ये कैलाश अहिरवार हैं, दलित समाज से आने वाले मजदूर जिनका वीडियो वायरल हुआ था साईकिल पे घर जाते हुए। @priyankagandhi जी ने संज्ञान लेते हुए इनके लिए जरूरी व्यवस्था कराई और घर पहुंचाया।
आज प्रियंका गांधी जी के प्रयासों से ये अपने घर के लिए रवाना हो गए हैं।
मजदूर की कांग्रेस।
सुप्रीम कोर्ट की ED को लेकर की गई टिप्पणी केंद्र सरकार के खिलाफ है और यह ED के गालों पर तमाचा है.
अब यह स्पष्ट है कि स्वायत्त संस्था होकर भी ED भाजपा के एक विंग के रूप में कार्य कर रही है. इसलिए ही सुप्रीम कोर्ट ने कल ED से कहा कि "आप अपना काम करें, राजनीतिज्ञों को राजनीति करने दें."
आज पूरे देश में भाजपा अपने राजनीतिक हितों को साधने के लिए ED का दुरुपयोग कर रही है और केवल विपक्ष को टारगेट कर रही है।
देशवासियों की बुलंद आवाज, निर्भीक, निडर और निष्पक्ष लोकसभा नेता प्रतिपक्ष श्री राहुल गांधी जी को जन्मदिन की ढेरों बधाई एवं शुभकामनाएं हो
#HappyBirthdayRahulGandhi
''जिस दिन SP,DC,CM,मंत्री और गांव के मजदूर का बेटा गांव के सरकारी स्कूल में पढने लगेगा,उसी दिन देश सुधर जाएगा.हमें देश में इलीट स्कूल्स की जरुरत क्यों है?ऐसे एक अलग समाज का निर्माण हो जाता है.अमीरों और गरीबों का ये घेरा टूटना चाहिए''- कांग्रेस नेता प्रदीप नरवाल ने कहा.
@SoniaDehati@Narwal_inc
श्री राजेन्द्र पाल गौतम जी को कांग्रेस SC विभाग के चेयरमैन पद पर नियुक्त होने की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
इस मौके पर श्री राजेश लिलोठिया जी के SC विभाग को दिए गए योगदान के लिए उनका धन्यवाद करते है और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं।
बीते दिनों बस्ती में आदर्श उपाध्याय की पुलिस कस्टडी में मौत हो गई। आज घटना की वास्तविक वस्तुस्थिति जानने के लिए प्रदेश अध्यक्ष श्री @kashikirai जी ने मृतक के परिजनों से मुलाक़ात की।
उन्होंने पीड़ित परिवार को हिम्मत देते हुए विश्वास दिलाया कि कांग्रेस उनके न्याय की लड़ाई मजबूती से लड़ेगी।
"हम चावदार तालाब पर सिर्फ पानी पीने नहीं बल्कि यह जताने जा रहे हैं कि हम भी औरों की तरह इंसान ही हैं।" - डॉ अंबेडकर
हवा, पानी और धूप से धरती पर मौजूद सभी जीवों के लिए है। दुनिया की सारी सभ्यताएं नदियों या बड़े जलस्रोतों के किनारे विकसित हुईं। यह स्वाभाविक ही है कि कालांतर में पानी एक बुनियादी जरूरत के अलावा सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक महत्व हासिल करता गया।
धार्मिक दृष्टि से जलस्रोत दैवीय पवित्रता के प्रतीक बने और ताकतवर वर्गों ने इन पर विशेषाधिकार हासिल किया, जिसने अन्य वर्गों को इससे वंचित किया।वर्ण-व्यवस्था में शूद्रों को हाशिये पर डाला गया तो सार्वजनिक जलस्रोत भी उनसे छीन लिए गए। अंग्रेज़ी राज में भी इस बहिष्करण को बढ़ावा ही मिला।
इस बारे में सोचकर भी हमारा सिर शर्म से झुक जाता है कि हमारे देश में मनुष्यों की एक बड़ी आबादी को इन नैसर्गिक अधिकारों से वंचित कर दिया गया था। कबीर, नानक, रैदास, ज्ञानेश्वर, नामदेव, तुकाराम जैसे कवियों ने ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ जैसी रचनाओं के जरिये इस कुप्रथा पर कठोर प्रहार किया लेकिन यह सामाजिक जड़ता बनी ही रही।
इस अमानवीयता को पहली चुनौती मिली जब महात्मा ज्योतिबा फुले ने 1868 में अपना निजी कुआं अछूतों के लिए खोल दिया। 19 एवं 20 मार्च, 1927 को बाबासाहब ने एक विशाल कॉन्फ्रेंस की और करीब ढाई हजार लोगों के साथ चावदार तालाब जाकर पानी पिया और पानी के अधिकार की दावेदारी पेश की।
भेदभाव और छुआछूत के खिलाफ बाबासाहेब के इस संघर्ष और महाड़ सत्याग्रह को इतिहास हमेशा याद रखेगा।
सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों को मंगलकामनाएँ!
