#इति_सिद्धम
वे अपने लिये संसद के बनाये क़ानून को भी नहीं मानेंगे ,क्योंकि उनको न्यायिक स्वतन्त्रता चाहिये ।
बिना किसी परीक्षा में सम्मिलित हुए केवल अनुभव और सिफारिश के आधार पर नियुक्ति और प्रमोशन लेते रहेंगे ।
आप पर वे नियम थोपे जाएँगे जो संसद ने आपके लिए बनाए ही नहीं हैं
2017 के संशोधन सहित आरटीई में कहीं टेट का उल्लेख नहीं है आरटीई के 23(1) के द्वारा प्रदत्त शक्ति से एनसीटीई ने 23 August 2010 को minimum qualification परिभाषित की है जोकि नियुक्ति वर्षों के अनुसार with tet और without tet है लेकिन माननीय जी ने minimum qualification को TET लिख दिया तो लिख दिया ।
आपको नियुक्ति हेतु निर्धारित परीक्षा उत्तीर्ण करने के नियुक्त होने के 20-25 वर्षों बाद भी परीक्षा में बैठायेंगे ।
अनुभव के आधार पर पदोन्नति तो दूर नौकरी (उस नौकरी में जिसमें नियुक्ति की प्रक्रिया में कोई दोष या आपत्ति नहीं है)में भी आप नहीं रहेंगे ।20-25 lakhलाख शिक्षकों की नौकरी जाये तो जाये उन पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता।
हमने सदैव कहा कि रास्ता संसद से निकलेगा ।इसलिए अब minimum qualification को parliament से define कराने हेतु आगे बढ़ेंगे ।
@narendramodi@AmitShah@dpradhanbjp@myogiadityanath
कम्पोजिट विद्यालय मखुनी, रानीपुर, मऊ के प्रांगण में स्थित यह ट्रान्सफर अगर कोई साथी हटवाने में कोई सहयोग/परामर्श देना चाहें तो उसका स्वागत है क्योंकि यह छात्रों के सुरक्षा का सवाल है। विभाग को कई बार प्रार्थना पत्र दिया जा चुका है लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
Teachers Federation of India के बैनर तले देश के कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक के लाखों शिक्षकों ने रामलीला मैदान दिल्ली पहुँच कर बता दिया कि शिक्षकों के साथ अन्याय को बर्दास्त नहीं किया जायेगा ।रैली में उपस्थित सभी शिक्षकों ने साफ़ कहा कि भर्ती के समय सरकार द्वारा जो भी नियम और योग्यता निर्धारित की उसे अर्जित करने के बाद ही सभी शिक्षक नियुक्ति पाये है ।सुप्रीम कोर्ट द्वारा आरटीई से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टेट की अनिवार्यता थोपा जाना किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा ।शिक्षकों ने कहा कि उनकी नियुक्ति सरकार द्वारा की गई इसलिए उसकी सेवा शर्तों की सुरक्षा का दायित्व भी सरकार का है ।फेडरेशन ने माँग की कि भारत सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश के retrospective effect को समाप्त करने के लिये क़ानून बनाए ।
रैली के मुख्य अतिथि मा सांसद श्री जगदंबिका पाल ने रैली को संबोधित करते हुए कहा हम देश के शिक्षकों की आबाज को देश यशस्वी प्रधानमंत्री जी तक पहुँचाएँगे और शिक्षकों का अहित नहीं होने दिया जायेगा ।
हम देश भर से आये सभी साथियों का हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं ।
#NoTetBeforeRteAct
