1. देश में वन्दे मातरम् गायन को पूरा गाना है या शुरू के दो छंद (पैरा) गाना है या नहीं गाना है, इसको लेकर जो इस समय में देश में राजनीति चल रही है, यह ठीक नहीं है और इस मामले में हमारी पार्टी का यही कहना है कि वन्दे मातरम् गायन को लेकर अभी हाल ही में संसद में जो क़ानून पास किया गया है यह कोई पहली बार ऐसा नहीं हो रहा है।
2. क्योंकि केन्द्र व राज्यों में भी सत्ता परिवर्तन के दौरान् सभी पार��टियाँ अपने राजनैतिक स्वार्थ/फ़ायदे के हिसाब से या फिर अपनी कमियों पर से जनता का ध्यान बाँटने के लिए यह सब करती रहती हैं अर्थात् एक-दूसरे के बने क़ानूनों को बदलती रहती हैं।
3. जबकि इस समय देश व जनहित के मुद्दों पर व ख़ासकर बेरोज़गार युवाओं व छात्र-छात्राओं ’जेन-जी’ व स्कूली बच्चे-बच्चियों की ’जी-अल्फा’ एवं इस समय देश के कुछ भागों में भयंकर आई बाढ़ से हो रही जान-माल की हानि आदि के अनेकों और भी अति-महत्वपूर्ण मुद्दों पर केन्द्र व सभी राज्य सरकारों को तथा साथ ही सभी राजनैतिक पार्टियों को भी सही से समुचित ध्यान देना चाहिये, यही वर्तमान में देश व जनहित में समय की सबसे ज़रूरी माँग भी है।
1. जेन-अल्फा अर्थात् सन् 2013 के बाद जन्मे बच्चे-बच्चियों में भी ख़ासकर अपने थोड़े ’अच्छे दिन’ की उम्मीद लगाये स्कूली छात्र-छात्रायें व उनके माता-पिता भी सुखी भविष्य हेतु अच्छी शिक्षा को लेकर हमेशा चिन्तित ही नहीं ब��्कि उसके लिये लगातार काफी जद्दोजहद भी करते रहे हैं, किन्तु देश भर में व विशेषकर यूपी एवं उत्तर भारत के राज्यों के स्कूलों के बदतर हालत की कड़वी ज़मीनी हक़ीक़त के कारण वे लोग अति-मुखर होे गये हैं।
2. वे लोग जेन-जी अर्थात् कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के देशव्यापी ’स्कूल ठीक करो’ अभियान में काफी बढ़चढ़ कर व पूरे उत्साह के साथ भाग ले रहे हैं।
3. किन्तु यह बड़े दुख और चिन्ता की बात है कि जिन मासूम बच्चे-बच्चियों के हंसने-खेलने व पढ़ने-लिखने के दिन हैं, उन्हें अपनी प्रारम्भिक स्कूली शिक्षा हेतु बुनियादी सुविधाओं के लिये भी सड़कों पर संघर्ष करने को मजबूर होना पड़ रहा है।
4. वैसे परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के ’शिक्षित बनो’ आह्वान के कारण शिक्षा में भी ख़ासकर स्कूली शिक्षा ’बहुजन समाज’ के लोगों के लिये हमेशा विशेष चिन्ता की बात रही है, और इसी के तहत् हमारी पार्टी बी.एस.पी. ने इन ��बे-कुचले व शोषित-पीड़ित समाज के लोगों की, जिनकी केन्द्र व राज्य में रही सरकारें लगातार उपेक्षा करती रहीं हैं, उनके हित व कल्याण एवं शिक्षा आदि के लिये यूपी में मेरे नेतृत्व में बी.एस.पी. की सभी चारों रही सरकारों में पूरा-पूरा ध्यान दिया गया, ताकि बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर द्वारा निर्मित मानवतावादी एवं कल्याणकारी भारतीय संविधान के हिसाब से उन सभी परिवार वालों को रोटी-रोजी व शिक्षा-युक्त ���त्म-सम्मान का समतामूलक जीवन नसीब हो सके।