उम्मीद है आप सभी माननीय कांग्रेस अध्यक्ष श्री @kharge जी,
जन-जन के नेता, जननायक श्री @RahulGandhi जी और हम सबकी नेता, कांग्रेस महासचिव श्रीमती @priyankagandhi जी के सामाजिक न्याय के मिशन को आगे बढ़ायेंगे और पार्टी को मजबूती प्रदान करेंगे एवं महासचिव प्रभारी श्री @avinashpandeinc जी के निर्देशन में संगठन सृजन अभियान को गति प्रदान करेंगे।
पंजाब सरकार द्वारा खनौरी और शंभु बॉर्डर से 14 महीनों से धरने पर बैठे किसानों को हटाये जाने के विरोध में आज पंजाब कांग्रेस के सांसदों ने संसद में प्रदर्शन किया।
कल देर रेत पंजाब सरकार के आदेश पर पुलिस ने किसानों को डिटेन कर लिया था और उनके तंबू उखाड़ दिए थे।
कानपुर में विभिन्न कार्यक्रमों में सम्मिलित होने के लिए !
आज कानपुर आगमन पर कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों द्वारा भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। आपका यह स्नेह व प्रेम ही मेरी ऊर्जा व अमूल्य पूँजी है। मैं आप सभी का हृदय तल की अनंत गहरियों से आभार व्यक्त करता हूँ।
एक सज्जन मिलने आए थे। उर्दू विवाद पर बात छिड़ गई। वे बोले- गड़े मुर्दे उखाड़े जा रहे हैं। मैंने कहा- आपने जो बात बोली, वह उर्दू में ही है। उन्होंने फिर कहा- मेरा मतलब है कि आज की तारीख में उर्दू पढ़ना बेकार की बात है। मैंने कहा- मतलब, तारीख, बेकार और बात शब्द भी उर्दू ही हैं। वे झेंप गए।
आपने देखा होगा कि विधानसभा में उर्दू की खिलाफत करने वाले मुख्यमंत्री योगी को भी अपनी बात रखने के लिए उर्दू शेर पढ़ना पड़ा।
असल में उर्दू और हिंदी का विवाद ही गलत है। दोनों भाषाएं लिपि के स्तर पर जितनी अलग हैं, व्याकरण, शब्दभंडार और उच्चारण के मामले में उतनी ही एक हैं। इन भाषाओं की उत्पत्ति दिल्ली मेरठ के बीच, इसी धरती पर हुई है। किसी जमाने में सबसे पहले इसे लश्करी जबान, किला-ए-मुहल्ला, फिर रेख्ता और बाद में उर्दू कहा जाने लगा। अब तक इसकी लिपि नस्तालिक थी। जब इसी उर्दू को देवनागरी लिपि में लिखा जाने लगा, तब ये हिंदी बन गई। हिंदी और उर्दू एक ही मां, यानी खड़ी बोली के गर्भ से निकलीं जुड़वा बेटियां हैं। ब्रज, अवधी, भोजपुरी इसकी मौसियाँ हैं। संस्कृत, फारसी और अरबी जैसी महान भाषाओं ने इसे अपनी गोद में पाला-पोसा और बड़ा किया है।
हिंदी और उर्दू के शुरुआती विद्वानों/लेखकों/शायरों/कवियों का भी साझा विकास हुआ, इसलिए ये आपस में गंगा और जमुना की तरह मिली हुई हैं। जिसे हम आज हिंदी कहते हैं उसकी शुरुआत करने वाला अमीर ख़ुसरो नाम का एक आशिक़ और सूफ़ी था। “गोरी सोवे सेज पर, मुख पर डारे केस, चल ख़ुसरो घर आपने, रैन भई चहूँ देस”।