@narendramodi@jagdambikapalmp@dpradhanbjp@AmitShah@PMOIndia
#आलोचना_की_प्रवृत्ति_और_उसका_दुष्परिणाम
जिस विचार की शुरुआत ही दूसरों की कमियाँ खोजने से होती है, वह अंततः स्वयं को ही कमजोर कर देता है। निरंतर आलोचना करने वाला व्यक्ति धीरे-धीरे अपने भीतर नकारात्मकता का ऐसा जाल बुन लेता है, जिसमें वह स्वयं फँस जाता है। इसी को संत शिरोमणि पूज्य कबीर दास जी ने भी हम सभी का मार्गदर्शन किया है जो आज के समय में बहुत ही अधिक प्रासंगिक है।
“बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय।
जो दिल खोजा आपना, मुझ से बुरा न कोय॥”
वर्तमान समय में सोशलमीडिया हो या सार्वजनिक मंच हों, तथागत लोगों की शुरुआत ही किसी की आलोचना से होती है और अन्त भी आलोचना से। जबकि ऐसा लगता है कि उनके पास न स्वयं के जीवन में कुछ अच्छाई है और न ही जिसके वह शुभचिंतक बनने का प्रयास कर रहे हैं वहाँ से भी कोई अच्छाई दिखाई नहीं देती है। यही कारण है,
आज हम देख रहे हैं कि -
चारों ओर नकारात्मक दृष्टिकोण में लगातार वृद्धि हो रही है।
व्यक्तिगत हित लाभ के लिए सामाजिक सामन्जस्य को बिगाड़ा जा रहा है।
मतभेद को मनभेद में बदला जा रहा है।
असहमति को शत्रुता समझ लिया जाता है।
संवाद के स्थान पर आरोप-प्रत्यारोप का वातावरण बन रहा है।
परिणामस्वरूप समाज में अविश्वास, कटुता और विभाजन बढ़ रहा है। जब एक मनुष्य ही दूसरे मनुष्य को गिराने में ऊर्जा लगाने लगे, तो सहज ही मनुष्यता कमजोर होने लगती है। यही कारण है कि आज एक दूसरे को नीचा दिखाने की होड़ मची हुई है। अच्छाई और सच्चाई हार रही है तथा बुराई, असत्य और अहंकार मानवता और न्यान को कुचलते जा रहे हैं। इसके लिए-
"आत्मचिंतन ही सच्चा सुधार है।"
पूज्य कबीर जी का संदेश सीधा, साफ और सरल है - "पहले स्वयं को देखो।"
यदि हम प्रतिदिन कुछ समय आत्ममंथन में लगाएँ और स्वयं से पूछें कि -
क्या मैं निष्पक्ष हूँ?
क्या मेरी आलोचना सुधार के लिए है या केवल अपमान के लिए?
क्या मैं वही आचरण करता हूँ जिसकी अपेक्षा दूसरों से करता हूँ?
तो आधी समस्याएँ स्वतः समाप्त हो जाएँगी।
इसलिए हम सभी को "सकारात्मक दृष्टिकोण की आवश्यकता है।"
समाज को बचाने के लिए केवल कानून पर्याप्त नहीं, बल्कि संवेदनशील मन की बहुत अधिक आवश्यक है।
इसलिए हम सबको चाहिए कि -
सिर्फ आलोचना ही नहीं, सुझाव भी दें।
सिर्फ स्वयं ही न कहें, दूसरों की सुनें भी तथा सत्य को स्वीकार भी करें।
व्यक्ति नहीं, विचार पर चर्चा करें।
त्रुटि नहीं, समाधान खोजें।
दोष नहीं, गुण देखने की आदत डालें।
"जब हम किसी के भीतर अच्छाई खोजने लगते हैं, तो हमारे संबंधों में मधुरता स्वतः आ जाती है। सकारात्मक सोच केवल व्यक्तिगत शांति नहीं देती, बल्कि सामूहिक सौहार्द का आधार बनती है।"
मनुष्यता की रक्षा, हम सबकी जिम्मेदारी है।
मनुष्यता कोई सिद्धांत नहीं, बल्कि व्यवहार है।
यदि हम चाहते हैं कि समाज में प्रेम, सहयोग और सद्भाव बना रहे, तो हमें स्वयं उदाहरण बनना होगा।
कटु शब्दों के स्थान पर संयमित भाषा अपनाएँ।
