खान सर का वॉकी-टॉकी वाला वीडियो सोशल मीडिया पर घूम रहा है। अंधेरा होने वाला था, तो उन्होंने अपनी टीम को साफ कहा—आज राहत सामग्री बांटना बंद करो। कल बांटेंगे। वजह भी बताई कि अंधेरे में बाढ़ के पानी में छोटे बच्चे डूब सकते हैं। साधारण सी बात लगती है, लेकिन ज़मीनी हकीकत जानने वाला ही ऐसे बोल सकता है।
पांच दिन से नाव पर बैठकर गांव-गांव घूम रहे हैं। पढ़ाना, कमाना और फिर समाज को लौटाना—ये फॉर्मूला कई लोग सिर्फ भाषण में बोलते हैं, खान सर इसे मैदान में उतार रहे हैं।
बाढ़ जब घरों में घुस जाती है, तब लोगों को लेक्चर नहीं, किसी के हाथ का सहारा चाहिए। उस वक्त खुद आगे बढ़कर मदद पहुंचाना आसान नहीं होता। खान सर यही कर रहे हैं। मुश्किल घड़ी में किसी के चेहरे पर थोड़ी सी उम्मीद लौटा देना ही असली इंसानियत है।
ऐसे काम करने वालों को समाज से और सहयोग मिलना चाहिए—ये बात सही लगती है। सेवा के कामों से उनकी पकड़ बढ़ रही है, ये भी सच है। आगे बिहार की राजनीति में उनकी चर्चा हो या न हो, फिलहाल जो काम हो रहा है वो ठोस और जरूरी है।
अच्छा काम है तो अच्छा है। बाकी सब शोर है।
अरे संघी देखो नेहा इस वक्त भी सड़क पर थी जब तुम्हारे पापा ने बोला था कि किसान वाला कानून वापस नहीं होगा
हुआ वापस।
फिर प्रधान इस्तीफा नहीं देगा इस्तीफा हुआ
अभी ज्ञानेश का जाना तय है बस कितना जल्दी ये देखना होगा
I’m choosing peace over people, distance over drama, and happiness over toxicity. My energy is precious, and my peace is non-negotiable.
Hasta la vista. 😎✌
Main media Sharam toh pahele hi chatukarita main bach diye tha aab Imaan ,Dharam woh bhi bach diya ..
Sorry to say but iss media se hazaron guna izzatdar ladkiya woh hote hai jo Red light area main baith te hai..
Jab ladne ka koi hatiyaar na mile toh Aurat ko badnaam karo bass.
@nehafolksinger Sstay strong we are with you❤️
माफ़ी माँगने से क्या होगा दलाल @ABPNews ? जो अफ़वाह उड़ा दिए हो वो ख़त्म हो जाएगी क्या? मैंने विरोध किया तो माफ़ी माँग रहे हो! जो बेटियाँ विरोध नहीं कर सकतीं उनको तो तुम आत्महत्या करने पर मजबूर कर दोगे? तुम्हारी बदमाशी से मेरी गरिमा को जो ठेस पहुँची है उसकी कोई माफ़ी नहीं है. कोर्ट में मिलते हैं.
@narendramodi@NCWIndia
रात गहरी हो चुकी थी। इंडिया गेट के सामने ठंडी हवा चल रही थी। चार साल पहले अपनी बेटी को खो चुके वीरेंद्र सिंह भंडारी और सोनी देवी वहीं धरने पर बैठे थे। बेटी के नाम का बोर्ड, उसकी तस्वीर, और न्याय की मांग यही उनका साथ था।
सुबह तकरीबन 4 बजे पुलिस पहुंची। उन्होंने मां-बाप को उठाकर ले गई। सोनी देवी बाद में बोलीं कि अगर यहां बैठने नहीं दिया, तो घर पर ही भूख हड़ताल करेंगी। पिता ने 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया कि दुष्यंत कुमार गौतम की सिक्किम राज्यपाल की नियुक्ति रद्द हो।
थोड़ी देर बाद उन्हें छोड़ दिया गया, लेकिन उस सुबह की तस्वीर कई लोगों के दिल में घुस गई एक मां-बाप, जो बेटी के लिए आवाज उठा रहे थे, उन्हें रात के अंधेरे में थाने ले जाया गया।
चार साल हो गए बेटी को खोए हुए। शरीर पर चोट के निशान, डूबने से मौत और अभी भी सवाल बाकी हैं।
वे सिर्फ इतना कह रहे हैं सीबीआई जांच पूरी होने तक दुष्यंत गौतम की नियुक्ति रोको। एक मां-बाप की आवाज को इतनी जल्दी दबाने की क्या जरूरत थी?
