मप्र सरकार को फिजियोथैरेपी के महत्व को समझना चाहिए,वर्तमान समय में खेल के मैदान से लेकर गहन चिकित्सा इकाई तक महत्वपूर्ण भूमिका है।सरकार इसकी शिक्षा व चिकित्सा पर ध्यान दे ताकि मरीजों को समय रहते उचित इलाज़ मिल सके।@PMOIndia@DrMohanYadav51@bhargav_gopal@rshuklabjp@healthminmp
@IndianPT@MOHedump@rshuklabjp भविष्य मे हर इलाज फिजियोथेरेपी विधा मे होगा,आप इनकी काउंसिल नही बना सकते तो इस विधा के लोगो का मनोबल तो कम ना करे
सरकार को समझना होगा की देश यहा के लोगो से है और यहां के लोगो का स्वास्थ्य लाभ किस प्रकार से बढ़ाया जा सकता है ऐसी नीतिया बनानी चाहिए ना कि किसी विधा के पटन की नीतियां
@MOHedump आज भौतिक चिकित्सक कल्याण संघ के पदाधिकारीयों ने माननीय उपमुख्यमंत्री श्री @rshuklabjp जी से फिजियोथैरेपी कोर्स को पूर्व की भाती जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी से ही संचालित करने के लिए ज्ञापन सोपा।
चार दिन 'वन नेशन, वन इलेक्शन' पर मगजमारी हो गयी। फिर एंकरों को लगा कि शायद ये कर पाने की ताकत सरकार में नहीं है। सो अब नया शिगूफा देश का नाम बदलने का है। ये भी 2-3 दिन चलेगा। इस पूरी नौटंकी में सरकार मजे ले रही है। कोई उससे पूछ नहीं सकता कि आपने सत्र बुलाया है तो एजेंडा क्यों छुपा रहे हो? और इस सब शोर शराबे में विपक्ष, अडानी, मणिपुर वगैरह की खबरें दब गई।
कभी सोचा कि नींव का भारी पत्थर खिसकने से बड़े बड़े भवन कैसे भरभरा के गिर जाते हैं?
कभी समझने की कोशिश की है कि ब्रिटिश राज में भारत की क्या जगह थी?
क्या ये नहीं मालूम कि दूसरे विश्व युद्ध में ब्रिटिश सेना में 35 लाख सैनिक थे, जिसमें 25 लाख भारतीय थे?
इसलिए भारतीय स्वाधीनता संग्राम जब सफल हुआ, तो ब्रिटिश साम्राज्य की चूलें हिल गईं।
क्या ये सोचा है कभी कि इतने बड़े देश में आज़ादी का आंदोलन घर घर कैसे पहुँचा?
आप तो सोचेंगे नहीं, लेकिन दुनिया ने खूब सोचा और समझा है।
यूँ ही नहीं नेल्सन मंडेला से लेकर मार्टिन लूथर किंग तक ने महात्मा गाँधी से प्रेरणा ली।
यूँ ही नहीं विश्व के 70 से ज़्यादा देशों में महात्मा गाँधी की मूर्तियाँ लगी हैं। दर्जनों देश आज भी मानते हैं कि गाँधी जी का आंदोलन अगर ब्रिटिश साम्राज्य को कमज़ोर न करता, तो उन देशों को आज़ादी इतनी आसानी से न मिलती।
वैसे आप तो ये भी भूल गये होंगे कि 1947 में भारत की आज़ादी के बाद सौ से ज़्यादा देश आज़ाद हुए हैं। इनमें तक़रीबन पूरा अफ़्रीका भी शामिल है।
ज़रा कभी अफ़्रीकी देशों में घूम आइए, समझ जाएँगे कि उन्हें आज़ादी दिलाने में जवाहरलाल नेहरू ने क्या मदद की थी।
गाँधी- नेहरू आपकी ही तो राष्ट्रीय विरासत हैं, जिसका आभार भारत छोड़ो आंदोलन के बाद आज़ाद होने वाले ज़्यादातर देश मानते हैं। आप कैसे भारतीय हैं जो ख़ुद ही इस पर प्रश्न लगा बैठे?
आख़िर क्यों? ज़रा सोचिए!
मैं ऐसे लोगों को भी जनता हूँ, जो परीक्षा में उस प्रश्न का उत्तर भी तीन तीन पेज में लिखकर आते थे जिनका उत्तर असल में उन्हें पता ही नहीं होता था. लॉजिक ये कि कॉपी जांचने वाले को कॉपी भरी हुई दिखनी चाहिए.
पुरुष परेशान दिखे तो उसे अकेला छोड़ दो, उस वक़्त उसे बात करना नहीं पसंद होता , वो अपनी परेशानी का हल खुद ढूँढ निकालना चाहता है। ठीक इसके विपरीत महिला जब परेशान होती है तो वो चाहती है कि कोई उसकी परेशानी सुने, उससे बात करे।
जब महिला अपनी परेशानियाँ सुना रही हो तो...
Hon’ble Prime Minister of India Shri @narendramodi ji today inaugurated the new campus of @jamea_saifiyah Arabic Academy in Mumbai.
The head of the Dawoodi Bohra community, His Holiness Syedna Mufaddal Saifuddin, welcomed the Prime Minister at the Academy complex.
एक माह की समय सीमा समाप्त होने के बाद भी एनएचएम संविदा कर्मचारियों को 5 जून 2018 की संविदा नीति का लाभ प्राप्त नहीं हुआ इसलिए संविदा कर्मचारियों ने आज से काली पट्टी बांध कर सरकार से अपना विरोध दर्ज़ कराया।
#NHM_कर्मचारियों_से_किया_वादा_पूरा_करें@ChouhanShivraj@DrPRChoudhary
प्रवासी सम्मलेन: कई प्रवासी हॉल में जगह नहीं मिलने से नाराज हो गए. जिन प्रवासियों के लिए पूरे इंदौर में झांकीबाजी की गयी, झुग्गियां ढंकी गयीं, फुटपाथ रंगे गए, घांस रंगी गयी उन्हें ये सब छोड़कर हॉल में बैठकर भाषण सुनना था! हद है.
We can't ignore the #ClimateCrisis any longer.
It’s time to stop making excuses & start making changes.
Let's take #ClimateAction before it's too late!