प्रतिक्रिया से पहले विचार करें।
मतभेद के बावजूद सम्मान बनाए रखें।
याद रखिए, "समाज को तोड़ना सरल है, जोड़ना कठिन। आलोचना की आग क्षणभर में फैल सकती है, पर विश्वास का दीपक जलाने में समय लगता है।"
यदि हम सचमुच समाज के शुभचिंतक बनना चाहते हैं, तो हमें आलोचनात्मक प्रवृत्ति पर अंकुश लगाकर आत्मसुधार की दिशा में कदम बढ़ाने होंगे।
कबीर का यह संदेश केवल दोहा नहीं, बल्कि जीवन का मार्ग है। जब हम अपने भीतर झाँकेंगे, तभी बाहर का संसार सुंदर दिखाई देगा। तभी-
हम आलोचना नहीं, निर्माण करेंगे।
हम विभाजन नहीं, संवाद करेंगे।
हम नकारात्मकता नहीं, सकारात्मकता फैलाएँगे।
क्योंकि मनुष्यता को बचाए रखना केवल किसी एक व्यक्ति का नहीं, हम सभी का सामूहिक दायित्व है। 🙏
सादर- विमल कुमार
मिशन शिक्षण संवाद
#शहीदों_की_पंचायत
कहा जाता है कि जब धरती पर अन्याय अपनी सीमा लाँघने लगता है, तब इतिहास अपने पन्नों से निकलकर सवाल पूछता है।
एक ऐसी ही रात थी, न चाँदनी, न अँधेरा, बस एक अजीब-सी रोशनी। उसी रोशनी में एक विशाल बरगद के नीचे शहीदों की पंचायत सजी।
सबसे पहले महात्मा गांधी अपने हाथ में लाठी लिए आगे बढ़े। उनके पीछे भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, चंद्रशेखर आज़ाद, सुभाष चंद्र बोस, रानी लक्ष्मीबाई, अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ, खुदीराम बोस, बिरसा मुंडा, तात्या टोपे आदि अनगिनत चेहरे, अनगिनत बलिदान।
बरगद की जड़ें जैसे इतिहास में धँसी थीं और शाखाएँ भविष्य की ओर फैली हुई।
गांधीजी ने शांत स्वर में कहा,
“हमने इस देश को आज़ाद कराने के लिए सत्य, अहिंसा और बलिदान का रास्ता चुना था। पर आज जो समाचार हम तक पहुँच रहे हैं, वे मन को व्यथित कर देते हैं।”
भगत सिंह ने तीखे स्वर में बात आगे बढ़ाई-
“हमने अंग्रेज़ों से लड़ाई Sc, St, OBC, हिंदू या मुसलमान बनकर नहीं लड़ी थी, बल्कि भारतीय बनकर लड़ी थी। आज उसी भारत की राजनीति जाति और धर्म के नाम पर नफरत फैला रही है, भारतीय समाज, देश व राष्ट्र की एकता और अखण्डता को मात्र अपने क्षणिक लोभ और लालच के लिए कमजोर किया जा रहा है, यह देखकर क्रांति भी आज शर्मिंदा है।”
रानी लक्ष्मीबाई की आँखों में आँसू थे।
“मैंने अपने प्राण इसलिए दिए थे कि भारत की हर बेटी सुरक्षित और सम्मानित रहे। लेकिन आज समाज बँटता जा रहा है, कहीं जाति के नाम पर, कहीं धर्म के नाम पर। क्या यही आज़ादी थी?”
नेता जी सुभाष चंद्र बोस ने गहरी साँस ली-
"तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा" मैंने यह देश को एकजुट करने के लिए कहा था। लेकिन आज खून तो बह रहा है, पर भाई का, भाई के ही हाथों तथा एक भारतीय का दूसरे भारतीय के हाथों।”
अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ और रामप्रसाद बिस्मिल आश्चर्य चकित होकर, एक साथ बोले।
“हम अलग धर्म के थे, पर फाँसी के फंदे पर साथ लटके थे। आज लोग यह क्यों भूल गए कि देश, जाति और धर्म से बड़ा होता है?”
