हेडिंग जरा देखिए।
700 करोड़ का माया पार्क 🤔🤔🤔
जब किया बहुजन पार्क था यह बसपा सुप्रीमो बहन मायावती जी के परिवार का पार्क नहीं था उसका नाम दिया गया था माया पार्क ???????
लेकिन वहीं भाजपा जब तीन लोगों का स्टैचू लगती है और एक ही जाति के लोगों का तो उसे राष्ट्रीय प्रेरणास्थल नाम दिया जाता है उसे ना तो मोदी पार्क ना तो योगी पार्क कहा जाता है इसे कहते हैं राजनीतिक षड्यंत्र बदनाम करने के लिए.....
ताजूब की बात यह है कि भाजपा और कांग्रेस वाले तो बदनाम करते ही थे बहुजन समाज के तथाकथित नेता भी बोलते थे की बहन जी ने तो सारा पैसा पत्थरों में लगा दिया 🤣🤣🤣
लेकिन भाजपा के पार्क पर भाजपा के मंदिर पर भाजपा के अपने पार्टी के नेताओं के नाम पर बनाए गए पार्क पर यह सवाल ही नहीं उठा पाए ???
कल तो गजब ही हो गया 22000 करोड रुपए एक उद्योगपति के माफ कर दिए गए जो इन सरकारों के प्रचार प्रसार का जिम्मा संभालता है।
कितना 22000 करोड़ बहुत छोटी रकम है।
और बहुजन महापुरुषों के लिए 700 करोड़ बहन जी ने खर्च कर दिया था तो पूरी मीडिया पूरी राजनीति पूरी पार्टियां पीछे पड़ गई थी।
इसे कहते हैं घटिया जातिवाद।
तुम करो तो रासलीला और बहुजन समाज के लोग करें तो करेक्टर ढीला....
@Ratneshgautam0
है क्या कोई मेरिट बाला टक्कर में
सब के सब साले मुगलों की दलाली करते थे फिर अंग्रेजों की दलाली करते थे
दलाली करते ही चमचागिरी करके ही शोषण करने का काम करते थे पढ़ा लिखा एक भी नहीं 1 भी सालों में
द ग्रेटेस्ट इंडियन ऑफ़ द वर्ल्ड🔥🔥🔥 बाबासाहेब अंबेडकर जय भीम 🙏
1. दिल्ली के जंतर मंतर पर संविधान में एस.सी., एस.टी. व ओ.बी.सी. समाज को दिये गये आरक्षण के विरुद्ध अभी हाल ही में जमा हुये कुछ लोगों द्वारा आर्थिक आधार पर आरक्षण को लागू करने की उठाई गई यह नई माँग कतई भी उचित व देशहित में नहीं है। उन्हें आरक्षण के सम्बंध में ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिये जिससे समतामूलक समाज, विकसित व सम्मानित देश बनाने के संवैधानिक कार्यों को आघात पहुँचे।
2. वैसे भी देश में सदियों से जातिवाद की अमानवीयता का शिकार रहे एस.सी., एस.टी. व ओबीसी समाज के लोगों हेतु संविधान में की गई आरक्षण की व्यवस्था के बारे में परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर का यह कहना था कि ’जातिवाद का परित्याग ही सबसे बड़ी देशभक्ति है’। अतः लोग सही देशभक्ति का परिचय ज्यादा दें तो यही उचित होगा।
3. जहाँ तक आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की बात है, तो केन्द्र व राज्य सरकारों द्वारा भी ग़रीबी उन्मूलन के एक नहीं बल्कि अनेकों कार्यक्रमों पर काफी सरकारी धन हर वर्ष ख़र्च किया जाता है, किन्तु उसमें व्याप्त भ्रष्टाचार आदि के कारण इसका सही लाभ अगर देश के लोगों को नहीं मिलता है तो यह तो सरकारी व्यवस्था का सीधा-सीधा दोष है।
4. इसके अलावा, आर्थिक आधार पर आरक्षण की नई व्यवस्था भी देश में लागू है, जिसका भी सही लाभ अपरकास्ट समाज के ग़रीब परिवारों को नहीं मिल पा रहा है बल्कि इसमें छलावा अधिक है।
5. वास्तव में ख़ासकर यही वह भ्रष्ट व जातिवादी सरकारी व्यवस्था है जिसने आरक्षण के संवैधानिक रचनात्मक प्रावधान को कभी सही से ज़मीन पर लागू ही नहीं होने दिया है, जिस कारण एससी, एसटी व ओबीसी समाज के लोग, आज़ादी के इतने लम्बे अरसे के बाद आज तक भी, ग़रीबी, जातिवादी द्वेष, शोषण, अत्याचार व जातिवाद के ज़हर का दंश हर दिन हर स्तर पर लगातार झेलते रहते हैं।
