सुनो भाजपा वालों
ये AI का बच्चों वाला झूठा खेल खेलना बंद करो, समाजवादियों ने तो अभी सच्चा खेल खेलना अभी शुरू भी नहीं किया है,
देखो भाई, ये सोशल मीडिया है, आप शुरुआत करेंगे तो हमारे पास आपके 10 सालों का पूरा हिसाब किताब है, आप एक बनाओगे तो हमारे क्रिएटिव कार्यकर्ता और समाजवादी समर्थक आपके सारे किए धरे पर पानी फेर देंगे
फिलहाल ये पहला जवाब ले लो, अगला जवाब झेल भी नहीं पाओगे
जिन भाजपाइयों और उनके संगी-साथियों ने भगवान के ख़जाने में हाथ डालकर ‘धर्म-धन’ चुराने तक का दुस्साहस कर लिया, वो किसी पुजारी और इंसान का मान क्या करेंगे। बेहद निंदनीय!
वैधानिक कार्रवाई हो।
जो भाजपा का साथी, वो रामघाती!
#CC_to_CC
विश्व विख्यात श्री सोनम वांगचुक जी से फोन पर बात करके उनके स्वास्थ्य के बारे में जाना और उनसे अनशन तोड़ने की अपील की। उनके सत्याग्रह को हमारा खुला समर्थन है।
हमारा मानना है कि वो जनहित में इस आग्रह पर विचार करें। देश की संपूर्ण युवा शक्ति, उनके अभिभावकों, परिवार और परिजनों की आकांक्षा भी यही है क्योंकि उनके नैतिक बल की देश को बहुत आवश्यकता है अतः वो पूरी दुनिया से आ रहे निवेदनों को स्वीकार करते हुए अपना अनशन तोड़े दें, फिर कुछ दिनों का स्वास्थ्य लाभ लें और नई ऊर्जा का संचय करके पुनः नये आंदोलन में जुट जाएं। उनसे सविनय आग्रह है कि वो ‘नकारात्मक, भ्रष्ट, बेईमान, लोकतंत्र विरोधी सांप्रदायिक भाजपा’ के विरुध्द हो रहे आंदोलनों को पूरे देश में विस्तारित कर जन-एकजुटता की अखंड कड़ी बनें।
नीट की परीक्षा के घोटाले के बाद मंदिर में चोरी के महापाप का भंडाफोड़ भी एक गहरा दिव्य-संकेत है। डॉक्टर को धरती पर भगवान के रूप में ही देखा जाता है। हम सब तो मंदिर और मेडिकल दोनों के गहरे संबंध में विश्वास करते हैं। धर्म के मनोबल का और चिकित्सा का मनोवैज्ञानिक संबंध भी होता है।
जिस तरह संपूर्ण विश्व का मीडिया श्री सोनम वांगचुक जी के लिए चिंतित दिखाई दे रहा है, उसका एक दूसरा पक्ष ये भी है कि इससे भाजपा राज में दुनिया भर में हमारे देश की डेमोक्रेटिक इमेज बुरी तरह खंडित हो रही है।
हम श्री सोनम वांगचुक जी के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हैं।
@Wangchuk66
लो अब वृक्षारोपण का ही एनकाउंटर कर दिया!
शुक्र तो ये मनाइये कि 1 पेड़ तो लगा, भले वो मंच पर लगा दिया है बाक़ी 34,99,99,999 तो काग़ज़ी फ़ाइल में लगेंगे।
ये वृक्षारोपण नहीं, भ्रष्टारोपण है जिसके बहाने चुनावी-फ़ंड की समानांतर व्यवस्था की जा रही है। इसके पीछे भी डबल इंजन की टकराहट ही मुख्य कारण है।
‘भाषण न सुनने के मूड’ वाले सार्वजनिक बयान के बाद जो 1-2% छवि बची भी थी, उस पर भी ऐसे दिखावटी कृत्यों से इन्होंने ख़ुद ही बुलडोज़र चला दिया है।
उत्तर प्रदेश दलितों को न्याय मिलना लगभग असम्भव है, लखीमपुर-खीरी के थाना प्रभारी शिकायतकर्ता के पिता और परिजनों को ही थाने में बैठा रखा है,जहां निष्पक्ष न्याय की उम्मीद ही खत्म हो जाती है!
@yadavakhilesh@samajwadiparty