तभी बरगद के पत्ते भी सरसराए, मानो धरती भी अपनी सहमति जता रही हो।
एक क्षण की शान्ति के बाद-
बिरसा मुंडा बोले।
“हमने आदिवासी, दलित और वंचित सबके अधिकारों के लिए संघर्ष किया था। लेकिन आज भी समाज में ऊँच-नीच की दीवारें खड़ी हैं। यह दीवारें अब अंग्रेज़ों से ज़्यादा मज़बूत क्यों लगने लगी हैं?”
चंद्रशेखर आज़ाद ने दृढ़ स्वर में कहा-
“मैं आज़ाद जिया और आज़ाद मरा। पर आज की पीढ़ी मानसिक गुलामी में क्यों फँसी है? नफरत फैलाने वालों की गुलामी, अंधी भीड़ की गुलामी।”
कुछ पल का मौन छा गया।
फिर गांधीजी ने पंचायत की ओर देखते हुए कहा- मेरे प्यारे भाइयो-बहनो, हमें आज इस पंचायत में केवल दुख व्यक्त करने के लिए नहीं, बल्कि देशवासियों को संदेश देने के लिए और भारतीय राजनीति को चेताने के लिए बुलाया गया है।”
तभी सभी शहीद एक स्वर में बोले-
“हाँ, संदेश!”
गांधीजी बोले-
“हे भारतवासियो! याद रखो-
जाति तुम्हारी पहचान नहीं,
धर्म तुम्हारी दीवार नहीं,
और भाषा तुम्हारी सीमा नहीं।
तुम्हारी पहचान सिर्फ़ भारत है।”
भगत सिंह ने जोड़ा-
“एकजुट रहोगे तो रोज़गार मिलेगा, शिक्षा मजबूत होगी, और देश विश्व में सम्मान पाएगा।
बँटे रहोगे तो न नेता बचेंगे, न जनता, सिर्फ़ पछतावा बचेगा।”
रानी लक्ष्मीबाई बोलीं-
“एकता से ही बेटियाँ सुरक्षित होंगी,
समाज मजबूत होगा,
और राष्ट्र आत्मनिर्भर बनेगा।”
सुभाष बोस ने चेतावनी दी-
“अगर आज नहीं जागे,
तो आने वाली पीढ़ियाँ आज़ादी को किताबों में ढूँढेंगी,
और नफरत को सड़कों पर।”
अंत में सभी शहीद खड़े हो गए।
उनकी आवाज़ गूँज उठी-
“हम मरे थे ताकि तुम इंसान बन सको।
अगर इंसानियत नहीं बची,
तो हमारा बलिदान व्यर्थ हो जाएगा।”
रोशनी धीरे-धीरे धुंधली होने लगी।
बरगद फिर से साधारण वृक्ष बन गया।
लेकिन हवा में अब भी गूँज रहा था।
“एक रहोगे तो सुरक्षित रहोगे,
बँटे तो मिट जाओगे।”
मेरे प्रिय देश वासियो-
यह केवल एक कहानी नहीं,
यह इतिहास और भविष्य के लिए गम्भीर चेतावनी है।
"आओ हम सब मनुष्य बनकर, मनुष्य के लिए जीना, सीखें और सिखाएँ"
सादर- विमल कुमार
मिशन शिक्षण संवाद परिवार
💐🌹सादर प्रणाम!🙏🙏🙏
विद्यालयों में शिक्षण को सरल, सहज एवं रोचक बनाने के लिए टीम मिशन शिक्षण संवाद के कुछ प्रेरक एवं अनुकरणीय प्रयास-
-:दैनिक प्रयास:-
✍️1- विद्यालय की शुभ शुरुआत के लिए #दैनिक_श्यामपट्ट।
✍️2- बच्चों में जिज्ञासा जगाने के लिए #बाल_जिज्ञासा।
✍️3- बच्चों में संस्कार को सुदृढ़ करने के लिए दैनिक #बाल_कहानी।
✍️4- बच्चों के जीवन को स्वस्थ और सकारात्मक बनाने के लिए #दैनिक_योग_संदेश
✍️5- भारतीय संस्कृति की समझ विकसित करने के लिए #संस्कृत_शिक्षण
✍️6- बच्चों में प्रतियोगी परीक्षाओं की समझ विकसित करने के लिए #दैनिक_क्विज।
