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संघर्ष, इंतज़ार और तमाम बाधाओं के बाद मैट पर कदम रखा, तो नतीजा वही रहा—जीत। विनेश फोगाट ने पहली ही बाउट में ज्योति पहलवान को 7-1 से हराकर अपनी वापसी का ऐलान कर दिया।
महम के पूर्व विधायक बलराज कुंडू को 5 करोड़ की धमकी, रोहित गोदारा नाम के व्यक्ति ने मोबाइल कॉल व वॉइस नोट भेजा। 2 दिन में पैसे न देने पर अंजाम भुगतने की चेतावनी। कुंडू ने डीजीपी और सरकार को ईमेल कर सुरक्षा मांगी। 2019 में निर्दलीय चुने गए,
आजकल हरियाणा में अपराध का बोलबाला।
@haryanvitai कैथल में चाचा-भतीजे की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या बताती है कि हरियाणा में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ढह चुकी है।
अपराधी बेखौफ हैं, जनता असुरक्षित है,
कब जागेगी सरकार, या हर घटना पर सिर्फ़ संवेदनाएँ ही बची रहेंगी?
कोविड के दौरान लाई गई आरोग्य सेतु ऐप का कोई ठोस लाभ जनता को नहीं मिला।अब सरकार संचार साथी ऐप लेकर आई है,जिससे भी जनहित में किसी बड़े उपयोग की उम्मीद नहीं दिखती। जब तकनीक को लेकर सरकार स्वयं विरोधाभासी और अवैज्ञानिक दावे करती रही हो,तो ऐसे ऐप्स की क्षमता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
कुरुक्षेत्र में एक कैबिनेट मंत्री को केंद्रीय मंत्री के काफिले में जगह न मिलना और गाड़ी का बिना रुके निकल जाना लोगों में जिज्ञासा जगा गया है। जनता इसे प्रोटोकॉल की चूक मान रही है या रिश्तों की दूरी—इस पर अलग-अलग राय बन रही है। हरियाणा में इस दृश्य की खूब चर्चा है।
कभी संभावित मुख्यमंत्री रहे @anilvijminister को अब गाड़ी में बैठने की जगह भी नहीं मिलती।
कुरुक्षेत्र में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के काफिले को हाथ देते रहे, लेकिन गाड़ी नहीं रोकी गई। उनका ये हाल देखकर वो अफसर तो खुश होते होंगे जिनकी ये मीटिंग्स के सरेआम बेइज्जती करते हैं।
@HaryanaTracker पोस्टर में कुछ चेहरे गायब होना शायद डिज़ाइन की गलती हो…
पर सवाल तो बनता है—क्या बड़े नेताओं को भूल जाना नई ट्रेंडिंग स्टाइल है या फिर किसी की नज़रचूक?
खैर, जनता तो असली काम करने वालों को ही याद रखती है।
अजीब बात है… काग़ज़ों में लैब भी बन गई, फर्नीचर भी आ गया, बिल भी कट गया…
पर ज़मीन पर कुछ दिखा क्यों नहीं?
7.25 करोड़ की हवा कहाँ गई?
कहाँ बनते हैं ऐसे जादुई सामान जो आते ही ‘गायब’ हो जाते हैं—बस रसीदें ही रसीदें छोड़कर?
तेजस्वी यादव की रैलियों में भीड़ उमड़ी, माहौल भी बना…
लेकिन जब वोट गिने गए तो नतीजे वैसा साथ नहीं दे पाए।
आख़िर ऐसा क्या हुआ कि रैलियों का जलवा मतपेटियों में नहीं उतर सका?
@yadavtejashwi@RJDforIndia@sanjuydv
@HansrajMeena सही कहा—तकनीक जितनी आगे बढ़ती है, उतनी ही पारदर्शिता की ज़रूरत बढ़ती है।
EVM हो या कोई भी सिस्टम, विशेषज्ञों के सुझाव लोकतंत्र को और मजबूत बनाते हैं।
सुरक्षा पर सवाल उठाना नकारात्मक नहीं, बल्कि सुधार और भरोसे की दिशा में सकारात्मक कदम है।
राहुल गांधी ने जिस ब्राज़ील मॉडल की फर्जी वोट का खुलासा किया था, अब गांव बरोटा के लोगों ने खुद फैक्ट चेक कर उसे सच साबित कर दिया है। जब नकली वोट लिस्ट में कायम हैं, तो सवाल चुनाव आयोग पर भी उठता है — क्या लोकतंत्र अब सिर्फ कागज़ों में रह गया है? संविधान की आत्मा को चोट पहुंची है।
हमारे पास 'वोट चोरी' के बहुत सारे सबूत हैं।
हम देश के युवाओं और Gen Z के सामने ये साबित कर देंगे कि नरेंद्र मोदी 'चुनाव चोरी' कर प्रधानमंत्री बने हैं।
: नेता विपक्ष श्री @RahulGandhi
अरे भाई, ये कैसी व्यवस्था है? फरवरी में कोई दिल्ली का वोटर होता है, नवंबर में बिहार का! 🤔
अगर ऐसे ही वोटर लिस्ट बनती रही तो फिर चुनाव की निष्पक्षता पर भरोसा कैसे करें?
क्या वाकई आयोग सब कुछ देख रहा है या बस देखने का दिखावा कर रहा है?