गत दिनों मोदी से नाराज़गी मे ट्रंप ने भारत को डेड इकॉनमी कहा, तो हमारे यहां का 56 वर्षीय युवा नेता, पप्पू बोला कि देश मे आर्थिक सुनामी आएगी, किंतु हमारी पहली तिमाही की इकॉनमी तो 7.8% निकली, जो दुनिया मे सबसे तेज गति वाली इकॉनमी हुई। पप्पू की भविष्यवाणी कुछ ही महीनों मे झूठ हो गई।
माफियाओं को सीएम हाउस बुलाकर उन्हें सम्मानित कर उनके कुत्ते से खुल-ए-आम हाथ मिलाने वाले आज कह रहे हैं कि हरियाणवी सिंगर, अंकित बालियान की हत्या पड़ोसी राज्य से शामली आकर गोगी गैंग ने कर दी और गोगी-योगी के नाम आपस मे मिलते-जुलते हैं। वैसे योगी पुलिस दो हत्यारों को निपटा चुकी है।
हमारे देश का 56 साल का अधेड़ पप्पू बोला करता है कि मोदी तो अमेरिकी राष्ट्रपति, ट्रंप के सामने डर कर झुक गये, जबकि मोदी उज़्बेकिस्तान मे ईरानी राष्ट्रपति, पेजेश्कियान से मुलाकात किए और रूस से S-500 लेने का सौदा पक्का किया, जो बुड्ढे ट्रंप और अधेड़ पप्पू के मुंह पर जोरदार तमाचा है।
बालीवुड के तीनो खान-बंधु बालीवुड को उर्दू वुड बनाकर हिंदुओं के देवी-देवताओं और पंडित-पुरोहितों का मखौल उड़ाते रहे, जिसे हिंदुओं ने भले ही देर से समझा, लेकिन समझने के बाद इन तीनों बंधुओं की फिल्म्स का बहिष्कार करते हुए इन्हें ऐसा बर्बाद किया कि बालीवुड से इनका राज ही खत्म हो गया।
बारीकी से देखने पर पता चलता है कि देश मे होने वाले 99% दंगे मुसलमानों द्वारा शुरू किए जाते हैं, जिसके बाद उस क्षेत्र से कुछ हिंदू तो घर बार यूं ही छोड़कर और कुछ औने-पौने दाम पर बेचकर पलायन कर जाते हैं, किंतु योगी जी ने अपने शासनकाल मे मुसलमानो से दंगा करने का अधिकार ही छीन लिया।
@saraswat_badal तुम कुछ भी कहो या बोलो, पर पीएम कभी नही बन पाओगे। भूल जाओ कि तुम्हारे बाप, बाप की मम्मी और बाप के नाना पीएम थे। उनके काल में पर्याप्त शिक्षित मतदाता नही होते थे और अब तो सोशल मीडिया भी आ गया है, जो तुम्हारी हर छल-कपट की सोच को उधेड़ कर रख देता है। अब दाल गलने वाली नही है पप्पू।
@Gobhiji3 1947 मे कांग्रेस शासन था, तो पेट्रोल 25 पैसे प्रति लीटर था, तो 2014 मे कांग्रेस के ही शासनकाल मे,जब विश्व प्रसिद्ध अर्थशास्त्री, मौन-मोहन के पीएम रहते 82/= प्रति लीटर क्यों हो गया था?
अक्ल-लेस यादव का यह कथन मूर्खतायुक्त है कि वह जिन्हे चवन्नी से रूपया बनाये, वह उन्हे छोड़कर चला गया। ध्यान रहे कि किसी भी राजनीतिज्ञ का रसूख बनाना-बिगाड़ना जनता के हाथ मे होता है, जो किसी अयोग्य या पारिवारिक विरासत से दल का मुखिया बनने वाले व्यक्ति के हाथ मे तो कतई नही होता है।
@Gobhiji3 सरकार किसी की भी रहे, मैं बखूबी जानता हूं कि महंगाई एक सतत क्रिया है, जो न कभी घटी है और न कभी घटेगी, इसलिए महंगाई के बाबत ज्ञान परोसने की जरूरत नही है।
@lalooyadav32@RubikaLiyaquat@narendramodi@PMOIndia चाराचोर और टोंटीचोर आपस में रिश्तेदार हैं, तो इन दोनों की चाटने वाले भी अनेक हैं। चोर और उसके चाटुकार यादव होकर भी यदुवंशी नही हो जाते। अच्छा हुआ कि इन चोरों को पहचान लिया गया और अब चोर सरकार कभी नही बनेगी।
झुंड मे चलने वाली पीछे की भेंड़ खुद सामने देखकर नही, अपने आगे की भेंड़ का पैर देखकर पीछे चलती रहती है और यदि आगे वाली कुएं मे कूद जाय, तो पीछे वाली भी उसमे कूद जाएगी। अब खांग्रेस मे सुरजेवाला हो या जयराम और खरगे हो या खेड़ा, बिना परिणाम जाने पप्पू का पैर देखकर पीछे-पीछे चलते है।
पहले बंदे मातरम और अब मनुस्मृति का विरोध कर खांग्रेस का पप्पू कहना क्या चाहता है? वैसे देश तो संविधान से चलता है, मनुस्मृति से नही, फिर इन्हें मनुस्मृति से कष्ट क्या है? साफ है कि तुष्टिकरण की नीति तो इनकी पुरानी है, किंतु राजनीति मे भूरी काकी के आने से नीति हिंदू विरोधी हो गई।
टोंटीचोर ने जयंत जी को चवन्नी से रूपया बनाने की बात कही, जबकि सच यह है कि अक्ल-लेस अभी तो खुद ही चवन्नी है। इसके अब्बू, मुल्ला-यम को जयंत के दादा, चौधरी चरण सिंह ने चवन्नी से रूपया बनाया था और अब मोदी जी को चाहिए कि वह जयंत जी को राज्य मंत्री से कैबिनेट मंत्री बनाकर महान बना दें।
@jpsin1 क्या 1947 से 2014 तक चीनी के दाम कभी नही बढ़े थे? मैं 75 वर्ष का हूं और मैंने 1 रूपए में 2 किग्रा चीनी पहले कभी खरीदी थी और जब 2014 मे खरीदी, तो दाम जुदा थे। मैं जानता हूं कि महंगाई एक सतत क्रिया है, जो किसी की सरकार में न कम हुई थी और न कभी कम होगी। कोई बताए कि महंगाई घटी कब थी?
बेचारी ममता बानो।सोचे थी कि 30 साल कांग्रेस और 34 साल बामपंथियों ने शासन किया, तो वह और उसके भाइपो भी 40-50 साल तक तुष्टिकरण, गुंडागर्दी और घुसपैठियों के सहारे राज करेंगे। वह भूल गई थी कि पहले सोशल मीडिया नही था, जो अब है और वहां 70% हिंदू हैं, इसलिए 15 साल मे ही ध्वस्त हो गई।
देश पर 800 साल मुसलमान और 200 साल अंग्रेज राज किए और वे चाहकर भी सनातन धर्म नही मिटा सके। एक विदेशी मां का बच्चा, पप्पू हिंदुओं को जातियों मे बांटकर सत्ता पाने और हिंदू धर्म को मिटाने की सोच रखता है। खुद तो इसाई है और "सर तन से जुदा" के नारे से गांव फटती है,सो उनपर मौन रहता है।