✍️7- भारत के महान रत्नों को जानने एवं नमन करने हेतु दैनिक #भारत_के_महान_रत्न।
✍️8- शिक्षण को सरल, सहज व रोचक बनाने के लिए #TLM_संसार और #काव्यांजलि।
✍️9- शिक्षक एवं विद्यार्थियों में काव्य सृजन की प्रतिभा निखारने लिए दैनिक #काव्य_सृजन।
✍️10- बच्चों की प्रतिभा को पंख लगाने एवं प्रतियोगी परीक्षाओं की निशुल्क तैयारी हेतु दैनिक #ऑनलाइन_शिक्षण।
-: साप्ताहिक प्रयास :-
✍️1- बच्चों में विषयों की गहरी और स्पष्ट समझ के लिए साप्ताहिक #हिन्दी, #अंग्रेजी, #गणित, #विज्ञान, #सामाजिक_विषय, #तर्कशक्ति, #मानसिक_योग्यता शिक्षण के लिए वर्कशीट एवं वीडियो निर्माण।
✍️2- बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाने के लिए निशुल्क साप्ताहिक एवं मासिक आकलन एवं #मॉडल_टेस्ट_पेपर।
✍️3- शिक्षकों की प्रेरक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए साप्ताहिक #शैक्षिक_दर्पण संकलन एवं वीडियो निर्माण।
✍️4- भारत की भौगोलिक एवं सांस्कृतिक विरासत की जानकारी के लिए #भारत_दर्शन।
-: मासिक प्रयास :-
✍️1- शिक्षकों की विविध प्रतिभाओं को संकलित, संयोजित एवं प्रोत्साहित करने के लिए मासिक संकलन "#शिक्षण_संवाद"।
निशुल्क एवं निस्वार्थ स्वैच्छिक स्वयंसेवी सेवा के रूप में-
"हम सब का है यही प्रयास।
भारत बने विश्व में खास।।"
✍️सादर🙏🙏🙏
विमल कुमार
मिशन शिक्षण संवाद
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🏅#शिक्षक_स्वाभिमान_दिवस पर मिशन शिक्षण संवाद के कर्मयोगी शिक्षकों को किया गया सम्मानित🏅
दिनाँक 15-10-2025 को डॉ APJ अब्दुल कलाम जी के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में "शिक्षक स्वाभिमान दिवस" मिशन शिक्षण संवाद टीम #अलीगढ़ द्वारा आभा रेजेन्सी रामघाट रोड में आयोजित किया गया। इस भव्य कार्यक्रम के मुख्य अतिथि #प्रवीण_राज_सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि व कार्यक्रम संयोजक #डॉ०_राकेश_कुमार_सिंह जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अलीगढ़ रहे।
https://t.co/qffDn6ZX1r
कार्यक्रम का संचालन मेघा जैन व प्रियंका अग्रवाल द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। सर्वप्रथम मुख्य अतिथि द्वारा कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्ज्वलन द्वारा किया गया। इसके उपरांत कस्तूरबा गाँधी आवसीय विद्यालय धनीपुर की छात्राओं द्वारा सरस्वती वंदना व स्वागत गान प्रस्तुत किया गया।
