*`🌸 || श्रीमद्भगवद्गीता ||🌸`*
> 📘 अध्याय 6, श्लोक 5
*उद्धरेदात्मनाऽत्मानं नात्मानमवसादयेत्।*
*आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुः आत्मैव रिपुरात्मनः॥*
📝 *सरल अर्थ:* मनुष्य को चाहिए कि वह स्वयं अपने आप को ऊपर उठाए, अपने आप को गिरने न दे। #जय_श्री_कृष्ण#Bhagwatgita#krishna
🚨 जनहित में खुला पत्र | 7 वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा 🚨
माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी (@myogiadityanath), माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी (@PMOIndia), माननीय मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश शासन, माननीय मंडलायुक्त वाराणसी, माननीय जिलाधिकारी जौनपुर, माननीय पुलिस अधीक्षक जौनपुर, तथा समस्त उत्तर प्रदेश शासन एवं भारत सरकार के संबंधित अधिकारियों के संज्ञानार्थ।
@narendramodi
मैं सुरेन्द्र नंदलाल प्रजापति, ग्राम हरिहरपुर, तहसील केराकत, जनपद जौनपुर का निवासी हूँ। वर्ष 2019 से अपने पैतृक भूमि प्रकरण गाटा संख्या 2482 के न्यायपूर्ण निस्तारण हेतु संघर्ष कर रहा हूँ।
आज इस प्रकरण को 7 वर्ष पूर्ण होने जा रहे हैं, लेकिन अभी तक अंतिम एवं प्रभावी समाधान नहीं हो सका है।
यह मामला केवल एक भूमि विवाद नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही, राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली, शिकायत निस्तारण व्यवस्था तथा एक सामान्य नागरिक के संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर प्रश्न बन चुका है।
📌 वर्ष 2019 से अब तक 350 से अधिक शिकायतें विभिन्न विभागों में प्रस्तुत की गईं।
📌 40 से अधिक आरटीआई आवेदन दाखिल किए गए।
📌 मुख्यमंत्री कार्यालय, मुख्य सचिव कार्यालय, जिलाधिकारी कार्यालय, पुलिस विभाग, राजस्व विभाग, मानवाधिकार आयोग, सूचना आयोग तथा अन्य सक्षम प्राधिकारियों को बार-बार अभ्यावेदन भेजे गए।
📌 उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग (प्रकरण संख्या 5878/24/39/2026) ने मामले में रिपोर्ट तलब कर सुनवाई निर्धारित की है।
📌 मुख्य सचिव कार्यालय, उत्तर प्रदेश शासन द्वारा मेरे प्रकरण से संबंधित पत्राचार एवं आरटीआई आवेदन पर कार्रवाई की गई है।
📌 इलाहाबाद उच्च न्यायालय के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी द्वारा मेरे आवेदन को सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 6(3) के अंतर्गत जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक जौनपुर को आवश्यक कार्रवाई हेतु हस्तांतरित किया गया।
इन सभी अभिलेखों से स्पष्ट है कि मामला वर्षों से शासन और प्रशासन के संज्ञान में है। इसके बावजूद यदि एक नागरिक को अपने वैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए सात वर्षों तक संघर्ष करना पड़े, तो यह अत्यंत चिंताजनक स्थिति है।
मैं उत्तर प्रदेश सरकार से पूछना चाहता हूँ—
क्या एक गरीब और सामान्य नागरिक को न्याय प्राप्त करने के लिए 7 वर्ष भी पर्याप्त नहीं हैं?
क्या 350 से अधिक शिकायतें, 40 से अधिक आरटीआई आवेदन, मानवाधिकार आयोग की कार्यवाही, मुख्य सचिव कार्यालय का पत्राचार तथा उच्च न्यायालय से संबंधित अभिलेख भी प्रशासन को वास्तविक स्थिति समझाने के लिए पर्याप्त नहीं हैं?
यदि उत्तर प्रदेश सरकार की "जीरो टॉलरेंस नीति" वास्तव में प्रभावी है, तो इस प्रकरण में भी उसकी झलक दिखाई देनी चाहिए।
अतः शासन एवं प्रशासन से मांग है कि—
✅ गाटा संख्या 2482 प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
✅ संयुक्त राजस्व एवं पुलिस टीम द्वारा निष्पक्ष स्थलीय सत्यापन कराया जाए।
✅ अब तक प्रस्तुत सभी रिपोर्टों, आख्या एवं अभिलेखों की स्वतंत्र समीक्षा कराई जाए।
✅ प्रकरण में हुई देरी एवं प्रशासनिक उत्तरदायित्व की जांच की जाए।
✅ आवश्यकता होने पर विशेष जांच दल (SIT) गठित किया जाए।
✅ समयबद्ध एवं पारदर्शी कार्रवाई सुनिश्चित कर न्याय दिलाया जाए।
यह लड़ाई केवल मेरी भूमि की नहीं है, बल्कि उस व्यवस्था में विश्वास की है जहाँ संविधान प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार, निष्पक्ष प्रशासन और न्याय का भरोसा देता है।
न्याय में अत्यधिक विलंब, न्याय के उद्देश्य को ही कमजोर कर देता है।
सुरेन्द्र नंदलाल प्रजापति
ग्राम हरिहरपुर, तहसील केराकत
जनपद जौनपुर, उत्तर प्रदेश
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अद्रोह: सर्वभूतेषु कर्मणा मनसा गिरा!
अनुग्रहस्च दानं च संता धर्म: सनातन:!!
मन,वचन,और कर्म से किसी भी प्राणी के प्रति द्वेष न रखना तथा सभी पर दया करना एवं यथाशक्ति दान देना यही सज्जनो का सनातन धर्म हैं!
#जयतु_सनातन_धर्मः#हर_हर_महादेव_
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