दिल पर मोहर!!
पैगम्बर मुहम्मद ﷺ ने फरमाया:-
“जो शख्स तीन जुमा सुस्ती के सबब छोड़ देगा, तो अल्लाह उसके दिल पर मोहर लगा देगा।”
📓(जामे तिरमिजी : 500)
जुमे के दिन के अमल
1• गुसल करना।
2• साफ कपड़े पहनना और खुशबू लगाना।
3• जुम्मे के लिए जल्दी जाना।
दिल पर मोहर!!
पैगम्बर मुहम्मद ﷺ ने फरमाया:-
“जो शख्स तीन जुमा सुस्ती के सबब छोड़ देगा, तो अल्लाह उसके दिल पर मोहर लगा देगा।”
📓(जामे तिरमिजी : 500)
जुमे के दिन के अमल
1• गुसल करना।
2• साफ कपड़े पहनना और खुशबू लगाना।
3• जुम्मे के लिए जल्दी जाना।
रसूल अल्लाह ﷺ ने फरमाया:-
जिस शख़्स ने हर नमाज़ के बाद आयत-अल-कुर्सी पढ़ी तो मौत के इलावा जन्नत और उसके दरमियान कोई रुकावट नहीं है।
(अल सिलसिला तुस सहीह हदीस न.749 )
@FirozaK70336089 बहन यहां किसी गैर मज़हब की मज़ाक उड़ाने आई हो आप? इस्लाम कभी भी किसी दूसरे धर्म को नीचा दिखाने की इज़ाजत नहीं देता है। मंदिर में प|त्थर ये सब लिख कर कौमी एकता तोड़ने का प्रयास मत किया करो
1. नबी ए करीम सल्लाहु अलैही वसल्लम ने फरमाया : -
खबरदार ! तुमसे पहले लोग अपने अंबिया और नेक लोगों की कब्रों को सजदा गाहें बना लिया करते थे , खबरदार ! तुम कब्रों को सजदा गाहें ना बनाना।
मैं तुमको इससे रोकता हूं !!!
( Sahi Muslim : 1188 )
इस्लाम में मजार - दरगाह बनाना ही मना हैं :
1. हजरत जाबिर रजि० अल्लाहु अन्हु बयान करते हैं कि नबी ए करीम सल्लाहु अलैही वसल्लम ने कब्रों पर बैठना / कब्रों को पक्का करवाना और कबर पर ईमारत बनवाना मना फरमाया था !
( Sahi Muslim : 2245 )
मजारो - दरगाहों को सजदागाह बनाना हराम हैं :
@FirozaK70336089 और तुम्हारा मौलाना तारिक़ जमील गुरुद्वारा में शिर्क़ करने जा सकता हैं, क्यूँ और हम सुन्नी बरेलवी अल्लाह के वली की मज़ार पर जाए तो गलत हैं, तुम लोगों को इतना दोगलापन कहाँ सिखाया जाता हैं
कब्र परस्ती ( पीरी / मुरीदी ) का इस्लाम से कोई ताल्लुक नहीं हैं !
1. नबी ए करीम सल्लाहु अलैही वसल्लम ने फरमाया : -
कि कब्रों की जियारत करो क्योंकि कब्र तुम्हे मौत की याद दिलाती हैं !
( Sahi Muslim : 2259 )
Note > इस हदीस से मालूम होता हैं की कब्रो की
��इए कुरान और हदीस की रोशनी में जानते हैं,
तलाक कब और कैसे दी जाए, किन हालात में तलाक़ नहीं होगी, इद्दत की मुद्दत, रूजू का तरीक़ा, तलाक़ की शर्त, हलाला और खुला
https://t.co/mhYFdn0SBc