आधी आबादी, पूरा हक। आज का छात्रों की गूंज केवल महिलाओं के लिए था। हम सबको उम्मीद थी कि यह पॉलिटिकल होगा। पढ़ाई रोजगार और सुरक्षा के इर्द गिर्द।
लेकिन राहुल अब काफी अनप्रीडेक्टेबल हो गए हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि हमारी जेनरेशन ने केवल ' नेता ' देखा है।
महात्मा गांधी किसानों की आवाज बनने चम्पारण पहुंचे। उन्हें उम्मीद थी कि 10 दिनों में वो चम्पारण से वापस लौट आयेंगे। लेकिन वहां की गरीबी और अशिक्षा को देख परेशान हो गए। वहां से अपने छोटे बेटे देवदास गांधी को चिट्ठी लिख चम्पारण के लिए दांत, जीभ साफ करने की दवाई और साबुन भेजने को कहा।
गांधी जी चम्पारण 2 साल रहे। कस्तूरबा के साथ मिल वहां के लोगों को नहाना, कपड़े साफ रखना, दांत साफ करना जैसे कामों को सिखाने पर लग गए । विशेषकर महिलाओं और लड़कियों को। लोग सवाल पूछे कि गांधी जी इससे क्या होगा ? गांधी जी का जवाब था ' जब हमारे रहवासी ही स्वस्थ और शिक्षित नही होंगे तो आजादी की लड़ाई कैसे लड़ेंगे।'
स्वतंत्रता आंदोलन केवल अंग्रेजों के खिलाफ की लड़ाई नही थी। बल्कि कांग्रेस के नेतृत्व मे समाज की कुरीतियों के खिलाफ भी थी । जाति , महिलाओं की भागीदारी, शिक्षा, रोजगार जैसे बुनियादी सवाल पर भी कांग्रेस लड़ रही थी।
2 दिन पहले राजीव जी की जयंती पर राहुल को सुना। बाहर खड़े लोग बात करते मिले कि राहुल अब कांग्रेस को आत्मसात कर लिए हैं। कल संसद मार्ग थाने का संघर्ष और आज पुणे के कार्यक्रम से ये भरोसा और मजबूत हो गया कि राहुल ओल्ड कांग्रेस की नीव पर Gen-G कांग्रेस को खड़ा कर रहे हैं।
राहुल की लड़ाई अब भाजपा के खिलाफ और प्रधानमंत्री पद की लड़ाई नही है। बल्कि राहुल अब लम्बे संघर्ष के लिए तैयार है। गांधी जी की तरह दूर की लड़ाई की तैयारी , जहां सत्ता मायने नही रखती। समाज के हर दबे, वंचित, शोषित वर्ग की लड़ाई। जिसका रास्ता सामाजिक सुधारो से होते हुए राजनैतिक सुधार तक जाता है । राहुल 'मन नेता ' के बरक्स जन नेता हैं। हम राहुल के साथ हैं।
@RahulGandhi@priyankagandhi@INCIndia@SupriyaShrinate@ShindePraniti
हमारे घर में कुछ ही फ्रेम्ड फोटो रहे। उनमें से दो फोटो हमेशा करीने से साफ की जातीं। एक किसी मैगजीन में छपी मीना कुमारी की। दूसरी दिनमान में छपी, सेवादल की टोपी पहने मुस्कुराते राजीव गांधी की।
बचपन में हमें लगता कि ये शख्स घर का ही कोई सदस्य है। किसी दिन पापा से पूछ लिया—ये कौन हैं? बचपने को देखते हुए बताया गया, एक दोस्त थे अब नहीं रहे।
बड़े होने के क्रम में इस शख्स को खूब जानने की कोशिश की।
9th क्लास में था। बलिया की बंद पड़ी लाइब्रेरी में एक दिन राशीद किदवई की सोनिया जी पर लिखी एक किताब हाथ लगी—‘नेपथ्य से उत्कर्ष तक’। सोनिया जी को केंद्रित, इटली से 2004 की सरकार बनने तक की कहानी।
घर का माहौल ऐसा रहा कि कांग्रेस पार्टी के सदस्य न रहते हुए भी कांग्रेसी राजनीति का केंद्र रहा। ऐसे में बिना किसी सायास कोशिश के भी देश, आजादी आंदोलन और कांग्रेस की राजनीति के बारे में खूब जाना।
लेकिन पहली बार किदवई जी की किताब से गांधी परिवार के व्यक्तिगत जीवन का परिचय हुआ। जो प्रेम के दिनों में हमें फ़ैसिनेट करती रही।
किसी शाम बनारस के अस्सी घाट पर गंगा में पैर डाले हम तैरते दीयों को देख रहे थे। उसने अचानक से पूछ लिया “अगर हम 2 सालों तक किसी कम्युनिकेशन में न रहे तो?”
मैंने जवाब दिया, “पता नहीं। ऐसा क्यों होगा... क्या यह संभव है ?”
हॉस्टल वापसी में उसने बहुत देर की खामोशी को तोड़ते हुए कहा “तुम प्रेम में कभी राजीव नहीं हो सकते। मैं हमेशा तुम्हें राजीव की तरह देखना चाहती थी।
आज राजीव गांधी की जयंती है। मै जब भी उन्हें याद करता हूं वही फ्रेम उभर आता है। सौम्य, मुस्कुराता और बेहद आत्मीय। नमन हीरो I am young and I too have a dream .
मंत्री नही प्रधान मंत्री का इस्तीफा होना चाहिए। जो भी साथी जंतर मंतर के आउटर सर्कल मे हैं वो PMO पहुंचे। लड़ाई लड़ी जाएगी, जीती जाएगी। ✊✊✊
@RahulGandhi@priyankagandhi@INCIndia@s_kanth
@BBCHindi@BBCWorld@BBCIndia क्या आप वोटरों को उनके नस्ल के आधार पर नही बांट रहे हैं ? एक दौर में आपके न्यूज से हम भाषा को बर्तना सीखे है, आप ये कहां आ गए ?
