Will Hit,who hit my nation IITD☺️ Follow me 🙏ज्ञान भी मिलेगा और सम्मान भी..अपने जैसा भान भी, तरकस में तीखे बाण भी ,न्याय भी विधान भी,धर्म भी संविधान भी🙏
हमारे बाप का है
हिंदुस्तान
किसी ग़ैर का
हक़ -ए- जायदाद नहीं चलेगा
यहाँ रहना है तो
कलाम सा रहिए
किसी कट्टर का
हल्ला-ए- जेहाद नहीं चलेगा
@MoNa42327912@dehati_ladkiR @vijayashreenair
यदि आपके साथ एक भी "यादव" है तो यकीन मानिए आपको हर मुसीबत से निकाल ले आएगा 🔥
महाभारत में कौरवों की तरफ़ एक से बड़े एक शूरवीर थे मगर पांडवों के पास यदुकुल श्रेष्ठ भगवान श्री कृष्ण थे जिसके कारण महाभारत में विजय पांडवों की हुई।
मुंबई इंडियंस अपने शुरुआती दिनों में बिल्कुल ही नीचे चल रही थी फिर फॉर्म में आए
"सूर्यकुमार यादव" और मुंबई इंडियंस ने लगातार एक के बाद एक मैच जीतना शुरू किया,
आज मुंबई इंडियंस प्ले ऑफस में पहुंच चुकी है जिसके पीछे एक मात्र कारण सूर्यकुमार यादव हैं।
देहरादून की घटना न तो पहली है, न अंतिम। पाँच मित्र, नई इनोवा कार, पार्टी, दारू, लॉन्ग ड्राइव की चर्चा और फिर ‘दारू पीने से कन्सनट्रेशन बढ़ता है’ जैसे निरर्थक उपहास को सत्य मानने वाले लाखों बच्चों की तरह, अल्कोहल के नशे में सड़क पर।
एक BMW उन्हें ओवरटेक करती है। संभवतः, ‘भाई, इसने तो तुझे ओवरटेक कर दिया, ये क्या गाड़ी चला रहा है तू’ जैसी उकसाऊ ललकार जैसा मजाक और स्पीड 100 से 120-30-50 की ओर। दो लोग सनरूफ से बाहर देख कर ठिठोली करते हुए ‘उत्साहवर्धन’ कर रहे थे।
स्पीड और बढ़ती है, ट्रक आता है और गाड़ी टकराती है। दोनों बच्चों का सर सनरूफ के साथ कार और शरीर से अलग हो जाता है। बाकियों के देह की दुर्दशा ऐसी हो जाती है कि उसे लिखना भी मुश्किल है। इम्पैक्ट इतना भयावह की नई कार का ढाँचा पहचानने योग्य नहीं रह जाता। एक भी सवारी बचती नहीं, उनकी देह क्षत-विक्षत।
शराब, नशा, गाड़ी और मित्र मंडली ऐसा कॉकटेल है, जिसे हर कोई तब तक हल्के में लेता है, जब तक वो स्वयं इसका शिकार नहीं हो जाते। सबको लगता है वो अजेय, अजित, अमर है, उस पर महादेव का हाथ है। ऐसा होता नहीं। उनके परिजनों के बारे में सोचिए।
ऋषभ पंत के साथ 2022 के 31 दिसंबर को जो हुआ, पूरे देश ने देखा। ऐसे एथलीट को भी रिकवर करने में बीस महीने लग गए जिसके पास हर व्यवस्था थी। वो नशे में नहीं था, केवल स्पीड में था।
शराब जानलेवा है, सड़क-गाड़ी-मित्र-रात्रि न हो तब भी। नशे में गाड़ी चलाना जानलेवा है, स्पीड-मित्र-समय से कोई मतलब नहीं। गाड़ी जानलेवा है, यदि मित्र आपको दारू पीने के बाद भी उस पर बिठाते हैं। मित्र मंडली जानलेवा है यदि उनमें से एक भी आपको ऐसी स्थिति में कार पर बैठने से रोक न रहा हो।
मैं न तो शराब पीता हूँ, न मेरे पास गाड़ी है, परंतु ऐसे मित्रों के साथ रहा हूँ जो ऐसा करना चाहते हैं। मैं ऐसी गाड़ी पर नहीं बैठता चाहे मुझे मित्रों द्वारा ‘डरपोक, कायर, फट्टू’ जैसे विशेषण सुनने पड़े। मेरे लिए उस क्षणिक ‘पौरुष’ प्रदर्शन से करोड़ों-गुणा कीमती मेरा जीवन है।
वीरता और पौरुष सड़क पर दूसरी कार के पीछे भागते हुए मरने में नहीं है। वीरता है स्वयं पर संयम रखना और अपने मित्रों को किसी भी प्रकार से उस समय, उस अवस्था में, गाड़ी पर बैठने से रोकना।
A pregnant Delhi teen was killed and buried by her boyfriend Salim and aides; she wanted marriage and to keep the baby, he wanted an abortion.
As in many cases, the accused trapped the girl on Insta by hiding his identity.
The girl is gone, and there is no justice. But here’s a reminder for parents and brothers: The law allowing individuals to make their own choices at 18 is man-made. The terms like misogyny, patriarchy, and masculinity are man-made. But, the duty to protect your kids is a responsibility given by nature and God. It takes precedence over man-made things.
Parents across species allow their young ones space to explore, take risks, and grow, while still keeping a watchful eye from a distance. They recognize the risks and manage them carefully. You have that same instinct. Don’t let labels like "patriarchal" or "toxic masculinity” make you suppress it.
