“Lawrence Bishnoi Sahab”
The respect Delhi Police has for gangsters…
Wish they showed even 10% of this courtesy to students and activists who are doing nothing but protest.
CJP का पहला आंदोलन सफल हुआ क्योंकि नगीना सांसद @BhimArmyChief चन्द्रशेखर आजाद द्वारा उसे खुला समर्थन किया गया। उन्होंने उस आंदोलन को राजनीतिक होने से बचाया था
परंतु CJP के दूसरे आंदोलन में इनके नेता व लेफ्ट के अन्य छात्र संगठन राहुल गांधी व आम आदमी पार्टी के पक्ष में जाकर खड़े हो गये, जिन्होंने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन को राजनीतिक रंग देकर उसे कमजोर कर दिया
आपने देखा होगा पहले हुए आंदोलन में चन्द्रशेखर आजाद के कार्यकर्ता बहुत बड़ी संख्या में आए लेकिन किसी के हाथ में पार्टी का झंडा नहीं था। परंतु अबकी बार राहुल गांधी, अखिलेश यादव व अरविंद केजरीवाल ने पूरा खेल बिगाड़ दिया। सब अपने-अपने झंडे लेकर आंदोलन कर रहे हैं
चन्द्रशेखर आजाद एक समझदार नेता हैं, वो जानते हैं कि आंदोलन कैसे सफल होते हैं। उनके अंदर राजनीतिक स्वार्थ नहीं है, वो सही मायने में आंदोलन को ताकत देते हैं
चन्द्रशेखर आजाद व नीले झंडे के बिना कोई लड़ाई नहीं जीती जा सकती, यही सच्चाई है...!!
@BhimArmyChief जनसंख्या के आधार पर उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है, पिछले 4 वर्षों से राज्य सरकार ने नाममात्र ही सरकारी नौकरियां दी हैं, हर साल लगभग 2.5 से 3 लाख सरकारी रोजगार का सृजन होना चाहिए।
लंदन के भारतीय दूतावास में भारतीय भारत में आज़ादी की मांग करते हुए नारे लगा रहे हैं।
वोट चोरों से देश को आज़ाद करवाने की मुहिम अब अंतरराष्ट्रीय शक्ल लेती जा रही है।
नेहा बोरा को पकड़ा जाता है, छोड़ा जाता है. यानी नेहा बोरा को बार बार डिटेन कर छोड़ा गया.
नेहा बोरा को अब तक 8 बार से ज्यादा बार डिटेन किया गया. हर बार छोड़ा गया.
CJP के नेता अभिनीत दीपके ने बार बार सड़कों पर प्रदर्शन नही किया. केवल कल सड़कों पर तिरंगा फहराने के लिए उतरे थे.
पुलिस ने डिटेन कर लिया. आज उन्हें कोर्ट में पेश किया जायेगा. अगर उन्हें भी आशुतोष रंका और सौरव दास की तरह जेल भेजा गया तो यह लोग 1947 के बाद पहले ऐसे भारतीय बन जाएंगे जिन्हें तिरंगा फहराने के लिए जेल भेजा गया.
अभिजीत दीपके ने नेहा बोरा की तरह ना सड़को पर दौड़ लगाई और ना ही बार बार पुलिस को अपने पीछे दौड़ने को मजबूर किया,
फिर अभिजीत दीपके पर इतनी सख्ती क्यों बरती जा रही. दलित समाज का युवक पहली बार गैर राजनीतिक आंदोलन का नेतृत्व कर रहा है, क्या इसी कारण अभिजीत दीपके को परेशान किया जा रहा है ?