तदो उपरांत डॉ० राकेश कुमार सिंह द्वारा जनपद अलीगढ़ बेसिक शिक्षा विभाग में सुचारु रूप से चलने वाली सभी योजनाओं के विषय में शिक्षकों को अवगत करवाया व शिक्षक के महतत्त्वपूर्ण किरदार को बताते हुए यह भी बताया की अब जनपद अलीगढ़ में क़ोई भी विद्यालय ऐसा नहीं है जो पक्की सड़क से न जुड़ा हुआ हो। उन्होंने कहा कि आज बेसिक शिक्षा विभाग अलीगढ़ पूरे उत्तर प्रदेश में प्रथम स्थान पर है। अलीगढ जनपद से 10000 से अधिक विद्यार्थियों ने #NMMSE परीक्षा में फार्म भरकर पूरे उत्तर प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। उनके द्वारा मिशन शिक्षण संवाद द्वारा किये जा रहे शैक्षिक कार्यों की भी मुक्त कण्ठ से प्रसंशा की गयी। मुख्य अतिथि प्रवीण राज सिंह द्वारा बताया गया की वह इस शिक्षक स्वाभिमान दिवस का हमेशा से सम्मान करते आये हैं और शिक्षा को राजनीति से अलग रख, सभी शिक्षकों को प्रेरित करते हुए बताया की शिक्षक देश का निर्माता है और वह निःस्वार्थ भाव से अपने विद्यालय के बच्चों के लिए कार्य करता है। उन्होंने कहा कि जबसे अलीगढ जनपद को डॉ० राकेश कुमार सिंह जैसे जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मिले हैं बेसिक शिक्षा विभाग अलीगढ नित रोज नये-नये आयाम प्राप्त कर रहा है।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि भाजपा युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष धर्मवीर सिंह लोधी ने अपने सम्बोधन में शासकीय योजनाओ को विस्तार पूर्वक बताया।
मिशन शिक्षण संवाद जनपद अलीगढ़ एडमिन यतेंद्र सिंघल द्वारा कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए बताया गया की मिशन शिक्षण संवाद जनपद अलीगढ़ में 2016 से कार्यरत है और जनपद औरेया से चलते हुए आज उत्तर प्रदेश के हर जनपद में आज मिशन शिक्षण संवाद एक साथ लाख से अधिक शिक्षकों को जोड़े हुए है। जिला सह-संयोजक प्रिया शर्मा द्वारा सम्पूर्ण टीम का परिचय दिया गया व शिक्षकों को अपने भाव प्रकट करने का अवसर प्रदान किया गया। कार्यक्रम के दौरान मिशन शिक्षण संवाद की टेक्निकल टीम व प्रॉफिसियंट टीम मौजूद रही। राष्ट्रगान के पश्चात कार्यक्रम का समापन किया गया। कार्यक्रम में सतीश सिंह, प्रज्ञयवीर सिंह, यतीश गुप्ता, मूलचंद्र, माधवी वार्ष्णेय, नाजिया इस्हाक, बुशरा परवीन, हेमन्त पवांर आदि उपस्थित रहे।
https://t.co/62Ee3wKCm5
साभार - यतेन्द्र सिंघल
संयोजक- मिशन शिक्षण संवाद अलीगढ़
जज़,जूता,आरटीआई और मैं …
मैं फरियादी के रूप में अदालत में खड़ा था — उम्मीद थी न्याय मिलेगा, मगर मिला अपमान।
महिला जज का व्यवहार ऐसा जैसे मैं कोई अपराधी हूँ। बदतमीज़ लहजा,सख्त चेहरा ,आँखों में सभी के लिए तिरस्कार।कक्ष में उपस्थित सभी उसका ये घमंडी व्यवहार सहते रहे पर मेरी उस दिन महिला जज से उसके व्यवहार को लेकर बहस हो गई,मेरे वकील ने मामला शांत कराया।
बाहर निकला तो दरवाज़े के ऊपर एक नोटिस चस्पा दिखा —
“जूते-चप्पल बाहर उतारकर ही प्रवेश करें।”
