इन दिनों हनुमान अंश फ़िल्म को लेकर बहुत सारी चर्चा चल रही है। कुछ लोग सवाल पूछ रहे हैं कि नीम करौली बाबा क्या सचमुच हनुमान अंश हैं। मैं अपने अनुभव के आधार पर कह सकता हूँ कि स्वयं हनुमान शिव अंश हैं। एक समय में एक से अधिक लोग भी किसी देवता के अंश हो सकते हैं । जैसे भगवान राम और भगवान परशुराम दोनों विष्णु के अंश थे और एक ही समय में मौजूद थे। जैसे भगवान कृष्ण और उद्धव एक ही समय में मौजूद थे और दोनों विष्णु के अंश थे ।इसी प्रकार अलग अलग समय में अलग अलग महापुरुष किसी देवता के अंश हो सकते हैं ।आज भी एक महापुरुष भगवान शिव के अंश, और एक दूसरे महापुरुष भगवान विष्णु के अंश रूप में मौजूद हैं। लेकिन किन्चित कारणों से उनका नाम लेने की ज़रूरत नहीं समझता ।इसलिए नीम करौली बाबा की क्षमता और हनुमान, शिव और भगवान राम के प्रति उनके प्रेम को देखते हुए उन्हें हनुमान अंश कहना मेरी दृष्टि में सर्वथा उचित है।
Offline and Online #SufiDarbar will be conducted at Samarthguru Dham, Murthal on Thursday 6 Aug, 26 from 09.15-10.00 pm by Acharya Chetan Ji to experience #Shaktipat and Healing of Negative energy/feelings. 🌹
Contact 📞+91 9671400193/96
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शंकराचार्य कुछ ऐसे हैं
संतों को गाली देते हैं
कुछ श्लोक यादकर ग्रंथों का
ज्ञानी अपने को कहते हैं
अब कौन उन्हें समझाए भला
है संत हंस पंडित बगुला
हंसत्वं शरणं गच्छामि
गोविंदं शरणं गच्छामि
समर्थगुरु धाम में 1100+ वृक्ष आश्रम की शोभा बढा रहे है। इससे आश्रम का तापमान निकटस्थ शहर के तापमान से 4 डिग्री सेल्सियस कम रहता है हवा शुद्ध, प्रदूषण न्यूनतम। समर्थगुरु का नारा है-
'हरा-भरा हिंदुस्तान चाहिए
हमको भारत महान चाहिए
क्रांति ला दें कुशलता में जो
हमको ऐसे इन्सान चाहिए।'
#missionsangam
With @SiddharthAulia Ji's blessings, Feeling truly blessed to visit Pilot Baba’s Ashram in Haridwar. I had a deeply graceful and enriching meeting with Mahamandaleshwar Maa Chetna, Ma Shraddha, and Papu ji. 🙏✨ #missionsangam"
Glimpses of Print Media coverage inviting all seekers and Osho lovers to witness Cultural Program which will be performed by artists of Punjab SG Maitri Sangh in Osho Birthday Celebration on 11 Dec,25 in the presence of Samarthguru @SiddharthAulia Ji,at Samarthguru Dham,Murthal.
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न्याय के पक्ष में यदि वह ना लड़े
सत्य हारेगा वह ना ऐसा करे
कर्म करता संसारी युक्त काम हो
योगी करता है कर्म निष्काम हो
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ज्ञानी को चाहिए, कर्मयोगी रहे
ख़ुद करे कर्म औरों को प्रेरित करे
ज्ञानी रहता कर्म का साक्षी है
बेहोशी में जीता अहंकारी है
-समर्थगुरु, उत्तरकांड,
श्री सिद्धार्थ रामायण
मैं खड़ी इस पार आज मुझे जाने दे | ऐसे सुंदर और मधुर गीत सुनने के लिए Samarthguru Sangeet चैनल सब्स्क्राइब कीजिए Lyrics - Samarthguru | Music - Samarth... https://t.co/1mFLTsxUob via @YouTube
समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया जी द्वारा रचित पुस्तक 'सब्दै बंध्या सब रहै' (संतमत-39) में संत दादू साहब जी की वाणी पर प्रवचनों में जानें ओंकार से जुड़ा हुआ जीवन जीने पर स्थितप्रज्ञता कैसे घटित होती है। यह पठनीय,संग्रहणीय है। गैलेरिया से प्राप्त कर सकते हैं। मूल्य ₹350
📞+919671400107
#ओशोजन्मोत्सव:
For Senior Seekers:
Sp Abhay Pad (8-10 Dec)
For Freshers:
Sp Swasthya Pragya (8-10 Dec)
Sp Dharma Drishti (11-13 Dec)
Sp Dampatya Pragya (11-13 Dec)
Cultural Program:11 Dec
Bonfire on Tuesday & Friday from 9-10 pm
Concession 30-40%
For Booking:
📞9671400193/96
#ओशोजन्मोत्सवः
Samarthguru Dhara is pleased to invite all seekers and Osho lovers in following special programs during Osho Birthday Celebration Week:
For Freshers:
Sp Successful Living (8-10 Dec,25)
Sp Hans Pragya (8-10 Dec,25)
Sp Swasthya Pragya (8-10 Dec,25)
Sp Dharma Drishti (11-13 Dec,25)
Sp Nature Healing (11-13 Dec,25)
Sp Maitri Pragya (11-13 Dec,25)
Sp Dampatya Pragya (11-13 Dec,25)
For Senior Seekers:
Sp Abhay Pad (8-10 Dec,25)
Cultural Program: 11 Dec,25
Bonfire on Tuesday and Friday from 9-10 pm
Concession: 30-40%
For Booking
📞9671400193/96
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भौंरे जैसा गुंजायमान
पंछी बनकर क्रीड़ा करता
नीले नभ में प्रभु विद्यमान
सरिता बनकर नित है बहता
जो दिखता प्रभु की लीला है
चला रहा रात दिन क्रीड़ा है
अथ लीला शरणं गच्छामि
गोविंदं शरणं गच्छामि
-समर्थगुरु, गोविंद गीता
सद्गुरु की बांह पकड़ो, सद्गुरु की शरण जाओ और शरणागत भाव की रक्षा करो। होश में जियो, साक्षी होकर जगत में जियो और गोविंद की ओर चलो।
-Samarthguru @SiddharthAulia Ji 🏵
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सूरज बन आलोकित करता
बादल बनकर बारिश करता
प्रभु पर्वत बन उन्नत होता
सागर बनकर नर्तन करता
वह अलख निरंजन निराकार
नित गुंजित उसमें ओंकार
ओंकारं शरणं गच्छामि
गोविंदं शरणं गच्छामि
-समर्थगुरु, गोविंद गीता