@apnarajeevnigam भारतीय न्याय-व्यवस्था का पुश्तैनी जज। जज साहब इलाहाबाद में पैदा हुए जहां पूरब का आक्सफोर्ड कहा जाने वाला इलाहाबाद विश्वविद्यालय है पर कानून की पढ़ाई रीवा में किया। जज बनने की योग्यता इनकी काबिलियत नही बल्कि पिता का जज होना है। इनसे न्याय की अपेक्षा करना बेइमानी है।
@BhimArmyChief चिराग पासवान वोट के लिए महादलित हैं बशर्ते वो ब्राह्मणवादी सोच का कट्टर ब्राह्मण है। राम विलास पासवान जी की सोच चिराग में हो ही नही सकती।
@mrmishra@sachingupta इसी माफिया को लाभ देने के लिए सामान्य गरीब नाविकों को साजिशन संगम क्षेत्र से 5-6 किमी दूर नाव चलाने का आदेश दिया गया। नाविकों ने विरोध किया धरना-प्रदर्शन किया किसी ने नही सुनी। इसकी नाव चलाने वाले मजदूरों को 500 दिहाड़ी मिली, गरीब नाविकों से 5 से 10 हजार की रंगदारी वसुली।
@hktripathi2@keshavdevmaurya भाजपा से ज्यादा और कौन गुण्डयी कर सकता है। इन्सान पर पेशाब करना, दलित दूल्हों को घोड़ी पर न चढ़ने देना , घड़े से पानी पी लेने पर जान से मार देना जैसा कुकृत्य ब्राह्मण ही कर सकता है।।
@apnarajeevnigam दिल्ली का लाल किला, आगरा का ताज महल, किला, इलाहाबाद का किला , बख्शी बांध और अनगिनत वो सभी इमारतें तोड़ डालो, कुछ तो कर नही सकते नाम ही बदल डालो। नफरती चिंटुओं बच्चों की परीक्षाएं टलवा कर कुम्भ का स्नान करवाओ।
@apnarajeevnigam योगी सरकार में पिछड़े वर्ग की बच्चियों के साथ लगातार एक के बाद एक हो रहे बलात्कार एवं हत्याओं के जिम्मेदार बीजेपी के पिछड़े वर्ग के कायर नेता हैं। केशव मौर्य, स्वतंत्र देव सिंह, अनुप्रिया पटेल जैसे कायरों की जुबान बन्द रहती है। ये सब मरे हुए लोग हैं।
@apnarajeevnigam पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टी एन शेषन जी का चुनाव आयोग, भारत के अन्तिम पायदान पर खड़े व्यक्ति में जो विश्वसनीयता का जो बीज बोया, जिसे बाद के चुनाव आयुक्तों ने उसे आगे बढ़ाया, इस राजीव कुमार ने सत्ता की चाटुकारिता के चक्कर में सब कुछ तहस नहस कर दिया। नीचता की सारी हदें पार कर दी।
@apnarajeevnigam दोनों मियां बीबी सत्ता की मलाई खा रहे हैं और यहां आकर जनता को दिखाने के लिए भौंक रही हैं। पूरा प्रदेश आतंक और अराजकता के आगोश में है पर बात जीरो टॉलरेंस की होती है। जीरो टॉलरेंस कहां है " पूछो अपने पति से और अपने आप से " ये सत्ता के गुलाम हैं न कुछ कर पायेंगे न बता पायेंगे।
@nehafolksinger बहराइच की सच्चाई यही है। अपने बच्चों को विदेशों में पढ़ाने वाले नेताओं/मंत्रियों का असली खेल भी यही है। कांवड़ यात्रा और धर्म बचाने न ये आगे आते हैं और न अपने बच्चों को भेजते हैं। मोहित पांडेय जैसे न जाने कितने युवा इनके बहकावे में आकर जान दे देते हैं या जेल में सड़ जाते हैं।