If you want to understand why I admire Dr. @himantabiswa, just watch this video. He is far from a conventional politician. He has the courage to say what others hesitate to say, the conviction to do what others avoid doing and the vision to think beyond the boundaries of traditional politics.
His clarity, decisiveness and willingness to take bold stands set him apart. Whether one agrees with him or not, his leadership and impact are impossible to ignore. To me, he represents a rare blend of courage, conviction and action. He is truly inspiring and a leader worthy of being followed.
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क्या आपको अंदाज़ा है कि कांग्रेस एक ऐसा कानून लागू करना चाहती थी, जिससे भारत में हिंदू होना ही सबसे बड़ा जुर्म बन जाता? अगर वह बिल पास हो गया होता, तो आज रामनवमी की शोभायात्रा निकालना, मंदिरों में जगराता करना या केवल ‘जय श्रीराम’ कहना भी अपराध माना जाता!
2005 से 2011 के बीच, कांग्रेस पार्टी ने एक ऐसा विधेयक संसद में लाने की भरसक कोशिश की थी, जो अगर पारित हो जाता, तो भारत में हिंदू होना ही अपने आप में एक अपराध बन चुका होता।
इस बिल का नाम था "Communal Violence (Prevention, Control and Rehabilitation of Victims) Bill"। नाम सुनने में मासूम लगता है, लेकिन इसके पीछे की मंशा रोंगटे खड़े कर देने वाली थी।
यह बिल कांग्रेस की राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (NAC) द्वारा तैयार किया गया था, जिसकी अध्यक्ष सोनिया गांधी थीं। इस परिषद में शामिल लोग जैसे हर्ष मंदर और तीस्ता सीतलवाड़, खुले तौर पर हिंदू संस्कृति के विरोधी और कथित सेक्युलर एजेंडे के पोषक थे। NAC खुद कोई संवैधानिक संस्था नहीं थी, फिर भी वही कांग्रेस सरकार की नीतियों को निर्देशित कर रही थी और यही सबसे बड़ा लोकतांत्रिक धोखा था।
इस बिल की सबसे खतरनाक बात यह थी कि इसमें सांप्रदायिक हिंसा की परिभाषा केवल "अल्पसंख्यकों" पर होने वाली हिंसा तक सीमित रखी गई थी। यानी अगर किसी दंगे में मुस्लिम मरे तो वह साम्प्रदायिक हिंसा थी, लेकिन अगर हिंदू मारे गए चाहे वे किसी राज्य में अल्पसंख्यक ही क्यों न हों तो यह बिल उन पर लागू ही नहीं होता था।
इस बिल ने हिंदुओं को एक जातीय अपराधी के रूप में प्रस्तुत करने की साजिश रची थी। किसी इलाके में यदि कोई साम्प्रदायिक तनाव होता, तो वहां के बहुसंख्यक यानी हिंदू "सामूहिक दोषी" मान लिए जाते। पुलिस, प्रशासन और न्यायपालिका को निर्देशित किया जाना था कि वे मुस्लिमों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखें, भले ही सच्चाई कुछ भी हो।
यहां तक कि इस बिल में ये प्रावधान रखा गया था कि अगर किसी व्यक्ति पर "शंका" भी हो कि वह साम्प्रदायिक हिंसा में शामिल हो सकता है, तो उसे बिना FIR के गिरफ्तार किया जा सकता था। यह बिल यदि कानून बन जाता, तो लाखों निर्दोष हिंदू युवकों की ज़िंदगियाँ जेलों में सड़ रही होतीं।
इस बिल के जरिए कांग्रेस सरकार ने NGO, मानवाधिकार संगठनों और स्वयंभू सेक्युलर एक्टिविस्टों को अदालत से ऊपर रखने की साजिश की थी। उन्हें ये अधिकार दिया जा रहा था कि वे जांच में दखल दें, राज्य सरकारों को कटघरे में खड़ा करें और किसी भी हिंदू संस्था, संगठन या व्यक्ति को "दोषी" घोषित कर सकें बिना किसी ठोस सबूत के।
इतना ही नहीं, इस बिल के तहत केंद्र सरकार को यह अधिकार दिया गया था कि वह किसी भी राज्य सरकार को “सांप्रदायिक पक्षपात” के आरोप में बर्खास्त कर सके। ये कांग्रेस द्वारा गैर-कांग्रेसी राज्यों की चुनी हुई सरकारों को अस्थिर करने का एक वैधानिक हथियार बन चुका था।
कल्पना कीजिए अगर यह बिल कानून बन गया होता, तो आज भारत में हर मंदिर, हर रामनवमी की शोभायात्रा, हर संत और हर हिंदू संगठन संदेह के घेरे में होते। कोई भी दंगा होता, और सीधा दोष हिंदू समाज पर मढ़ दिया जाता, भले ही वे पीड़ित ही क्यों न हों।
कांग्रेस की यह साजिश जब देश के राष्ट्रवादियों और सजग नागरिकों की नजर में आई, तब पूरे देश में भारी विरोध हुआ। नरेंद्र मोदी जी जो उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री थे, उन्होंने इसे भारत के संघीय ढांचे और संविधान पर सीधा हमला बताया। बीजेपी, शिवसेना, अकाली दल, AIADMK, जेडीयू जैसी अनेक पार्टियों ने इसे संसद में रोका।
