यह मेरा सौभाग्य है कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया के टैगोर हॉल में हुए इस आयोजन में हिस्सा ले पाया, और प्रथम स्थान हासिल करने में सफल रहा।
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हिन्दी विभाग और बैंक ऑफ बड़ौदा मेधावी विद्यार्थी सम्मान समारोह और आशुभाषण प्रतियोगिता का आयोजन
नई दिल्ली, 3 अक्टूबर 2025
हिंदी पखवाड़ा के अंतर्गत एक समारोह का आयोजन जामिया मिल्लिया इस्लामिया के हिंदी विभाग और बैंक ऑफ बड़ौदा के संयुक्त तत्वावधान में टैगोर हॉल में किया गया| कार्यक्रम में बड़ौदा मेधावी विद्यार्थी सम्मान योजना के तहत बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा स्नातकोत्तर हिन्दी में सर्वाधिक अंक लाने के लिए विभुम शुक्ला और आश्रुति पटेल को प्रशस्ति-पत्र और क्रमश: रु.11000 और रु.7500 राशि देकर सम्मान किया गया| कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए हिन्दी विभाग के अध्यक्ष प्रो.नीरज कुमार ने कहा कि भाषा का महत्व इसके प्रयोग से होता है| प्राय: समाज में प्रभाव प्रदर्शित करने के लिए उस भाषा का प्रयोग करते हैं, जो प्रभावी मानी जाती है| उन्होंने कहा कि किसी भी भाषा का विरोध नहीं किया जाना चाहिए चाहे वह बड़ी हो या छोटी| एक व्यक्ति द्वारा बोली जाने वाली भाषा का भी उतना ही महत्व होता है, जितना करोड़ों लोगों द्वारा बोली जाने वाली भाषा का | बैंक ऑफ बड़ौदा के सहायक महाप्रबंधक एवं उपक्षेत्रीय प्रमुख ओ.पी. वीरेंद्र सिंह ने बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि हमारा बैंक हमेशा विश्वविद्यालयों के मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करता आया है| इसी क्रम में विश्वविद्यालयों के हिन्दी विभाग के मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित करने की यह योजना है| उन्होंने बताया कि बैंक ऑफ बड़ौदा के संस्थापक महाराजा गायकवाड ने डॉ. भीमराव अंबेडकर को विदेश अध्ययन के लिए वजीफा दिया था|
कार्यक्रम में हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य में आशुभाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया| प्रतियोगिता में हिमांक द्विवेदी, महफूज अली और खुशी खातून ने क्रमश: प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त किया| साथ ही, केशव प्रताप सिंह राजपूत और सिप्तैन हैदर ने सांत्वना पुरस्कार प्राप्त किया| विजेता विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र और बैंक ऑफ बड़ौदा की तरफ से प्रति विद्यार्थी एक हज़ार रुपये का ई-वाउचर दिया गया| प्रतियोगिता के निर्णायक विभाग के अध्यापक डॉ. अनिल कुमार, डॉ. गणपत तेली और डॉ. आलमगीर थे| कार्यक्रम के संयोजक डॉ. मुकेश कुमार मिरोठा ने कहा कि बैंक ऑफ बड़ौदा की यह योजना कई वर्षों से हमारे विद्यार्थियों को प्रोत्साहित कर रही है और हम आशा करते हैं कि भविष्य में ऐसी और योजनाएं आएंगी| कार्यक्रम का संचालन सुश्री नूरी निशात, प्रबंधक, राजभाषा विभाग, बैंक ऑफ बड़ौदा ने किया| कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की सक्रिय उपस्थित रही |
प्रो. साइमा सईद
मुख्य जनसंपर्क अधिकारी
जामिया मिल्लिया इस्लामिया
भरत तिवारी की मौत हो गई। पूरा देश उसके लिए न्याय माँग रहा है
लेकिन इस व्यक्ति की कुटिल मुस्कान देखिए….उम्र में बुड्ढे हो चुके ये व्यक्ति बेहद असंवेदनशील है
अखिलेश प्रसाद सिंह वर्ष 2004 के बाद ख़ुद वह और उनके परिजन 7 चुनाव हार चुके हैं।
2005 में उनकी पत्नी अरवल विधानसभा क्षेत्र से राजद उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ी और मात्र पाँच हज़ार वोट मिला।
2009 में केंद्रीय राज्यमंत्री रहते पूर्वी चंपारण लोकसभा सीट से लड़े, बुरी तरह हार गये।
2010 में अपने भतीजे धनंजय शर्मा को चुनाव लड़ाया, वह भी ज़मानत गवां बैठे।
2014 के लोकसभा चुनाव में बतौर कांग्रेस प्रत्याशी मुज़फ़्फ़रपुर लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े। भीषण पराजय हुई।
2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में तरारी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस-जदयू-आरजेडी महागठबंधन के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़े और तीसरे नंबर पर रहे।
2019 में इनके बेटे आकाश कुमार सिंह पूर्वी चंपारण से लड़े बुरी तरह हारे।
2024 में इनके बेटे महराजगंज से लड़े और चुनाव हारे।
आज अखिलेश प्रसाद सिंह खुद को बिहार कांग्रेस का मसीहा बता रहे हैं।
Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक इनमें से अधिकतर जमीनें उन इलाकों में हैं जहां बाद में उनकी सरकार ने सरकारी प्रोजेक्ट्स की घोषणाएं कीं. रिपोर्ट के अनुसार परिवार और उनकी कंपनियों ने दो साल में 137 से अधिक प्लॉट करीब 45 करोड़ रुपए में खरीदे.
@gateposts_ मतलब जेएनयू वाले आन का दाना तान के खाना वाले हिसाब किताब से भोजन ग्रहण करते हैं क्या
तात्पर्य जहां कम दाम में कुछ भी मिले वहां जेएनयू वाले पहुंच जाते हैं क्या?
जब मीडिया ये सब दिखाकर आपकी आँखों में धूल झोंकने में व्यस्त था, उसी दौरान इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार मोहन यादव के परिवार और उनसे जुड़ी संस्थाएँ उज्जैन में बड़े पैमाने पर ज़मीन खरीद रही थीं।
@TeamYouTube Hello team, just following up on this. It has been over 72 hours since I shared my channel URL. Could you please look into it and provide an update? Thank you!
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इस ट्वीट पर कुछ लोगों की प्रतिक्रिया देखकर मन खिन्न है। कुछ लोग इसे जाति से जोड़कर देख रहे हैं। लिख रहे हैं भरत भूषण तिवारी था, इसलिये मैं उसकी हत्या पर लिख रहा हूँ!
बात बात में जाति घुसाने वाले ऐसे जाहिलों की सोच पर लानत है!