बिहार के CM सम्राट चौधरी से जॉब फेयर में जॉइनिंग लेटर लेकर, एक लड़की दिल्ली पहुंची।
लेकिन उसकी नौकरी का सपना तब चकनाचूर हो गया, जब उसे पता चला कि नौकरी देने वाली कंपनी उसे 'देह व्यापार' में धकेल रही है।
पीड़िता ने बताया 👇
⦿ दिल्ली पहुंचते ही उसे एक हॉस्टल में कैद कर दिया गया
⦿ वीडियो कॉल के जरिए उसकी लड़कों से बात करवाई गई
⦿ पसंद आने पर लड़कों के सामने परोसने की कोशिश की गई
⦿ मना करने पर टॉयलेट साफ करवाया गया और भूखा रखा गया
पीड़िता का कहना है कि वो कंपनी उसे विदेश में बेचने की तैयारी में थी, लेकिन किसी तरह मौका देखकर वो वहां से भाग निकली।
ऐसे में सवाल उठता है-
❓ CM सम्राट चौधरी ने बिना जांच-पड़ताल के लड़कियों को किसी भी कंपनी का जॉइनिंग लेटर कैसे थमा दिया?
❓ रोजगार मेले में हजारों लड़कियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?
❓ ऐसे और कितने 'गैंग' BJP के जॉब फेयर में मासूम बच्चियों की जिंदगी तबाह कर रहे हैं?
साफ है-
BJP के लिए बेटियों की सुरक्षा रत्ती भर मायने नहीं रखती। इन्हें सिर्फ फर्जी नौकरियों के सर्टिफिकेट बांटने हैं, खोखला PR करना है और रीलबाजी कर अपनी ही पीठ थपथपानी है।
शर्म आनी चाहिए।
यह नफ़रती चिंटू कह रहा है
• मोदी जी ने इशारा कर दिया है, अब हम दिमागी नक्सलियों का इलाज करेंगे
• अभी तक तो कड़ा चलाया है, आगे कट्टा चलायेंगे
• हम खुल कर कैमरे पर कह रहे हैं यह सब करने के लिए गूदा चाहिए
@DelhiPolice - हिंसा और मारने की बात करने वाले को पकड़ने का गूदा है?
दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान निशु आज़ाद के पिता संजय कुमार से मारपीट के मामले में भाजपाई गुंडे स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी और सख़्त कार्रवाई की मांग को लेकर संसद मार्ग थाने के बाहर भारी पुलिस तैनाती के बीच लोगों का विरोध-प्रदर्शन जारी है।
नोएडा DM की सैलरी से ₹5 लाख काटकर एक्टिविस्ट को दिया जाएगा मुआवजा!
नोएडा में हुए मजदूरों के प्रोटेस्ट के मामले में आकृति चौधरी की गिरफ्तारी हुई थी. उन पर यूपी पुलिस ने मजदूरों को हिंसा के लिए भड़काने के आरोप में NSA लगाया था.
अब इलाहाबाद हाई कोर्ट ने NSA के तहत जारी डिटेंशन ऑर्डर को रद्द कर दिया है. साथ ही 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश भी दिया है.
हाई कोर्ट ने मुआवजे की रकम गौतमबुद्धनगर की डीएम मेधा रूपम की सैलरी से वसूलने का निर्देश दिया है.
डिटेंशन ऑर्डर रद्द करते हुए कोर्ट ने कहा, आकृति को राज्य की ओर से पेश की गई एक मनगढ़ंत कहानी के आधार पर हिरासत में लिया गया था.
पूरी खबर: https://t.co/kJeZjXgrB9
💔 60 टांके लगे मौत के मुंह से लौटे एक पिता।
और उनका हमलावर भाजपा के साए में बेख़ौफ़ घूमता रहा?
आरोप है कि स्टूडेंट प्रोटेस्ट के दौरान उन पर हमला किया गया। मामला गंभीर था, लेकिन आरोपी के बेख़ौफ़ घूमने और राजनीतिक संरक्षण ने कई सवाल खड़े कर दिए।
भाजपा राज में आम आदमी के लिए कानून अलग है क्या?
