाँ थीं जिन्हें मैंने धीरे-धीरे अपना स्वभाव समझ लिया था।
मैंने उस कमरे को सजाया नहीं, बस उसे वैसे ही रहने दिया। शायद इसलिए कि मुझे डर था कहीं कोई आए और मेरी वीरानी देखकर लौट न जाए।
फिर तुम आईं और सबसे खूबसूरत बात ये रही कि तुमने मेरी दीवारों पर लगी उदासी को देखकर कोई सवाल नहीं किया। तुमने ये नहीं पूछा कि यहाँ इतनी खामोशी क्यों है। तुमने ये नहीं पूछा कि खिड़कियाँ इतनी देर से क्यों बंद हैं। तुमने ये भी नहीं पूछा कि दीवारों पर इतने पुराने निशान किसके हैं।
तुम बस वहीं ठहर गईं।
जैसे तुम्हें मेरे भीतर का यह वीरान कमरा पहले से मालूम था। जैसे तुम जानती थीं कि कुछ घरों में रौशनी बाहर से नहीं लाई जाती, वहाँ बस किसी अपने का होना ही काफी होता है, और तुम्हारा होना मेरे लिए वही रौशनी है।
तुमने मेरी जिंदगी को बदलने की कोशिश नहीं की। शायद इसीलिए तुम मेरी जिंदगी का सबसे खूबसूरत हिस्सा बन गईं। तुमने मुझे कोई नया आदमी बनाने की कोशिश नहीं की। तुमने मेरे भीतर बैठे उस आदमी को ही प्यार किया जो थोड़ा थका हुआ था, थोड़ा टूटा हुआ था, थोड़ा चुप था और बहुत कुछ कहकर भी कह नहीं पाता था।
तुमने मेरी चुप्पियों को शब्द नहीं दिए, तुमने उन्हें समझ लिया और शायद किसी को समझ लिया जाना, किसी को प्रेम करने से भी बड़ी बात होती है।
कभी-कभी मैं सोचता हूँ, आखिर तुम्हारे होने में ऐसा क्या है जो मेरे भीतर इतनी हलचल पैदा कर देता है?
फिर कोई जवाब नहीं मिलता। शायद प्रेम का कोई तर्क नहीं होता। अगर होता, तो मैं तुम्हें इतना क्यों चाहता? तुम्हारे होने का कोई कारण नहीं है मेरे पास। बस इतना जानता हूँ कि जब दिन बहुत भारी हो जाता है, तुम्हारा ख्याल उसे थोड़ा हल्का कर देता है। जब मन बहुत थक जाता है, तुम्हारी याद मेरे पास बैठ जाती है। जब लगता है कि दुनिया की सारी आवाज़ें बेकार हैं, तुम्हारी कल्पना भी मुझे पर्याप्त लगती है।
कभी-कभी मुझे लगता है कि तुम मेरे जीवन में किसी इंसान की तरह नहीं, किसी मौसम की तरह आई हो। ऐसा मौसम जो कैलेंडर देखकर नहीं आता। जो अचानक उतरता है और भीतर की सारी सूखी जमीन को छू जाता है।
तुम्हारे आने के बाद मुझे अपने अकेलेपन से शिकायत थोड़ी कम हो गई है। अब अकेला बैठता हूँ तो तुम्हें याद कर लेता हूँ। खिड़की से बाहर देखता हूँ तो तुम्हारे बारे में सोचता हूँ। किसी गीत में प्रेम सुनाई देता है तो तुम्हारा चेहरा याद आता है। किसी फूल की खुशबू आती है तो मन कहता है ये ख़ुशबू तुम्हारे पास भी होगी क्या? और फिर मैं मुस्कुरा देता हूँ अकेले। मगर अब वह मुस्कान भी अकेली नहीं होती। क्योंकि उसमें तुम होती हो।
शायद यही वजह है कि मैं तुम्हें अपने जीवन की अमरबेल कहता हूँ। तुमने मेरी दीवारों को ढक लिया है, मगर मेरी दीवारें मिटाई नहीं। मेरी वीरानी को खत्म नहीं किया, मगर उसे खूबसूरत बना दिया। मेरे अंधेरे को उजाला नहीं कहा, बस उसके भीतर बैठकर मेरा हाथ थाम लिया और मोहब्बत शायद यही है..किसी के अंधेरे को देखकर उससे उजाला बनने की उम्मीद न करना। बस उसके अंधेरे में उसके साथ बैठ जाना। तुम मेरे साथ बैठी हो मेरी खामोशी में, मेरी थकान में, मेरी अधूरी नींदों में, मेरे अनकहे वाक्यों में, मेरी उन बातों में जिन्हें मैंने कभी किसी से नहीं कहा और इसीलिए तुम्हारा होना मेरे लिए इतना गहरा है।
मैं तुम्हें अपने जीवन में किसी खूबसूरत चीज़ की तरह नहीं देखता।
१/२
सुनो लड़की...
