यह तो ग़नीमत है कि CBSE हस्तलिखित परीक्षा ले रहा है। अपनी हस्तलिपि पहचानकर विद्यार्थियों ने गंभीर गड़बड़ी चिह्नित कर ली।
सोचिए कि यदि यह भी कहीं कम्प्यूटराइज़्ड गूगल कीबोर्ड होता तो बच्चे अपनी ईमानदारी कैसे सिद्ध करते?
परीक्षा हस्तलिखित ही हो।
गुजरात के पाटन ज़िले के चंद्रुमना गांव में दलित युवक विशाल चाबड़ा की बारात सिर्फ़ इसलिए रोकी गई क्योंकि वह घोड़े पर सवार था। तलवारें निकाली गईं, गालियाँ दी गईं, बारातियों के साथ मारपीट की गई-क्योंकि जातंकी आज भी मानते हैं कि दलितों को सम्मान, खुशी और बराबरी के साथ जीने का अधिकार नहीं है।
जातंकवादियों का तर्क न केवल अमानवीय बल्कि संविधान विरोधी था। उनका कहना था कि घोड़े पर सवार होना केवल तथाकथित ‘उच्च वर्ण’ का विशेषाधिकार है। भीड़ में से चिल्लाया जा रहा थ-
“इस गांव में एक दलित की घोड़े पर चढ़ने की हिम्मत कैसे हुई?”
हम @CMOGuj से मांग करते हैं कि सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी हो,अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की सख़्त धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए,पीड़ित परिवार को सरकारी सुरक्षा और उचित मुआवज़ा दिया जाए
माननीय केंद्रीय शिक्षा मंत्री @dpradhanbjp जी, जातिगत श्रेष्ठता के इस नग्न प्रदर्शन ने #UGCRegulation2026 की प्रासंगिकता को और गहरा कर दिया है। यदि यह विनियम संस्थागत जातिवाद के मामलों में दोषियों को दंडित करने में कमजोर पड़ता है, तो यह समाधान नहीं बल्कि जातिगत श्रेष्ठता को मिला वैधानिक संरक्षण बन जाएगा।
जब समाज में आज भी बराबरी को खुली चुनौती दी जा रही है, तब उच्च शिक्षा में समता को आधा-अधूरा नहीं छोड़ा जा सकता।
@mygovindia@Bhupendrapbjp
#ASP_K_Support_UGC_Act
#ASP_K_Support_UGC_Act
उच्च वर्णीय और अनुसूचित जाति/जनजाति तथा पिछड़ा वर्गों द्वारा किए गए यूजीसी एक्ट संबंधी आंदोलन में एक अंतर दिखाई दे रहा है कि उच्च जातियों के लोग हिंसा का प्रदर्शन कर रहे है और अनुसूचित जाति/जनजाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग भाषाई गरिमा के साथ हैं।
डॉ आंबेडकर का यह प्रभाव है।
जो कवि उर्फ़ कथावाचक दो दिन पहले किसी दलित से पॉंव धुलना रहा था, आज equity regulation से घबरा गया।
यदि इतने ही समतावादी थे तो पॉंव धुलवाने से इंकार क्यों नहीं कर दिया?
दोहरे मापदंड
Who is practicing discrimination will be exposed. Just look at our universities and see the reality of representation of Scheduled Castes, Scheduled Tribes, and Other Backward Classes even today.