आर्थिक जो कमजोर है, तुम हाथ उसका थाम लो,
पर योग्यता की साख का, तुम आरक्षण का मत नाम लो।
ज्ञान की इस भूमि पर, हर एक को सम्मान हो,
जाति नहीं, बस कर्म ही, हर व्यक्ति की पहचान हो।
#ReservationReformआंदोलन
जैसा कि मैंने कहा है, हर आंदोलन के लिए जंतर मंतर नहीं चाहिए। वो भी जा कर हमने दिखा दिया, पर कई आंदोलन घर बैठे, केवल सूचित करने से भी होते हैं। आंदोलनों में गर्मी केवल जलती बस की आग से नहीं आती, गर्मी हम दूसरे तरह से भी उत्पन्न कर सकते हैं।
यह आंदोलन हमारा है ही नहीं, या आंदोलन हर उस प्रताड़ित व्यक्ति का है जो कभी SC/ST एक्ट, तो कभी UGC तो कभी आरक्षण के कारण घुटता रहता है। कानपुर, आगरा, प्रयागराज, नागपुर, दिल्ली आदि में जो भी सड़क पर हैं, मेरा पूर्ण समर्थन है आपको। जब तक जागरूकता नहीं आएगी, सरकार आपका चूतिया बनाती रहेगी।
बक्सर बिहार का यह वीडियो आँखें खोल देने वाला है। जलजमाव और टूटी झोपड़ी के बीच नंगे बदन खड़ा यह बच्चा एक ब्राह्मण परिवार से है।
जब रिपोर्टर ने इससे पूछा कि "नये कपड़े क्यों नहीं पहनते?", तो इस मासूम ने कहा — "पापा के पास पैसे नहीं हैं, इसलिए माँगता भी नहीं हूँ।"
कानपुर में आरक्षण सुधार आंदोलन और यूजीसी के नए कानून के विरोध को लेकर कल मार्च निकाला गया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और हाथों में मशाल लेकर विरोध प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण सुधार की मांग उठाते हुए यूजीसी के कानून का विरोध किया।
आरजेडी प्रवक्ता प्रिया राज यादव अक्सर आरक्षण और SC-ST एक्ट के समर्थन में मुखर होकर बोलती रही हैं। इनकी जुबान पर "मनुवाद से आजादी, ब्राह्मणवाद से आजादी" के नारे हमेशा ही रहते हैं। अब खुद के ऊपर SC-ST एक्ट के तहत केस दर्ज होने का दावा सामने आया है।
3 महीने पहले का पूरा मामला ये था कि एक निजी अस्पताल में प्रसव के दौरान कथित लापरवाही के बाद महिला की हालत बिगड़ गई। उसे दरभंगा रेफर किया गया, जहां उसकी मौत हो गई। घटना के बाद प्रिया ने अस्पताल संचालक के खिलाफ आवाज उठाते हुए प्रदर्शन किया। बाद में अस्पताल संचालक, जो अनुसूचित जाति से हैं, ने संबंधित प्रिया के खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत मामला दर्ज करा दिया।
जिस SC-ST एक्ट के समर्थन में वे अक्सर आवाज़ उठाती रही हैं, आज उसी एक्ट के इस्तेमाल पर वे सवाल उठा रही हैं।
नाम - मदन गोपाल मेघवाल
पद - बीकानेर शहर कांग्रेस
काम - टिकट बेचना
मौका ए वारदात - कांग्रेसी नेताओं ने पहले मदन गोपाल का मुंह मीठा करवाया और फिर उन्हें एक साइड में बुलाया। बहुत आराम से बातें करते हुए अचानक से, दे धपाधप, दे धपाधप
मै इसकी कड़ी निंदा करता हु।🤣🤣
जौहर राजपूतों की एक युद्धकालीन प्रथा थी। जब किला घिरा होता और हार पक्की लगती, तो महिलाएं (और बच्चे) सामूहिक रूप से आग में कूदकर आत्मदाह कर लेती थीं। इसका मकसद यह था कि दुश्मन उन्हें पकड़कर अपमानित न कर सके, गुलाम न बना सके या बलात्कार न कर सके।