6. अतः सभी सरकारें भी आरक्षण विरोधी तत्वों को शरण व संरक्षण बिल्कुल भी ना दें तो यह व्यापक देश व जनहित में होगा। लोगों से भी अपील है कि वे आरक्षण जैसे अहम् एवं संवेदनशील मुद्दे पर सस्ती राजनीति ना करें और ना ही होने दें।
7. हालाँकि उसी ही दिन पार्लियामेन्ट थाना के बाहर एक पीड़ित व्यक्ति के मामले में एफआईआर दर्ज कराने के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता श्री राहुल गाँधी कई घन्टों तक धरने पर बैठे रहे, जिसका पार्टी को कोई ऐतराज़ नहीं है।
ऽ लेकिन उसके बग़ल में जंतर-मंतर पर दलित व शोषितों के जातीय आधार पर दिये जाने वाले आरक्षण को ख़त्म करवाने के लिए धरना-प्रदर्शन भी चल रहा था, वहाँ पर वे व उनका कोई भी कांग्रेसी साथी उन्हें समझाने तक के लिये भी नहीं गये, जिससे इन वर्गों के प्रति इनकी आरक्षण विरोधी मानसिकता अभी भी साफ झलकती है।
क्या बीजेपी के लोगों को तिरंगे झंडे से इतनी नफरत है? जो स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगे झंडे को न फहराकर अपनी पार्टी बीजेपी का फूल छाप झंडा फहरा रहे हैं।
बीजेपी हर कही राजनीति करती हैं।
आज स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पूरे भारत देश में तिरंगा झंडा फहराया जा रहा है परंतु बीजेपी एंड कंपनी के लोग अपनी राजनीति चमकाने के चक्कर में तिरंगा झंडा का अपमान कर भारतीय जनता पार्टी के झंडा लहरा रहे हैं। आने वाले समय में इस बार भारत देश की जनता भारतीय जनता पार्टी को उखाड़ फेंकेगी पूरे देश से।
इस पर आपकी क्या राय हैं।
@narendramodi@AmitShah@BJP4India@aajtak@ABPNews@UPTakOfficial@BBCHindi
अबे क्या भांग, धतूरा खा कर ट्वीट करता है क्या, गुंडे पार्टी के समर्थक। बीजेपी को बसपा मजबूत कर रही थी। और 2007 में बहन जी की पूर्ण बहुमत की सरकार भी बन गई। जो बीजेपी 88 सीट से 51 पर आ गई थी। उसे सपा ने 2017 में 312 पर पहुंचा दिया। यही नेता जी का सपना था जो पूरा हुआ बसपा को रोकना।
जैसाकि सर्वविदित है कि बी.एस.पी. अध्यक्ष, ज़िला ग़ाज़ियाबाद द्वारा कल श्री जय प्रकाश सिंह को तथा बी.एस.पी. अध्यक्ष, ज़िला बुलन्दशहर द्वारा आज श्री धर्मवीर सिंह अशोक, पूर्व विधायक को पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने के कारण पार्टी से निष्कासित कर दिया गया, जिसकी काफी चर्चा मीडिया में है, लेकिन आज ही बाद में पाटी के तीन वरिष्ठ लोगों - श्री मेवालाल गौतम, श्री मुनक़ाद अली व श्री नौशाद अली - को पार्टी से निष्कासित करने वाला बी.एस.पी. अध्यक्ष, ज़िला बुलन्दशहर के जाली लेटरपैड पर जारी प्रेस विज्ञप्ति पूर्णतः फेक व फ़र्ज़ी है। इसीलिये उस पर क़तई ध्यान नहीं दिया जाये। मीडिया भी ऐसे तथ्यहीन ख़बरों से बचे तथा आगे ऐसे फेक ख़बरों पर ज़रूरी सावधानी बरते अर्थात् पुष्टि/सत्यापन ज़रूर कर ले तो यह उचित होगा।
#DrAmbedkar
आप भले ही किसी भी राजनैतिक दल का समर्थन करते हो, किसी भी विचारधारा का अनुकरण करते हो लेकिन जैसी ही आप अपनी सोशल मीडिया खोलेंगे भले ही अनुकरण करे या नफरत डॉ आंबेडकर से संबंधित कुछ ना कुछ पढ़ेंगे या देखेंगे !
