जैसे-जैसे कॉलोनियलिज़्म का अंत हुआ और अलग-अलग देशों में लोकतंत्र स्थापित हुआ बंधुआ मज़दूरी और ग़ुलामी ख़त्म हुई, लेकिन भारत में आज भी बंधुआ मज़दूरी कराई जा रही है।
24 घंटे में एक बार चोकर की रोटी और नमक खिलाई जा रही है।
प्रदेश भी तो उत्तर प्रदेश है!
उफ़्फ़😖
This is the condition of Ac chair car coach in Katihar intercity express. There is no space for passangers to come in and go out. Kindly help PNR-6205588764 @RailMinIndia@IRCTCofficial
इंडियन एक्सप्रेस के @RTIExpress ने पड़ताल की है जिससे EWS आरक्षण के नाम पर बड़ा घोटाला सामने आया है।
UPSC में सिलेक्ट हुए 104 में से अधिकतर करोड़पति ऐसे हैं कि-
मां बाप का बिजनेस है, IIT से ग्रेजुएट हैं, MNC में जॉब किए हैं और ढाई लाख कोचिंग फीस देते हैं।
आज लखनऊ के ईको गार्डन में छात्रों और युवाओं ने अपनी जायज़ मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया।
युवाओं की मांग है कि सभी प्रतियोगी परीक्षाएँ समयबद्ध, पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से आयोजित की जाएँ। लगातार सामने आ रहे पेपर लीक, परीक्षा गड़बड़ियों और भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लगाई जाए, ताकि मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों का भविष्य सुरक्षित रह सके।
युवाओं का स्पष्ट संदेश है - रोज़गार और भर्ती व्यवस्था में ईमानदारी चाहिए, पेपर लीक और भ्रष्टाचार नहीं।
मथुरा में आज "कॉकरोच" सड़क पर उतर आया… क्योंकि यमुना अब नदी कम, सीवर ज्यादा लगने लगी है।
सामाजिक कार्यकर्ता दीपक शर्मा ने कॉकरोच बनकर वो सच दिखाया, जिसे सरकार के करोड़ों के "स्वच्छता विज्ञापन" छिपा नहीं पाए।
नाले खुलेआम यमुना में गिर रहे हैं, और सत्ता फोटोशूट में व्यस्त है। लगता है अब इंसानों से ज्यादा कॉकरोच को ही यमुना की चिंता है।
जब लाखों युवा सड़क पर हों, 22 लाख बच्चों का भविष्य दांव पर हो और PM चुप हो - तो सरकार जवाब देने नहीं, बचने में लगी है।
जब तक धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं होता और NEET जैसे पेपर लीक रोकने के लिए foolproof सिस्टम नहीं बनता - हम रुकेंगे नहीं।
राहुल गांधी ने छात्रो को आश्वासन दिया था संसद से सड़क तक छात्रो के लिए लड़ाई लड़ी जाएगी।
ये आंदोलन कोई गोदी मीडिया नहीं दिखाएगा ।
RT करो और देश को दिखाओ...
NTA दफ़्तर के बाहर 48°C की भीषण गर्मी में, कांग्रेस के जाँबाज़ कार्यकर्ता भारत के भविष्य छात्रो के लिए संघर्ष कर रहे हैं। 🔥🔥
>मुख्यमंत्री बनाओगे BJP का
>स्वास्थ्य मंत्री बनाओगे निशांत कुमार को
>विधायक चुनोगे अनंत सिंह और मैथिली ठाकुर को
और फिर तुमको TRE4 का नौकरी चाहिए 😂
अरे चुनाव के टाइम राशन और 10 हज़ार रुपया मिला तो था । चलो गुजरात और आंध्र लोहा पीटने
नौकरी नहीं मिलेगा
#Patna#BPSC#TRE4
पटना में कल अपने रोज़गार का हक़ मांगते हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे शिक्षक अभ्यर्थियों को बिहार पुलिस ने बेरहमी से पीटा - फिर से।
बेरोज़गार युवाओं को BJP का जवाब - लाठी।
भारत में आज सबसे बड़ी बीमारी बेरोज़गारी है और इसकी सबसे भयंकर मार बिहार और उत्तर प्रदेश के युवाओं पर पड़ रही है।
लाखों युवा डिग्री और क़ाबिलियत हाथ में लेकर दर-दर भटक रहे हैं। मगर BJP की सरकार को न इनकी परवाह है, न आपकी। जब युवा सड़कों पर उतरकर अपना हक़ मांगते हैं, उनके हाथ में रोज़गार नहीं - पीठ पर लाठियां रख दी जाती हैं।
भारत का युवा BJP के झूठ से तंग आ चुका है - वो अब चुप नहीं बैठेगा। और, कांग्रेस उनके साथ हर मोड़ पर खड़ी है।
छात्रों पर लाठीचार्ज बेहद शर्मनाक और चिंताजनक है।
जो युवा नौकरी और अपने भविष्य की उम्मीद लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आवाज़ उठा रहे थे, उनसे संवाद की जगह बल प्रयोग किया गया।
यह वीडियो देखिए और समझिए कि कल महामानव राष्ट्र के नाम पर क्यों रो रहे थे। ताकि उनके रोने की खबर दिखाई जाए, और हज़ारों मज़दूर जो सूरत से गैस सिलेंडर की किल्लत की वजह से वापस जा रहे हैं, वह दिखाया न जाए।
कान में फंसी हुई ब्लूटूथ डिवाइस निकालने के लिये परीक्षार्थी को लेकर सदर अस्पताल पहुंची पुलिस, मुफस्सिल थाना क्षेत्र कृष्णा हाई स्कूल से बनारस कि एक परीक्षार्थी AEDO परीक्षा के दौरान धराया...
