शाम के साढ़े बजे थे। मैं स्कूल से वापस आ गया था, बाबूजी भी। दरवाजे का सीकर जोर से बजा। मैंने जाकर दरवाजा खोला। हमारे परिचित राम शुभग बाबू का बेटा घबराया और हाँफता हुआ खड़ा था। मैंने उसे अंदर बुलाया, पानी पिलाया और पूछा, "का भइल बा हो?" उसने उत्तर नहीं दिया। तब तक बाबूजी आ गये।
पिछ्ला बरिस के इ क्लिप भोरहिं से कई गो लोग हमरा के भेजले बा, देस बिदेस से भी, जेकरा में बहुत लोग नईखे जानत के बेजोड़ टीम के बनावल वीडियो बाटे | बाकिर बढियाँ बात बा, नया पीढ़ी खातिरो कुछ ना कुछ बनत रहे के चाहीं | 🙂🙏🌹
गोरख पाण्डेय की भोजपुरी कविता 'समाजवाद' ने हमको भी समाजवाद पर तुकबंदी के लिए बाध्य कर दिया है.इस महान भोजपुरी कवि और गीतकार से क्षमा याचना सहित 'तबही ए बबुआ समाजवाद आयी' ट्वीट श्रृंखला के रुप में टीएल पर रखा जाएगा.आपकी प्रतिक्रियाएं सर माथे धरी जाएंगी.स्टे ट्यूनड. #भोजपुरी