Stay aware, assess, educate, and step in when necessary. Protect your daughters and sisters.
भक्त गर्व से कहते थे,
कि इस बार भी चुनाव के बाद क्या बदला है,
मोदी जी PM, अमित भाई गृह मंत्री हैं,
सब कुछ वैसा ही तो है,
नहीं मेरे दोस्त, बहुत कुछ बदल गया है,
पिछले दस साल में BJP पहली बार कोई बिल सदन में नहीं पास करवा पाई है,
दस साल में पहली बार कोई बिल JPC में गया है,
वक्फ बोर्ड के मुद्दे पर देश के सांसद अपने मुस्लिम भाइयों के साथ खड़े हो गए हैं,
इतना कुछ बदल गया,
और तुम हो कि, देख ही नही पा रहे हो,
गिरने की बात तुम्हें शोभा नहीं देती
रही बात खून की ....तो अस्पताल भी जानते हैं कि कौन सी कौम है जो रक्तदान में विश्वास नहीं करती है।
और हां जैसे हलाल खाना तुम्हारा धार्मिक अधिकार है ना वैसे ही पूजा पाठ या अन्य दिनों में शुद्ध खाना हमारा अधिकार है ।
@JaikyYadav16 मैं "निसार की दुकान" से ही फल लूंगा
मैं "आरिफ की दुकान" से ही फल लूंगा
अगर सभी देशवासी जाति, धर्म का भेद भूल कर
इस मुहिम के समर्थन में एकजुट हो जाएं
तो BJP, RSS का मुंह काला हो जाएगा
(मैं सपा, बसपा, कांग्रेस, ASP समर्थकों को इस मुहिम में शामिल होने की दावत देता हूं)
चुनाव आयोग चुनाव के प्रचार में बच्चों के इस्तेमाल से मना करता है। क्या लोक सभा या राज्य सभा में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं कि आप किसी की कम बुद्धि का मज़ाक़ नहीं उड़ाएँगे। बच्चों के IQ को प्रधानमंत्री बाल बुद्धि बोल-बोल कर कम बुद्धि के रूप स्थापित करते रहे। किसी भी परिपक्व लोकतंत्र में बच्चों का सार्वजनिक मज़ाक़ उड़ाने की अनुमति नहीं होनी चाहिए। वे जिस बच्चे को रोने वाला बता रहे थे, ख़ुद भी तो बात-बात में रो देते हैं।
जनता ने विपक्ष चुना है तो नेता प्रतिपक्ष बना है। ये पद तो जनता के कारण मिला है। आप उसका एक बार भी नाम नहीं लेते और बार-बार बालक, बच्चा, बाल बुद्धि कह कर मज़ाक़ उड़ाते रहे। क्या यह उस जनता का मज़ाक़ उड़ाना नहीं है? प्रधानमंत्री की नज़र में जो जनता बीजेपी को वोट नहीं करती, उसकी बाल बुद्धि है?
वास्तविक रूप से वैज्ञानिक सोच वाला लोकतंत्र होता तो इन बातों को कार्यवाही से निकालता। आस्था के नाम पर धर्म से जुड़े वाक्यों को हटाने की जगह बच्चों को लेकर बोले गए वाक्यों पर चिंता ज़ाहिर की जाती ।
ये सारी जमीन उसी पीपल या उस जैसे पेड़ की है जहां लोगों ने अवैध मकान बना रक्खा है ।
ये पीपल का पेड़ अपनी खोई विरासत को छीनने का प्रयास करता है ,क्योंकि वो जीवट है ।
अवैध कब्जा कर मकान वाले को इस पेड़ से बहुत दिक्कत होती है 😊
लोकसभा का स्पीकर किसने लगवाया है?
बेहद घटिया स्पीकर है.
उसकी क्वालिटी लोकसभा लायक़ नहीं है.
बीच-बीच में मीठी आवाज़ आती है अचानक फिर बिगड़ जाता है.
कौन सी कंपनी का स्पीकर है भाई?
किसने ट्यून किया है?
नामक हराम वो सब है जो देश के संविधान को बदलना चाहते है, नामक हराम वो सब है जो देश को तिरंगे से एक रंगे पर ले जाना चाहते है और नामक हराम वो सब है जिन्होंने ने आज़ादी की लड़ाई में अंग्रेजों की मुखबीरी की।
वही राहुल
जिसका कैंडिडेट हार गया
वही राहुल
जो इतनी साजिशों के बाद भी बस विपक्ष में बैठ सका
वही राहुल
जो हाथ मिलाने से पहले तक प्रधानमंत्री के पीछे चल रहा था
वही राहुल
जो चाह कर भी ओम बिरला को स्पीकर बनने से रोक न सका
यह तो मेरे साथ थोड़ा-सा मोए-मोए मोमेंट हो गया कि कल मैंने लिखा था कि भाजपा कभी मेरे साथ खड़ी नहीं रही और आज HMO और PMO दोनों ही जगह से फोन आए कि विषय उनके संज्ञान में है और हर गतिविधि पर दृष्टि रखी जा रही है।
इसके अतिरिक्त कुछ मंत्रियों ने, बड़े पदाधिकारियों ने फोन किया। यह FIR-बाज़ी बंद हो तो बेहतर है, चलेगी तो फिर कोई नहीं रुकने वाला।
मेरे पास आभार के अलावा कुछ भी नहीं है कहने के लिए। ट्विटर पर तो उन्होंने भी लिखा जिनके साथ असहमतियाँ रही हैं। बाकी, हर हैंडल ने, जिनसे मैं प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जुड़ा हूँ, सबने मेरे लिए लिखा और स्वर उठाए। सबका आभार। 🙏