ये बलिया,यूपी के नवीन राय है.. पेशे से किसान.. ये कंधे में गेहूं, ज्वार और बाजरा लेकर जो कि करीब एक क्विंटल था लेकर डीएम ऑफिस पहुँच गए.. और उनसे आग्रह किये कि ये अन्न देश के बॉर्डर पे लड़ रहे सैनिकों तक पहुँचा दे ताकि उन्हें खाने-पीने में कुछ मदद हो सके..!
इन्होंने कहा कि, "अभी एक क्विंटल के करीब अन्न दिया है, साथ ही डीएम से निवेदन किया है कि अगर जरूरत पड़ती है तो वे घर पर ट्रक लगा दें, वो और भी अनाज भारतीय सेना के लिए देगा.. सीमा पर अन्न की कमी नहीं होनी चाहिए... अगर जरूरत पड़ेगी तो अपनी पत्नी का गहना भी बेच कर देश की सेवा में लगा देगा.!"
ये किन्हीं को छोटी-मोटी चीज लग सकती है लेकिन यही इस समय सबसे ज्यादा जरूरत है देश को.. इस भाव की आवश्यकता है देश को.. और ये भाव हर एक नागरिक में होना चाहिए..!
ये भाव भाव-विह्वल कर देता है... और यही चाहिए देश को।
जय हिंद।
कृपया ऐसी मूर्खता न करें। हरे रंग से समस्या? सावन में अधिकतर हिन्दू स्त्री हरे रंग की साड़ी, सूट, दुपट्टा आदि से सँवरती है। माताएँ अपनी विवाहित पुत्रियों को सावन में हरी चूड़ियाँ, हरी बिन्दी, हरे वस्त्र आदि भेजती हैं।
हरा रंग आतंकियों का या पाकिस्तानियों का नहीं है। सारे रंग हमारे हैं।