कमाल को अभिमान हो गया था। मैंने उसको त्याग द���या था। मेरे को अहंकारी प्राणी पसंद नहीं हैं। हम तो भक्ति के साथी हैं, हाथी-घोड़ों को नहीं चाहता। जो प्रेम भक्ति करता है, उसको हृदय में रखता हूँ। 🌱🌱
#सत_भक्ति_संदेश
#SaintRampalJi
#ये_है_गीता_का_ज्ञान JagatGuru Tattvadarshi Sant Rampal Ji Maharaj said that in Holy Gita ji Adhyay 9 Mantra 25, it is prohibited to worship Pitras i.e. to carry out shraadh.
#ईसाई_नहीं_समझे_HolyBible
ईसा जी में फरिश्ते प्रवेश कर बोलते थे
एक स्थान पर ईसा जी ने कहा कि मैं याकूब से भी पहले था। संसार की दृष्टि से याकूब ईसा जी का दादा था। यदि ईसा जी की आत्मा होती तो यह नहीं कहती कि मैं याकूब (अपने दादा) से भी पहले था।
पवित्र कुरान शरीफ में प्रमाण है कि प्रभु सशरीर है तथा उसका नाम " कबीर " है।
उसने छः दिन में सर्व सृष्टि रचना की और तख्त पर जा विराजा । उसकी खबर कोई बाखबर ही बता सकता है।
वह बाख़बर संत रामपाल जी महाराज जी है।
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गीता अध्याय 1 श्लोक 12 से 15
में कहा है कि तीनों प्रभुओं (त्रिगुणमाया) के पुजारी राक्षस स्वभाव को धारण किए हुए, मनुष्यों में नीच, शास्त���र विरूद्ध साधना रूपी दुष्कर्म करने वाले, मूर्ख मुझे (ब्रह्म को) नहीं भजते ।
यही प्रमाण गीता अध्याय 16 श्लोक 4...
#ये_है_गीता_का_ज्ञान
गीता सार
गीता ज्ञान दाता ने संकेत किया है कि इस
सच्चिदानंद घन ब्रह्म अर्थात परम अक्षर ब्रह्म
की भक्ति का ऊँ तत् सत् यह तीन मंत्र का
��ाप है, इसी का जाप करने का निर्देश है।
📚जानने के लिए हिन्दू साहेबान! नहीं समझे गीता, वेद, पुराण पुस्तक को
गीता ज्ञान दाता अपनी भक्ति को अनुतम क्यों कह रहे हैं ❓ जानिए सतलोक आश्रम यूट्यूब चैनल पर या पढ़े पुस्तक ज्ञान गंगा निशुल्क मंगवाएं।
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Gita Chapter 18 Verse 61-62:- there is a description of a Supreme God other than the giver of the knowledge of Gita.
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Holy Gita 16:23,24
says that Those who abandoning the injunc- tions of scriptures follow arbitrary way of worship, they neither attain happiness, nor the supreme state.
To know ⤵️
Must watch Sadhna TV 7:30pm .
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गीता जी अध्याय 7श्लोक 16 में गीता ज्ञान दाता ने अपने से अन्य किसी और को अविनाशी परमात्मा कहा है।
अविनाशी तो उस परमात्मा को जान जिस का नाश करने में कोई समर्थ नहीं है जिससे यह समपूर्ण जगत व्याप्त है।
- Sant Rampal Ji Maharaj
Chapter 17 verse 24 Chanting Om mantra alone can never give Moksha. Complete salvation is only possible after obtaining scripture-based way of worship
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In Bhagavad Gita Chapter 4, Verse 5, the Lord Himself describes being bound by birth and death, yet asks: Who is the imperishable, eternal, and worshipable Supreme Soul beyond birth and death? Discover the ultimate truth!
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#ये_है_गीता_का_ज्ञान
गीता जी अध्याय 2 श्लोक 17 में गीता ज्ञान दाता ने अपने से अन्य किसी और को अविनाशी परमात्मा कहा है।
अविनाशी तो उस परमात्मा को जान जिस का नाश करने में कोई समर्थ नहीं है जिससे यह समपूर्ण जगत व्याप्त है।
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#बुद्धिमान्_हिन्दुहरू_जाग्नुहोस् सबै धर्मगुरुहरु अज्ञानतावश ॐ नम: शिवाय, हरे राम, हरे कृष्ण, राधे राधे, आदि मन्त्र जपका लागि निर्देश गर्छन् जबकि गीता १७:२३ मा सच्चिदानन्द घनब्रह्म पूर्ण परमात्माकाे प्राप्तिको लागी
"ॐ, तत्, सत्", मन्त्र जपकाे निर्देश छ।
Today everyone will know through this Tag #ये_है_गीता_का_ज्ञान
Which Spiritual Guru has given knowledge according to the Scriptures to the Devotee community❓
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Halanki sarvottam Parmatma to koi aur hai Jo teenon lokon mein Pravesh karke sabhi ka palan poshan karte Hain aur use Amar parmeshwar kahate Hain.
@AbhisekJantar
@anitada23854181
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गीता सार गीता अध्याय 7, श्लोक 16
गीता ज्ञान दाता ने कहा है कि मेरी भक्ति चार प्रकार के लोग करते हैं अर्थार्थी, आर्थ, जिज्ञासु और ज्ञानी। गीता ज्ञान दाता अपनी भक्ति से होने वाली गति को भी अनुत्तम कह रहा है।
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गीता अध्याय 16 श्लोक 23 में कहा है कि शास्त्र विधि को त्यागकर जो साधक मनमाना आचरण करते हैं उनको ना तो कोई सुख होता है, ना कोई सिद्धि प्राप्त होती है तथा ना ही उनकी गति अर्थात मोक्ष होता है ।
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