Just a nice guy for nice people.RTs are not necessarily reflect my views.
देख जिन्दाँ से परे,रंगे-चमन,जोशे-बहार;
रक्स करना है तो फिर पाँवों की ज़ंजीर न देख ।
1970-80 का दशक था जब तलत महमूद की आवाज का जादू हर तरफ सुनाई दे रहा था। उनकी ग़ज़लों के लोग दीवाने थे। 1979 में उन्हें लंदन के बहुप्रतिष्ठित रॉयल एल्बर्ट हॉल में कार्यक्रम के लिए बुलाया गया। उनकी लोकप्रियता इस कदर बढ़ चुकी थी कि कार्यक्रम की तय तारीख से 2 हफ्ते पहले ही सभी टिकट बिक चुके थे।
तलत उस दौर में लता मंगेशकर के बाद दूसरे ऐसे भारतीय गायक थे जिन्हें इतने प्रतिष्ठित हॉल में कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया गया था। तलत महमूद ने उस कार्यक्रम में श्रोताओं को झूमा दिया। लोगों ने बाकयदा उन्हें ‘स्टैंडिंग ओवेशन’दिया।
ये तलत महमूद की लोकप्रियता ही थी कि शम्मी कपूर जैसे बड़े अभिनेता ने सार्वजनिक तौर पर इस बात को कहाकि उनके गानों को लोकप्रिय बनाने का श्रेय मोहम्मद रफी से भी पहले तलत महमूद को जाता है।
1982 के वेस्टइंडीज के एक ‘टूर’ का भी जिक्र जमकर होता है जिसमें ऋषि कपूर, नीतू सिंह और माला सिन्हा जैसी फिल्मी हस्तियां गई थीं लेकिन उस ‘टूर’ के पोस्टर पर उन सबसे कहीं ज्यादा बड़ी तस्वीर तलत महमूद साहब की छपी थी, जो उनकी लोकप्रियता को बताती है।
#Raaggiri
@YRDeshmukh@hvgoenka
मल्लिका पुखराज… सिर्फ नाम ही काफी है। आप उस्ताद बड़े ग़ुलाम अली ख़ान के वालिद उस्ताद अली बख़्श कसूरी की शिष्या थीं। कथक की तालीम भी ली थी।उनकी गाई हफ़ीज़ जालंधरी की इस रचना को हिंदुस्तान की भी एक पीढ़ी रोज गुनगुनाती है।
#Raaggiri@YRDeshmukh@hvgoenka@KapilSharmaK9@sumrag
माई री मैं का से कहूँ पीर..!!
🎬 दस्तक (1970)
#मदन_मोहन (संगीतकार)
#जन्मजयंती 💐 #लेखनी ✍️
मदन मोहन जी को कभी फिल्म फेयर अवॉर्ड नहीं मिला। एकमात्र राष्ट्रीय पुरस्कार ('दस्तक' के लिए) मिला भी तो लगभग बीस साल के फिल्मी करियर के बाद।
@ShwetaJha24@niranzangurjar@KamalpreetBali