Healthy Society भारत सरकार से #गरीबी और #बेरोजगारी पर स्वेत पत्र लाने की मांग करता हैlपत्ती पर पानी डालने से क्या होगा जड़ पर पानी डालने से पौधे का विकास होगा!समस्या क्या है और समस्याओं की जड़ क्या है? क्या वोट बैंक या बहुमत या चुनी सरकारे स्वेत पत्र ला सकती है? मेरा समर्थन करे!
का ��ामला कोई #विचित्र मामला नहीं है l पर पेपर लीक को रोका जा सकता है पर खत्म नहीं किया जा सकता है l इसक��� पीछे जनसंख्या है l जिसे भारत देश के नेता बढ़ा रहें है मुफ्त मे बड़ा और महान बनने के लिए l क्योंकि इससे भारत के नेताओं को काम कम करना पड़ेगा!
पूर्व शिक्षा मंत्री #धर्मेंद्रप्रधान जी का त्यागपत्र सिर्फ भारत के बिगड़ते हालात को नियंत्रित करने का प्रयास है l इसका Neet प्रतियोगिता परीक्षा से कोई लेना देना नहीं है l CJP पार्टी ने इस पूरे मुद्दे को सियासी रं�� देकर Neet परीक्षा के पेपर लीक मामले को घटा दिया
रुख करती है तब मेले मे बड़े #हादसे होते है l जब ये जनसंख्या अस्पताल की तरफ रुख करते है तो अस्पताल मे बड़े हादसे होते है और हर साल लगातार प्राकृति�� आपदाओं मे बहुत से लोग मरते है और मंदिरो की भीड़ मे सैकनो लोगो अपनी जान गवाते है l जब भारत देश की इतनी बड़ी जनसंख्या है तब पेपर लीक
#अमेरिका और #ईरान का युद्ध सिर्फ गरीबो के लिए काल है l अगर मान लिया जाये की ईरान के साथ अमेरिका ने बहुत गलत किया तो इसका बदला ईरान सभी विकासशील देशो को नुकसान पहुंचा कर लेगा ! जब अमेरिका के ऊपर 9/11 का हमला हुआ तब अमेरिका के लगभग 3000 निर्दोष लोगो की जान चली गयी और दस हजार से
देशो पर हमला बंद करना चाहिए और स्ट्रेट ऑफ़ हारमुज को खोलना चाहिए l #ईरान जो समय,रुपया और #ऊर्जा युद्ध पर खर्च कर रहा है उसका इस्तेमाल ईरान स्वयं को मजबूत बनाने मे करना चाहिए ताकि जब कभी फिर ईरान पर हमला हो तब वो इसका बदला सीधे दुश्मन देश के सेना पर सीधा मिसाइल छोड़ कर ले सके
आज जरूरत है कि ईरान के लोग स्वयं विचार करें—उन्होंने इस रास्ते पर चलकर क्या पाया और क्या खोया। क्योंकि किसी भी देश की असली ताकत उसकी जनता की स्थिरता, शांति और प्रगति में होती है, न कि केवल टकराव या #झूठी शान में।
झूठी शान
#ईरान की वर्त���ान स्थिति देखकर मन में दुःख होता है। सवाल यह है कि आखिर इसके लिए जिम्मेदार कौन है? अगर निष्पक्ष और ठंडे दिमाग से विचार किया जाए, तो कहीं न कहीं इसकी जिम्मेदारी स्वयं ईरान के हालात और फैसलों पर भी जाती है।
परिणाम है lदुनिया भर में लोग इस स्थिति को अपने-अपने #नजरिए से देख रहे हैं—कोई इसे ईरान की जीत बता रहा है, तो कोई संघर्ष। लेकिन सच्चाई को समझने के लिए निष्पक्ष दृष्टिकोण जरूरी है। यह केवल बाहरी संघर्ष नहीं, बल्कि आंतरिक निर्णयों और नीतियों का भी परिणाम है।