अंबेडकरवादी विचारधारा के सामने अब अन्य विचारक या तो इनकी शरण में है या सहमत है,
जो विरोध में है ,उनके पास डॉ अंबेडकर के खिलाफ जातिय जहर तो मिलेगा पर उनकी आलोचना का कोई ठोस कारण नहीं होगा !
डॉ आंबेडकर ने ब्राह्मण परिवार में विवाह कर जातीय नींव तो बरसो पहले ही ध्वस्त करी अब विभिन्न धार्मिक कुरीतियों की भी जड़े खोद कर रख थी !
डॉ आंबेडकर के विचारों को आरंभ में लोगों ने विरोध करके अब स्वीकार किया है !
डॉ आंबेडकर जयंती 14 अप्रैल 1984 पर बहुजन समाज पार्टी #BSP के छोटे से कार्यालय से शुरू हुआ कारवां आज अपने शिखर की और दिन दोगुनी रात चौगुनी रफ्तार से बढ़ रहा है !
जिस RSS ने कभी डॉ आंबेडकर के पुतले फूंके आज अपने कार्यालय में भव्य अंबेडकर जयंती का आयोजन कर रहा है,
कांग्रेस जिसने डॉ आंबेडकर को रोकने के तलहटी तक जोर लगाया वो महात्मा गांधी को भूल अब डॉ आंबेडकर में जगह तलाश रही है,
समाजवादी पार्टी , राष्ट्रीय लोकदल, जनता दल, कम्युनिस्ट व अन्य जिन्होंने तब डॉ आंबेडकर के स्मारकों तक की भरकस आलोचना करी किंतु अब इनकी सुबह बिना अंबेडकर का नाम लिए नहीं होती !!
बसपा पिछले डेढ़ दशक से सत्ता से बाहर है, फिर भी उसके विचार लगातार घर घर पहुंच चुके है, या पहुंच रहे है !
लोकतंत्र में लड़ाई वैचारिक है और बसपा इस लड़ाई को सत्ता से बाहर रहते हुए भी जीत गई है,
2027 में यूपी प्रदेश और 2029 केंद्रीय सरकार में अपना भारी शेयर रखेगी,
भारतीय जनता विचारों पर वोट करती है तब बसपा ही एक मात्र पार्टी जिसने विचारों से कोई समझौता नहीं किया,
बसपा सुबह लोहियावादी, दुपहर को गांधीवादी, शाम को सावरकर वादी नहीं बनती,
जब से बसपा का उदय हुआ उसका एक ही विचार एक ही उद्वेश्य एक मिशन जिसमें कोई समझौते की जगह नहीं रही,
विचारों के प्रति इतनी कटिबद्धता किसी विश्व के किसी भी पार्टी में देखने को नहीं मिलती !!
बसपा के कार्यकर्ताओं समर्थकों से अन्य पार्टी को सीखना चाहिए बिना वैचारिक समझौते कैसे अपना स्थान निरंतर बनाए रखना है !!
आप सभी को डॉ आंबेडकर जयंती की शुभकामनाएं !
#Baba_Manish
सावधान बहुजन समाज!
जो लोग सत्ता में आते ही बाबा साहब के नाम पर बने जिलों और स्मारकों का नाम बदल देते थे, आज वो जयंती मनाने का ढोंग कर रहे हैं। ये अम्बेडकर प्रेम नहीं, 2027 के चुनाव की वोट की भूख है!