गंगा और जमुना के मैदानी समाजों के भीतर से निकली दो भाषाओं के बीच धार्मिक आधार पर भेद पैदा करने की कोशिशें करना आरएसएस और सांप्रदायिक ताकतों का बहुत पुराना राजनीतिक एजेंडा रहा है। एक वाक्य हिंदी बोलिए और अगर आप उसमें जबरदस्ती कृत्रिमता नहीं लाते, तो उसमें उर्दू शब्दों की भरमार होती है। फर्ज़ कीजिए आपने अपने बच्चे से कहा कि “बेटी, मेरी यह किताब मेज पर रख दो, ट्यूबलाइट बुझा दो और आलमारी से पैसे निकाल कर दे दो, मुझे दुकान जाना है।” इस वाक्य में पाँच भाषाओं के शब्द हैं।
उर्दू और हिंदी को अलग-अलग आंख से देखने की कोशिश आपकी और मेरी जीभ चीरने जैसा है। अपने बच्चों की जीभ चीरने जैसा है।
उर्दू और हिंदी का विवाद हमारी जीभ चीरने के लिए, हमारी समझ चीरने के लिए, हमारा इतिहास और अंतत: हमारे समाज को चीरने के लिए खड़ा किया जाता रहा है।
इस राजनीति का हासिल क्या है? चलिए उर्दू को हटा दीजिए। लेकिन हिंदी या दूसरी भारतीय भाषाओं का भविष्य क्या है? आज हिंदी पढ़ने वाले छात्रों की क्या हालत है? हिंदी पढ़ने वाले कितने युवाओं को रोजगार मिल रहा है? कितने हिंदी लेखक लिखने को जीविका बना सकते हैं? इसी तरह अवधी, भोजपुरी, ब्रज, बुंदेली या दूसरी बोलियों का भविष्य क्या है?
जाहिर है कि यह विवाद हिंदी या स्थानीय बोलियों की भलाई के लिए नहीं है। इस विवाद का मकसद सांप्रदायिक है। दो भाषाओं को दो धर्मों से जोड़ना और उनके बीच भेद पैदा करना सांप्रदायिक ताकतों और फासिस्टों का प्रिय खेल रहा है।
याद रखिए धर्म की भाषा नहीं होती, भाषा हमेशा भूगोल और समाज की होती है जिससे हमारी स्मृति बनती है। फ्रांस के ईसाई लैटिन नहीं, फ्रेंच बोलते हैं। इंडोनेशिया के मुस्लिम अरबी नहीं इंडोनेशियाई भाषा बोलते हैं। बंगाली मुस्लिम उर्दू नहीं बांग्ला बोलते हैं।
जो उर्दू को कठमुल्ला बनने की भाषा बताते हैं उनसे बड़ा कोई कठमुल्ला ढूंढे नहीं मिलेगा।
बहुत पहले धूमिल ने लिखा था -
चंद चालाक लोगों ने
बहस के लिए
भूख की जगह
भाषा को रख दिया है
उन्हें मालूम है कि भूख से
भागा हुआ आदमी
भाषा की ओर जाएगा
उन्होंने समझ लिया है कि
एक भुक्खड़ जब ग़ुस्सा करेगा,
अपनी ही अँगुलियाँ
चबाएगा
~सुदामा पांडेय “धूमिल”
केरल के कोच्चि मे श्रम,कपड़ा व कौशल विकास की स्थाई संसदीय समिति के अध्ययन दौरे मे विभिन्न सरकारी संस्थानो के अधिकारीगण व श्रम संगठनो के प्रतिनिधियो के साथ बैठक मे सहभागिता कर सुझाव साझा किए । वहीं आईआरएसएमई अध्यक्ष बी. काशीविश्वनाथन जी ने अंगवस्त्र पहनाकर सम्मानित भी किया । श्रम,कपड़ा व कौशल विकास की स्थाई संसदीय समिति के अध्यक्ष आदरणीय श्री बसवराज बोम्मई जी का हार्दिक आभार व धन्यवाद प्रकट किया ।
