सम्राट चौधरी जी के लिए कुर्सी लगाई गई थी, लेकिन बड़ों के सम्मान और संस्कारों को प्राथमिकता देते हुए सम्राट जी खुद चौकी पर बैठ गए। 🙏
लोगों ने जब आग्रह किया, तब जाकर वे कुर्सी पर बैठे। ❤️
यही हैं @samrat4bjp जी, जिनकी पहचान सिर्फ सत्ता और पद से नहीं, बल्कि उनके संस्कार, विनम्रता और बड़ों के प्रति सम्मान से होती है।
आज के दौर में जहाँ लोग कुर्सी पाने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं, वहीं सम्राट जी ने कुर्सी होते हुए भी बड़ों के सम्मान को प्राथमिकता दी।
यही भारतीय संस्कृति है, यही हमारे संस्कार हैं और यही एक सच्चे जननेता की पहचान है।
पद कितना भी बड़ा हो जाए, लेकिन जब संस्कार बड़े हों, तो इंसान का व्यक्तित्व अपने आप ऊँचा हो जाता है।
#SamratChoudhary #Bihar
असिस्टेंट कमांडेंट अजय मलिक जी ने नक्सली मुठभेड़ के दौरान IED ब्लास्ट में अपना एक पैर खो दिया - देश की रक्षा में सब कुछ दांव पर लगा दिया।
और इस बलिदान के बदले मिला क्या?
15 साल से अधिक की निष्ठापूर्ण सेवा के बावजूद - प्रमोशन नहीं, अपनी ही फोर्स को लीड करने का अधिकार नहीं। क्योंकि सभी शीर्ष पद IPS अफसरों के लिए आरक्षित हैं।
यह सिर्फ एक अफसर की पीड़ा नहीं - यह लाखों CAPF जवानों के साथ हो रहा संस्थागत अन्याय है।
ये जवान सीमाओं पर तैनात रहते हैं, आतंक और नक्सलवाद से लोहा लेते हैं, लोकतंत्र के उत्सव चुनावों को सुरक्षित बनाते हैं। लेकिन जब इनके अधिकार और सम्मान की बात आती है, तो व्यवस्था मुँह फेर लेती है।
खुद CAPF के जवान इस भेदभाव के विरुद्ध हैं। सुप्रीम कोर्ट तक ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। फिर भी, वर्तमान सरकार इसी अन्याय को कानूनी रूप से स्थायी बनाने पर आमादा है।
यह विधेयक केवल एक करियर रोकने का प्रयास नहीं - यह उन लोगों का मनोबल तोड़ने की कोशिश है जो देश की पहली रक्षा पंक्ति हैं। और जब उनका मनोबल टूटता है, तो राष्ट्रीय सुरक्षा की नींव हिलती है।
हम CAPF के जवानों का सम्मान सिर्फ शब्दों में नहीं, नीतियों में करते हैं। कांग्रेस का साफ वादा है - हमारी सरकार आते ही यह भेदभावपूर्ण कानून समाप्त होगा। क्योंकि जो देश के लिए लड़ता है, उसे नेतृत्व का अधिकार मिलना ही चाहिए।
आज न कल, सबका यही हाल होना है
आप आएँगे अपने पैतृक निवास पर,
अपने डिहवार को प्रणाम करेंगे।
आपकी आँखें नम होंगी,
अगल-बगल के बूढ़े चाचा-दादी
कुछ पुरानी बातें याद दिलाएँगे
वो बचपन की शरारतें, वो त्योहारों की रौनक।
कुछ बच्चे आपको निहारते रहेंगे,
नए चेहरे, अनजान निगाहों से
वहाँ खड़े लोग आपका परिचय देंगे:
"ये फलाना चाचा हैं,
दिल्ली/पंजाब/गुजरात/बेंगलुरु रहते हैं
आज कई सालों बाद
अपने गाँव लौटे हैं।"
कुछ पल बिताने के बाद
आप फिर से चले जाएँगे
अपना घर, गाँव छोड़कर
कदाचित बिहार के हर घर की यही कहानी होगी।
मूलभूत सुविधाओं के अभाव में,
बेहतर भविष्य की तलाश में
आप एक बार बिहार छोड़ देंगे,
फिर आप बिहार नहीं लौट पाएँगे।
आप शायद लौट भी जाएँ,
लेकिन आपका बच्चा नहीं लौटेगा।
Yeh Kaun Hai भाई? ज्ञानेश कुमार जी इसका क्या जवाब है? अगर ऐसे चुनाव होना है तो पहले ही रिज़ल्ट लिख कर प्रिंट कमांड दे दीजिए। खत्म कीजिए सब। शर्म आनी चाहिए उन अधिकारियों को जिनकी नाक के नीचे यह सब हुआ है। शर्म आनी चाहिए। जिस देश को हासिल करने के लिए लोगों ने इतनी कुर्बानी दी और ये नौकरी के नाम पर बैठ कर ये सब कर रहे हैं। ब्राज़ील की मॉडल हरियाणा के चुनाव में वोट डाल रही है। उसकी तस्वीर का इस्तेमाल हुआ। बिहार में क्या हो रहा है?
ख़ान sir के बारे में जैसा सुना था
वैसा ही उनसे मिलकर भी लगा।
ग्रामीण अंचल के छात्रों के उत्थान के लिए बेहतर शिक्षा की उनकी कोशिशें और गरीब बच्चों को आगे बढाने की उनकी सोच
अत्यंत सराहनीय है।🙏🙏
परंपरा, पुण्य और प्रकाश के पावन पर्व 'देव-दीपावली' की प्रदेश वासियों एवं सभी श्रद्धालुओं को हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं!
बाबा श्री विश्वनाथ एवं माँ गंगा की कृपा से यह दिव्य पर्व आप सभी के जीवन में आशा, आस्था, आत्मबल और आरोग्यता का उजाला लाए, यही प्रार्थना है।
हर हर महादेव!
जय गंगा मइया!