रसूल अल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:-
काश मेरी माँ ज़िंदा होती, में ईशा की नमाज़ के लिए खड़ा होता,नमाज़ शुरू कर चुका होता, माँ आवाज़ देती और में नमाज़ छोड़ कर, दौड़ कर माँ के पास चला जाता और दुनिया वालों को बताता की माँ की अज़मत क्या होती है
#MothersDay
असल मालदारी दिल की है
हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया:
"मालदारी, माल व दौलत की कसरत का नाम नहीं है बल्कि असल मालदारी तो दिल की मालदारी है।
(इब्ने माजा:4137)
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3 लोग ऐसे हैं जिनकी दुआ रद्द नहीं होती
हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया:
3 लोग ऐसे हैं जिनकी दुआ रद्द नहीं होती
1. एक रोजे़दार जब तक वह इफ्तार ना कर ले
2. इंसाफ करने वाला इमाम
3.मज़लूम(जिसके साथ नाइंसाफी की गई हो)
(तिरमिजी शरीफ :3598)
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रसूल अल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:
जब तुम में से कोई रोज़े से हो तो उसे खजूर से रोजा अफ्तार करना चाहिए अगर खजूर न पाए तो पानी से कर ले, इसलिए कि वह पाकीज़ा चीज़ है।
(सुनन अबू दाऊद हदीस न. 2355)
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हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया:-
“जिस ने रोज़ेदार का रोज़ा इफ़्तार कराया उसे इन (रोज़ेदारों) के बराबर सवाब मिलेगा, लेकिन इनके सवाब में कुछ कमी नहीं होगी”
(इब्ने माजा 1746)
#HadithOfTheDay
हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया:-
“जिस ने रोज़ेदार का रोज़ा इफ़्तार कराया उसे इन (रोज़ेदारों) के बराबर सवाब मिलेगा, लेकिन इनके सवाब में कुछ कमी नहीं होगी”
(इब्ने माजा 1746)
#HadithOfTheDay
हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया:-
“जिस ने रोज़ेदार का रोज़ा इफ़्तार कराया उसे इन (रोज़ेदारों) के बराबर सवाब मिलेगा, लेकिन इनके सवाब में कुछ कमी नहीं होगी”
(इब्ने माजा 1746)
#HadithOfTheDay
हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया:-
“जिस ने रोज़ेदार का रोज़ा इफ़्तार कराया उसे इन (रोज़ेदारों) के बराबर सवाब मिलेगा, लेकिन इनके सवाब में कुछ कमी नहीं होगी”
(इब्ने माजा 1746)
#HadithOfTheDay
हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया:-
“जिस ने रोज़ेदार का रोज़ा इफ़्तार कराया उसे इन (रोज़ेदारों) के बराबर सवाब मिलेगा, लेकिन इनके सवाब में कुछ कमी नहीं होगी”
(इब्ने माजा 1746)
#HadithOfTheDay
चुनाचें (ख़ुदा की अदालत फैसला सुनाएगी और उसकी ज़ियादतियों के बदले में) इन तमाम मजलूमों को उसकी नेकियों में से अदा किया जाएगा। जब नेकियां कम पड़ जाएंगी तो उस पर उसके गुनाहों का बोझ डाल कर उसको आग में झोंक दिया जाएगा।"
~सही मुस्लिम (6579)
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जो क़यामत के दिन पेश होगा तो अपने साथ नमाज़ और रोज़ा, सदका और खैरात, सब नेकियां लेकर आयेगा, (फिर भी ख़ाली दामन रह जाएगा। इसलिए कि) किसी को उसने गाली दी होगी, किसी पर बोहतान तराशा होगा, किसी का माल ले उड़ा होगा, तो किसी को मारा पीटा और कत्ल कर दिया होगा।
नबी करीम सल्ललाहू अलैहि वसल्लम ने (एक दफा अपने साथियों से) सवाल पूछा: "जानते हो कंगाल कौन होता है?"
उन्होंने जवाब दिया: "(या रसूल्लाह), हम में कंगाल उस शख़्स को कहा जाता है जो दिरहम य साज़ो सामान से महरूम हो"
आपने फ़रमाया:"(ऐसा ही है, मगर) मेरी उम्मत का असल कंगाल तो वो शख़्स है
रसूल अल्लाह ﷺ ने फरमाया :
हमारे रब का इरशाद है रोज़ा एक ढाल है जिसके जरिए बन्दा जहन्नम से बचता है और यह सिर्फ़ मेरे लिए है और मैं ही इसका बदला दूंगा
(मुसनद अहमद हदीस न. 3645)
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रोज़ा तोड़ने का कफ़्फा़रा
हुज़ूर ﷺ ने
"एक आदमी को हुक्म फ़रमाया जिस आदमी ने रमज़ान में रोज़ा तोड़ लिया था उसे चाहिए कि वह 1 गुलाम आज़ाद करें या 2 महीने के रोज़े रखे या 60 मिस्कीनो को खाना खिलाएं।
(सहीह मुस्लिम :2599)
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