हम मिलेंगे या नही, ये नही जानता मैं...पर नियति में अगर बिछड़ना लिखा होगा तो...
-मिल लेना एक बार मुझसे, मेरे लिए वो मिलना ऐसा होगा जैसे! देह से मृतप्राय पपीहे को जल मिल जाना🖤🤍
सुनो...तुम मेरे लिए वह पावर बैंक हो...जिससे मैं कभी...कहीं...किसी भी स्थिति में रिचार्ज हो जाता हूं...मैं कितना भी उतरा, बुझा या उलझा रहूँ तुम्हारी एक आवाज ही (चिढ़ा के, समझा के, हँसा के, मना के) रिचार्ज कर देती है...
मेरे जीवन में वक्त के आरे-तिरछे खींचे धार को इरेजर से मिटा कर रंगीन करने के लिए शुकिया लड़की "
ये संग बेहद अनुपम एवं अनमोल है""🩷🤎
अंत्येष्टि के पश्चात
सब अपने अपने घर लौट गए ,
केवल
मैं और मेरा विरह ,
श्मशान की भस्म पर बैठे रहे |
रात्रि ने अपने
तमाल वस्त्र ओढ़े ,
दिगंत मौन रहा ,
पर तुम्हारी स्मृति
मेरे लिए अनश्वर चिता बन गई |
_अ|जे|य🕊️
अतीत को तुम पकड़ कर बैठे हो क्योंकि उसने तुम्हें बनाया है
और वर्तमान को तुम ठुकरा रहे हो क्योंकि वो वैसा नहीं है जैसा तुमने सोचा था
तो तुम कहीं हो ही नहीं
अतीत में तुम रह नहीं सकते
वर्तमान में तुम रहना नहीं चाहते
तो भविष्य तुम्हारे लिए सिर्फ़ एक कल्पना बनकर रह जाएगा
एक और ज़गह जहाँ तुम भाग कर जाओगे
सच तो ये है
अतीत को भूलना नहीं है
पर रोज़ उसकी पूजा भी नहीं करनी है
उसे एक किताब की तरह रखो
जब ज़रूरत हो खोलो सबक पढ़ो और बंद कर दो
और वर्तमान
उसे पसंद करना ज़रूरी नहीं है
स्वीकार करना पड़ता है
पसंद और स्वीकार में फर्क़ है
पसंद दिल का चुनाव है स्वीकार आँख खोलना है
जो है उसे जैसा है वैसा देखना
जब तुम वर्तमान को स्वीकार लोगे
तभी अतीत अपनी सही ज़गह पर चला जाएगा
और तभी भविष्य कोई भागने की ज़गह नहीं कुछ बनने की ज़गह लगेगा...!!
कुछ रिश्ते...
चाँद-सितारों जैसे होते हैं,
दूर होकर भी
अपनी जगह बनाए रखते हैं,
कभी-कभी...
नदी की तरह
बातें बहती रहती हैं,
और कभी
समंदर जैसी ख़ामोशी
बीच में आ जाती है,
अगर किसी बात से
दिल दुखा हो...
तो उसे
मेरी एक छोटी-सी भूल
समझकर छोड़ देना,
क्योंकि...