“बना लो, वायरल कर देना… अखिलेश यादव को दे देना!”
मैनपुरी के CO City अशोक सिंह का यह अंदाज़ देखिए। वर्दी का रौब, सत्ता की अकड़ और ऊपर से मूंछों पर ताव!
योगी राज में यूपी पुलिस पर “ठाकुरवाद” और सत्ता-संरक्षित जातीय वर्चस्व के आरोप यूँ ही नहीं लगते। जब वर्दी में बैठा अफ़सर जनता से कानून की भाषा में बात करने के बजाय विपक्ष के नेता का नाम लेकर चुनौती देने लगे, तो सवाल सिर्फ़ एक पुलिसवाले के व्यवहार का नहीं रह जाता - सवाल उस सत्ता-संस्कृति का होता है, जिसने ऐसी अकड़ को बेख़ौफ़ बनाया है।
क्या यूपी पुलिस संविधान से चलेगी या सत्ता की जातीय हनक से?
भक्तों का दुःख काहे ख़त्म नही होता 😅
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राहुल गांधी की दोहरी नागरिकता वाली याचिका को खारिज कर दिया है !
कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता वकील अशोक पांडेय और अन्य लोग अपने आरोपों को साबित करने के लिए एक भी दस्तावेज पेश नहीं कर सके, याचिका में आरोप लगाया गया था कि राहुल गांधी भारतीय नागरिक नहीं हैं, बल्कि उनके पास ब्रिटेन की नागरिकता है. कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता एक भी ऐसा सबूत पेश नहीं कर सके जिससे यह साबित हो सके कि राहुल गांधी ने खुद को ब्रिटिश नागरिक घोषित किया है.
जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता ने जिस एकमात्र दस्तावेज का सहारा लिया, वह कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी का एक लेटर था. बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने कहा कि इस लेटर से याचिका में लगाए गए किसी भी आरोप की पुष्टि नहीं होती है
कितना शर्मनाक है कि एक शख्स "स्वतंत्र भारद्वाज" खुलेआम पॉडकास्ट में दावा करता है कि उसने एक लड़की के पिता ((एक दलित व्यक्ति) का सिर फोड़ा और लड़की के साथ बदतमीज़ी की—लेकिन इसके बावजूद उसे जेल नहीं हुई।
वह बड़े गर्व से दावा करता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बिहार के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान, दिल्ली के नेता कपिल मिश्रा और सांसद मनोज तिवारी उसके “बड़े भाई जैसे” हैं, इसलिए उसका बाल भी बांका नहीं हो सकता। वह बेफ़िक्री से इन नेताओं के साथ तस्वीरें खिंचवा रहा है और खुलेआम घूम रहा है।
अगर ये दावे सच हैं, तो सवाल बेहद गंभीर है—दिल्ली पुलिस और शासन-प्रशासन की कार्रवाई कहाँ है? क्या कानून सिर्फ कमजोरों के लिए है और रसूखदारों के लिए सारे नियम ताक पर रख दिए जाते हैं? किसी भी सरकार के Law & Order की असली परीक्षा यही होती है कि वह ताकतवर अपराधियों के खिलाफ भी उतनी ही सख्ती से पेश आए।
दक्षिणपंथी मानसिकता के इन रसूखदारों को सरंक्षण देकर क्या भाजपा यही ‘GenZ’ के सामने यही उदाहरण पेश कर रही है?