#नस्ल_भेद#recism
माननीय मुख्यमंत्री जी इन समीक्षा बैठको का क्या हासिल है? दो महीने पहले छपरा जिले से गायब हुई लड़की (FIR No 399/24 भगवान बाजार थाना ,छपरा) केस मे अब तक पुलिस हाथ धरे बैठी।IO बोलती है 'खुद वापस आ जायेगी'। यही है आपका सुशासन?
@NitishKumar@yadavtejashwi@bihar_police@manojkjhadu
1 अणे मार्ग स्थित ‘संकल्प’ में गृह विभाग की समीक्षा बैठक की। विधि व्यवस्था सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। अपराध नियंत्रण पर प्रतिबद्धता से कार्य करने का निर्देश दिया है। पुलिसकर्मियों की बहाली तेजी से करने को कहा है। पुलिस भर्ती में महिलाओं के लिए निर्धारित 35 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर रिक्तियों को भी जल्द पूर्ण करने को कहा है। बचे हुए पदों पर पुलिस की शीघ्र बहाली होने से कानून-व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने में और सहूलियत होगी।
कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पुलिस और प्रशासन को मुस्तैदी से कार्य करने को कहा है। गश्ती व्यवस्था को और सुदृढ़ करने का निर्देश दिया है। रात्रि एवं पैदल गश्ती को और प्रभावी बनाने को भी कहा है। भूमि विवाद के निपटारे हेतु पूरी तरह सतर्क रहने को कहा है। लैंड सर्वे एंड सेटलमेंट का काम तेजी से होने पर भूमि विवाद को लेकर होने वाले अपराध में कमी आएगी। अपराध अनुसंधान कार्य में तेजी लाने और इसे ससमय पूर्ण करने को कहा है ताकि दोषियों पर जल्द कार्रवाई हो सके।
@AshwiniVaishnaw जी बिहार के छपरा रेलवे स्टेशन का एक मिसिंग गर्ल के केस मे छपरा पुलिस को 2 AUG की CCTV फुटेज देखनी थी। जाने पर बताया गया कि स्टेशन का CCTV 10 दिनो से खराब है। आप बता सकते हैं कि इसके लिए हम कितनी बार ताली बजाए कि ये फुटेज मिल जाए ?
@RahulGandhi@yadavtejashwi
@AshwiniVaishnaw जी बिहार के छपरा रेलवे स्टेशन का एक मिसिंग गर्ल के केस मे छपरा पुलिस को 2 AUG की CCTV फुटेज देखनी थी। जाने पर बताया गया कि स्टेशन का CCTV 10 दिनो से खराब है। आप बता सकते हैं कि इसके लिए हम कितनी बार ताली बजाए कि ये फुटेज मिल जाए ?
@RahulGandhi@yadavtejashwi
… और अब गड़बड़ी की ख़बर के बाद UGC- NET की परीक्षा भी रद्द कर दी गयी है। भाजपा के राज में पेपर माफ़िया एक के बाद एक, हर एग्ज़ाम में धांधली कर रहा है। ये देश के ख़िलाफ़ किसी की बड़ी साज़िश भी हो सकती है।
गहरी बात समझिए:
- पुलिस भर्ती की परीक्षा का पेपर लीक होगा तो क़ानून-व्यवस्था नहीं सुधरेगी। जिससे देश-प्रदेश में अशांति और अस्थिरता बनी रहेगी।
- NEET की परीक्षा में घपला होगा तो ईमानदार लोग डॉक्टर नहीं बन पाएंगे और देश के लोगों के इलाज के लिए भविष्य में डॉक्टरों की कमी और बढ़ जाएगी और बेईमान लोग, जनता के जीवन के लिए ख़तरा बन जाएंगे।
- UGC-NET परीक्षा न होने से, पहले से शिक्षकों की जो कमी चली आ रही है, उसमें और भी ज़्यादा इज़ाफ़ा होगा। शिक्षकों की कमी से देश के मानसिक विकास में बाधा उत्पन्न होगी, जो कालांतर में देश के लिए बेहद घातक साबित होगी।
इन सबसे प्रशासन के साथ-साथ स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था चौपट हो जाएगी। ये हमारे देश के शासन-प्रशासन व देश के मानव संसाधन के विरूद्ध कोई बहुत बड़ा षड्यंत्र भी हो सकता है, जिसके दूरगामी नकारात्मक परिणाम निकलेंगे। इसीलिए कोर्ट की निगरानी में इसकी कठोर जाँच हो और दोषियों को कठोरतम सज़ा दी जाए, और कोई भी अपराधी छोड़ा न जाए, फिर वो चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो या फिर उसके सिर पर सत्ता का हाथ ही क्यों न हो।
लोग कह रहे हैं जो भ्रष्ट लोग कोरोना के वैक्सीन में चुनावी चंदे के नाम पर पीछे से करोड़ों रूपये खा सकते हैं, वो भला परीक्षा-प्रणाली को क्या छोड़ेंगे।
#UGC_NET
#NEET
महात्मा गांधी को कोई नही जानता था। गोडसेवादियो को इससे बुरा लगता था। फिर 42 से गांधी को प्रसिद्ध करने का ठेका लिए। जिसके लिए गांधी पर 6 बार जानलेवा हमला किए । अंततः 30 जनवरी 1948 को अपने अथक प्रयास से गांधी को विश्व प्रसिद्धि दिलाए। कांग्रेस उनके नाम पर देश को ठगती रही।