5. किन्तु यह बड़े दुख व चिन्ता की बात है कि सरकारी स्कूल की व्यवस्था को बेहतर बनाने की तरफ समुचित ध्यान देने के बजाय सभी सरकारों ने ज़्यादातर इसकी घोर अनदेखी ही की है तथा इस पूरी शिक्षा व्यवस्था को एक प्रकार से, इन वर्गों के आरक्षण की तरह ही, काफी हद तक निष्क्रिय बनाने का कुचक्र चलाया हुआ है और इस प्रक्रिया में हज़ारों सरकारी स्कूल बंद भी किये जा रहे हैं, जिसका भी विरोध बी.एस.पी. ने लगातार किया है और अब स्कूलों के भवन, शिक्षक, पेयजल, शौचालय व साफ-सफाई आदि जैसी बुनियादी ज़रूरतों की अत्यन्त कमी को लेकर नन्हें जेन-अल्फा स्वंय अति-मुखर होने के साथ-साथ अब आन्दोलित भी हैं।
6. अतः यूपी सहित अन्य राज्यों की भी सभी सरकारें जेन-अल्फा के मासूम बच्चे-बच्चियों की बेहतर शिक्षा व्यवस्था सम्बंधी उनकी ज़रूरतों/माँगों पर पूरी सहानुभूति के साथ सही नीयत व नीति स�� तत्काल ध्यान देना प्रारंभ करें और उनके विरुद्ध कोई भी सरकार बल का प्रयोग करने से पूरी तरह से बचें तो यह उचित होगा।
1. उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा आमचुनाव सन् 2027 की तैयारियों के मद्देनज़र बी.एस.पी. के जनाधार को सर्वसमाज में बढ़ाने की ज़मीनी मज़बूती के साथ-साथ पार्टी उम्मीदवारों के चयन व उनके नामो�� की पार्टी के विधानसभा स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलनों में घोषणा करने आदि की प्रक्रिया भी चल रही है, जिसको लेकर विरोधी पार्टियों में काफी बेचैनी है और सत्ताधारी पार्टी बीजेपी व अन्य विरोधी पार्टियों में भी अब अनवरत बदलाव होना भी स्वाभाविक है।
2. वैसे बी.एस.पी. ने, सर्वसमाज में से ख़ासकर ब्राह्मण समाज को भी पार्टी में उनकी सन् 2007 की तरह बी.एस.पी. की पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने की तैयारी के हिसाब से, ���न्हें बी.एस.पी. उम्मीदवार बनाना जब से शुरू किया है तब से विरोधी पार्टियों में इसको लेकर चर्चा व चिन्तायें दोनों होना स्पष्ट हैं, जिनके हथकण्डों से ’बहुजन समाज’ के लोगों को लगातार सजग व सतर्क रहने की ज़रूरत है।
3. इसी क्रम में बहुजन समाज पार्टी के काफी लम्बे अरसे से चले आ रहे राष्ट्रीय महासचिव, वरिष्ठ अधिवक्ता व बी.एस.पी. शासनकाल में यूपी के महाधिवक्ता, उत्तर प्रदेश बार काउन्सिल के कई बार अध्���क्ष तथा बी.एस.पी. सरकार में कैबिनेट मंत्री एवं कई बार बी.एस.पी. के राज्यसभा सांसद रहे श्री सतीश चन्द्र मिश्र जी को, पार्टी द्वारा लीगल व मीडिया आदि के साथ-साथ अब चुनाव आयोग सम्बंधी कार्यों की भी महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी साैंपी गयी है, जो कि ख़ासकर आगामी विधानसभा आमचुनाव के दौरान कई मायने में इनकी अहम् भूमिका रहेगी।
