महज़ कहने से ही हर बात तो मानी नहीं जाती
हक़ीक़त हो अगर परदे में, पहचानी नहीं जाती
वो ठुकराते हैं, लेकिन, दिल उन्हीं के गीत गाता है
बहुत रोका मगर इस दिल की नादानी नहीं जाती
#ग़ज़लगो#बज़्म#खुदशायर
कुछ और शे'र तस्वीर में 👇👇👇
दिल बेवफ़ा हो ऐसी मुहब्बत का क्या करें?
बढ़ने लगी जो रोज़ उस आफ़त का क्या करें?
धड़कन में मेरे रह के धड़कता है तेरे नाम
तू ही बता ये तेरी अमानत का क्या करें?
#ग़ज़लगो#ख़ुदशायर#ForYou❤️
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आज सुबह छत पर आ गयी। सोचा, सूरज को आज उगते देखा जाये, अब मुझको ये तो पता है कि सूरज पूरब में उगता है लेकिन यह नहीं पता है कि पूरब किधर है..?
बहुत है मेरे लिए एक ही उड़ान सही
ज़मीन हाथ न आए तो आसमान सही
मुसाफ़िरों को भरोसा है, मेरी कश्ती पर
यहाँ दुरुस्त है, लंगर न बादबान सही
हवा थमी है तो सूरज के सामने रख दो
चराग़े-सुब्ह का एक और इम्तिहान सही
#ग़ज़लगो#ख़ुदशायर
मेरे दिल के फूल को तोड़ कर, तू तो बेहिसी से मसल गया
मेरी ख़ुशबू है तेरे हाथ में, मेरा दिल इसी से बहल गया
तेरी उल्फ़तें, तेरी चाहतें, रही दिल में बन के जो राहतें
है न बाक़ी अब वो नसीब में, कि तेरा मिज़ाज बदल गया
#ग़ज़लगो#खुदशायर
पूरी ग़ज़ल तस्वीर में👇👇👇
इश्क़ मुझसे यूँ जताया करता था
शे'र मेरे ही सुनाया करता था
सोचता था एक हम हो या न हो
वो लकीरों को मिलाया करता था
मान जाती मुस्कुराहट से ही मैं
वो सियाही ख़त में ज़ाया करता था
वो बदल देता नियत को मेरी तब
देखकर जब मुस्कुराया करता था
#ग़ज़लगो#तेरी_याद ❤️
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आज सुबह छत पर आ गयी। सोचा, सूरज को आज उगते देखा जाये, अब मुझको ये तो पता है कि सूरज पूरब में उगता है लेकिन यह नहीं पता है कि पूरब किधर है..?
महज़ कहने से ही हर बात तो मानी नहीं जाती
हक़ीक़त हो अगर परदे में, पहचानी नहीं जाती
वो ठुकराते हैं, लेकिन, दिल उन्हीं के गीत गाता है
बहुत रोका मगर इस दिल की नादानी नहीं जाती
#ग़ज़लगो#बज़्म#खुदशायर
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