वन नेशन, वन इलेक्शन" स्वाभाविक प्रवाहवान राजनीति को बाधित करना है।
मेरे कुछ सवाल है NDA(National Dramatic Allinace ) सरकार से।
"वन नेशन, वन इलेक्शन" की प्रक्रिया एक बार शुरू होने के बाद कभी ये प्रक्रिया भंग नही होगी ये "जनता के मन की बात" है क्योंकि आजाद भारत के प्रथम चुनाव, साल 1952 में लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ ही हुए थे।
अभी हाल ही में, चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र का चुनाव हरियाणा के चुनाव के साथ कराने में असमर्थता व्यक्त की थी तो जो चुनाव आयोग 2 राज्यों का चुनाव एक साथ नही करवा पाया, वो 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में एक साथ चुनाव कैसे करवा पाएगा? ये संदेहास्पद न होकर हास्यास्पद लगता है।
यदि चुनाव आयोग "वन नेशन, वन इलेक्शन" की क्षमता रखता है तो एनडीए सरकार उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर की विधानसभाओं को भंग कर महाराष्ट्र विधान सभा चुनाव के साथ इन चारों राज्यों की विधानसभाओं के करवाकर, चुनाव आयोग की क्षमता का पता लगा सकता है।
जिस तरह से जम्मू-कश्मीर में दस साल तक विधानसभा चुनाव को रोके रखा वो तो अपने आप में सवाल है और अब जो चुनाव हो रहे है वो भी माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद।और बात हो रही है "वन नेशन, वन इलेक्शन" की।
पूर्व में मोदी सरकार लोक सभा,विधान सभा और निकाय चुनाव के समय भुखमरी सूचकांक में आखिरी पायदानों पर पडी जनता से वोट लेने के मकसद से जनता को रियायत देती रही है।"वन नेशन, वन इलेक्शन" के सिस्टम से वो मुफ्त में मिलने वाले 5 किलो अनाज को भी छीनने का प्रयास कर रही है।
स्मार्ट सिटी, महिला आरक्षण विधेयक का हाल तो सब को पता है सवाल ये है कि वर्ष 2014 में जो "गाँव" गोद लिए थे क्या वो अभी भी गोद में ही है ?
#OneNationOneElections
राजनीति में टेस्ट ट्यूब नेताओं का जन्म होता है. मीडिया टेस्ट ट्यूब नेताओं को लॉन्च करता है.
2011 में मीडिया ने टेस्ट ट्यूब नेता अरविंद केजरीवाल को लॉन्च किया.
2017 में मीडिया ने कन्हैया कुमार पांडेय को लॉन्च किया.
2024 में मीडिया प्रशांत किशोर पांडेय को लॉन्च कर रहा है.
टेस्ट ट्यूब नेताओं को जरूरत से ज्यादा कवरेज मिलता है. अरविंद केजरीवाल आंदोलन के सहारे UPA-2 को उखाड़ कर फेंका गया. रोहित वेमुला के आंदोलन को कुचलने के लिए कन्हैया कुमार को कवरेज दी गयी.
अब JDU और RJD को कमजोर कर BJP को बिहार में ताकतवर पार्टी बनाने के लिए प्रशांत किशोर पांडेय को लाया गया है.
बिहार में BJP ब्राह्मण मुख्यमंत्री बनाना चाहती है.
सचिन तेंदुलकर दसवीं क्लास क्लास फेल हैं. क्रिकेट के प्रति जुनून के कारण उन्होंने बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी.
विराट कोहली को भी क्रिकेट के प्रति जुनून ने बीच में ही पढ़ाई छोड़ने को मजबूर कर दिया था. विराट सिर्फ बारहवीं पास हैं. महेंद्र सिंह धोनी ने भी क्रिकेट के पीछे बारहवीं तक पढ़ाई की है.
क्रिकेट का जुनून बिहार के सुपरस्टार नेता तेजस्वी यादव में भी था. वो भी क्रिकेट में अपना भविष्य बनाना चाहते थे. क्रिकेट और एक्टिंग के जुनून कई लोग पढ़ाई से ज्यादा अपने जुनून को प्राथमिकता देते हैं.
क्या जुनून रखने का विशेषाधिकार केवल सवर्णों के पास है. सवर्ण जाति के लोग जातिवाद के पूर्वाग्रह से ग्रस्त होकर तेजस्वी यादव को बार बार पढ़ाई को लेकर अपमानित करते हैं.
ऐसे लोगों को शर्म आनी चाहिए.
आप The Wire की यह रिपोर्ट देखकर हिल जायेंगे।
अनिल अंबानी की R-Com पर 53 बैंकों का 49,000 करोड़ का कर्जा था, मगर
NCLT ने 47,000 करोड़ ही माना मगर इससे भी ज़्यादा हैरानी की बात तो यह है कि
NCLT ने एक रेजोल्यूशन प्लान बनाया जिसके अनुसार अनिल अंबानी ग्रुप को मात्र 455 करोड़ रुपए देने हैं जो कि पूरे कर्जे का 0.92% है।
The Wire की रिपोर्ट से आप यह समझ सकते हैं कि इस देश में अच्छे दिन सिर्फ़ बड़े बड़े सेठों के आए हैं।