क्षणभर को ठिठक गया… ये मंदिर है या अदालत? पर मैं ये भी समझ गया था की कोई व्यक्ति/अपराधी इस जज के ऊपर जूता ना फेंक दे इसलिए उसने यह नोटिस चस्पा करवाया है।
दूसरे ही दिन मैंने DJ ऑफिस में जनसूचना अधिकारी को 10/-₹ का पोस्टल आर्डर लगा के RTI दायर की —
“उक्त जज के कमरे के बाहर जिन नियमों के तहत जूते-चप्पल उतारने का आदेश/ नियम चस्पा है,उसकी सत्यापित छायाप्रति उपलब्ध करायें”
बस, इतना RTI लगाना था कि हलचल मच गई।
तीसरे दिन मेरे वकील का फोन आया —
“भैया, मैडम ने आपको सॉरी बोला है… RTI ज़रा वापस ले लीजिए।”
(वैसे आरटीआई वापस लिए जाने का कोई प्रावधान नहीं है)
मैं मुस्करा पड़ा —
“जब सच्चाई से सवाल पूछा जाए, तो माफ़ी ही जवाब बन जाती है।”
कभी-कभी अदालत में हथौड़े की नहीं, कलम की खनक भी गूँज जाती है। ✍️⚖️
🌿 शिक्षा के उत्थान और मानवता के कल्याण हेतु एक स्वैच्छिक स्वयंसेवी के रूप में सेवा का शुभ अवसर 🌿
आज का युग भौतिक प्रगति का युग है — परन्तु इसी के साथ पद, प्रतिष्ठा, पुरस्कार और पैसे की अंधी दौड़ में मानवीय जीवन की सरलता, शान्ति, सहृदयता और सच्चे सुख की अनुभूति कहीं खोती जा रही है।
फिर भी सौभाग्य की बात है कि इस समाज में आज भी कुछ ऐसे उज्ज्वल मनुष्य हैं जो स्वैच्छिक, निस्वार्थ और निशुल्क रूप से शिक्षा के उत्थान और मानवता के कल्याण के लिए कार्य कर रहे हैं तथा
मिशन शिक्षण संवाद के माध्यम से वे यह संदेश दे रहे हैं कि — “जीवन का सबसे बड़ा पुरस्कार सेवा है और सेवा का सबसे बड़ा आनंद देने में है।”
“जब हम किसी के जीवन में प्रकाश बनते हैं,
तो हमारा अपना जीवन भी आलोकित हो उठता है।”
इन स्वयंसेवियों का स्पष्ट विश्वास है कि — “जितना मैंने पाया जग से, उससे कहीं अधिक लौटाकर जाऊँ।”
इसीलिए वह बिना किसी पद, प्रतिष्ठा, पुरस्कार या लोभ की अपेक्षा के 24×7 समर्पित भाव से मानवता की सेवा में तत्पर रहते हैं।
उनका लक्ष्य स्पष्ट है —
“शिक्षा को जन-जन तक पहुँचाना और संवेदना को मन-मन तक जगाना।”
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🌍 #विश्व_शिक्षक_दिवस 🌍
"शिक्षक समाज का मुख्य दीपस्तम्भ है"
आज विश्व शिक्षक दिवस के इस पावन अवसर पर मैं मिशन शिक्षण संवाद परिवार की ओर से देश-विदेश के सभी शिक्षकों को हार्दिक शुभकामनाएँ, सम्मान और सादर नमन करता हूँ।🌹💐🙏🙏🙏
शिक्षक केवल ज्ञान का वाहक नहीं, बल्कि जीवन के पथप्रदर्शक होता है। वह अंधकार में दिशा दिखाने वाला ऐसा दीपक है, जो निस्वार्थ भाव से दूसरों के जीवन को प्रकाशमय करता है। एक सच्चा शिक्षक केवल पाठ्यपुस्तक नहीं पढ़ाता, बल्कि जीवन की पुस्तक को जीना सिखाता है।
"शिक्षक वह नहीं जो केवल बताता है कि क्या सही है, बल्कि वह है जो प्रेरणा देता है कि कैसे सही किया जाए?"