#बहनजी_ने_बुलाया_है#Mission2027
कल से समाजवादी मित्र उछलकूद कर रहे है। कह रहे थे कि देखा अखिलेश यादव की बुद्धिमत्ता, अब रोहणी घावरी के सहारे दलितो का वोट मिलेगा। बल्ले बल्ले।
मेने उन्हें कहा कि अखिलेश यादव का एक लड़की ने बढिया बना दिया और अखिलेश बन गए। अखिलेश यादव को अब दिख गया कि;
"चन्द्रशेखर बसपा का कुछ नुकसान नही पाएंगे लेकिन मुस्लिम में घुसपैठ करके सपा को जड़ खत्म कर देंगे"
रोहणी घावरी का दावा है कि उनकी अखिलेश यादव से बात हुई जिसपर दोनो इस बात पर सहमत हुए की;
"जाटव से अलग एससी जातियो को सपा की तरफ मोड़ने के लिए रोहणी अखिलेश को लेकर सभाएं करेगी । रोहणी का कहना है कि;
बाल्मीकि = 14 लाख
पासी = 70 लाख
हैं। उनकी बस्तियो में जाकर प्रचार करेगी।
अगर यह सच है तो;
"रोहणी घावरी की बुद्धिमता का कायल हो गया। अखिलेश यादव का इस लड़कीं ने दिन दहाड़े पप्पू बना दिया"
रोहणी घावरी एंटी जाटव बयान देती रहती हैं रोजाना चन्द्रशेखर के नाम पर पूरी जाति को टारगेट करती है।।
और;
"इससे चन्द्रशेखर का एक तरह से प्रचार होता है। जितना चन्द्रशेखर का प्रचार होगा, उतना मुस्लिम वोट अखिलेश से भागेगा। इंहा जाटव जाति जो उत्तर प्रदेश में 2 करोड़ 70 लाख है, उसमे एंटी अखिलेश मुहिम चलेगी, जो बसपा से और ज्यादा पुनः जुड़ेगा"
और सबसे बड़े बात यह है कि;
"चन्द्रशेखर की और न ही इस मोहतर्मा की रिच अनुसुचित जातियो में इतनी है कि कोई एससी इन्हें सुनेगा"
तो जनाब
"अखिलेश यादव का एक मामूली सी लड़की ने बना दिया"
तौबा तौबा। क्या दिन आ गए।
☺️😊☺️😊😊😊😊😊
विशाल आबादी वाले अपने भारत देश में ’बहुजन समाज’ अर्थात् बहुजनों के मसीहा भारतरत्न बोधिसत्व परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर को आज उनकी जयंती पर प्रातः मेरे द्वारा शत्-शत् नमन, पुष्पांजलि एवं अपार श्रद्धा-सुमन अर्पित करने के साथ ही बी.एस.पी. के लोगों द्वारा पूरे देश भर में ख़ुद व अपने परिवार सहित उन्हें पूरी मिशनरी भावना के साथ भावभीनी श्रद्धांजलि एवं श्रद्धा-सुमन अर्पित करने के लिये सभी लोगों का तहेदिल से आभार, शुक्रिया एवं धन्यवाद।
सर्वविदित है कि बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर का पूरा जीवन देश के ग़रीबों उपेक्षितों, शोषितों तथा जातिवाद एवं सामंतवाद से पीड़ित महिलाओं आदि समेत ’बहुजन समाज’ की सुरक्षा, सम्मान व उत्थान के लिये अत्यन्त ही कड़े संघर्ष में बीता, और अन्ततः जिसकी गारण्टी उन्होंने संविधान में सुनिश्चित करने का ऐतिहासिक कार्य किया और अमर हो गये और जिसके लिये देश हमेशा उनका कृतज्ञ रहेगा।