श्रम, कपड़ा एवं कौशल विकास की स्थाई संसदीय समिति के अध्ययन दौरे की बैठक में शामिल होने के लिए केरल के कोच्चि में सुप्रसिद्ध ताज होटल पहुंचते ही भव्य स्वागत किया गया । वहीं अन्ना एनटीआर गरु जी की पुण्यतिथि पर उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस कार्यक्रम में मेरे साथ समिति के अध्यक्ष आदरणीय श्री बसवराज बोम्मई जी, मा.सांसद श्री राजा राम सिंह जी, मा. सांसद श्री मनोज ठग्गा जी, एवं मा. सांसद श्री जीएम बालयोगी जी भी उपस्थित रहे।
भाजपा की सरकारें देश भर में शिक्षा की दुश्मन बनी हुई हैं। वे बच्चों के लिए अच्छी शिक्षा को बढ़ावा देने की जगह उसे हतोत्साहित कर रहे हैं। सरकार में बैठे सारे मंत्रियों और नेताओं के बच्चे विदेश में पढ़ाई कर रहे हैं लेकिन आपके बच्चों के लिए बने स्कूलों को बर्बाद किया जा रहा है।
आपके बच्चों को अनपढ़ रखना है ताकि वे भाजपा निर्मित भीड़तंत्र का हिस्सा बन सकें।
जब मोदी जी ने प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभाला था तब वह 64 वर्ष के होने वाले थे और डॉलर के मुक़ाबले रुपया 58.58 पर था।
उस समय वह रुपए को मज़बूत करने को लेकर बहुत कुछ बोला करते थे - उन्होंने इसके मूल्य में गिरावट को पूर्व PM की उम्र से भी जोड़ दिया था।
अब देखिए, मोदी जी इस वर्ष के अंत तक 75 के होने की तैयारी ही कर रहे हैं और रुपया पहले ही डॉलर के मुक़ाबले 86 पार चुका है।
जैसे-जैसे रुपया गिरता जा रहा है, मोदी जी अपने ही खोदे गड्ढे में फंसते जा रहे हैं।
उत्तर प्रदेश में जंगल राज कायम है,
लखीमपुर में पुलिस कस्टडी में रामचंद्र मौर्य जी का हत्या हो गया,
परिवार वाले न्याय के लिए भटक रहे हैं लेकिन यह गूंगी और बहरी सरकार को दिखाई नहीं पड़ रहा है ।।
#रामचन्द्र_मौर्य_को_न्याय_दो
आज जिला कांग्रेस कमेटी, बाराबंकी के सुमित्रा लॉन में "संगठन सृजन अभियान'' के तहत महत्वपूर्ण मीटिंग में सम्मिलित हुए, कार्यक्रम को संबोधित कर रहे राष्ट्रीय सचिव एवं पूर्व राज्यमंत्री मा.श्री धीरज गुर्जर जी एवं जिलाध्यक्ष मो० मोहसिन जी के साथ संगठन को लेकर परिचर्चा का लंबा दौर चला। इस महाअभियान के अंतर्गत बताया कि हम सब नेता प्रतिपक्ष आदरणीय श्री राहुल गांधी जी के नेतृत्व में पार्टी को मज़बूत करने में अपना अमूल्य योगदान दें।समर्पित कार्यकर्ताओं की प्रतिबद्धता और योगदान से संगठन को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
जब से नेता प्रतिपक्ष श्री @RahulGandhi जी ने सामाजिक न्याय की लड़ाई की अलख जगाई है , तब से उप्र के हर वर्ग की चेतना में कांग्रेस पार्टी ने प्रथम स्थान बना लिया है.
लोकसभा चुनाव इसका टेलर था और विधानसभा चुनाव में पूरी फिल्म आएगी.
जय बापू , जय भीम , जय संविधान 💪