Sumedh U did kind of miracles in my life unknowingly & in a very rare way. Love U & Bless U with my each&every heartbeat & space between each&every 2 heartbeats
Stay happy and bless u with new era of love and happiness🌿🤍✨ @Beatking_Sumedh
May u grow like a plant and radiate good vive and energy filled with oxygen and may ur fans stay with always in this journey...
till I can of course would be annoying u 😛🥰🫶
lots of love✨
On this day , 9 years ago, he wrote “ I ❤️ Sumedhians “ on goabeach and shared it with us
*this time with correct tagline*
Sumedh Ka Parivaar
#SumedhKeSumedhians
Received via WA but makes sense 👇
मेरे आदरणीय,
कृपया आपसे निवेदन है…
“मार्च 2027” तक भारत की जनगणना पूरी होने जा रही है। जनगणना अधिकारी शीघ्र ही आपसे जानकारी एकत्र करने के लिए मिलेंगे।
आपसे जब आपकी मातृभाषा पूछी जाएगी और उसके बाद जब आपसे यह पूछा जाएगा कि आप कौन-कौन सी भाषाएँ जानते हैं, तो कृपया “संस्कृतम्” को भी उन भाषाओं में अवश्य शामिल करें जिन्हें आप जानते हैं। यद्यपि हम सभी संस्कृतम् बोल नहीं पाते, फिर भी हम प्रतिदिन अपनी प्रार्थना, जप, श्लोक तथा सभी धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा-पाठ में इसका उपयोग करते हैं।
पिछली जनगणना के अनुसार पूरे देश में संस्कृत बोलने वालों की संख्या मात्र हजारों में थी, जबकि अरबी और फ़ारसी बोलने वालों की संख्या बहुत अधिक है। उन भाषाओं के विकास के लिए उन्हें वित्तीय सहायता भी मिलती है। यदि संस्कृतम् को “लुप्तप्राय” भाषा घोषित कर दिया गया, तो हमारे प्राचीन धर्मग्रंथ, वेद, पुराण आदि का प्रकाशन बंद हो सकता है। हम अपनी जड़ों से कटते जाएंगे और अंततः पूजा-अर्चना का अर्थ केवल DJ बजाने तक सीमित हो जाएगा।
देवभाषा संस्कृतम् भारत की सबसे प्राचीन और सुंदर भाषा है। यह सभी भाषाओं की जननी है। इस भाषा को जीवित रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। यदि संस्कृत को “लुप्त” भाषा घोषित कर दिया गया, तो इसके विकास और विस्तार के लिए कोई आर्थिक सहायता नहीं मिलेगी। संभव है कि हम संस्कृत को हमेशा के लिए खो दें।
केवल हमारी जागरूकता और प्रयास ही संस्कृत को जीवित रख सकते हैं। अभी भी देर नहीं हुई है। कृपया संस्कृत सीखने के साथ-साथ यह छोटा-सा प्रयास अवश्य करें।
यदि आपको यह उचित लगे, तो कृपया इस संदेश को अपने सभी परिचितों तक अवश्य पहुँचाएँ।