किन्तु काश, देश की केन्द्र व यहाँ राज्यों की सत्ता में रहने वाली पार्टियाँ बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के अति-मानवतावादी, सर्वजन-हितैषी व बहुजन-कल्याणकारी संविधान के पवित्र उद्देश्यों को प्राप्त करने में सही से सफल हो पातीं तो भारत अभी तक स्वावलम्बी/आत्मनिर्भर व विकसित देश बनकर यहाँ के करोड़ों बहुजनों की अपार ग़रीबी, बेरोज़गारी, जातिवादी द्वेष, शोषण व जुल्म-ज़्यादती आदि से मुक्त समता एवं न्याय-युक्त जीवन लोगों को ज़रूर दे पाता।
अगर ऐसा नहीं हो पाया है तो क्यों? इसका जवाब ढूंढने पर देश में बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर का ’सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक मुक्ति’ का कारवाँ चुनावी सफलता भी हासिल करके अपनी मंज़िल की ओर ज़रूर आगे बढ़ेगा। जय भीम, जय भारत
बाबु जगजीवनराम इस तश्वीर मे एयरलाइंस का निजीकरण से "राष्ट्रीयकरण" करके 1 अगस्त 1952 में एयर इण्डिया को राष्ट्र को समर्पित करते हुए।
श्रम मंत्री रहते हुए कार्य
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a.एम्प्लाइज स्टेट इनसौरेंस एक्ट 1948
b.प्रोविडेंट फंड एक्ट 1952
c.इण्डस्ट्रियल डिस्प्यूट एक्ट १९४७
डी.मिनिमम वेजेज एक्ट
e.इंडियन ट्रेड यूनियन संसोधन एक्ट 1960
f.पेमेंट ऑफ़ बोनस एक्ट 1965
संचार मंत्री रहते हुए
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गाँवों गाँवों में डाकघर जो आज दिखते है वो बाबूजी के कार्यो का ही परिणाम है. इसपर डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद ने कहा था की;
"बाबु जगजीवनराम दृढ संकल्प कार्यकर्ता तो है ही, साथ ही त्याग में भी वे किसी के पीछे नही रहे है यह उनका उत्साह व लग्न है"
रेल मंत्री रहते हुए
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बाबु जगजीवनराम जी रेल मंत्री रहते हुए आधुनिक "रेलवेज" के निर्माता है। उन्होंने पांच साल तक एक रुपया भी किराया नही बढ़ाया, जो की रिकोर्ड रखता है; इसके अलावा;
"रेलवे में एससी/एसट कर्मचारियो तक के लिए पानी पिने की अलग व्यवस्था थी, जिसे बाबूजी ने खत्म की. इसके अलावा बड़े स्तर पर एससी/एसटी के बैकलोग भरे. कर्मचारियो के हितो के लिए काफी कार्य करे."
बांग्लादेश बनवाने में योगदान
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भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय बाबु जगजीवनराम जी रक्षा मंत्री थे, उन्होंने सेना का आधुनिकरण किया, साजो समान बढाए, गोला बारूद व युद्ध लड़ने के साधनों को बढ़ाया व सेना के जवनो के बीच बार बार जाकर उनका हौसला बढ़ाया, एक कुशल रणनीति बनाई. उन्होंने ही बांग्लादेश निर्माण की घोषणा 16 दिसम्बर 1971 को संसद में करी. उनकी स्पीच इतिहास में दर्ज है. बांग्लादेश निर्माण में उनका योगदान इससे समझा जा सकता है की उन्हें बांग्लादेश ने :युद्ध वीर" की उपाधि दी, जिसमे उन्होंने लिखा की;