1. जैसाकि सर्वविदित है कि FCRA संशोधन बिल, जिसे सरकार अति-महत्वपूर्ण बताकर अन्य विधेयकों की तरह ही इसे तुरन्त पास कराना चाहती थी, किन्तु विपक्ष के ज़बरदस्त विरोध के चलते व संसद में इस पर बिना प्रारम्भिक चर्चा के ही इसे कल काफी आपाधापी में संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेज दिया गया है।
2. वैसे इस एफसीआरए संशोधन बिल को कांग्रेस पार्टी व इनके सहयोगी दल सीधे तौर पर अल्पसंख्यक विरोधी बताकर इस ब��ल को वापस लेने की माँग कर रहे हैं, जबकि सरकार इसे विदेश फण्डिंग के उपयोग में कथित भ्रष्टाचार से जोड़कर इसमें कठोर बदलाव करना चाहती है। इससे स्पष्ट है कि इस बिल का सत्ता व विपक्ष दोनों ने ही राजनीतिकरण ज़्यादा कर दिया है।
3. बेहतर होता यदि विपक्ष कल इस विधेयक को रखने के दौरान् संसद को चलने देता और इसकी कमियोें को उजागर करता तो उसे पूरा देश जानता, लेकिन इन्होंने संसद को ही अपनी ज़िद के हिसाब से न��ीं चलने दिया।
4. इतना ही नहीं बल्कि ऐसे अनेकों और बिल भी विपक्ष द्वारा संसद को नहीं चलने देने की वजह से सरकार ने उन्हें मिनटों में पास करा दिये हैं, जिन्हें इनको रोकना चाहिये था, जो विपक्ष ने ऐसा नहीं किया, जिसका सरकार अपने पक्ष में पूरा फायदा उठा रही है। इससे विपक्ष की या तो अन्दरुणी मिलीभगत लगती है या फिर जेन-जी (Gen Z) के वोटों के स्वार्थ में इन्हें देश के अन्य मुद्दे बिल्कुल भी नज़र नहीं आ रहे हैं। हालाँकि वर्तमान हालात में जेनजी की समस्याओं के मुद्दे को प्राथमिकता देते हुये इनको जनहित के अन्य मुद्दों को भी महत्व देना चाहिये था।
5. इसके साथ ही, इनको अयोध्या में राममन्दिर के चढ़ावे में गड़बड़ी का अर्थात् इसके भ्रष्टाचार का मुद्दा भी संसद में उठाना चाहिये था, जिसे भी अब विपक्ष ने अपने राजनैतिक स्वार्थ में उसे पीछे कर दिया है, जबकि इस पर संसद में चर्चा होना बहुत ज़रूरी है।
6. ऐसे में देश की जनता, सत्ता व विपक्ष के बीच इस समय संसद सत्र के दौरान् भी चल रही उनके अपने-अपने राजनैतिक स्वार्थ की लड़ाई से पूरी तरह से सचेत रहते हुये अपनी एकमात्र अम्बेडकरवादी बहुजन समाज पार्टी, जो ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की नीतियों व सिद्धान्तों के आधार पर पूरी ईमानदारी व निष्ठा से चल रही है, उससे देश व आम-जनहित में जुड़े, यही समय की माँग व सर्वसमाज के हित में भी है।
बहन मायावती जी ने बेरोजगारी और आरक्षण मुद्दे की जो Gen G बड़ी की समस्या है उसकी नब्ज़ पकड़ ली
प्राइवेट सेक्टर में SC ST आरक्षण लागू करने मांग करके बड़ी बहस छेड़ दी
बहन जी ने बड़ा दाब खेल दिया है? 🔥🔥🔥
@Mayawati के भतीजे और #BSP के नेशनल कोऑर्डिनेटर @AnandAkash_BSP , हाथरस के सादाबाद में रैली और कार्यकर्ता सम्मेलन के बीच बेहद आक्रामक नजर आए. लेकिन, सबसे दिलचस्प रहा ‘यूपी के दो लड़कों’ को 'अंकल' कहकर बुलाना. अब सवाल यह है कि क्या आकाश आनंद की यह वापसी बसपा में नई जान फूंक पाएगी?