आज जब समाज तकनीकी प्रगति के शिखर पर है, तब भी मानवीय मूल्य, संवेदना और सृजनशील सोच का विकास शिक्षक के बिना संभव नहीं। शिक्षक ही वह कड़ी हैं जो ज्ञान से कर्म और कर्म से चरित्र की यात्रा को पूर्ण करती हैं।
🌟 शिक्षक का जीवन, मात्र जीवन ही नहीं होता है बल्कि मानवता के भविष्य की एक प्रेरक साधना होती है।
🌟शिक्षक का जीवन त्याग, अनुशासन और करुणा का प्रतीक होता है। उनका हर दिन किसी परीक्षा से कम नहीं — कभी विद्यार्थियों की जिज्ञासा से, कभी समाज की अपेक्षाओं से, तो कभी अपने आत्ममंथन से। फिर भी शिक्षक मुस्कुराते हुए ज्ञान, मूल्य और प्रेरणा का प्रसार करते हैं।
🌟 "शिक्षक समाज में मौन क्रांति के निर्माता हैं — कोई शोर नहीं, कोई प्रदर्शन नहीं, केवल कर्म और समर्पण की शक्ति होते हैं।"
🌟 "शिक्षकों का सच्चा प्रतिफल वे पदक नहीं, जो दीवारों पर टंगे हों; बल्कि वे चेहरे हैं, जिनकी आँखों में सफलता की चमक होती है।"
शिक्षक के कर्तव्य केवल शिक्षण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे तीन प्रमुख स्तरों पर अपनी भूमिका निभाते हैं —
👉1. शिक्षण का कर्तव्य:
विद्यार्थियों में ज्ञान, तर्क, सृजनात्मकता और जिज्ञासा का विकास करना।
👉2. मानव निर्माण का कर्तव्य:
बच्चों में नैतिकता, करुणा, सत्य, और सेवा जैसे मूल्यों का बीजारोपण करना।
👉3. समाज सुधार का कर्तव्य:
शिक्षित नागरिकों के माध्यम से एक सशक्त, संवेदनशील और सहयोगी समाज का निर्माण करना।
"शिक्षक वह मूर्तिकार है जो मिट्टी नहीं, मानव चेतना को आकार देता है।"
शिक्षक समाज में मानवता के रक्षक हैं। वे केवल बच्चों को पढ़ाते नहीं, बल्कि—
👉शिक्षक दूसरों के लिए, समाज के लिए और विश्व के लिए जीना सिखाते हैं।
👉शिक्षक अंधविश्वास के विरुद्ध विवेक का दीपक जलाते हैं।
👉शिक्षक स्वार्थ के स्थान पर सहयोग का संस्कार देते हैं।
👉शिक्षक भेदभाव के स्थान पर समानता का पाठ पढ़ाते हैं।
👉शिक्षक घृणा के स्थान पर प्रेम का बीज बोते हैं।
आज जब विश्व में विभाजन, हिंसा और असहिष्णुता बढ़ रही है, तब एक सच्चा शिक्षक मानवता का प्रहरी बनकर समाज को जोड़ने का कार्य करता है।
"जहाँ शिक्षक हैं, वहाँ मानवता का भविष्य सुरक्षित है।"
विश्व शिक्षक दिवस केवल सम्मान का दिन नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर है।
हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि —
"हम शिक्षा को केवल रोजगार नहीं, बल्कि मानवता की सेवा बनाएँगे। हम बच्चों को केवल ज्ञान नहीं, बल्कि सद्भाव, संवेदना और संकल्प की शिक्षा देंगे।"
इस शुभ दिन पर, मैं सभी शिक्षकों से आह्वान करता हूँ — आइए, हम मिलकर "शिक्षा के उत्थान, शिक्षक के सम्मान और मानवता के कल्याण" के इस मिशन को नई दिशा दें।
सभी शिक्षकों को विश्व शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ। आपका हर दिन विद्यार्थियों के जीवन में नया उजाला लाए। 💐🙏🙏🙏
✍️ विमल कुमार
टीम मिशन शिक्षण संवाद
(शिक्षा के उत्थान — शिक्षक के सम्मान — मानवता के कल्याण हेतु समर्पित)
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