एक दौर था जब समाजवादी आंदोलन केवल सत्ता पाने का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय की मशाल हुआ करता था। उस दौर के नेता संसद में भी गर्जते थे और सड़कों पर भी संघर्ष करते थे। मंडल कमीशन की सिफ़ारिशों को लागू कराने की लड़ाई हो या पिछड़ों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा का सवाल - इन नेताओं ने हर कठिन मोड़ पर इतिहास में गहरी लकीर खींची।
लालू प्रसाद यादव, मुलायम सिंह यादव, शरद यादव, गोपीनाथ मुंडे और नीतीश कुमार जैसे नेताओं का तेवर देखिए - उन्होंने सत्ता को लक्ष्य नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का साधन माना। कुर्सी के लिए सिद्धांत नहीं बदले, बल्कि सिद्धांतों के लिए कुर्सी तक दांव पर लगा दी। उनके लिए राजनीति अवसर नहीं, सामाजिक परिवर्तन का संकल्प थी।
लेकिन समय की धारा में पिछड़ों की आवाज़ों में से कई आवाज़ें धीमी पड़ती चली गईं। संघर्ष की जगह समझौतों ने ले ली, और विचारधारा की जगह सत्ता की राजनीति ने। यह बदलाव केवल राजनीतिक नहीं, सामाजिक न्याय की मूल भावना के लिए भी एक गंभीर चुनौती है।
महिला आरक्षण के सवाल पर भी समाजवादी परंपरा ने साफ कहा - जब तक आरक्षण के भीतर आरक्षण नहीं होगा, तब तक प्रतिनिधित्व अधूरा रहेगा। पिछड़ी और दलित महिलाओं के लिए अलग हिस्सेदारी की मांग केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि समान भागीदारी के लोकतांत्रिक सिद्धांत का प्रश्न है।
आज भी अनेक पिछड़े और दलित संगठन सत्ता के विभिन्न खेमों में मौजूद हैं। उन्हें यह याद रखना चाहिए कि इतिहास केवल सत्ता के समीकरण नहीं देखता - वह यह भी दर्ज करता है कि किसने अपने समाज की आवाज़ बुलंद की और किसने उसे दबा दिया।
अंतरात्मा की आवाज़ कभी पूरी तरह ख़ामोश नहीं होती। सवाल केवल इतना है - क्या हम उसे सुनने का साहस रखते हैं? क्योंकि इतिहास का न्याय देर से होता है, पर होता ज़रूर है।
महिला आरक्षण की बात शुरू हो चुकी, लेकिन ओबीसी महिलाओं के लिए कोई भी कोटा नहीं है।।
सरकार को इस बात समझना चाहिए बिना ओबीसी महिलाओं को प्रतिनिधित्व दिए इस आरक्षण का कोई अस्तित्व नहीं है क्योंकि महिला आरक्षण के नाम पर कुछ लोग इस उपयोग करेंगे।।
ओबीसी के लिए भी सीट रिजर्व किया जाए।
आज प्रधानमंत्री ने बड़े हल्के में बोल दिया कि हम 'इस वर्ग-उस वर्ग' को देख लेंगे। आखिर ये 'इस वर्ग-उस वर्ग' क्या है?
क्या वो OBC वर्ग की बात कर रहे थे कि हम इस वर्ग को बाद में देख लेंगे। हमें इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।
OBC वर्ग की बहुत बड़ी संख्या है, उनका एक बड़ा संघर्ष है। हम इनके हक की बात कर रहे हैं, लेकिन प्रधानमंत्री ने इसे टेक्निकल मुद्दा बता दिया।
क्या प्रधानमंत्री जातिगत जनगणना से घबरा रहे हैं कि जब असल आंकड़ें आएंगे तो पता चलेगा कि OBC वर्ग कितना बड़ा और कितना मजबूत है, तब कोई नकार नहीं पाएगा।
2011 की जनगणना को परिसीमन का आधार बनाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी OBC वर्ग का हक छीनना चाह रहे हैं, लेकिन कांग्रेस पार्टी ऐसा कभी नहीं होने देगी।
: लोकसभा में कांग्रेस महासचिव व सांसद श्रीमती @priyankagandhi जी
महिला आरक्षण लागू होने वाला है, इस पर बहुजन वर्ग के नेताओं और जनता को पुरजोर आवाज़ उठाना चाहिए, महिला आरक्षण के अंदर SC ST OBC आरक्षण होना चाहिए, अन्यथा इलीट वर्ग की महिलाएं ही संसद पहुंचेगी,
जब इलीट वर्ग की महिलाएं ही संसद पहुंचेगी तो वो आपके हितों की बात कभी नहीं उठाएगी, एक वर्ग विशेष की महिलाओं का दबदबा बढ़ जाएगा, लोकतंत्र के मायने ख़त्म हो जाएंगे,
एक गरीब की बेटी कभी सांसद नहीं बन पाएगी, सुदामा कोटे की तरह इसमें ढिलाई मत बरतिए अन्यथा बहुजन वर्ग पुनः गुलाम हो जाएगा ।