"जगजीवन राम ने बांग्लादेश (तब पूर्वी पाकिस्तान) और भारत की संयुक्त कमान बनाई। इसने अंतिम और निर्णायक हमला कर जीत दिलाई। इसके अनुसार जगजीवन राम ने बांग्लादेश के लड़ाकों को प्रशिक्षण, हथियार और साजो सामान से लैस कर सफल युद्ध रणनीति तैयार की। उसे अंजाम दिया।
"
भूख से बेहाल देश को उबारा
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1966-67 के चुनाव के बाद उन्हें श्रम मंत्री रहते हुए खाध व कृषि मंत्रालय मिला.चीन व पाकिस्तान से जंग के कारण देश में "गरीबी व भुखमरी" पैदा हो गयी थी, उस समय अमरीका से पी.एल.-480 के अन्तरत गेहू व ज्वार मिल रहा था, जो की नाकाफी था. तब ऐसी अत्यत्न कठिन परिस्तिथि में बाबूजी ने ने डॉ॰ नॉर्मन बोरलाग की सहायता से हरित क्रान्ति की बुनियाद रखी व मात्र दो वर्षों के उपरान्त ही भारत फ़ूड सरप्लस देश बन गया | कृषि एवं खाद्य मंत्रालय में रहते हुए बाबूजी ने देश को भीषण बाढ़ से भी राहत पहुँचाई व भारत को खाद्य संसाधनों में आत्मनिर्भर बनाया |
बाबूजी ने सर्वप्रथम भारत के राजनैतिक मानचित्र को पूर्णतया परिवर्तित कर दिया | भारत-पाकिस्तान की उस अभूतपूर्व जंग में बाबूजी ने देश की जनता से वायदा किया कि ये जंग भारतभूमि के एक सूई की नोक के बराबर तक भाग पर भी नहीं लड़ी जायेगी, और वे इस वायदे पर कायम रहे | श्री राजीव गाँधी ने कुछ इस प्रकार से अपने विचार व्यक्त किए थे "देश को अनाज की दृष्टी से आत्म-निर्भर बनाने तथा बांग्लादेश की मुक्ति के युद्ध में उनका योगदान हमेशा याद रखा जायेगा'
वर्ष 1974 में बाबूजी ने कृषि एवं सिंचाई विभाग की ज़िम्मेदारी ली व एक नयी प्रणाली 'सार्वजनिक वितरण प्रणाली' की नीव रखी जिसके द्वारा यह सुनिश्चित किया गया कि देश की आम जनता को पर्याप्त मात्रा व कम दाम में खाद्य पदार्थ उपलब्ध हों |
निष्कर्ष
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सबसे मुख्य निष्कर्ष यह है की;
"जिस समाज को धर्म के आधार पर सैकड़ो वर्षो तक हाशिए रखा गया, उन्हें युद्ध लड़ने से लेकर प्रशासन में जगह नही दी गयी, दूर रखा गया, जब भी उन्हें मौका मिला उन्होंने रिकोर्ड बनाया है. डॉक्टर अम्बेडकर से लेकर बाबु जगजीवनराम जी व बहन कुमारी मायावती जी को जब भी केन्द्रीय मंत्री या फिर मुख्यमंत्री (बहनजी) बनने का मौका मिला, उन्होंने सर्वोत्तम दिया. उन्होंने गरीब से भी गरीब को ध्यान मे रखा. भारत में जब तक हासिये के समाज से निकले व्यक्ति को जिम्मेदारी नही मिलेगी तब तक हर शासन में कुछ वर्ग खुश रहेंगे, और कुछ दुखी. जबकि बाबा साहब, बाबूजी या बहनजी के कार्यकाल में हर वर्ग समान रूप से खुश रहा है.
यह सभी;
"एससी/एसटी वर्ग के लिए मनोबल का आधार होना चाहिए की उनके बीच से निकले व्यक्तिओ को जब भी जिम्मेदारी मिली, उन्होंने उस जिम्मेदारी को सर्वोत्तम रूप से निभाया है और उनके कार्यकाल को देश के विकास के तौर पर याद किया जाता है."