#JusticeForAnkita #AnkitaBhandari
मुस्लिम है एक लड़की, नाम है दानिश अली।
मध्य प्रदेश के छोटे से गाँव से आई है।
JNU में इतिहास की PhD कर रही है, JNUSU की संयुक्त सचिव है और AISA से जुड़ी है।
जब NEET/पेपर लीक के खिलाफ पूरा आंदोलन चला , नेहा और दूसरे साथी भूख हड़ताल पर बैठे थे। दानिश भी उनके साथ खड़ी हो गई। सात-पंद्रह दिन बिना खाए-पिए शरीर ने जवाब दिया, ब्लड शुगर गिरकर 41-46 तक पहुँच गई, तबीयत इतनी बिगड़ी कि एम्बुलेंस बुलाई गई और RML अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। लेकिन अस्पताल जाने से पहले भी उसने आवाज़ नहीं छोड़ी। मंच पर खड़ी होकर कहा कि हम युवा हैं, हम हार नहीं मानेंगे, शिक्षा मंत्री का इस्तीफा चाहिए, कागज लीक का हिसाब चाहिए।
उसके बाद शिक्षा मंत्री का इस्तीफा हो गया। अब अभी का आंदोलन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहा है मतदाता सूची (SIR) में नाम हटाने, कथित अनियमितताओं और वोट चोरी के आरोपों पर। CJP, AISA, नेहा बोरा, दानिश अली और कई अन्य संगठन/विपक्षी दल ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
अक्टूबर में दिल्ली में बड़े प्रदर्शन हुए, पुलिस ने सैकड़ों को डिटेन किया, बैरिकेड्स लगाए गए। दानिश ने फिर से मोर्चे पर आवाज़ उठाई, पुलिस कार्रवाई और मांगों पर बात की।
लोगों ने देखा एक मुस्लिम लड़की, गाँव से आई हुई, बिना डरे बोल रही है। धर्म कोई दीवार नहीं है जब बात अन्याय या युवाओं/लोकतंत्र के हक की हो यह दावा राजनीतिक नारा है, न कि किसी एक घटना का सबूत।
नेहा और दानिश जैसी आवाजें विपक्षी छात्र राजनीति AISA/CPI-ML लिंक की हैं, जो परीक्षा प्रणाली, NEP, NTA और अब चुनाव आयोग दोनों पर हमलावर हैं।
@danish_aisa
दिल्ली में चल रहे आंदोलन में किसी को कुछ हासिल हुआ या नहीं... नेहा बोरा ने बहुत कुछ हासिल कर लिया है।
नेहा बोरा बहुत कम दिनों में लोगों की जबान पर आ चुकी है और चर्चा का विषय बन चुकी है,
प्रियंका गांधी के साथ खड़े होकर प्रतिक्रिया देना नेहा के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है,
हालांकि बोरा लड़की होने के बाद भी बहुत मेहनती, उत्साह से भरपूर और निडर हैं, उनमें बोलने की अच्छी कला है, किसी भी मुद्दे को दमदार तरीके से रखती हैं, यही खासियत उन्हें एक दिन बहुत आगे लेकर जाएगी।
तुम्हे दिल्ली पुलिस सिर्फ इस लिए मार रही कि तुम बीजेपी और संघ के विरुद्ध है।
और हमें सिर्फ इस लिए मार दी जाती है के हम मुसलमान है।
अब बताओ ज्ञानेश के खिलाफ आंदोलन के साथ साथ इन बच्चों के लिए आवाज उठाना जरूरी नहीं है?