मैं तुम्हें चुनता हूँ,
हर उस सुबह की तरह
जो अंधेरी रात के बाद भी
उगने का साहस रखती है.
- सूर्यभान 'सूरी'🌷
@ImSury9 की शानदार कविता सुनें वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक @sanjeevpaliwal की आवाज़ में.
कुछ नहीं था वहाँ,
फिर भी सब कुछ था।
एक रोशनी थी —
जो चुप रहकर भी बोलती थी,
और एक सादगी —
जो ख़ूबसूरती से ज़्यादा
सच्ची लगने लगी थी...!
- सूर्यभान 'सूरी'🌷
@ImSury9