गुरमीत राम रहीम को बार बार क्यों मिल रहा है पैरोल ? असली वजह जानकर हैरान हो जाएंगे ||
कौन है इसके पीछे इस Vedioe में खुलेंगे सारे राज।
6 Minute में समझिए Power और Politics का पूरा खेल!
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अखिलेश प्रसाद सिंह वर्ष 2004 के बाद ख़ुद वह और उनके परिजन 7 चुनाव हार चुके हैं।
2005 में उनकी पत्नी अरवल विधानसभा क्षेत्र से राजद उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ी और मात्र पाँच हज़ार वोट मिला।
2009 में केंद्रीय राज्यमंत्री रहते पूर्वी चंपारण लोकसभा सीट से लड़े, बुरी तरह हार गये।
2010 में अपने भतीजे धनंजय शर्मा को चुनाव लड़ाया, वह भी ज़मानत गवां बैठे।
2014 के लोकसभा चुनाव में बतौर कांग्रेस प्रत्याशी मुज़फ़्फ़रपुर लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े। भीषण पराजय हुई।
2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में तरारी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस-जदयू-आरजेडी महागठबंधन के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़े और तीसरे नंबर पर रहे।
2019 में इनके बेटे आकाश कुमार सिंह पूर्वी चंपारण से लड़े बुरी तरह हारे।
2024 में इनके बेटे महराजगंज से लड़े और चुनाव हारे।
आज अखिलेश प्रसाद सिंह खुद को बिहार कांग्रेस का मसीहा बता रहे हैं।
चंपत राय जी जबतक कुर्सी पर बैठे रहेंगे, निष्पक्ष जाँच की बात बेमानी होगी. जिस तरह जैन हवाला कांड के आरोप लगते ही आडवाणी जी ने इस्तीफ़ा दिया था और बेदाग़ होने के बाद चुनाव लड़ा . उन्होंने नैतिकता का सर्वोच्च मानदंड स्थापित किया था.
आप उस पद पर बने रहेंगे तो आपको लेकर निष्पक्ष जाँच की उम्मीद पूरी तरह बेमानी है. जब तक जाँच चले, चंपत राय जी को खुद ही पद छोड़ देना चाहिये.
मोहनजी के सम्मान में, अखलेस भैया मैदान में। एक भाई बस अपना कर्तव्य निभा रहे हैं
उत्तर प्रदेश में आए दिन मुसलमानों को निशाना बनाया जाता है, उन पर झूठे इल्ज़ाम लगाकर उन्हें जेल भेजा जाता है। अखिलेश उनके लिए कभी कुछ नहीं कहते, लेकिन भाजपा के एक मुख्यमंत्री के लिए देखिए कितनी हमदर्दी है।
सपा का "समाजवाद" असल में यादव समाजवाद है।
कॉकरोच जनता पार्टी दहशतगर्दों की B टीम है, जिन्हें डेमोक्रेसी में रिजेक्ट कर दिया गया था, वे भेष बदलकर आए हैं और अब सिस्टम के पीछे पड़े हैं। वे उन लोगों के लिए नारे लगाते हैं जो देश को बांटना चाहते हैं। उनकी पहचान हो गई है।
धर्मेंद्र प्रधान
केंद्रीय शिक्षा मंत्री
अखिलेश प्रसाद सिंह वर्ष 2004 के बाद ख़ुद वह और उनके परिजन 7 चुनाव हार चुके हैं।
2005 में उनकी पत्नी अरवल विधानसभा क्षेत्र से राजद उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ी और मात्र पाँच हज़ार वोट मिला।
2009 में केंद्रीय राज्यमंत्री रहते पूर्वी चंपारण लोकसभा सीट से लड़े, बुरी तरह हार गये।
2010 में अपने भतीजे धनंजय शर्मा को चुनाव लड़ाया, वह भी ज़मानत गवां बैठे।
2014 के लोकसभा चुनाव में बतौर कांग्रेस प्रत्याशी मुज़फ़्फ़रपुर लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े। भीषण पराजय हुई।
2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में तरारी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस-जदयू-आरजेडी महागठबंधन के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़े और तीसरे नंबर पर रहे।
2019 में इनके बेटे आकाश कुमार सिंह पूर्वी चंपारण से लड़े बुरी तरह हारे।
2024 में इनके बेटे महराजगंज से लड़े और चुनाव हारे।
आज अखिलेश प्रसाद सिंह खुद को बिहार कांग्रेस का मसीहा बता रहे हैं।
Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक इनमें से अधिकतर जमीनें उन इलाकों में हैं जहां बाद में उनकी सरकार ने सरकारी प्रोजेक्ट्स की घोषणाएं कीं. रिपोर्ट के अनुसार परिवार और उनकी कंपनियों ने दो साल में 137 से अधिक प्लॉट करीब 45 करोड़ रुपए में खरीदे.
@zomato तुम्हारी कोई एकाउंटेबिलिटी है या नहीं क्या तुम्हे सांप सूंघ गया है क्या? @deepigoyal कहा घुसे हुए हो? क्या तुम्हे समझ नहीं आ रहा है कि तुम्हारे खराब खाने के वजह से फूड प्वाइजनिंग हो सकता है मैंने तुम्हे रिटेन में शिकायत किया तुम लोगो ने कोई एक्शन अभि तक क्यों नहीं लिया
देश की जनता 15 लाख रुपए खाते में आने की आस में बैठी रही, लेकिन नरेंद्र मोदी के दोस्त राजेश भाई ने 15 लाख करोड़ का घोटाला कर लिया।
मेहुल भाई, विजय भाई, नीरव भाई, ललित भाई, राजेश भाई ये सब नरेंद्र भाई के दोस्त हैं और ये भाईचारा देश पर बहुत महंगा पड़ रहा है।
पवन खेड़ा
कांग्रेस प्रवक्ता आलोक शर्मा ने कहा, "यूपी में इस बार ब्राह्मण समाज INDIA गठबंधन के साथ आएगा। बीजेपी का न हिंदुत्व कार्ड चलेगा और न ही ब्राह्मण कार्ड।"