@NeerajGupta20@imkubool
#akashanand #samajwadiparty #akhileshyadav #RahulGandhi #BSP #mayawati #BJP #yogiadityanath
@UPTakOfficial
आज दिनांक 11-08-2026 को बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व सांसद माननीया बहन कु. मायावती जी द्वारा कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर मीडिया बाइट।
#बहनजी_का_संदेश#जयभीम#मिशन_2027#BSP#lucknow
1. बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव व वरिष्ठ अधिवक्ता, उत्तर प्रदेश के पूर्व महाधिवक्ता, बार काउन्सिल, उत्तर प्रदेश के पूर्व अध्यक्ष, बी.एस.पी. सरकार में कैबिनेट मंत्री एवं कई बार बी.एस.पी. के राज्यसभा सांसद रहे श्री सतीश चन्द्र मिश्र जी को अब वका��त के पेशे में 50 वर्ष (स्वर्ण जयंती) पूरे होने के इस शुभ अवसर पर हार्दिक बधाई एवं ढेरों शुभकामनाएँ।
2. माननीय न्यायालय के गलियारों से लेकर जनसेवा की राजनीति तक, इनका यह सफर सदैव सत्य, न्याय और संविधान के प्रति अटूट निष्ठा से संचालित रहा है। न्याय को केवल अदालतों की चौखट तक सीमित ना रखकर समाज के अन्तिम व्यक्ति तक पहुँचाने का जो संकल्प इन्होंने निभाया है, विशेषकर दृष्टिबाधित एवं अन्य दिव्यांगजनों के अधिकारों के लिए किए गए इनके ऐतिहासिक कार्य भी अनुकरणीय हैं।
3. परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर द्वारा रचित भारतीय संविधान के मूल्यों और लोककल्याण के इस संकल्प को वे आगे भी इसी ऊर्जा और समर्पण के साथ समृद्ध करते रहें, यही कामना है।
#Bsp #india
-देश के छात्रों व युवाओं केे आन्दोलन के चलते आज केन्द्रीय शिक्षा मन्त्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान द्वारा इस्तीफा दिये जाने का फैसला उचित, जो यह पहले ही ले लिया जाता तो बेहतर होता। साथ ही, हमारी पार्टी केन्द्र सरकार से यह भी अपेक्षा करती है कि जिन पुलिसकर्मियों ने जन्तर-मन्तर पर शान्तिमय ढंग से प्रदर्शन कर रहे निहत्ते लड़के व लड़कियों पर बरबर्तापूर्वक लाठी, डन्डों ���दि से चोट पहुँचायी है जिससे ये बड़ी संख्या में गम्भीर रूप से घायल हुए, उनपर सख़्त कार्रवाई की जानी चाहिये।
-और ख़ास तौर से जिन पुरूष पुलिसकर्मियों ने लड़कियों के साथ बेहूदा व शर्मनाक बदसलूकी की और बल प्रयाग किया, उनको चिन्हित करके, उनके खिलाफ अनुशासनिक एवं क्रिमनल केस चला कर सख़्त से सख़्त क़ानूनी कार्रवाई की जानी चाहिये, जिससे कि भविष्य में इस तरह की घिनौनी हरकत करने की कोई हिम्मत ना कर सक���।
- इसके साथ-साथ, सरकार को आन्दोलन कर रहे छात्रों व युवाओं के ख़िलाफ जो भी FIR या complaint दायर की गई है, उन सभी को वापस ले लिया जाये, जिससे इनको आगे चलकर थानों व कोर्ट कचहरी के चक्कर ना काटने पड़े और इस वजह से उनका भविष्य भी ख़राब ना हो, जिससे फिर देश में सौहार्दपूर्ण वातावरण बन सके।
- साथ ही मेरा सभी आन्दोलनकारियों से यह कहना है कि वो इस मामले में किसी भी पार्टी को उनके इस संघर्ष का राजनीतिकरण ना करने दें तथा अपने भविष्य को भी ख़राब ना होने दें।
न्याय किसी एक समाज का नहीं, बल्कि हर नागरिक का अधिकार है। हमारा संविधान न्याय पाने का स्पष्ट और कानूनी मार्ग प्रदान करता है। इसलिए किसी भी अफवाह, उकसावे या भड़काऊ बातों में आकर कानून अपने हाथ में न लें।
यदि कोई व्यक्ति जोश में आकर शांति ���ंग करता है या कानून का उल्लंघन करता है, तो उसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई हो सकती है। एक पल का आवेश कई वर्षों तक अदालतों के चक्कर लगाने की वजह बन सकता है।
इसलिए धैर्य रखें, कानून पर विश्वास रखें और समाज में शांति, सद्भाव तथा संवैधानिक व्यवस्था बनाए रखने में अपनी जिम्मेदारी निभाएँ।
1.देश में नीट-यूजी सहित विभिन्न परीक्षाओं के पेपरलीक व उसके उपरान्त परीक्षार्थियों द्वारा होने वाली आत्महत्याओं से उपजे छात्र-छात्राओं/युवाओं के ’कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) आन्दोलन के नई दिल्ली जन्तर-मन्तर में लगातार जारी शान्तिपूर्ण धरना को हालाँकि लोगों की व्यापक सहानुभूति हासिल है, किन्तु सरक���री जवाबदेही के रूप में केन्द्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की उनकी ज़िद्दी माँग को लेकर विपक्ष व सरकार दोनों के बीच ज़बरदस्त राजनीति का बाज़ार काफी गर्म है, जिससे शिक्षा व्यवस्था में ज़रूरी व्यापक सुधार का असली मुद्दा ही कहीं लुप्त ना हो जाये?