हिंदू संत समाज, RSS, मंदिर ट्रस्ट, अखाड़ा परिषद और करोड़ों हिंदुओं ने सोशल मीडिया, धरना, याचिकाओं और जनदबाव के ज़रिए इस बिल को रोका। और आखिरकार, यह बिल संसद में पारित नहीं हो सका।
यह कहना गलत नहीं होगा कि यह बिल पारित न होना, हिंदू समाज के लिए ईश्वर का आशीर्वाद साबित हुआ। कांग्रेस अगर सफल हो जाती, तो हिंदुओं के लिए यह देश जेलखाना बन चुका होता, जहां उनका हर बोल, हर त्योहार, हर परंपरा कानून के नाम पर अपराध घोषित की जा सकती थी।
कांग्रेस की यह मानसिकता कि "अगर तुम हिंदू हो, तो तुम दोषी हो", बार-बार नीतियों में दिखी है चाहे वह शाहबानो केस हो, मंदिरों पर कर लगाना हो, या इस सांप्रदायिक बिल जैसी विधायी साजिशें हों।
इसलिए आज भी यह ज़रूरी है कि हम इस इतिहास को याद रखें, ताकि आगे कोई और ताकत हिंदू समाज को कानून के ज़रिए गुलाम बनाने की जुर्रत न कर सके।
@narendramodi@AmitShah@JPNadda@blsanthosh@ajayjamwalbjp@SudhanshuTrived@sambitswaraj@Swamy39@himantabiswa@myogiadityanath@KapilMishra_IND@TajinderBagga@NupurSharmaBJP@amitmalviya@harshvshringla@sadhvipragyag@girirajsinghbjp@SureshChavhanke
Just like the legendary @SrBachchan once said, "Hum jaha khade hote hain, line wahi se shuru hoti hai." It seems that wherever @himantabiswa goes, millions of people gather, proving his immense popularity and the magnetic effect he has on the masses. Dada♥️
#HimantaBiswaSarma #MassLeader
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री @Dev_Fadnavis जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ। 💐
आपके दूरदर्शी नेतृत्व, समर्पण और उत्कृष्ट नीतियों ने राज्य को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया है। ईश्वर आपको उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और सफलता प्रदान करे। 🙏🎂
पूर्व विदेश सचिव श्री हरवर्धन श्रृंगला जी को राज्यसभा के लिए मनोनीत किया जाना राष्ट्र के लिए अत्यंत गौरव की बात है। आज उनके शपथग्रहण के साथ संसद को एक ऐसा विद्वान, अनुभवी राजनयिक और दूरदर्शी नीति-निर्माता मिला है, जिनकी उपस्थिति 'सशक्त भारत' के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
हार्दिक शुभकामनाएं एवं अभिनंदन💐 🇮🇳
#HarshVardhanShringla #RajyaSabha @harshvshringla@narendramodi@AmitShah@JPNadda@DrSJaishankar
@RahulGandhi जी, अगर आपको असम की संस्कृति का सम्मान करना नहीं आता, तो कृपया असम न आएं। हमारे लिए 'गामोचा' सिर्फ एक कपड़ा नहीं, बल्कि सम्मान और भावना का प्रतीक है। इसे सम्मानपूर्वक ग्रहण न कर इस तरह किसी और को थमा देना असम की संस्कृति का अपमान है, चाहे वह देने वाला कांग्रेस कार्यकर्ता ही क्यों न हो। आपको शर्म आनी चाहिए। #RahulGandhi
ISI, MSS ৰ হৈ কাম কৰা সন্ত্ৰাসবাদী সংগঠন আলফাৰ সদস্যৰ মৃত্যুত দুখ পোৱা কেইজনৰ ওপৰত পুলিচে তীক্ষ্ণ নজৰ ৰখা দৰকাৰ। এইবোৰেই আলফাৰ Sleeper Cell
Police should keep a close watch on those mourning the death of ULFA terrorists working for ISI and MSS. These are the real sleeper cells of ULFA.
@assampolice@HardiSpeaks@DGPAssamPolice@himantabiswa@CMOfficeAssam@HMOIndia@AmitShah
सोचा था मिटा दोगे, रोज़ झूठ फैलाया, फेक न्यूज़ चलाई, साजिश रची .... पर नाकाम रहे।
@jayanta_malla को मिटाना इतना आसान नहीं। जनता ने बता दिया, तुम्हारी औकात क्या है। आज हजारों की भीड़ ने जवाब दे दिया — 'जिसे जनता चाहती है, उसे कोई गिरा नहीं सकता।'
#JayantaMallaBaruah@himantabiswa
राजनीतिक शुचिता, कूटनीतिक प्रगल्भता एवं राष्ट्रसेवा के प्रति निष्कलुष समर्पण के प्रतीक श्री हर्षवर्धन श्रृंगला जी को महामहिम राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा हेतु मनोनीत किया जाना एक अत्यंत प्रशंसनीय व दूरदर्शी निर्णय है।
पूर्व विदेश सचिव के रूप में उन्होंने भारत की वैश्विक छवि को नई ऊँचाइयों तक प्रतिष्ठित किया। अब राज्यसभा में उनकी गरिमामयी उपस्थिति नीतिनिर्माण को दूरगामी दृष्टि एवं नई दिशा प्रदान करेगी। उन्हें हृदयतल से बधाई एवं अशेष शुभकामनाएं। 🇮🇳🙏
@harshvshringla@narendramodi@rashtrapatibhvn
नेतृत्व ऐसा हो जो न सिर्फ सुनता है, बल्कि तुरंत कार्रवाई भी करता है। गोवा के स्वास्थ्य मंत्री @visrane ने मरीज के साथ हुए दुर्व्यवहार पर त्वरित और साहसिक कदम उठाकर एक मिसाल कायम की है।