बाबू जगजीवनराम जी को उनके जन्मोत्सव पर नमन:
विकास कुमार जाटव
समस्त देशवासियों तथा दुनिया भर में रहने वाले सभी भारतीय नागरिकों एवं उनके परिवार वालों को भी आज 77वें गणतंत्र दिवस की दिली मुबारकबाद/हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें।
वैसे आज के दिन अपने बेहतरीन संविधान पर गर्व करने के साथ-साथ इसका विशेष महत्व तभी है जब सरकारों के बड़े-बड़े दावों और लुभावने वादों आदि के भूलभलैयों से अलग हटकर, यह ईमानदार ऑकलन किया जाये कि क्या केन्द्र व राज्य सरकारों की केवल छलावापूर्ण बातें हैं या फिर संविधान की सर्वसमाज हितैषी सच्ची मंशा के हिसाब से देश ने राजनीतिक, सामाजिक व आर्थिक लोकतंत्र के क्षेत्र में अपेक्षित विकास करके लोगों का जीवन स्तर में कुछ बहु-अपेक्षित सुधार किया है? ऐसा करके ही देश की ज्वलन्त समस्याओं से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।
इसके साथ ही, गणतंत्र दिवस पर विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ठ सेवा के लिये जिन लोगों को पद्म विभूषण, पद्म भूषण व पद्मश्री तथा सर्वोच्च वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया है उन सबको तथा उनके परिवार वालों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें।
इतना ही नहीं बल्कि देश में ’बहुजन समाज’ के करोड़ों ग़रीबों, शोषितों-पीड़ितों एवं उपेक्षितों को अपने पैरों पर खड़ा करके उन्हें आत्म-सम्मान व स्वाभिमान का जीवन दिलाने के संघर्ष हेतु अपना पूरा जीवन समर्पित करने वाले बहुजन समाज पार्टी के जन्मदाता एवं संस्थापक मान्यवर श्री कांशीराम जी को, देश भर में उनके करोड़ों अनुयाइयों की चाहत के अनुसार अब बिना और देरी किये, भारतरत्न से सम्मानित किया जाए तो यह उचित होगा, जिसकी माँग बी.एस.पी. लगातार करती आ रही है।
कितनी बेटियां है भारतीय समाज में जिनका जन्मदिन पूरा विश्व मनाता है, जिनको मानने वाले,जानने वाले देश विदेश के कोने कोने में मौजूद हैं। वो बेटी जिसने अपनी स्त्रीवत सारी इच्छाओं, आकांक्षाएं को बहुजन समाज को शासक कौम बनाने में लगा दिया, उम्र के इस पड़ाव पर जब सब अपने नाती पोतों के साथ खेलते हुए, उनके करियर सेटल कराने में अपना जीवन व्यतीत कर रहे होते हैं ऐसे में वो बेटी समाज को मजबूत करने में रात दिन लगी हुई है। अपनी एक भी बेटी को इस महान व्यक्तित्व के चरण की धूल भर भी बना पाए हम, और चले हैं इस महान बेटी को जिसे बड़ा हो या बूढ़ा, बहनजी कह कर सम्मान देता है, उसका मूल्यांकन और आंकलन करने। हैसियत आंकने के लिए औकात होनी चाहिए। हमें गर्व है बहुजन विरासत को संभालने वाली अपनी सम्मानित बहना का जिनका जीवन मेरे जैसी तमाम महिलाओं के लिए एक नज़ीर है। आपके संघर्ष से हमने #Prof_Indu_Choudhary प्रेरणा ली और गांव गांव में मान्यवर साहेब कांशीराम और बहुजन विचारधारा को लगातार पहुंचाने के कार्य में लगे हुए हैं और लगे रहेंगे, इस अटूट विश्वास और लगन के साथ कि शासक बने बिन हमारा कोई भी अधिकार सुरक्षित नहीं रह सकता।
जिसने सत्ता का स्वाद चखाया, मान्यवर कांशीराम ने जिसे अपनी विरासत संभालने की जिम्मेदारी दी, जिसे समाज ने सिर आंखों पे बिठाया , जिसके कुर्सी संभालने पर प्रत्येक बहुजन महिला स्वयं को मुख्यमंत्री से कम नहीं समझती है, और बेटियां गली चौराहों पर लाउडस्पीकर पर बेझिझक और निडर होके सत्ता पर आसीन होने का दंभ भरती हैं, ऐसी बहुजन समाज की शेरनी बहना का आज जन्मदिन है जिसको हमारी पार्टी जनकल्याणकारी दिवस के रूप में मनाती है।
आप सभी को आदरणीय बहन कुमारी मायावती जी के 70 वें जन्मदिन की ढेर सारी मंगलकामनाएं |
#Mission2027 #Mayawati #HappyBirthday_bahenji
देश की प्रथम दलित महिला मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश की चार बार रही मुख्यमंत्री विश्व की आठ ताकत वर महिलाओं स्थान रखने वाली,शोषितों वंचितों गरीबों की मसीहा आयरन लेडी बहन कुमारी मायावती जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।