2.वैसे इस गर्म मुद्द��� को भुनाने हेतु विशेषकर विरोधी पार्टियों में सड़क से लेकर संसद तक में ज़बरदस्त होड़ लगी हुई है, उससे भी सरकार व विपक्ष के बीच तनाव व टकराव की भी परिस्थिति हिंसक होकर किसी न किसी रूप में राज्यों में भी फैल रही हैै, जिससे अपनी पार्टी के लोगों को सचेत व सजग रहने की सलाह।
3.इस प्रकार इस मुद्दे का पूरी तरह से राजनीतिकरण हो जाने के साथ ही जन्तर-मन्तर में आन्दोलनकारियों के विरुद्ध पुलिस की कार्रवाईय���ं ने स्थिति को और अधिक गर्म व गंभीर बना दिया है।
4.इस भारी तनाव व टकरावपूर्ण स्थिति के कारण संसद का वर्तमान मानसून सत्र अभी तक एक दिन भी सही व सुचारू रूप से नहीं चल पाया है, जिससे देश व जनहित के और भी अनेकों महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार की जवाबदेही एक प्रकार से रुक सी गयी है।
5.इसके साथ ही, सरकार सीजेपी के आन्दोलन से निपटने हेतु जो उपाय ढूंढने का प्रयास कर रही है वह भ्रष्टाचार एवं अयोग्यता आदि के ���ारण होने वाले पेपरलीक होने के बाद की सख़्त कार्रवाई के द्योतक हैं, जबकि पेपरलीक के जघन्य अपराध ना हों इसके नियंत्रण हेतु उचित उपाय नहीं होता दिखने से भी लोगों में असंतोष बढ़ रहा है।
6.इसलिये वर्तमान राजनीतिक हालात में उग्र व निराश होने के बजाय अपने लागों को अपने मिशन के प्रति पूरी लगन व तन, मन, धन से लगातार डटे रहना है, यही अपील।
@Nehabhartipro नेहा भारती मैं तुम्हारी हर बात से सहमत हूं और मुझे अच्छा लगा रहा है कि तुम समाज की आवाज बन रही हो और हम सबको आजादी भारत का संविधान देता है अपनी बात रखें लेकिन बहुजन समाज के नेता परमआदरणीय बहन कुमारी मायावती जी के बारे में कुछ भी सुनने को तैयार नहीं
जय भीम जय भारत
यूपी के जिला मेरठ की सरधना विधानसभा क्षेत्र के ग्राम चिरोड़ी की लगभग 17 वर्षीय बेटी एंव राष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी अनुष्का पाल की बदमाशों द्वारा की गई हत्या की खबर अत्यंत दुःखद एंव चिंताजनक है। यह घटना समाज को झकझोर देने वाली है। सरकार इस जघन्य अपराध में शामिल सभी दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी सुनिश्चित कर उनके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई करे, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके तथा भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृति न हो।