आज निशु है, कल कोई और बेटी या परिवार इस अराजकता का शिकार हो सकता है। इस मामले में निष्पक्ष जांच हो और आरोपी पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
आवाज़ उठाइए, क्योंकि चुप्पी किसी भी व्यवस्था को जवाबदेह नहीं बनाती।
BJP के साथ गठबंधन किए हुए नेताओं ने देश को ज़्यादा नुक़सान पहुंचाया है। सत्ता में बने रहने की लत में इन्होंने देश का बंटाधार किया है।
चिराग जी आरक्षित सीट से लड़ते हैं और आरक्षण के ख़िलाफ़ बोलने वाली पार्टी के साथ गठबंधन करके पावर एंजॉय करते हैं।
दलित तबके की बेटी के साथ अन्याय करने वाले आतंकी इनको अपना बड़ा भाई बताता है।
जिनके साथ ये सत्ता सुख ले रहे हैं, वही भाजपाई खड़गे जी के जाने के बाद ज़मीन की शुद्धिकरण करते हैं। फिर ये शुद्धिकरण के ख़िलाफ़ बोलते हैं लेकिन इतनी हिम्मत नहीं कि BJP के ख़िलाफ़ खड़े हों।
उल्टे आतंकियों को संरक्षित कर रहे हैं। अच्छा ही है रामबिलास जी को ये सब देखना नहीं पड़ा! न जाने उन पर क्या बीतती!
आज सत्येंद्र जैन को बेल मिल गई।
उनको गिरफ्तार क्यो किया गया। किसी को समझ नहीं आ रहा। किसी भी मामले में किसी को गिरफ्तार उनसे पूछताछ के लिए किया जाता है। इसके लिए पुलिस कस्टडी ली जाती है। पुलिस कस्टडी पूरी होने के बाद व्यक्ति न्यायिक हिरासत में जाता है।
सत्येंद्र जैन को इस मामले में पुलिस कस्टडी में नहीं भेजा गया। उनसे कोई पूछताछ नहीं की गई। सीधे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। उनके ख़िलाफ़ केस इतना कमज़ोर था कि मात्र दस दिन में उन्हें बेल मिल गई।
मोदी जी, इस से आपको क्या हासिल हुआ? चौबीस घंटे आप बस लोगों को जेल भेजने के बारे में सोचते रहते हो। देश चलाने में तो कोई इंटरेस्ट ही नहीं आपको। और ना ही देश चलाना आता है।
कहाँ आप देश के प्रधान मंत्री बन गए। आपको तो किसी गाँव का थानेदार होना चाहिए था। आपकी हरकतें वैसी ही हैं।
एक तरफ़ आप सत्येंद्र जैन जैसे भले व्यक्ति को जेल भेजते हो, दूसरी तरफ़ ऐसे गुंडों को पाल कर रखते हो
दिल्ली में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता जी से सवाल पूछने की कोशिश करने पर पत्रकारों शाहीन और नफीसा को पुलिस द्वारा कथित रूप से मारते-पीटते थाने ले जाने, गाली-गलौज करने, धमकाने और उनके साथ दुर्व्यवहार किए जाने का आरोप यह बताता है कि World Press Freedom Index में भारत 180 देशों में 157वें स्थान पर क्यों है।
सबसे चिंताजनक यह है कि उनका कहना है कि उनके मुस्लिम होने की जानकारी मिलने के बाद उनके साथ दुर्व्यवहार और बढ़ गया यह भाजपा की मुस्लिम विरोधी मानसिकता और प्रेस की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
सवाल पूछना अपराध नहीं है। पत्रकार की पहचान देखकर उसके साथ भेदभाव करना लोकतंत्र और संविधान दोनों के खिलाफ है।
यह बेहद गंभीर और चिंताजनक है!
नेहा सिंह:- CJP प्रोटेस्ट मे आपके हाथ मे जो डंडा था वो कहां से लेकर आए थे
स्वतंत्र:-(अपना जूता दिखाते हुए)
ये जो जूता आप देख रही हैं, ये दिल्ली पुलिस का जूता है 😳
नेहा:- क्या बात कर रहे 😳
स्वतंत्र:- हां, हम बिना फार्म भरे दिल्ली पुलिस बनकर चलते है, हमारे पास सब है दिल्ली पुलिस का 😳
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वाह दिल्ली पुलिस ये लडका तो गजब ही दावा कर रहा है !!