यह रोजमर्रा का रीति-रिवाज नहीं था। सिर्फ घेराबंदी के समय होता था। महिलाएं शादी के कपड़े पहनकर रात को जौहर कुंड में आग लगाकर प्रवेश करती थीं। अगली सुबह पुरुष साका करते थे — केसरिया वस्त्र पहनकर, माथे पर राख लगाकर किले से निकलकर लड़ते हुए मृत्यु को गले लगाते थे।
सबसे प्रसिद्ध जौहर चित्तौड़गढ़ में हुए:
1303 में अलाउद्दीन खिलजी के हमले के समय (रानी पद्मिनी की कहानी से जुड़ा)
1535 में बहादुर शाह के हमले के समय (रानी कर्णावती)
1568 में अकबर के घेरे के समय
राजपूत संस्कृति में जौहर को कायरता नहीं, बल्कि अभय राजपूत जौहर माना जाता था। यह सम्मान (मर्यादा) की रक्षा का सबसे बड़ा प्रतीक था। दुश्मन के हाथों जीवित बचना अपमान से भी बड़ा माना जाता था, इसलिए आग को चुना गया।
यह सती से अलग है। सती में विधवा अपने पति की चिता पर बैठती थी। जौहर सामूहिक होता था और युद्ध के दौरान, जब पुरुष अभी जीवित या लड़ रहे होते थे।
आज यह प्रथा नहीं है, लेकिन राजपूत इतिहास और लोकगीतों में इसे साहस और बलिदान का प्रतीक माना जाता है।
#jauhar #जोहार #history
गोल्ड मेडलिस्ट भावना मिश्रा ने SC/ST एक्ट के कथित दुरुपयोग पर उठाए सवाल, जब घर पर नहीं थी तब हुई FIR;
वीडियो के मुताबिक, भावना का आरोप है कि उनके खिलाफ झूठा SC/ST Act का मुकदमा दर्ज किया गया, जिसके चलते उन्हें पांच वर्षो से लगातार कोर्ट की तारीखों, आरोपों और मानसिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि लंबे समय बाद भी न तो उन्हें राहत मिली है और न ही मामला पूरी तरह समाप्त हुआ है।
(नोट: वीडियो की तारीख और मामले से जुड़े सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।)
जंतर-मंतर के उपद्रवियों की FIR हट सकती है…
तो स्वर्ण समाज पर लगाए गए झूठे SC/ST Act के मुकदमे क्यों नहीं?
अगर सरकार के पास FIR हटाने का रास्ता है,
तो न्याय सिर्फ कुछ लोगों के लिए क्यों?
अंबेडकरवादियों को जब सवर्णों से लड़ना होता है तो OBC समाज याद आता है और जब OBC समाज कट्टरपंथियों से लडने के लिए अंबेडकरवादियों से सहयोग मांगता है तो ये हम हिंदू नहीं है कहकर OBC समाज को लात मार देते हैं। इसलिए OBC समाज, सवर्णों के साथ लड़ाई के अंबेडकरवादियों का साथ ना दे।
चलिए कम से कम सवर्णों के आंदोलन का कुछ तो असर होता हुआ दिखाई पड़ रहा है!
बीजेपी सांसदों ने राष्ट्रीय सवर्ण आयोग बनाने की मांग सरकार के सामने रख दी है।
वरिष्ठ मंत्रियों से मुलाकात कर बिहार का हवाला दिया गया। जिस तरह देश में एससी एसटी आयोग है, ओबीसी आयोग है...उसी तरह सवर्णों के हितों और समस्याओं की सुनवाई के लिए भी एक आयोग जरूरी है।
कोर वोटरों का विश्वास बनाए रखने और उनका संदेश सुनने के लिए यह सही कदम होगा।
#सवर्ण_आयोग_बनाओ